उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कालेजों में काम कर रहे मेडिकल इंटर्न्स ने कम स्टाइपेंड (मानदेय) के ख़िलाफ़ सोमवार से हड़ताल शुरू कर दी है.
कोविड वार्ड्स में डयूटी पर लगे इंटर्न्स हालांकि फ़िलहाल बाज़ुओं पर काली पट्टी बांधकर और कैंडेल मार्च निकालकर ही अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन उनका कहना है कि अगर उनकी मांगे जल्दी न मानी गईं तो वो भी पूरी तरह से हड़ताल में शामिल हो जाएंगे.
एमबीबीएस की पढ़ाई करके मेडिकल कालेजों में इंटर्न्स का कहना है कि उन्हें 12 से 18 घंटे तक मरीजों की देखभाल करनी पड़ती है लेकिन उन्हें दिया जानेवाल मानदेय एक मज़दूर की दिहाड़ी से भी कम है. उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में इंटर्न्स को 7500 रुपये प्रति माह का स्टाइपंड मिलता है.
इनका तर्क है कि इस हिसाब से ये 250 रुपये प्रति दिन आता है जो एक 'अनस्किल्ड' मज़दूर को मिलने वाले पैसे से भी कम है. डेढ़ महीनों से ये रक़म भी उन्हें नहीं दी गई है. राज्य स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इंटर्न्स के मामले को ऊपर शासन को भेजा गया है.
तीरथ सिंह रावत सरकार में स्वास्थ्य विभाग की ज़िम्मेदारी ख़ुद मुख्यमंत्री के पास है. देहरादून के दून मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में ही इंटर्नशिप कर रहीं पूजा मीणा कहती हैं कि हॉस्टल से अस्पताल जाने में ही उन्हें सैकड़ों ख़र्च करने पड़ रहे हैं.
कोरोना के कारण सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट सर्विसेज उपलब्ध नहीं हैं तो ऑटो या टैक्सी लेकर ही अस्पताल पहुँचा जा सकता है. फिर मेस में खाने के पैसे और दूसरे ख़र्च. पूजा कहती हैं पढ़ाई के समय घर से पैसे मंगाने में बुरा नहीं लगता था लेकिन अब तो नौकरी लग गई है, नाम के आगे डॉक्टर शब्द लग गया है.
इंटर्न्स का आरोप है कि ड्यूटी पर इस्तेमाल करने के लिए मास्क और सेनेटाइजर तक अपने पैसे से खरीदने पड़ते हैं. हल्द्वानी से एमबीबीएस कर चुके गोरखपुर के अजीत तिवारी कहते हैं जो मास्क मिलते हैं वो कहने को तो N95 मास्क हैं लेकिन इतने डिफेक्टिव हैं कि पहने नहीं जा सकते.
वो कहते हैं कि चूंकि अपनी सुरक्षा अपने हाथ है तो हम मास्क, पीपीई किट और हाथ के दस्ताने भी अपने पैसों से ख़रीद रहे हैं. इंटर्न्स का आरोप है कि लंबी ड्यूटी की वजह से कई बार परिवार वालों तक से हफ्ते-हफ्ते बात नहीं हो पाती. कोविड वार्ड में ड्यूटी के लेकर कई डाक्टर्स ख़ुद भी संक्रमित हो गए थे.
उत्तराखंड इंटर्न्स डॉक्टर्स ग्रुप के मीडिया कॉर्डिनेटर अक्षत थापा कहते हैं कि पिछली बार मानदेय में साल 2011 में बढ़ोतरी हुई थी जब इसे 2500 रुपये प्रति माह से 7500 रुपये किया गया था. अक्षत बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में भी पहले स्टाइपेंड 7500 रुपये ही था लेकिन अब उसे बढ़ाकर 12500 रुपये कर दिया गया है.
दूसरे राज्यों में तो 17 से 18 हजार प्रति माह तक है. इस संदर्भ में डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी दिया है. लेकिन दूसरी ओर से कोई जवाब अभी तक नहीं मिला है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के डॉक्टर डीडी चौधरी ने बीबीसी से कहा राज्य मेडिकल एजुकेशन के निदेशक ने पिछले साल अगस्त में उत्तराखंड के चिकित्सा स्वास्थ्य सचिव को एक पत्र लिखा था जिसमें स्टाइपेंड बढ़ाये जाने की सिफारिश की गई थी.
उत्तराखंड सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने बीबीसी से कहा कि उन्हें डॉक्टरों की हड़ताल और मांगों की बात का ज्ञान अख़बार से मिला है. राज्य स्वास्थ्य निदेशक तृप्ति बहुगुणा का कहना है कि मामले को ऊपर शासन को भेजा गया है.