भारत सरकार और अमेरिकी माइक्रो ब्लॉगिंग
साइट ट्विटर के बीच टकराव ख़त्म होता नहीं दिख रहा है.
केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री
रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार को न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा है कि अभिव्यक्ति
की आज़ादी के नाम पर ट्विटर नियमों का उल्लंघन नहीं कर सकता है. इसके साथ ही ट्विटर को बैन किए जाने के सवाल पर प्रसाद ने बताया कि वह
किसी भी मंच को प्रतिबंधित करने के पक्ष में नहीं हैं.
उन्होंने उन स्थितियों का भी ज़िक्र किया जिनके तहत सरकार संदेशों को डिक्रिप्ट करने की माँग कर सकती है.
क्यों ख़त्म हुआ मध्यस्थ का दर्जा
ट्विटर का 'मध्यस्थ दर्जा' ख़त्म होने पर रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि उन्होंने इसका ऐलान नहीं किया है, बल्कि ये क़ानून की वजह से हुआ है.
वे कहते हैं, “हमने उन्हें (ट्विटर को) तीन महीने का समय दिया था. अन्य पक्षों ने (इस नियम) का पालन किया है, उन्होंने नहीं किया है. आईटी गाइडलाइंस का नियम 7 कहता है कि अगर आप नियमों का पालन नहीं करेंगे तो आप मध्यस्थ का दर्जा खो सकते हैं और देश के दंड कानूनों समेत अन्य कानूनों के लिए उत्तरदायी हो सकते हैं.
मैंने ये (ट्विटर का मध्यस्थ दर्जा ख़त्म होने की) घोषणा नहीं की है. बल्कि ये कानून की वजह से हुआ है. अगर अन्य पक्ष कानून का अनुसरण कर सकते थे तो वे क्यों नहीं. हमने तीन अधिकारियों की नियुक्ति की माँग की. हमने उन्हें तीन महीनों का समय दिया जो कि 26 मई को ख़त्म हो गया था. इसके बाद उन्हें गुडविल जेस्चर के रूप में एक और अवसर दिया.
25 मई को 3 महीने की अवधि पूरी हो गई, मैंने फिर भी कहा कि ट्विटर को एक अंतिम नोटिस और दो. 3 पदाधिकारियों की नियुक्ति के लिए आपको बहुत बड़ी परीक्षा आयोजित करनी है? व्यापार करो, आपके यूजर्स सवाल पूछें उसका स्वागत है लेकिन भारत के संविधान और कानून का पालन करना पड़ेगा
भारत में सौ करोड़ सोशल मीडिया उपभोक्ता हैं और मैं खुश हूं. उन्हें पैसे कमाने दें, उन्हें हमारी निंदा करने की अनुमति दें. इसका पूरा स्वागत है. लेकिन जब ये लाभ कमाने वाली कंपनियां हमें लोकतंत्र पर ज्ञान देने लगती हैं तो मैं एक सवाल पूछता हूं. भारत एक लोकतंत्र है. जहां चुनाव निष्पक्ष हैं. हम असम का चुनाव जीत गए लेकिन बंगाल हार गए. स्वतंत्र न्यायपालिका कड़े सवाल पूछती है. मीडिया वरिष्ठ मंत्रियों से सवाल पूछती है. यह अभिव्यक्ति की आज़ादी है. अगर इसकी आड़ में आप नियमों का पालन नहीं करेंगे तो ये एक ग़लत तर्क है.”
भारत के नियम मानने में क्या हर्ज?
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि भारत में काम करने वाली कंपनियों को भारत के नियम-कानून मानने होंगे.
उन्होंने कहा, “जब भारतीय कंपनियां अमेरिका या दूसरे देशों में IT बिजनेस करने जाती हैं तो क्या वो अमेरिका या दूसरे देशों के कानूनों का पालन करती हैं या नहीं? आपको भारत में व्यापार करना है, प्रधानमंत्री और हम सबकी आलोचना करने के लिए आपका स्वागत है. लेकिन भारत के संविधान, नियमों का पालन करना होगा.”
जब वॉशिंगटन पर हमला हुआ तब आपने राष्ट्रपति समेत सभी लोगों के अकाउंट बैन कर दिए. किसान आंदोलन के दौरान जब लाल किले पर हमला हुआ तो आतंकवादी समर्थक नंगी तलवारें दिखा रहे थे, पुलिसकर्मियों को घायल कर रहे थे, गड्ढों में धकेल रहे थे, तो ये अभिव्यक्ति की आज़ादी है.
अगर कैपिटल हिल अमेरिका का सम्मान है तो लाल किले पर भारतीय प्रधानमंत्री झंडा फहराता है. आप लद्दाख के कुछ इलाकों को चीन के हिस्सा के रूप में दिखाते हैं. हमें ये हटवाने में 15 दिन का समय लगा. एक लोकतंत्र के रूप में भारत के पास अपनी डिज़िटल संप्रभुता की रक्षा करने का पूरा अधिकार है.
हम ये नहीं चाहते कि आप सभी संदेशों को डिक्रिप्ट कर दें. ये मेरा वचन है कि सभी सामान्य वॉट्सऐप यूज़र्स लगातार इस्तेमाल करते रह सकते हैं. लेकिन अगर कोई कंटेंट वायरल होता है जिससे मॉब लिंचिंग होती है, महिलाओं को नग्न अवस्था में दिखाया जाता है, बच्चों का यौन शोषण होता दिखता है तो सिर्फ इन सीमित स्थितियों में आपको ये बताने को कहा जाएगा कि ये मैसेज़ शुरू कहां से हुआ. अगर वायरल संदेश, जो कि सीमा पार से आया हो, से यहां स्थितियां विषम होती हैं, तो उसकी शुरुआत भारत में किसने की. हम सिर्फ यही पूछ रहे हैं. ये जनहित में है.”