दिल्ली की एक अदालत ने शहर में बीते साल हुए दंगों के सिलसिले में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता और संस्था 'यूनाइटेड अगेंस्ट हेट' के सह-संस्थापक उमर ख़ालिद को ज़मानत दे दी है. दंगे का ये मामला खजूरी ख़ास पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ था.
बारएंडबेंच.कॉम के मुताबिक, कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने उमर ख़ालिद को 20 हज़ार रूपये के निजी मुचलके पर कुछ शर्तों के साथ ज़मानत दी है.
इनमें ये शर्त भी शामिल है कि उमर ख़ालिद किसी साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे और किसी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश भी नहीं करेंगे, साथ ही इलाके में शांति और सौहार्द बनाकर रखेंगे.
बीबीसी संवाददाता कीर्ति दुबे से बातचीत मेें यूनाइटेड अगेन्स्ट हेट की सह-संस्थापक बनो ज्योत्सना लहरी ने बताया कि उमर ख़ालिद को ये ज़मानत एफआईआर संख्या 101 में मिली है. हालांकि वो जेल में ही रहेंगे, क्योंकि उन्हें यूएपीए की धाराओं वाली एफआईआर संख्या 59 में अब तक ज़मानत नहीं मिली है.
एफ़आईआर-59 यानी 'साज़िश' का मामला
बीबीसी संवाददाता कीर्ति दुबे के मुताबिक,इस मामले में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच का कहना है कि दंगों के पीछे एक गहरी साज़िश थी. एफ़आईआर 59 इसी कथित साज़िश के बारे में है.
इसमें अनलॉफ़ुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट (यूएपीए) की तीन धाराएं लगाई गई हैं. यूएपीए का इस्तेमाल आम तौर पर आतंकवाद के संदिग्ध लोगों को लंबे समय तक बिना ज़मानत के जेल में रखने के लिए किया जाता है.
इस एफ़आईआर में उन छात्र नेताओं के नाम शामिल हैं जो दिल्ली में सीएए के खिलाफ़ प्रदर्शनों में प्रमुख चेहरे रहे.
6 मार्च 2020 को दर्ज हुई इस मूल एफ़आईआर में सिर्फ़ दो लोगों- जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर ख़ालिद और पॉपुलर फ़्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) से जुड़े दानिश के नाम हैं.
एफ़आईआर-59 के आधार पर अब तक 22 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. जिनमें से सफ़ूरा ज़रगर, मोहम्मद दानिश, परवेज़ और इलियास इस समय ज़मानत पर रिहा हैं. बाकी सभी लोग अब भी न्यायिक हिरासत में हैं.
ख़ास बात ये है कि इनमें से ज्यादातर लोगों को शुरूआत में दिल्ली दंगों से जुड़ी अलग-अलग एफ़आईआर में गिरफ़्तार किया गया लेकिन जैसे ही उन मामलों में उन्हें ज़मानत मिली या मिलने की संभावना बनी, इनका नाम एफ़आईआर संख्या 59 में जोड़ दिया गया और इस तरह इन लोगों पर यूएपीए की धाराएँ लग गईं.
इस केस में उमर ख़ालिद की गिरफ़्तारी 13 सितंबर, 2020 को देर रात में की गई, चूंकि तब तक इस मामले में यूएपीए की धाराएं जोड़ दी गई थी ऐसे में उमर को अब तक ज़मानत नहीं मिल सकी है और वे न्यायिक हिरासत में हैं.
16 सितंबर को स्पेशल सेल ने एफ़आईआर 59 की 17 हज़ार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की जिसमें 15 लोगों के खिलाफ़ धाराएँ और सबूत का ज़िक्र किया गया.
इस चार्जशीट में उमर ख़ालिद और शरजील इमाम के खिलाफ़ आरोप नहीं तय किए गए थे. 22 नवंबर, 2020 को स्पेशल कोर्ट में उमर ख़ालिद, शरजील इमाम और फ़ैज़ान खान के ख़िलाफ़ एक 200 पन्नों की एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की गई. इन पर 26 धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें तीन धाराएं यूएपीए की शामिल हैं.
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का कहना है कि जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी (जेसीसी), पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई), पिंजरा तोड़, यूनाइटेड अगेंस्ट हेट से जुड़े लोगों ने साज़िश के तहत दिल्ली में दंगे कराए.
ये उन लोगों की सूची है जिन्हें गिरफ़्तार तो अलग-अलग एफ़आईआर के आधार पर किया गया लेकिन बाद में यूएपीए वाली एफ़आईआर-59 में उनका नाम जुड़ गया, इस मामले में उमर ख़ालिद ही अकेले व्यक्ति हैं जिनका नाम उस एफ़आईआर में पहले से था.
ख़ालिद सैफ़ी- यूनाइटेड अगेंस्ट हेट
इशरत जहां- पूर्व कांग्रेस पार्षद
सफ़ूरा ज़रगर-एमफ़िल छात्रा, जामिया
मीरान हैदर- पीएचडी छात्र, जामिया
गुलफ़िशां फ़ातिमा- एमबीए छात्र, गाज़ियाबाद
शिफ़ा-उर-रहमान- जमिया एल्युमिनाई
नताशा नरवाल- जेएनयू छात्र,'पिंजरा तोड़' की सदस्य
देवांगना कलिता- जेएनयू छात्र, 'पिंजरा तोड़' की सदस्य
आसिफ़ इक़बाल तन्हा- जामिया छात्र
उमर ख़ालिद-पूर्व जेएनयू छात्र
ताहिर हुसैन- पूर्व 'आप' पार्षद