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प्राइवेट हॉस्पिटल कोविशील्ड, कोवैक्सीन और स्पुतनिक वैक्सीन की क्या कीमत ले सकेंगे, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को इसकी अधिकतम सीमा तय कर दी है.
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने समाज में हाशिए पर मौजूद उन लोगों को कोरोना का टीका लगवाने के लिए कुछ नियम तय किए हैं, जिनके पास अपनी पहचान साबित करने के लिए आधार कार्ड या पैन कार्ड जैसा कोई डॉक्युमेंट नहीं है.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि पहचान पत्र न होने के कारण किसी को कोविड वैक्सीन से महरूम नहीं रखा जा सकता.
मंत्रालय ने कहा, “देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद ख़ानाबदोश और बेघर लोग, साधु-संत, सड़कों पर रहने वाले भिखारी, मानसिक रूप से विक्षिप्त लोग, जेल में बंद क़ैदी और ओल्ड एज में रहने वाले लोगों को कोरोना की वैक्सीन लगाई जा सके, यह सुनिश्चित करने के लिए हमने कुछ नियम बनाए हैं.”
इन नियमों के अनुसार:
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को ये निर्देश दिया कि वो कोरोना महामारी के कारण अनाथ हुए बच्चों के नाम पर, उनकी पहचान जाहिर करके और इच्छुक लोगों को उन्हें गोद लेने का निमंत्रण देकर चंदा उगाहने वाले ग़ैरसरकारी संगठनों को ऐसा करने से रोकेंगे.
जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की बेंच ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को उन एनजीओ के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का आदेश दिया जो अवैध रुपये से बच्चों को गोद दिलाने के काम में शामिल हैं.
कोर्ट ने कहा, "जुवेनाइल जस्टिस ऐक्ट के प्रावधानों को ताककर पर रख कर कोरोना से प्रभावित हुए किसी भी बच्चे को गोद नहीं दिया जाएगा."
राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को इस सिलसिले में कई शिकायतें मिली थीं कि कुछ लोग और संगठन कोरोना महामारी से अनाथ हुए बच्चों को गोद दिलाने के नाम पर उनके बारे में सक्रिय रूप से आंकड़े जुटा रहे थे. ये लोग दावे कर रहे थे कि वे परिवारों और बच्चों को गोद दिलाने में मदद कर रहे थे.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "एनसीपीसीआर के आंकड़े बताते हैं कि इस साल पहली अप्रैल से पांच जून के बीच 3621 बच्चे अनाथ हो गए. 26,176 बच्चों ने या तो मां या फिर पिता को खो दिया और 274 बच्चे छोड़ दिए गए."
सुप्रीम कोर्ट ने ये भी आदेश दिया है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की मौजूदा योजनाओं के तहत बिना देरी किए इन बच्चों को आर्थिक मदद दी जाए.
साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा है कि राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश पिछले साल मार्च के बाद कोरोना के कारण अपने माता-पिता में से किसी एक को गंवाने वाले या फिर अनाथ हो गए बच्चों के बारे में पता करने का काम जारी रखेगी और ये आंकड़ें एनसीपीसीआर की वेबसाइट पर बिना देरी किए उपलब्ध कराई जाएगी.
प्राइवेट हॉस्पिटल कोविशील्ड, कोवैक्सीन और स्पुतनिक वैक्सीन की क्या कीमत ले सकेंगे, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को इसकी अधिकतम सीमा तय कर दी है.
केंद्र सरकार ने अब प्राइवेट अस्पतालों में कोविशील्ड वैक्सीन के लिए 780 रुपये, कोवैक्सीन के लिए 1410 रुपये और स्पुतनिक वैक्सीन के लिए 1145 रुपये अधिकतम कीमत तय कर दी है.
ये कीमत वैक्सीन निर्माण करने वाली कंपनियों की घोषित कीमत के हिसाब से तय की गई है.
कोविड महामारी की वजह से तबाह हुई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के उपायों पर लगातार चर्चा हो रही है लेकिन जिस उपाय को लेकर सबसे ज्यादा मतभेद है, वह है रिज़र्व बैंक को और नोट छापने चाहिए या नहीं.
अर्थव्यवस्था में संतुलन लाने के लिए कई बार मौद्रिक उपाय किए जाते हैं, अधिक नोट छापने को तकनीकी भाषा में 'क्वॉन्टिटेटिव इज़ींग' कहते हैं, मोटे तौर पर इसका मतलब है मुद्रा की उपलब्धता को बढ़ाना.
दुनिया के कई देशों में इस तरीके को अपनाया गया है, अमेरिका का फ़ेडरल रिज़र्व इस तरीके का इस्तेमाल हाल के वर्षों में कामयाबी के साथ कर चुका है, लेकिन वेनेज़ुएला और ज़िम्बॉब्वे जैसे देशों में इसके बहुत ही घातक परिणाम हुए हैं.
पिछले हफ़्ते देश के शीर्ष बैंकरों में से एक उदय कोटक ने एक इंटरव्यू में कहा था कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर से तबाह हुई अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए नोट छापने की जरूरत है.
चार जून की रात शिवम(बदला हुआ नाम) को थोड़ी बेचैनी हो रही थी. नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले शिवम को लग रहा था जैसे उसे अगले दिन यानी पांच जून को परीक्षा देने जाना है.
दरअसल इस बेचैनी के पीछे एक वजह थी . शिवम को कोवैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल का हिस्सा बनने जाना था . वे इस बात को लेकर खुश था कि वे इतने बड़ी वैक्सीन मुहिम में अहम भूमिका निभा रहा है लेकिन मन ही मन में एक डर भी था.
डर इस बात का कि सुई बहुत प्वाइंटेड है तो बहुत दर्द होगा. कहीं कोई साइड इफेक्ट या दुष्प्रभाव न हो जाए. क्या वो सुरक्षित होगा या और कोई बीमारी हो सकती है जैसे कोरोना ही हो जाए.
वे ये बैचेनी अपनी एक फ्रेंड के साथ भी शेयर कर चुके था. वो दसवीं में पढ़ती हैं और वो भी इस ट्रायल का हिस्सा हैं.
चीन में बनी कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर कई देशों में सवाल उठाए जा रहे हैं. सऊदी अरब, फिलीपींस, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैस देशों में इस वैक्सीन की मान्यता और इसके प्रभाव पर शंका जताई गई है.
इस समय चीन की दो वैक्सीन चलन में है, सिनोफार्मा और सिनोवैक. दोनों ही वैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ से मान्यता भी मिल चुकी है. लेकिन, कुछ देशों की शंकाएं इसे लेकर बनी हुई हैं.
सबसे पहले सऊदी अरब तो चीन की वैक्सीन लगने का सर्टिफिकेट ही स्वीकार नहीं कर रहा है. इससे हज या कारोबार या नौकरी के लिए सऊदी अरब जाने वाले उन लोगों के लिए मुश्किल हो गई है जिन्होंने चीन की वैक्सीन लगवाई है.
सऊदी अरब भी उन देशों में है जिसने चीन में बनी वैक्सीन को मान्यता नहीं दी है.
पंजाब नेशनल बैंक से 13,578 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के अभियुक्त मेहुल चोकसी ने कहा है कि उन्हें एंटीगा से अगवा करके डॉमिनिका ले जाया गया.
उन्होंने दावा किया कि उनके अपहरणकर्ताओं ने उनसे कहा था कि डॉमिनिका में उनकी बातचीत एक शीर्ष भारतीय मंत्री से कराई जाएगी.
इससे पहले मेहुल की पत्नी प्रीति ने भी मेहुल को अगवा किए जाने का दावा किया था.
उनके वकीलों ने भी अलग-अलग मीडिया संस्थानों से बातचीत में यही बात दोहराई थी.
मेहुल चोकसी ने दो जून को अपने वकीलों के ज़रिए एंटीगा पुलिस के पास अपने अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी. इस शिकायत में उन्होंने कई बड़े दावे किए हैं.
दिल्ली में घर-घर राशन डिलीवरी योजना पर सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी एक दूसरे के ऊपर सियासी वार पलटवार कर रही हैं. ताज़ा घटनाक्रम में मंगलवार को दिल्ली सरकार घर-घर राशन योजना में केंद्र सरकार के सभी बदलाव मानने पर राज़ी हो गई है.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिख कर बताया है कि केंद्र जो भी बदलाव करना चाहती है वो उसके लिए तैयार हैं.
उन्होंने कहा, "अगर केंद्र को कोई आपत्ति है तो मैं उनकी सारी बातें मानने के लिए तैयार हूँ. लेकिन घर-घर राशन स्कीम लागू करें."
केजरीवाल ने कहा, "बैठ जाएं हमारे साथ, आज घोषणा कर दें कि वो ये स्कीम लागू करने के लिए तैयार हैं केजरीवाल जी कर दें. मैं गारंटी दे रहा हूं सारी चीज़ें उनकी मान लेंगे हम. बैठ कर करें तो सही. ये कहना बंद कर दें कि तुम अपनी योजना चलाओ हम अपनी चलाएंगे. ऐसे सरकारें चलती हैं, देश चलता है."
"ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार सबसे लड़ रही है. ममता जी से लड़ रही है, पश्चिम बंगाल से लड़ रही है, दिल्ली वालों से लड़ रही है, लक्षद्वीप से लड़ रही है, किसान से लड़ रही है, महाराष्ट्र से लड़ रही है.''
''केंद्र सरकार से हाथ जोड़कर कहना चाहता हूँ कि कोरोना का टाइम है सबसे मिलकर एक साथ काम करो. सबके साथ मिल कर चलो. प्यार मोहब्बत से काम करो. इस वक़्त राज्य सरकारों को सबसे ज़्यादा केंद्र सरकार की ज़रूरत है. हम लोगों को सबसे ज़्यादा केंद्र सरकार की ज़रूरत है."
प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में केजरीवाल ने लिखा, "अभी तक की सरकारों ने देश के ग़रीब लोगों को 75 सालों तक लाइनों में खड़ा रखा है. इन्हें और अगले 75 साल तक राशन की लाइनों में खड़ा मत कीजिए. ये लोग मुझे और आपको कभी माफ़ नहीं करेंगे."
क्या है पूरा मामला?
केजरीवाल ने घर घर योजना राशन योजना को लागू करने की अनुमति देने का अनुरोध करते हुए दावा किया कि केंद्र ने इस योजना के लागू होने से पहले ही अड़ंगा लगा दिया है.
दिल्ली सरकार ने शनिवार को कहा था कि उप-राज्यपाल ने राशन योजना को ख़ारिज कर दिया है क्योंकि योजना के लिए केंद्र से मंज़ूरी नहीं ली गई थी तथा इस बाबत मामला उच्च न्यायालय में लंबित है.
लेकिन दिल्ली से छपने वाले कुछ अख़बारों ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया कि दिल्ली के उप-राज्यपाल ने केजरीवाल सरकार के इस प्रस्ताव को ख़ारिज नहीं किया है, जैसा दिल्ली सरकार चित्रित कर रही है.
केजरीवाल ने यह दलील भी दी थी कि 'उन्हें इस योजना के लिए केंद्र की मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं थी, लेकिन उन्होंने शिष्टाचार के चलते ऐसा किया.'
इस पर बीजेपी प्रवक्ता हरीश खुराना ने कहा था, "केजरीवाल को यह समझना होगा कि सरकार तो संविधान और क़ानून के हिसाब से ही चलेगी. एनएफ़एसए एक़्ट कहता है कि कोई नई योजना शुरू करने के लिए केंद्र की मंज़ूरी ज़रूरी है.''
इससे पहले केंद्र सरकार ने अपने बयान में कहा था कि दिल्ली सरकार जिस तरह चाहे राशन का वितरण करे, उसने दिल्ली सरकार को रोका नहीं है.
फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को एक शख़्स ने थप्पड़ जड़ दिया.
यह वाकया मंगलवार को फ़्रांस के दक्षिण-पूर्वी इलाके में हुआ जब मैक्रों एक आधिकारिक दौरे पर थे.
सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि एक शख़्स अचानक मैक्रों की तरफ़ बढ़ता है और उनके चेहरे पर थप्पड़ जड़ देता है.
वीडियो में देखा जा सकता है कि वेलेंस शहर में मैक्रों एक बैरियर के दूसरी तरफ़ खड़े लोगों से मिलने के लिए बढ़ते हैं.
इस बीच लोग तालियाँ बजाकर उनका स्वागत कर रहे हैं लेकिन तभी भीड़ में खड़ा एक शख़्स अचानक लपककर उनके गाल पर थप्पड़ मार देता है.
इसके बाद तुरंत ही मैक्रों के साथ मौजूद अधिकारी उन्हें वहाँ से दूर खींच लेते हैं.
वीडियो में देखा जा सकता है कि थप्पड़ मारने वाला शख़्स ‘मैक्रोंवाद हाय-हाय’ के नारे भी लगा रहा है.
फ़्रेंच मीडिया के अनुसार, इस सिलसिले में दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
फ़्रांस के नेताओं ने इस घटना की निंदा की है.
बिहार के बांका ज़िले के एक मदरसे में एक बड़े धमाके की रिपोर्ट मिली है. पुलिस ने बताया कि धमाका इतना शक्तिशाली था कि मदरसे की इमारत बुरी तरह से ढह गई.
इस बीच मदरसे के मौलवी अब्दुल सत्तार की लाश भी मिली है.
स्थानीय पत्रकार मनोज ने बीबीसी को बताया, “शाम पाँच बजे के आसपास एक अज्ञात कार मौलवी का शव गाँव में उतारकर चली गई.”
बताया जा रहा है कि मौलवी मूल रूप से झारखंड के रहने वाले थे. वो मस्जिद के मोअज़्ज़िन भी थे.
बांका के एसपी अरविंद कुमार गुप्ता ने बीबीसी की सहयोगी पत्रकार सीटू तिवारी को बताया, "सुबह 8 बजे बांका के नवटोलिया थाने के अंतर्गत पड़ने वाले एक मदरसे में ब्लास्ट हुआ है. धमाके से मदरसे की छत और दीवार ढह गई''
उन्होंने बताया, ''अभी एफएसएल की टीम जांच कर रहे हैं और हम लोग साइंटिफिक इन्वेस्टीगेशन कर रहे हैं कि ब्लास्ट किस वजह से हुआ."
अरविंद कुमार ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "मदरसा एक मस्जिद के अहाते में सामने वाले हिस्से में था. ये भीतर से बंद था. इसके भीतर से एक रास्ता मस्जिद की तरफ़ जाता है जिसके दरवाजे खुले हुए थे. धमाके के कारण मदरसे की इमारत को बहुत नुकसान हुआ है."
उन्होंने बताया कि जब पुलिस पार्टी घटनास्थल पर पहुंची तो वहां एक भी शख़्स मौजूद था और न ही मस्जिद के इमाम वहां पर थे.
उन्होंने कहा, "हम आस-पड़ोस के लोगों से पूछताछ कर रहे हैं. घटनास्थल की जांच के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम बुलाई गई है. मदरसे की इमारत के मलबे को तब तक हटाने से रोक दिया गया है. फॉरेंसिक विशेषज्ञ ये पता लगाएंगे कि किस तरह का विस्फोटक उस जगह पर इस्तेमाल किया गया था."
बिहार में कोरोना महामारी के कारण पिछले एक महीने से सभी धार्मिक स्थल बंद थे.
जम्मू स्थित वैष्णो देवी मंदिर के कैश काउंटिंग सेंटर में आग लग गई.
जम्मू में मौजूद बीबीसी के सहयोगी पत्रकार मोहित कंधारी ने बताया कि आग शाम करीब चार बजे लगी.
मंदिर बोर्ड के आधिकारिक बयान के अनुसार 4:25 बजे तक आग को काबू में लाया जा चुका था. इस हादसे में कोई घायल नहीं हुआ है और न ही वैष्णो देवी यात्रा में किसी तरह की रुकावट आई है.
मंदिर बोर्ड के सीईओ रमेश कुमार ने बीबीसी को बताया,“आग लगने के बाद स्थानीय पुलिस की टीमें, फ़ायर ब्रेड टीम और मंदिर के स्टाफ़ ने तत्परता से इस पर काबू पा लिया.”
मंदिर में किसी तरह की भगदड़ जैसी स्थिति पैदा नहीं हुई और कोई अप्रिय घटना नहीं घटी.
कोरोना महामारी में पाबंदियों के बीच इन दिन रोज़ाना औसतन 1000-2000 श्रद्धालु वैष्णो मंदिर दर्शन के लिए आते हैं.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे मराठा आरक्षण, मेट्रो कार शेड और जीएसटी मुआवजे से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले.
मराठा वर्ग के लिए आरक्षण के कोटे को सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में खारिज कर दिया था. उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक चह्वाण भी इस मुलाकात में उद्धव के साथ थे.
मुलाकात के बाद उद्धव ठाकरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच 10 मिनट तक अलग से आमने-सामने की बातचीत भी हुई.
प्रधानमंत्री मोदी से अलग से मिलने पर उद्धव ठाकरे ने कहा, "हम भले ही राजनीतिक तौर पर साथ न हों लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं कि हमारे रिश्ते खत्म हो गए हों. मैं कोई नवाज़ शरीफ़ से मिलने नहीं गया था. इसलिए अगर मैं प्रधानमंत्री से अलग से व्यक्तिगत रूप से मिलता हूं तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है."
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस मुलाकात पर कहा है कि इसमें कोई आश्चर्य जैसी बात नहीं है. उन्होंने कहा कि जब वे मुख्यमंत्री थे तो प्रधानमंत्री के साथ कई मुद्दों पर बातचीत के लिए वे अलग से मिलते थे.
पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने अपने एक अध्ययन में कोरोना वायरस का एक नया वैरिएंट मिलने की पुष्टि की है. मेडिकल क्षेत्र से जुड़ी प्री-प्रिंट रिपोर्ट्स प्रकाशित करने वाली वेबसाइट bioRxiv पर छपी रिपोर्ट में बताया गया है कि यह वैरिएंट ब्रिटेन और ब्राज़ील से आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के नाक और गले के स्वैब से मिला है.
इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद से सोशल मीडिया से लेकर मीडिया रिपोर्ट्स में तमाम तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि ये वैरिएंट काफ़ी ख़तरनाक है.
सोशल मीडिया में कहीं इसे बेहद घातक वैरिएंट बताया जा रहा है तो कहीं इसकी तुलना डेल्टा वैरिएंट से की जा रही है.
बीबीसी हिंदी ने इस वैरिएंट से जुड़े सवालों के जवाब तलाशने के लिए इस वैरिएंट को डिटेक्ट करने वालीं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की वैज्ञानिक डॉक्टर प्रज्ञा यादव से बात की.
यह 7 जून 1962 की बात है. पाकिस्तान के पांच युवा वैज्ञानिकों का एक ग्रुप डॉक्टर अब्दुल सलाम के साथ बलूचिस्तान के सोनमियानी के तटीय इलाके में इकट्ठा हुआ.
मई 1998 में बलूचिस्तान में किये गए परमाणु धमाकों से 36 साल पहले उस दिन बलूचिस्तान की धरती पर एक और वैज्ञानिक प्रयोग होना था.
ये सभी वैज्ञानिक पाकिस्तान के पहले रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहे हैं.
सूरज डूब चुका है और रात के आठ बजने में अभी सात मिनट बाकी हैं.
फिर काउंटडाउन शुरू होता है.
थ्री, टू, वन ...
और पाकिस्तान का पहला रॉकेट, 'रहबर-ए-अव्वल', सफलतापूर्वक हवा में लॉन्च होकर अपने बाद आने वाले दूसरे रॉकेटों का मार्गदर्शक बन जाता है.
बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को अमरावती की लोकसभा सांसद नवनीत कौर राणा का जाति प्रमाणपत्र रद्द कर दिया है.
कोर्ट ने कहा कि नवनीत कौर राणा ने फर्जी दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करके ये जाति प्रमाणपत्र हासिल किया था.
इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें छह हफ्तों के भीतर आत्मसमर्पण करने का भी निर्देश दिया है. जस्टिस आरडी धानुका और जस्टिस वीजी बिष्ट ने उन पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है.
जुर्माने की ये रकम नवनीत कौर राणा को महाराष्ट्र लीगल सर्विस अथॉरिटी को दो हफ्ते के भीतर जमा करानी होगी.
हाई कोर्ट ने कहा कि 'मोची' जाति से जुड़ा होने का उनका दावा अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए किया गया था. उनका इरादा धोखाधड़ी का था और ये सब इस तबके को उपलब्ध सुविधाओं को हासिल करने के मकसद से किया गया था जबकि वो जानती थीं कि वो उस समुदाय से ताल्लुक नहीं रखती हैं.
नवनीत कौर राणा साल 2019 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की अमरावती लोकसभा सीट से निर्वाचित हुई थीं.