पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने
कहा है कि ‘उसे विश्वास है कि संयुक्त अरब अमीरात शुक्रवार को
मेच्योर हुए 1 अरब डॉलर के ऋण को लौटाने के लिए पाकिस्तान को थोड़ा और समय देगा.’
पाकिस्तान की ओर से ये बयान ऐसे समय में आया है, जब कुछ
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ‘दुबई ने अपनी वित्तीय सहायता वापस ले ली है.’
एक अरब डॉलर का यह ऋण, संयुक्त अरब
अमीरात द्वारा साल 2018 के अंत में घोषित 6.2 अरब डॉलर के शुरुआती आर्थिक पैकेज का
हिस्सा है जो यूएई ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की सरकार को मदद के
तौर पर दिया था.
पाकिस्तान के वित्त सचिव कामरान अली
अफ़ज़ल ने कहा, “पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात बहुत ही अच्छे दोस्त हैं और हमें विश्वास है
कि यूएई हमें ऋण चुकाने के लिए और समय देगा.”
कामरान से पूछा गया था कि ‘क्या संयुक्त अरब अमीरात ऋण चुकाने के लिए पाकिस्तान
को एक साल का समय और देगा?’ जिसके जवाब में उन्होंने दोनों
देशों के संबंधों का हवाला दिया.
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून अख़बार ने
पाकिस्तानी वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का हवाला देते हुए लिखा है कि ‘पैसा वापस नहीं जा रहा है और यूएई ने पाकिस्तान सरकार
को सूचित किया है कि वो एक अरब डॉलर के लोन को रोल-ओवर करेगा.’
यूएई ने 6.2 अरब डॉलर का लोन देने
की बात कही थी. पर यूएई ने सिर्फ़ दो अरब डॉलर का ही वितरण किया.
दो में से एक अरब डॉलर जो इसी साल
जनवरी में पाकिस्तान को लौटाने थे, उनके लिए भी यूएई ने रोलओवर की घोषणा कर दी थी
जिसने पाकिस्तान को राहत की साँस दी.
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात
द्वारा घोषित वित्तीय सहायता पैकेजों के दम पर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष
(आईएमएफ़) के साथ एक डील कर पाया, लेकिन इस डील का कार्यान्वयन भी पिछले 13महीनों से रुका हुआ है, जो अब इस महीने के चौथे सप्ताह में फिर से शुरू होने की उम्मीद है.
ट्रिब्यून ने अपनी रिपोर्ट में
लिखा है कि पाकिस्तान ने चीन से मिले पैसे से सऊदी अरब का ऋण चुका दिया था. चीन से
पाकिस्तान को एक अरब डॉलर सॉफ़्ट लोन के रूप में मिले थे. इसके अलावा, चीन के दो
अन्य माध्यमों से भी पाकिस्तान को क़रीब दो अरब डॉलर का लोन मिला था.
चीनी सहायता ने पाकिस्तान के स्टेट
बैंक को लगभग 13 अरब डॉलर के सकल विदेशी मुद्रा भंडार को बनाये रखने में मदद की.
पाकिस्तान सरकार फ़िलहाल रुके हुए
आईएमएफ़ कार्यक्रम को पुनर्जीवित करने के लिए विभिन्न शर्तों को लागू कर रही है. इन
सभी शर्तों को पूरा करने के अधीन, आईएमएफ़ कार्यकारी बोर्ड 24मार्च को अगली किस्त मंज़ूर कर सकता है.
आईएमएफ़ की शर्तों के हिस्से के
रूप में पाकिस्तान सरकार स्टेट बैंक ऑफ़ पाकिस्तान एक्ट, 1956 में संशोधन भी कर
रही है.