बांग्लादेशः रोहिंग्या शरणार्थियों के सबसे बड़े कैंप में भीषण आग
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक इस आग में एक हज़ार से अधिक घर तबाह हो गए हैं
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बांग्लादेशः रोहिंग्या शरणार्थियों के सबसे बड़े कैंप में भीषण आग, सरकारी अधिकारियों के मुताबिक इस आग में एक हज़ार से अधिक घर तबाह हो गए हैं
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बांग्लादेश के अधिकारियों के मुताबिक कॉक्स बाज़ार के रोहिंग्या शरणार्थी कैंप में लगी आग में एक हज़ार से अधिक घर तबाह हो गए हैं. सोमवार दोपहर लगी आग ने शरणार्थी कैंप के बड़े हिस्से को अपने दायरे में ले लिया.
अग्नीशमन दलों और स्वयंसेवकों ने तेज़ी से फैलती आग पर काबू करने के लिए कई घंटों तक संघर्ष किया. इस कैंप में अधिकतर घर बांस और लकड़ी के बने हैं. कॉक्स बाज़ार में काम करने वाली राहत संस्थाओं के कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये इस कैंप में लगी अब तक की सबसे बड़ी आग है. इसी साल जनवरी में लगी आग में भी हज़ारों लोग बेघर हो गए थे.
रिपोर्टों के मुताबिक सोमवार को लगी आग में कई लोगों के मारे जाने की आशंका है. हालांकि अभी तक किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है.
कॉक्स बाज़ार शरणार्थी कैंप में क़रीब 11 लाख रोहिंग्या शरणार्थी रहते हैं. तीन साल पहले म्यांमार में हिंसा की वजह से लाखों रोहिंग्या मुसलमानों ने जान बचाने के लिए बांग्लादेश में पनाह ली थी.
हाल के महीनों में बांग्लादेशी सरकार ने कुछ रोहिंग्या शरणार्थियों को एक द्वीप पर बने कैंप में बसाया है. सरकार का तर्क है कि ये नया कैंप कॉक्स बाज़ार से ज़्यादा सुरक्षित है और यहां रहने की अच्छी व्यवस्था है. मानवाधिकार संगठन बांग्लादेश के इस कदम का विरोध भी करते हैं.
ब्रेकिंग न्यूज़, मतदान से 72 घंटे पहले बाइक रैली पर चुनाव आयोग ने लगाया प्रतिबंध
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चुनाव आयोग ने मतदान के दिन और मतदान से 72 घंटे पहले बाइक रैली निकालने पर प्रतिबंध लगा दिया है.
जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चुनाव है, वहाँ के मु्ख्य चुनाव अधिकारियों को इसे लेकर सूचित कर दिया गया है.
चुनाव आयोग का कहना है कि कुछ असामाजिक तत्व बाइक का इस्तेमाल मतदाताओं को डराने धमकाने में करते हैं.
बांग्लादेश में पीएम मोदी के दौरे का विरोध क्यों हो रहा?
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भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 मार्च को बांग्लादेश दौर पर जा रहे हैं, लेकिन उनके जाने से पहले ही वहाँ कुछ लोगों ने उनके दौरे का विरोध शुरू कर दिया है. लेकिन बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन ने शनिवार को कहा कि लोगों के एक समूह के इस विरोध से चिंतित होने की कोई वजह नहीं है.
उन्होंने कहा, "कुछ लोग भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ढाका दौरे के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे हैं लेकिन कोई चिंता की बात नहीं है. बांग्लादेश एक लोकतांत्रिक देश है, जहाँ लोगों को अभिव्यक्ति की आज़ादी है."
ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक़ विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन ने एक प्रेस वार्ता में कहा, "लोग हमारे साथ हैं. सिर्फ़ कुछ लोग इस दौरे का विरोध कर सकते हैं और उन्हें करने दीजिए. इस मसले से चिंतित होने का हमारे पास कोई कारण नहीं है."
देहरादून के मंदिरों में लगे 'गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित' वाले बैनर
वीडियो कैप्शन, देहरादून के मंदिरों में लगे 'गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित' वाले बैनर
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के कुछ मंदिर में बैनर लगाए गए हैं, जिन पर लिखा है कि गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है. ये बैनर हिंदू युवा वाहिनी नामक संगठन ने लगाए हैं.
पुलिस ने उस शख़्स के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है जिसका फोन नंबर इन बैनरों पर लिखा है. कहा जा रहा है बैनर हटा दिए हैं लेकिन मंदिर प्रशासन ने इसकी जानकारी से इनकार किया है.
कुछ दिन पहले यूपी के ग़ाज़ियाबाद में मंदिर में एक मुस्लिम युवक की पिटाई का मामला आया था. उस मंदिर के गेट पर भी इसी तरह के संदेश वाला बैनर लगा था.
सेक्स के लिए ऐप पर सहमति के सुझाव का विरोध क्यों?
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ऑस्ट्रेलियाई लोगों ने न्यू साउथ वेल्स के पुलिस कमिश्नर के उस सुझाव को हास्यास्पद बताया है जिसमें उन्होंने कहा था कि एक एप्लिकेशन का इस्तेमाल यौन सहमति दर्ज करने के लिए किया जा सकता है.
गुरुवार को मिक फ़ुलर ने एक ऐसे ऐप का सुझाव लोगों के सामने रखा जहां लोग सेक्स को लेकर अपनी आपसी सहमति दर्ज कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल करके 'सकरात्मक सहमति' को स्थापित किया जा सकता है.
लेकिन कई लोगों ने इस प्रस्ताव की आलोचना की है और कहा है कि ये एक बेहद अदूरदर्शी कदम होगा और इससे शोषण को और बढ़ावा मिलने का ख़तरा भी पैदा हो सकता है. साथ ही लोग ये भी चिंता जता रहे हैं कि इस तरह के डेटा से सर्विलांस का खतरा भी हो सकता है.
बर्फ पर बेहद आसान तरीके से बनाई गई अद्भुत नक्काशी
वीडियो कैप्शन, बर्फ पर बेहद आसान तरीके से बनाई गई अद्भुत कलाकृति
बर्फ पर ऐसी नक्काशी की आप देखकर हैरान रह जाएंगे. फ़िनलैंड में हेल्सिंकी के पास यह ख़ूबसूरत नज़ारा देखने को मिला.
देखने पर लगता है कि इस नक्काशी को करने में काफी मेहनत लगी होगी, लेकिन असल में यह बहुत ही आसान तरीके से बनाई गई. देखिए वीडियो.
लॉकडाउन लगाने से पहले पीएम मोदी ने किसकी सलाह ली थी?
वीडियो कैप्शन, लॉकडाउन लगाने से पहले पीएम मोदी ने किसकी सलाह ली थी?
कोरोना वायरस से सबसे अधिक प्रभावित देशों में भारत भी शुमार है. देश में पिछले साल 24 मार्च को संपूर्ण लॉकडाउन का फ़ैसला सुनाया गया. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए लॉकडाउन का ऐलान किया.
पीएम मोदी ने आम जनता को इसके लिए चार घंटे का वक़्त दिया. इस लॉकडाउन के बाद भारत की सड़कों पर मज़दूर बड़ी संख्या में पलायन करते हुए देखे गए.
बीबीसी ने सूचना के अधिकार के ज़रिए सरकारी दस्तावेज़ों से जानना चाहा कि आखिर दुनिया के सबसे बड़े लॉकडाउन से पहले भारत सरकार ने क्या तैयारियां की, किसके साथ बैठक, चर्चा और प्लानिंग की.
चीन और फिलीपींस आमने-सामने, दक्षिण चीन सागर में फिर हलचल
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फिलीपींस ने दक्षिण चीन सागर में अपने जल क्षेत्र पर अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए चीन से 200 से अधिक जहाज़ों को हटाने के लिए है.
फिलीपींस के रक्षा मंत्री डेल्फ़िल लोरेन्ज़ाना ने कहा है कि चीन के जहाज़ फिलीपींस के समुद्री अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं.
फिलीपींस का कहना है कि ऐसा नहीं लगता कि मछली पकड़ने वाले जहाज़ मछली पकड़ रहे हैं और इन जहाज़ों पर चीन के समुद्री लड़ाके हैं.
पाँच साल पहले एक अंतरराष्ट्रीय अदालत ने 90% पानी पर प्रभुत्व के चीनी दावों को ख़ारिज कर दिया था.
फिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया, ताइवान और वियतनाम दशकों से पूरे दक्षिण चीन सागर पर चीन से दावों पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में तनाव काफ़ी बढ़ गया है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021: अमित शाह का 'बनिया' होना क्या बीजेपी के घोषणापत्र पर अमल की गारंटी है?
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'खेला होबे' यानी खेल होगा के नारे के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दोनों मज़बूत दावेदारों तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिए हैं.
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इन घोषणापत्रों में ऐसे-ऐसे और इतने वादे किए गए हैं कि अगर उनमें से आधे पर भी अमल हो सके तो यह राज्य सचमुच 'सोनार बांग्ला' बन जाएगा.
दोनों दलों के घोषणापत्रों में काफ़ी समानताएं हैं. इसलिए टीएमसी ने बीजेपी पर पार्टी के घोषणापत्र की नक़ल करने का आरोप लगाया है.
दूसरी ओर, बीजेपी इसे घोषणापत्र की बजाय संकल्प बता रही है. दिलचस्प बात यह है कि टीएमसी ने जहाँ अपने घोषणापत्र में दस प्रमुख वादे किए थे, वहीं बीजेपी ने एक क़दम आगे बढ़ते हुए एक दर्जन प्रमुख वादे किए हैं.
आज का कार्टून: इनका काला दिवस
जनता कर्फ्यू के एक साल पर आज का कार्टून.
कोरोना लॉकडाउन का फ़ैसला मोदी सरकार ने आख़िर किसकी सलाह पर लिया? -बीबीसी पड़ताल
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सुनीता कुमारी, झारखंड के सिमडेगा में खाने-पीने की एक दुकान चलाती हैं.
लेकिन, पिछले साल मार्च महीने में वो गोवा में एक केयर होम में काम करती थीं. यानी वो एक फ्रंटलाइन वर्कर थीं.
पिछले साल भारत में अचानक देश भर में लॉकडाउन लगाए जाने के बाद जो कुछ हुआ, उसने सुनीता की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल दी.
सुनीता ने हमसे कहा कि, "वो सब इतना ख़ौफ़नाक था. मुझे लगता है कि वैसे हालात का सामना करने से बेहतर होगा कि मैं मर जाऊं. आज भी जब मैं उन दिनों को याद करती हूं तो मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगता है."
वायरस के प्रकोप के बावजूद उन्हें निजी सुरक्षा उपकरणों यानी पीपीई किट के बग़ैर काम करने को मजबूर किया गया. सुनीता ने बताया कि उनके मालिक ने चेतावनी दी थी कि उन सबको अव्वल तो तनख़्वाह ही शायद मिले, और मिली भी तो आधी ही दी जाएगी.
हालात इतने ख़राब थे कि सुनीता ने नौकरी छोड़ने का फ़ैसला किया.
केरल विधानसभा चुनाव: मोदी और अमित शाह बीजेपी को कितनी सीटें दिलवा पाएँगे
केरल भर में नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों के लगे चुनावी पोस्टर, बड़े और ऊँचे कटआउट्स और दीवारों पर पेंट किए नेताओं के चेहरे अगर अच्छे प्रदर्शन के संकेत हैं, तो बीजेपी को इस विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करके दिखाना चाहिए.
केरल कई जगह भगवा रंग में रंगा दिखता है. सत्तारूढ़ लेफ़्ट डेमोक्रेटिक फ़्रंट और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ़्रंट के झंडे और पोस्टर बीजेपी के मुक़ाबले कम दिखाई देते हैं. लेकिन इन सबके बीच फ़िलहाल वाम मोर्चा मज़बूत दिखाई देता है. भले ही उनकी सीटें कुछ कम हो जाएँ. साथ ही मुक़ाबला एलडीएफ़ और यूडीएफ़ के बीच ही नज़र आता है.
बीजेपी केरल विधानसभा चुनाव में अपना सिक्का जमाने की हर मुमकिन कोशिश कर रही है. दिल्ली से पार्टी के कई बड़े नेता रैलियों में शामिल हो रहे हैं और स्थानीय नेताओं का मनोबल बढ़ा रहे हैं. लेकिन राज्य में पार्टी के नेता जानते हैं कि केरल में चुनाव जीतना और सरकार बनाना फ़िलहाल संभव नहीं है.
कोविशील्ड की दूसरी डोज़ अब चार नहीं, आठ हफ़्ते बाद लगेगी
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केंद्र ने कोविशील्ड की दूसरी डोज़ की समय सीमा बढ़ाकर चार से आठ हफ़्ते कर दी है. यह सिफ़ारिश टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह और कोविड-19 के लिए टीका प्रबंधन के राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह ने की है.
अध्ययन में पता चला है कि दूसरी डोज़ जब छह से आठ हफ़्तों के बीच दी गई तब शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ गई. हालाँकि आठ सप्ताह बाद दूसरी ख़ुराक देने पर ऐसा नहीं हुआ.
इससे पहले कोविशील्ड की दोनों खुराकों के बीच चार से छह हफ़्ते का अंतर रखने पर सहमति बनी थी. हालाँकि यह भी बताया गया है कि दो खुराकों के बीच समय बढ़ाने की बात केवल कोविशील्ड वैक्सीन के लिए है. कोवैक्सीन के मामले में समय-सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
सोमवार को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बताया है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एनटीएजीआई और एनईजीवीएसी की अहम सिफ़ारिश को मान लिया है.
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 19 मार्च 2021, सुनिए मोहनलाल शर्मा के साथ.
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ब्रेकिंग न्यूज़, अमित शाह ने बदरुद्दीन अजमल को आधुनिक काला पहाड़ कहा
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असम में एक चुवावी रैली को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के नेता बदरुद्दीन अजमल से गठबंधन को लेकर निशाना साधा है.
शाह ने कहा कि कांग्रेस क्या बदरुद्दीन अजमल को साथ लेकर असम में घुसपैठ रोकेगी? अमित शाह ने कहा, ''मैं आज राहुल गांधी से सार्वजनिक रूप से पूछता हूँ कि एक ओर आप असम की अस्मिता की बात करते हैं और दूसरी ओर आधुनिक 'काला पहाड़' बदरुद्दीन अजमल को लेकर चलते हो तो, कैसे असम की अस्मिता की रक्षा करोगे? बदरुद्दीन अजमल सत्ता में आया घुसपैठ रुक सकती है क्या? क्या फिर से हम घुसपैठ शुरू कराना चाहते हैं? कांग्रेस पार्टी को शर्म आनी चाहिए.''
अमित शाह ने कहा, ''पाँच साल पहले तक असम में कांग्रेस का शासन था तब यहां आंदोलन और गोलियां चल रही थीं, लोग मर रहे थे. आपने 5 साल भाजपा को दिए, आज असम विकास के रास्ते पर चल पड़ा है. कांग्रेस आती है तो अशांति आती है, भाजपा आती है तो विकास आता है.''
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कोरोना लॉकडाउन का एक साल: पीएम मोदी ने घोषणा से पहले किस-किस से सलाह ली थी?
दुनिया के सबसे बड़े लॉकडाउन से पहले भारत सरकार ने क्या तैयारियां की, किसके साथ बैठक, चर्चा और प्लानिंग की.
देखिए बीबीसी संवाददाता जुगल पुरोहित की यह ख़ास रिपोर्ट.
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असम में बीजेपी माफ़िया की तरह काम कर रही है: प्रियंका गाँधी
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कांग्रेस नेता प्रियंका गाँधी ने असम के खुमताई में एक रैली को संबोधित करते प्रदेश की सत्ताधारी बीजेपी पर जमकर हमला बोला. प्रियंका गाँधी ने कहा कि प्रदेश की बीजेपी सरकार माफ़िया की तरह काम कर रही है.
प्रियंका ने कहा, ''बीजेपी विकास के वादे पर सत्ता में आई थी. बीजेपी वालों ने कहा था महंगाई कम होगी, रोज़गार मिलेंगे लेकिन कुछ नहीं हुआ. असम में 40 लाख लोग बेरोज़गार हैं. तीन लाख सरकारी नौकरियों के पद ख़ाली है. एक बार फिर से नए-नए वादे किए जा रहे हैं. जब बाढ़ आई तो दिल्ली से क्या प्रधानमंत्री असम मिलने आए?''
प्रियंका ने कहा, ''हमने देखा कि पाँच साल में असम में विकास होने के बजाय बर्बाद किया जा रहा है. हम प्रदेश के लिए पाँच गारंटी योजना लेकर आए हैं. पाँच लाख सरकारी नौकरियां, गृहणी सम्मान निधि 2000, टी ट्राइब्स को प्रतिदिन 365 रुपए का वेतन, सीएए लागू नहीं होगा, 200 यूनिट बिजली मुफ़्त. प्रियंका ने कहा कि ये वादे नहीं हैं बल्कि हम करेंगे.''
कांग्रेस महासचिव ने कहा, ''बीजेपी का यहाँ दो धड़ा काम करता है और दोनों ने लोगों को छला है.'' प्रियंका गाँधी ने बीजेपी नेतृत्व की तुलना महाभारत के किरदार धृतराष्ट्र और शकुनी से की. धृतराष्ट्र महाभारत में अंधे शासक के तौर पर जाने जाते हैं और शकुनी राजनीतिक साज़िशकर्ता.
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मिथुन चक्रवर्ती बने बंगाल के वोटर, चुनाव लड़ने की अटकलें तेज़
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अभिनेता से नेता बने मिथुन चक्रवर्ती ने पश्चिम बंगाल के मतदाता के तौर पर अपना
नाम दर्ज करवा लिया है.
वो दो हफ़्ते पहले ही बीजेपी में शामिल हुए हैं और अब अटकलें तेज़ हो गई हैं
कि क्या वो पश्चिम बंगाल का चुनाव लड़ सकते हैं, क्योंकि उसके लिए पहले उनका नाम
मतदाता सूची में होना ज़रूरी है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, उन्होंने काशीपुर-बेलगछिया से अपना मतदाता पहचान
पत्र बनवाया है. उन्होंने उत्तर कोलकाता में रहने वाली अपनी बहन शर्मिष्ठा सरकार
के पते पर पहचान पत्र बनवाया है.
मिथुन की बहन शर्मिष्ठा सरकार ने मीडिया को बताया, “उन्होंने मेरे घर के पते
से अपना पहचान पत्र बनवाया है. वो निजी कारणों से जब भी कोलकाता आते
हैं तो मेरे ही घर पर रुकते हैं.”
हालांकि, मिथुन की बहन ने ये नहीं बताया कि वो इस चुनाव में उम्मीदवार होंगे या नहीं.
शर्मिष्ठा
ने कहा, “दादा बड़े सुपरस्टार हैं. वो किसी भी पद पर फिट होंगे. उन्हें
एक बार फिर से सक्रिय देखकर अच्छा लग रहा है.”
बीजेपी ने अभी
294 में से 25 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार के नाम जारी करने हैं. इनमें कोलकाता-काशीपुर-बेलगछिया
और चौरंगी सीट भी शामिल है.
हाल में बीजेपी को तब शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था
जब काशीपुर-बेलगछिया और चौरंगी सीट से उतारे गए उसके उम्मीदवारों ने ये कहते हुए
चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया कि वो तो बीजेपी में शामिल हुए ही नहीं और बीजेपी ने उन्हें उम्मीदवार बनाने से
पहले कोई बातचीत नहीं की.
एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने नाम ना छापने की शर्त पर कहा, “चक्रवर्ती को इनमें से एक सीट से
मैदान में उतारे जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इस मसले पर आलाकमान
चर्चा कर रहा है.”
बीजेपी उम्मीदवार के बाहरी वाले बयान पर कमल हासन बोले, ‘एक भारतीय एक भारतीय होता है’
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तमिलनाडु के कोयम्बटूर दक्षिण से चुनावी मैदान में उतरे कमल हासन ने अपनी
बीजेपी प्रतिद्वंदी वनथी श्रीनिवासन की ‘कोयम्बटूर के मेहमान’ वाली टिप्पणी पर जवाब देते हुए कहा कि कोई बाहरी
नहीं होता, एक भारतीय एक भारतीय होता है.
उन्होंने कहा, “आप राजनीति में ऐसे तर्क नहीं दे सकते. कोई बाहरी
नहीं होता, एक भारतीय एक भारतीय होता है. गांधी जी एक गुजराती नहीं हैं, वो मेरे
पिता हैं.”
अभिनेता से नेता बने और मक्कल निधिमय्यम के प्रमुख कमल हासन ने रविवार
को तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी एआईएडीएमके और मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके को
निशाने पर लिया और कहा कि ये दोनों ही पार्टियां समर्थन करने लायक नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि लोगों को विधानसभा चुनाव में फ़ैसला लेना चाहिए और त्रिशंकु विधानसभा
नहीं बनानी चाहिए.
उन्होंने कहा, “कोयम्बटूर मेरे दिल के बहुत क़रीब है. शहर में मेरे
कई दोस्त हैं. कई यादें हैं. मेरी ज़िंदगी से जुड़ी कई अहम चीज़ें वहां हुई हैं.”
उन्होंने कहा कि वो कोयम्बटूर को सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि देश का सबसे
अच्छा शहर बनाने के लिए काम करेंगे.
बीजेपी के घोषणापत्र को ममता ने ग़ैर-बंगालियों का गुजराती मेनिफेस्टो बताया
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बीजेपी ने रविवार को पश्चिम बंगाल के लिए अपना घोषणापत्र जारी कर दिया जिसमें
सरकारी नौकरी में महिलाओं को 33% आरक्षण, केजी से पीजी तक मुफ़्त
शिक्षा, मछुआरों को हर साल 6 हज़ार रुपये, किसानों के लिए तीन लाख रुपये का दुर्घटना
कवर और नए नागरिकता क़ानून को सख़्ती से लागू करने जैसे वादे किए गए हैं.
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने घोषणापत्र जारी करते हुए इसे 'सोनार बांग्ला संकल्प पत्र' बताया. उन्होंने कहा कि बीजेपी
सुनिश्चित करेगी कि राज्य में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना और पीएम-किसान
कार्यक्रम लागू हो, साथ ही हर परिवार को कम से कम एक नौकरी दी जाएगी.
इसके अलावा बंगाल के किसानों के लिए भी बीजेपी ने कई वादे किए हैं. घोषणापत्र
के मुताबिक़, बीजेपी जीतती है तो किसान निधि के वो पूरे पैसे देगी, जो ममता सरकार
ने नहीं दिए. अमित शाह ने इस दौरान साथ ही कहा कि राज्य में सत्ता में आने पर
पीएम-किसान निधि पर सहयोग राशि बढ़ाकर 10 हज़ार की जाएगी, उन्होंने बताया कि इसमें
से 6 हज़ार रुपये केंद्र देगी और 4 हज़ार राज्य वहन करेगा.
बीजेपी ने 18 साल से
ज़्यादा उम्र की विधवाओं को हर महीने एक हज़ार पेंशन देने समेत और भी कई वादे किए
हैं.
खुद को "बनिया" बताते हुए अमित शाह ने कहा, "मुझ पर भरोसा रखना."
लेकिन टीएमसी ने बीजेपी के इस घोषणापत्र को जुमला बताया है और कहा है कि बंगाल
गुजराती मेनिफेस्टो को ख़ारिज करता है. टीएमसी ने कहा कि बीजेपी का घोषणापत्र जुमलों और झूठ से भरा है.
टीएमसी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक पोस्टर ट्वीट किया है, जिसके एक तरफ ममता
बनर्जी और एक तरफ नरेंद्र मोदी की तस्वीर है.
ममता बनर्जी की तस्वीर के साथ लिखा है कि ‘दीदी का घोषणापत्र बंगाल के लोगों का है, बंगाल के लोगों द्वारा और बंगाल के लोगों के लिए है.’ वहीं नरेंद्र मोदी की तस्वीर के नीचे लिखा है कि ‘बीजेपी का घोषणापत्र बाहरी लोगों और ग़ैर-बंगालियों का है, जिसे गुजराती लोग बंगाल के वोटरों को मूर्ख बनाने के लिए लाए हैं.’
इस पोस्टर के साथ ही लिखा है, "पहली बार एक ग़ैर-बंगाली ने बंगाल के लिए घोषणापत्र जारी किया है क्योंकि बंगाल बीजेपी के पास एक भी यहां की ‘मिट्टी का बेटा’ नहीं है जो ये कर सके. बंगाल इस अपमान को कभी नहीं भूलेगा."
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वहीं टीएमसी सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने ट्वीट किया, “हास्यास्पद है कि कैसे टूरिस्ट गैंग ने बंगाल के चुनावों के लिए अपने जुमलों से भरे घोषणापत्र को गुजराती के हाथों जारी किया! एक पार्टी जो बंगाल की सभी 294 सीटों के लिए पर्याप्त उम्मीदवार नहीं ढूंढ सकी, उसके पास इस तरह के प्रमुख कार्यक्रमों के लिए स्थानीय नेतृत्व नहीं है!”
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बीजेपी का घोषणापत्र जारी होने के तुरंत बाद ही टीएमसी नेता और समर्थक #BengalRejectsGujaratiManifesto हैशटैग के साथ ट्वीट करने लगे.
टीएमसी सांसद काकोली घोष बोलीं, “आपको पता है कि बंगाल बीजेपी ‘सोनार बंगाल’ कैसे बनाएगी? किसान क्रेडिट कार्ड का नाम रुपये कार्ड करके (जिसके अंदर कोई असली क्रेडिट नहीं होगा). बंगाल इस पाखंड को स्वीकार नहीं कर सकता और ना करेगा.”
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