ब्रेकिंग न्यूज़, साहित्यकार नरेंद्र कोहली का निधन, मोदी ने कहा- हमेशा याद किए जाएंगे

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हिंदी भाषा के जाने माने साहित्यकार और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डॉक्टर नरेंद्र कोहली का शनिवार शाम निधन हो गया है. वो 81 साल के थे.
बीते दिनों कोरोना संक्रमित होने के बाद उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
उनकी मौत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है और सोशल मीडिया पर लिखा है कि, "साहित्य में पौराणिक और ऐतिहासिक चरित्रों के जीवंत चित्रण के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे."
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वहीं राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने भी नरेंद्र कोहली मौत पर दुख प्रकट किया है और कहा है कि हिंदी साहित्य जगत में उनका विशेष योगदान रहा है. सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा कि "उन्होंने हमारे पौराणिक आख्यानों को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया."
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गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत समेत कई नेता सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धाजंलि दे रहे हैं.
अमित शाह ने लिखा कि "उनके निधन से साहित्य के एक युग का अंत हो गया." वहीं राजनाथ सिंह ने लिखा कि, "उनके निधन से हिंदी साहित्य में बहुत बड़ा शून्य निर्मित हुआ है."

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नरेंद्र कोहली को जन्म 6 जनवरी, 1940 को पंजाब के सियालकोट में हुआ था (जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है). उनकी प्रारंभिक पढ़ाई लाहौर में हुई. विभाजन के बाद वो जमशेदपुर आ गए और वहीं उनकी आगे की पढ़ाई शुरू हुई.
इसके बाद उन्होंने दिल्ली युनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की. 1963 में उन्होंने दिल्ली युनिवर्सिटी पर अध्यापन का काम शुरू किया. 1995 में लेखन के काम पर ध्यान देने के लिए उन्होंने वॉलंटरी रिटायरमेन्ट ले लिया था.
उनकी लिखी जानीमानी कृतियों में न भूतो न भविष्यति, अभ्युदय, संघर्ष की ओर, युद्ध, बन्धन, अधिकार और कर्म शामिल हैं.
अपने लेखन के लिए उन्हें हिन्दी अकादमी, साहित्य सम्मान, साहित्य भूषण और डॉ. कामिल बुल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. साल 2017 में उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से नवाज़ा गया था.






















