पाकिस्तान में कोरोना के 70 प्रतिशत मामलों में मिला यूके वेरिएंट
पाकिस्तान में कोरोना महामारी पर अध्ययन कर रहे एक रिसर्च सेंटर ने शनिवार को बताया कि देश में कोरोना वायरस के 70 प्रतिशत मामले ब्रिटेन में मिले वेरिएंट के पाए गए हैं.
लाइव कवरेज
पिछले एक महीने से भारत में कोरोना संकट ने भयावह शक्ल अख़्तियार कर ली है.
संक्रमण की दूसरी घातक लहर के बढ़ने के साथ ही दुनिया भर के तमाम देशों की ओर से भारत को भेजी जाने वाली इमरजेंसी मेडिकल सप्लाई की रफ़्तार भी बढ़ गई है.
पिछले सप्ताह की शुरुआत से ही ब्रिटेन और अमेरिका से विमानों में भर कर वेंटिलेटर, दवाइयां और ऑक्सीजन उपकरण भारत पहुँचने लगे थे.
रविवार तक अकेले दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 25 विमानों में भर कर 300 टन राहत सामग्री पहुँच चुकी थी.
लेकिन जैसे-जैसे भारत में कोरोना संक्रमण के मामले रिकार्ड स्तर को छूने की ओर बढ़ रहे हैं, विदेश से मिल रही मेडिकल मदद को ज़रूरतमंदों तक पहुँचाने से जुड़ी चिंताएँ भी बढ़ती जा रही हैं.
पिछले कुछ दिनों के दौरान अस्पताल लगातार ज़्यादा मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन मेडिकल सामानों की खेप हवाईअड्डों पर पड़ी रही.
दिल्ली के अधिकारियों ने स्थानीय मीडिया को बताया कि मंगलवार शाम तक इन सामानों को बाँटा नहीं जा सका था. यानी आपातकालीन मदद की पहली खेप को आए एक सप्ताह से ज़्यादा हो गए थे लेकिन ये ज़रूरतमंदों तक नहीं पहुँच सकी थी.
वीडियो कैप्शन, भारत को मिल रही विदेशी मदद आख़िर जा कहाँ रही है?
पाकिस्तान में कोरोना के 70 प्रतिशत मामलों में मिला यूके वेरिएंट
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ब्रिटेन में मिला
कोरोना वायरस का वेरिएंट अब पाकिस्तान में बड़े स्तर पर पाया गया है.
पाकिस्तान में कोरोना
महामारी पर अध्ययन कर रहे एक रिसर्च सेंटर ने शनिवार को बताया कि देश में कोरोना
वायरस के 70 प्रतिशत मामले ब्रिटेन में मिले वेरिएंट के पाए गए हैं.
न्यूज़ एजेंसी
रॉयटर्स ने यूनिवर्सिटी ऑफ कराची में इंटरनेशनल सेंटर फॉर केमिकल एंड बायोलॉजिकल
साइंसेज (आईसीसीबीएस) के निदेशक डॉक्टर मोहम्मद इक़बाल चौधरी के हवाले से लिखा है,
“पाकिस्तान में (आज)
60 से 70 प्रतिशत संक्रमण यूके वेरिएंट का है.”
आईसीसीबीएस कोविड-19
के सैंपल पर काम करता है और सरकार को शोध व आंकड़े उपलब्ध कराता है.
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ब्रिटेन में मिले वेरिएंट B.1.1.7 की पहली बार पहचान पिछले साल हुई थी. माना जाता है कि ये कोरोना के अन्य वेरिएंट के मुक़ाबले ज़्यादा संक्रामक है.
डॉक्टर मोहम्मद इक़बाल चौधरी का कहना है कि अभी ये देखना बाकी है कि क्या ये वेरिएंट ज़्यादा घातक भी है.
उन्होंने ये भी बताया कि पड़ोसी देश भारत में जो नया वेरिएंट B.1.617 मिला है वो पाकिस्तान में नहीं पाया गया है. लेकिन ऐसा इसलिए भी था क्योंकि उनके पास वेरिएंट का पता लगाने के लिए आवश्यक किट नहीं थे. ये किट जल्द ही देश में आने वाले हैं.
हाल के हफ़्तों में पाकिस्तान में हर दिन कोरोना वायरस से 100 से ज़्यादा मौतें हो रही हैं. देश में हर दिन चार से पांच हज़ार मामले सामने आ रहे हैं.
अगले हफ़्ते आ रहे त्योहार ईद-उल-फित्र को देखते हुए पाकिस्तान में कोरोना के मामले बढ़ने से रोकने के लिए सख़्त प्रतिबंध लगाए गए हैं. त्योहार के दौरान सार्वजनिक वाहनों पर भी प्रतिबंध लगा है.
कोरोना की तीसरी लहर पर क्या बोले सरकार के वैज्ञानिक?
केंद्र सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के विजयराघवन ने कहा है कि अगर हम कड़े उपाय अपनाते हैं तो तीसरी लहर को कहीं भी आने से रोका जा सकता है.
उन्होंने कहा कि ये इस पर निर्भरता है कि स्थानीय स्तर पर राज्यों, ज़िलों और शहरों में हर जगह दिशानिर्देशों का कितने प्रभावी तरीक़े से पालन होता है.
इससे पहले पांच मई को विजयराघवन ने ही चेतावनी दी थी कि कोरोना वायरस की तीसरी लहर को रोका नहीं जा सकता.
उन्होंने कहा था कि जिस तरह तेज़ी से वायरस का प्रसार हो रहा है कोरोना महामारी की तीसरी लहर आनी तय है.
हालांकि, ये साफ नहीं है कि तीसरी लहर कब और किस स्तर की होगी. हमें बीमारी की नई लहरों के लिए तैयारी करनी चाहिए.
वीडियो कैप्शन, कोरोना की तीसरी लहर पर अब क्या बोले सरकार के वैज्ञानिक?
ब्रेकिंग न्यूज़, भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कोच एमके कौशिक का कोरोना से निधन
पूर्व भारतीय हॉकी
खिलाड़ी और कोच एमके कौशिक का निधन हो गया है.
कुछ दिनों पहले वो
कोरोना पॉज़िटिव पाए गए थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
महाराज कृष्ण
कौशिक भारतीय पुरुष हॉकी टीम और महिला हॉकी टीम के कोच रह चुके हैं. उन्हें अर्जुन अवॉर्ड
और द्रोणाचार्य अवॉर्ड से भी नवाज़ा गया था.
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उनके निधन पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र रसकिना ने शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, “भारतीय हॉकी और भारतीय खेल के लिए आज बेहद दुख भरा दिन. एक दिन के भीतर हॉकी के दो दिग्गज खिलाड़ियों की कोरोना वायरस से मौत- रविंदर पाल सिंह और एमके कौशिक. दोनों 1980 मॉस्को ओलंपिक्स हॉकी के गोल्ड मेडलिस्ट थे.”
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बीबीसी इंडिया बोल: कोरोना की तीसरी लहर से कैसे बचेंगे हम?
बीबीसी इंडिया बोल, 8 मई 2021. हाल ही में वैज्ञानिकों ने कहा था कि भारत में कोरोना की तीसरी लहर आनी तय है.
कहा यह भी जा रहा है कि इस लहर में बच्चे भी प्रभावित होंगे.
इससे कैसे बचेंगे हम? बीबीसी इंडिया बोल में आज इसी विषय पर चर्चा मोहनलाल शर्मा के साथ
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कोरोना वैक्सीन पहुंचाने के लिए ड्रोन के इस्तेमाल को मंज़ूरी
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देश के दूरदराज के इलाक़ों के मरीज़ों तक कोरोना वैक्सीन पहुंचाने के लिए आपात स्थिति में ड्रोन की मदद लेने को सरकार ने मंज़ूरी दे दी है.
भारत सरकार की तरफ़
से जारी बयान में बताया गया है कि नागर विमानन मंत्रालय और नागर विमानन महानिदेशालय ने तेलंगाना सरकार को वैक्सीन डिलीवरी के लिए बियोंड लाइन ऑफ़ वीज़ुअल साइट ड्रोन उड़ानों का परीक्षण शुरू करने की सशर्त इजाज़त दे दी है.
तेलंगाना सरकार इस महीने के अंत में इस काम के लिए परीक्षण शुरू करेगी.
इससे पहले
आईसीएमआर ने कोविड-19 वैक्सीन की डिलीवरी के लिए ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर आईआईटी कानपुर के साथ शोध को अनुमति दी थी.
इसके लिए मानवरहित
एयरक्राफ्ट सिस्टम नियमों में विशेष छूट भी दी गई है.
आदेश के मुताबिक़ ड्रोन उड़ानों के लिए दी गई ये छूट एक साल या अगले आदेश तक वैध रहेगी. पिछले महीने
आईसीएमआर को भी इसी तरह का शोध करने के लिए ड्रोन उड़ाने की छूट दी गई थी.
सरकार का कहना है
कि ये मंज़ूरी देने का मकसद वैक्सीन की जल्द डिलीवरी और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान
पहुंच के दोहरे लक्ष्य को हासिल करना है.
आदेश के अनुसार ड्रोन उड़ाने के लिए ज़मीन से अधिकतम 400 मीटर की ऊंचाई तक की इजाज़त दी गई है. साथ ही ये भी दखना होगा कि ड्रेन पायलट के पास इसे ऑपरेट करने के लिए ट्रेनिंग का वैध लाइसेंस होना चाहिए.
सरकार के अनुसार ट्रायल शुरू करने से कहने भारतीय वायु सेना और स्थानीय प्रशासन से भी इजाज़त मांगने की ज़रूरत होगी.
आदेश के अनुसार ड्रोन उड़ानों पर निगरानी और इस ट्रायल के दौरान सुचारू रूप से काम करने के लिए शम्साबाद में सिंगल प्वाइंट एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल बनाया जाएगा और स्थानीय समयानुसार सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त के बीच ही ड्रोन उड़ाए जा सकेंगे.
कोरोना संकट से निपटने में स्वास्थ्य मंत्रालय का रवैया हैरान करने वाला: आईएमए
ब्रेकिंग न्यूज़, कोरोना के लिए डीआरडीओ ने बनाई दवा, कहा, कम करेगी ऑक्सीजन पर निर्भरता
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डीआरडीओ और
इंस्टीट्यूट ऑफ़ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलाइड साइंसेस ने मिलकर कोविड-19 की रोकथाम
के लिए एक दवा विकसित की है.
सरकार के मुताबिक़ ये दवा जान बचाने में और अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों की संख्या कम करने में
कारगर सिद्ध हो सकती है.
कोविड-19 की रोकथाम के लिए 2-डैक्सी-डी-ग्लूकोज़
(2-डीजी) नाम की इस दवा को डॉ. रेड्डी लैब के साथ मिलकर
विकसित किया गया है.
भारत सरकार की तरफ
से जारी बयान में कहा गया है कि इस ड्रग के क्लिनिकल ट्रायल से पता चला है कि यह
अस्पताल में भर्ती मरीज़ों की सेहत में सुधार करती है और ऑक्सीजन पर उनकी निर्भरता
को कम करती है.
सरकार ने अपने
बयान में कहा है कि यह दवा कोविड-19 के मरीज़ों के लिए बेहद कारगर साबित हो सकती है.
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पिछले साल हुआ था ट्रायल
पिछले साल जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के संस्थानों से कोविड महामारी के ख़िलाफ़ तैयारियां तेज़ करने का आह्वान किया था, उस वक्त डीआरडीओ ने 2-डीजी के चिकित्सकीय प्रयोग के लिए पहल की थी.
अप्रैल 2020 में महामारी की पहली लहर के दौरान आईएनएमएएस और डीआरडीओ ने सेंटर फॉर सेल्यूलर एंड मॉलीक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) के साथ मिलकर प्रयोग किए थे और ये पाया था कि ये दवा संक्रमण की बढ़त को रोकती है और सार्स सीओवी-2 वायरस के ख़िलाफ़ प्रभावी है.
इन्हीं नतीजों के आधार पर भारत के दवा नियंत्रक ने इस दवा के दूसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल को मई 2020 में मंज़ूरी दी थी.
मई से अक्तूबर के बीच डीआरएल, हैदराबाद के साथ मिलकर किए गए क्लिनिकल ट्रायल में इस दवा को कोविड-19 के मरीज़ों के लिए सुरक्षित पाया गया है. दूसरे चरण का प्रयोग 110 मरीज़ों पर किया गया.
नवंबर 2020 में दवा नियंत्रक डीसीजीआई ने तीसरे चरण के ट्रायल को मंज़ूरी दे दी थी. दिसंबर 2020 और मार्च 2021 के बीच 220 मरीज़ों पर ये ट्रालय पूरा हुआ.
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पाउडर के रूप में
एक मई को दवा नियंत्रक ने आपात स्थिति में इस दवा के इस्तेमाल को मंज़ूरी दे दी थी. ये दवा एक जेनेरिक मॉलिक्यूल है और ग्लूकोज़ का ही एक अनुरूप है. ऐसे में इसे बड़ी तादाद में आसानी से निर्मित किया जा सकता है.
ये दवा पाउडर स्वरूप में सैशे में मिलती है और इसे पानी में घोलकर पिया जाता है.
भारत सरकार के मुताबिक़ दूसरी लहर के दौरान ये दवा लोगों की जान बचाएगी और अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरतों को भी कम करेगी.
कोरोना वायरस के असर क्या उबर चुका है चीन?
जहां दुनिया के कई देश अब भी कोरोना वायरस की मार झेल रहे हैं, वहीं चीन में लोगों की ज़िंदगी पटरी पर लौट रही है.
माना जा रहा है कि कोरोना वायरस के संक्रमण का सबसे पहला मामला चीन के वुहान में ही सामने आया था.
इस हफ़्ते वहां घरेलू पर्यटन उद्योग ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए. उसके आंकड़े बिल्कुल वैसे थे जैसे कोरोना काल से पहले हुआ करते थे.
मे डे हॉलिडे सप्ताह के दौरान वहां 20 क़रीब लोगों ने यात्राएं कीं, जिसने वहां की अर्थव्यवस्था में जैसे नई जान फूंक दी.
वीडियो कैप्शन, कोरोना से लगभग उबर चुका है चीन
अमेरिका के कुछ समुदाय कर रहे हैं वैक्सीन से परहेज़
अमेरिका में अब तक लगभग दस करोड़ से भी ज़्यादा लोगों को कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाई जा चुकी है.
लेकिन वहां के अफ़्रीकी अमेरिकी समुदाय के लोग और कई रिपब्लिकन सपोर्टर वैक्सीन लेने में परहेज़ कर रहे हैं.
एक पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए उनकी बातों को पहले सुनना और समझाना सबसे ज़रूरी है.
वैक्सीन लगाने के काम के जुटे कुछ स्वास्थ्यकर्मी अब उन तक पहुंचने की कोशिश रहे हैं.
वीडियो कैप्शन, अमेरिका के कुछ समुदाय कर रहे हैं वैक्सीन से परहेज़
पाकिस्तान में रमज़ान और ईद को देखते हुए लगाई गई पाबंदियां
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पाकिस्तान ने ईद और समज़ान के मद्देनज़र यात्रा और पर्यटन
पर नई पाबंदियों की घोषणा की है. ये रमज़ान के महीने का आख़िरी सप्ताह है और इस दौरान
बाज़ारों में काफ़ी भीड़ रहती है.
पाकिस्तान सरकार के मंत्री असद उमर ने एक बयान में कहा है कि वायरस ने अपना रूप बदला है और
इसके म्यूटेट होने के कारण क्षेत्र में ख़तरनाक हालात पैदा हो रहे हैं.
सोशल मीडिया पर किए एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “हमें इस बात का
अहसास है कि 16 तारीख तक के लिए पाबंदियां लगाई गई हैं जिसके कारण लोगों को
परेशानी होगी. लेकिन इस पूरे प्रांत में कोरोना वायरस के म्यूटेटेड वर्जन फैल रहा है और इससे बेदह ख़तरनाक़ हालात पैदा हो गए हैं.”
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नए प्रतिबंधों के दौरान होटल और रेस्त्रां बंद रहेंगे और पर्यटन के चर्चित क्षेत्रों में यात्राओं पर भी रोक रहेगी. हालांकि इस दौरान मस्जिदें खुली रहेंगी. रमज़ान के महीने में पाकिस्तान में मस्जिदों में सामान्य से बहुत ज़्यादा भीड़ रहती है.
पिछले साल ईद के बाद पाकिस्तान में कोरोना वायरस के मामलों में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई थी.
मोदी से चर्चा को लेकर हेमंत सोरेन की टिप्पणी पर शिवराज चौहान ने दिया जवाब
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मध्य प्रदेश के
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की
प्रधानमंत्री मोदी को लेकर की गई टिप्पणी की निंदा की है.
शिवराज सिंह चौहान
ने शनिवार को कहा कि उन्होंने अपनी टिप्पणियों से अपने पद की गरिमा को धूमिल किया है.
हेमंत सोरेन ने पीएम
मोदी के साथ कोविड-19 को लेकर हुई चर्चा का जिक्र करते हुए गुरुवार रात को तंज
कसते हुए एक ट्वीट किया था.
उन्होंने लिखा था,
“आज आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने फ़ोन किया.
उन्होंने सिर्फ़ अपने मन की बात की. बेहतर होता यदि वो काम की बात करते और काम की
बात सुनते.”
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इस पर आपत्ति जताते हुए शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट किया, “प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के लिए हेमंत सोरेन जी अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर मुख्यमंत्री पद की गरिमा को धूमिल कर रहे हैं, किसी भी मुख्यमंत्री ने आज तक किसी प्रधानमंत्री के लिए ऐसी निकृष्टतम भाषा का प्रयोग नहीं किया है.”
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शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पीएम से बातचीत को लेकर हेमंत सोरेन ने ना सिर्फ़ अपने राजनीतिक फायदे के लिए ट्वीट किया बल्कि उनकी भाषा में भी संयम और मर्यादा का अभाव था.
उन्होंने कहा, “मैं इसकी निंदा करता हूं. पीएम मोदी हर मुख्यमंत्री और हर व्यक्ति की बात सुनते हैं. सोरेन को ये सोचना चाहिए कि पीएम ने खुद फ़ोन किया था क्योंकि वो झारखंड की स्थिति को लेकर चिंतित थे.”
“देश और झारखंड दोनों कोविड-19 की चुनौती से जूझ रहे हैं. इसलिए प्रधानमंत्री ने सिर्फ़ कोविड-19 के बारे में बात की. अगर हेमंत जी कुछ और बात करना चाहते हैं तो उन्हें प्रधानमंत्री को फोन करके अपनी समस्या से अवगत कराना चाहिए. उन्हें किसने रोका है?”
शिवराज सिंह चौहान ने पीएम मोदी को एक “संवेदनशील” प्रधानमंत्री बताते हुए कहा कि वो देश को इस महामारी से निकालने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि हेमंत जी, राजनीतिक फायदे के लिए पीएम पर आरोप लगाते हुए संवेदनहीन टिप्पणी करने के लिए देश आपको कभी माफ नहीं करेगा.
कोरोना: पाकिस्तान और भारत के दूसरे पड़ोसियों के क्या हैं हाल?
भारत में लगातार दूसरे दिन चौबीस घंटों में कोरोना के चार लाख से ज़्यादा मामले सामने आए हैं और लगभग चार हज़ार लोगों की मौत हो गई है.
लेकिन विशेषज्ञ आशंका जता रहे हैं कि असल आंकड़ा इससे कहीं बहुत ज़्यादा हो सकता है.
अब वायरस देश के छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में भी फैल रहा है जहां स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही कमज़ोर है. कई जगहों पर अस्पताल हैं तो डॉक्टर नहीं और कहीं डॉक्टर हैं तो अस्पताल में उपकरण नहीं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव क्षेत्र वाराणसी की भी हालत बहुत बुरी है.
वहीं भारत के पड़ोसी देशों में भी कोरोना की दूसरी लहर का ख़तरा बढ़ रहा है.
वहां हालात भारत जितने ख़राब नहीं हैं लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकारें और नागरिक लापरवाही बरतते रहे तो स्थिति बेक़ाबू होने में वक़्त नहीं लगेगा.
देखिए बीबीसी संवाददाताओं की भेजी रिपोर्ट.
वीडियो कैप्शन, पाकिस्तान समेत भारत के बाक़ी पड़ोसियों के कोरोना से क्या हैं हाल? Cover Story
सऊदी में सभी कर्मचारियों के लिए टीका लगवाना हुआ अनिवार्य
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सऊदी अरब में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के सभी कर्मचारियों के लिए काम पर आने के लिए टीकाकरण करवाना अनिवार्य कर दिया गया है. मानव संसाधन मंत्रालय ने शुक्रवार को ये आदेश जारी किया है. हालांकि अभी ये नहीं बताया गया है कि ये कब से लागू होगा.
मानव संसाधन और सामाजिक विकास मंत्रालय ने ट्विटर पर कहा, 'निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के सभी सेक्टरों में पुरुष और महिला कर्मचारियों के लिए काम पर आने के लिए टीकाकरण करवाना अनिवार्य होगा.'
मंत्रालय ने कार्यस्थलों से कहा है कि वो टीकाकरण करवाने की तैयारियां करें. आदेश में कहा गया है कि मंत्रालय जल्द ही ये बताएगा कि टीके कैसे लगवाए जाएंगे.
तमिलनाडु में 24 मई तक लॉकडाउन
कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए तमिलनाडु में 24 मई तक लॉकडाउन लगाने की घोषणा की गई है.
समाचार एजेंसी रायटर्स के मुताबिक़ अधिकारियों ने बताया कि लॉकडाइन
सोमवार से शुरू होकर 24 मई तक चलेगा. शनिवार और रविवार को दुकाने खुलेंगी ताकि
लोगों को लॉकडाउन के पहले पूरी तैयारी करने का मौक़ा मिले.
पड़ोसी राज्य कर्नाटक में भी 24 तक के लिए लॉकडाउन है. दिल्ली,
बिहार समेत कई दूसरों राज्यों भी पूरी तरह से या कई इलाकों में लॉकडाउन या कर्फ्यू
लगाया गया है.
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ब्रेकिंग न्यूज़, नेपाल में भी कोरोना तबाही की ओर बढ़ रहा, चीन से पूछे गए सवाल
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नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन से चाइना न्यूज़
सर्विस ने शुक्रवार को सवाल पूछा कि नेपाल में भी कोविड संक्रमण तेज़ी से फैल रहा है.
आपका इस पर क्या कहना है?
चीन क्या नेपाल को
किसी तरह से मदद कर रहा है?
पिछले तीन हफ़्तों में नेपाल में कोरोना के संक्रमण तेज़ी से
बढ़े हैं.नेपाल में कोविड टेस्ट
किए जाने पर हर पाँच में से दो लोग संक्रमित पाए जा रहे हैं. गुरुवार को नेपाल में
कोरोना के 9,023 नए मामले दर्ज किए
गए थे.
यह एक दिन में अब तक का सबसे ज़्यादा संक्रमण है. नेपाल में
कोविड महामारी आने के बाद से 3,500 लोगों की मौत हो चुकी है. पिछले दो हफ़्तों में 400 लोगों की मौत हुई
है.
नेपाल में कोरोना संकट को लेकर चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा, ''नेपाल हमारा पड़ोसी
दोस्त है और रणनीतिक साझेदार भी है. कोरोना महामारी शुरू होने के बाद सेही दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं. चीन-नेपाल दोस्ती में कोरोना
अभी सबसे बड़ा मुद्दा है.’’
‘’हमारी इस पर नज़र बनी हुई कि नेपाल में कोरोना के
मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और हम बेहतर समर्थन के लिए तैयार हैं. हाल ही में हमने
नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और
श्रीलंका के विदेश मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की थी. हमने दक्षिण एशिया में कोरोना
के ख़िलाफ़ लड़ाई में ज़रूरी दवाइयां और वैक्सीन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए
कई योजनाओं पर बात की थी और इन पर काम भी हो रहा है. जल्द ही नेपाल में कोविड से जुड़ी
सप्लाई पहुँचने वाली है.''
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सऊदी अरब मुश्किल वक़्त में आया साथ तो मोदी सरकार का भी रुख़ पड़ा नरम
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भारत के तेल मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सऊदी अरब
और मध्य-पूर्व के बाक़ी के तेल उत्पादक देशों को कोविड संकट में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन
भेजने के लिए शुक्रिया कहा है.
अपने कई ट्वीट में धर्मेंद्र प्रधान ने सऊदी अरब, यूएई और क़तर की ओर से अगले छह महीने तक कंटेनर की आपूर्ति और लिक्विड मेडिकल
ऑक्सीजन की व्यावसायिक सप्लाई के आश्वासन का स्वागत किया है.
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, ''यूएई, कुवैत, बहरीन और सऊदी
अरब की ओर से ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए हम शुक्रगुज़ार हैं.''
प्रधान का ये बयान तब आया है जब भारत की सरकारी तेल रिफाइनरी ने सऊदी
से मई महीने में तेल आयात में कटौती की है.
ऐसा तेल मंत्रालय के निर्देश पर किया गया है.
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भारत की सरकारी रिफाइनरी सऊदी की सरकारी तेल कंपनी अरामको से महीने में लगभग 1.5 करोड़ बैरल तेल ख़रीदती है.
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है. भारत अपनी ज़रूरत का 80 प्रतिशत तेल आयात करता है और इसके लिए मध्य-पूर्व पर बहुत अधिक निर्भर है.
सऊदी अरब और भारत के बीच रिश्तों में थोड़ी कड़वाहट आ गई थी जब इसी साल प्रधान ने कहा था कि सऊदी अरब और दूसरे देशों में तेल उत्पादन में की गई कटौती कच्चे तेल की क़ीमतों को बढ़ा रही है.
भारत ने तेल रिफ़ाइनरी कंपनियों से कहा था कि वो मध्य-पूर्व पर अपनी निर्भरता को कम करे और सऊदी से कम तेल ख़रीदें. इसके बाद तेल कंपनियों ने मई में तेल की ख़रीद एक तिहाई कम कर दी.
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समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक भारतीय तेल उद्योग से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि कोरोना महामारी के बढ़ते मामलों के बीच सऊदी ने जब भारत को ऑक्सीजन और क्रायोजेनिक टैंकर उपलब्ध करवाए, उसके बाद भारत के तेल मंत्रालय ने तेल रिफ़ाइनरी कंपनियों से सऊदी से आयात कम नहीं करने के लिए कहा है.
सूत्र के मुताबिक, “सऊदी ने स्थिति को सुधारने के लिए तुरंत मदद की...उन्होंने फिर से दोस्ती की कोशिश की.”
भारत के तेल मंत्री ने भी शुक्रवार को कहा कि उन्होंने सऊदी अरब और खाड़ी के दूसरे देशों से बात की और उन्हें राहत सामाग्री देने के लिए शुक्रिया कहा.
प्रधान ने ट्विट किया, “सऊदी असब, यूएई और कतर से बात की और लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन के आयात को बढ़ाने पर चर्चा की.”
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ब्रेकिंग न्यूज़, भारत में कोरोना से पिछले 24 घंटों में 4,187 मौतें, चार लाख नए मामले
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भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 4.01 लाख नए मामले दर्ज किए गए हैं और 4,187 लोगों की मौत हुई है. इसके साथ ही एक दिन में चार हज़ार से ज़्यादा मौत के मामले में भारत ब्राज़ील और अमेरिका के बाद ती़सरा देश बन गया है. 14 फ़रवरी के बाद से भारत में कुल 82 हज़ार से ज़्यादा लोगों की जान कोरोना से गई है.
भारत में सरकारी आँकड़ों के अनुसार कोरोना से अब तक 2,18,92,676 लोग संक्रमित हो चुके हैं और मरने वालों की संख्या दो लाख, 38 हज़ार 270 हो गई है. अभी भारत में कोरोना के कुल सक्रिय मामले 37,23,446 हैं.
कमला हैरिस बोलीं- भारत की स्थिति विचलित करने वाली
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अमेरिका की उपराष्ट्रपति
कमला हैरिस ने कहा है कि भारत में कोरोना का बढ़ता संक्रमण और मौतें भयावह हैं
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक हैरिस ने कहा कि भारत की मदद अमेरिका के लिए लिए बहुत मायने रखती है. उन्होंने भारत को भेजी जा रही मदद के बारे बताते हुए उन लोगों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं जिन्होंने महामारी के दौरान अपनों को खोया है.
भारतीय मूल के लोगों के लिए आयोजित किए गए कोविड-19 से जुड़े एक समारोह में हैरिस ने एक रिकॉर्डेड संदेश में कहा, “जैसा कि आप में से बहुत से लोग जानते हैं, मेरे परिवार की कई पीढ़ियां भारत से आती हैं. मेरी माँ का जन्म और पालन-पोषण भारत में हुआ. मेरे परिवार के कई सदस्य आज भी भारत में रहते हैं. भारत की मदद अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण है.”
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कमला हैरिस ने कहा, “भारत में जैसे ही स्थिति ख़राब होनी शुरू हुई, अमेरिकी प्रशासन ने क़दम उठाए. “
हालांकि भारत में कोरोना की दूसरी लहर के आने के बाद बाइडन सरकार के रवैये की काफ़ी आलोचना की गई थी. उन पर आरोप लगे थे कि दूसरे देश भारत की मदद के लिए तुरंत आगे आए, लेकिन अमेरिका कई दिनों तक चुप्पी साधे रहा.
हालांकि शुरुआत के बाद से अमेरिका भारत को अबत क क़रीब 100 मिलियन डॉलर की मदद कर चुका है.
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हैरिस ने कहा, “26 अप्रैल को राष्ट्रपति जो बाइडन ने प्रधानमंत्री (मोदी) से मदद करने की बात कही. 30 अप्रैल को अमेरिकी सेना और लोग ज़मीन पर मदद पहुंचा रहे थे.”
उन्होंने कहा कि एन-95 मास्क, ऑक्सीजन सिलिंडर जैसी ज़रूरी चीज़ें भेजी जा चुकीं हैं और भेजी जा रही हैं.
यूएस एड के मुताबिक़, भारत को भेजी गई इमर्जेंसी सप्लाई में रेमडेसिविर की 1,25,000 शीशियां, 1500 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और दस लाख रैपिड टेस्टिंग किट शामिल हैं.
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इसके अलावा अब तक 6 हवाई जहाजों से पहुँचाई गई मदद में क़रीब 550 मोबाइल ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी हैं, तो हवा में मौजूद ऑक्सीजन की मदद से काम करते हैं. इनका इस्तेमाल एक साथ कई मरीज़ों पर किया जा सकता है और ये क़रीब पाँच साल तक चलते हैं.
हैरिस ने कहा, “पेटेंट में छूट देने को लेकर हमारा पूरा समर्थन है ताकि भारत और दूसरे देशों के लोगों का जल्द टीकाकरण किया जा सके.”
इससे पहले बाइडन प्रशासन ने कहा था कि वो अस्थायी रूप से वैक्सीन से जुड़े पेटेंट में छूट देने का समर्थन करेगा.
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भारत ने इस पहल का स्वागत किया है.
हैरिस ने कहा, “महामारी की शुरुआत में जब अस्पतालों में बेड की कमी होने लगी थी, तब भारत ने हमारी मदद की थी, हम भारत की मदद से लिए प्रतिबद्ध हैं. हम ये भारत के दोस्त के नाते, एशियाई क्वाड और वैश्विक समुदाय के सदस्य के तौर पर कर रहे हैं. “