भारत के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर चीनी हैकरों के कथित हमले को लेकर महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा है कि साइबर हमले केवल मुंबई तक सीमित नहीं हैं बल्कि इसका दायरा देश भर में फैला हो सकता है.
उन्होंने कहा, "हमें इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए. मैंने इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री आरके सिंह से बात की है. उन्होंने इस बारे में जानकारी माँगी है और कहा है कि हमें अलर्ट रहना चाहिए."
इससे पहले अनिल देशमुख ने अक्तूबर, 2020 में मुंबई में हुए ब्लैकआउट पर कहा था कि महाराष्ट्र के साइबर सेल ने इस मामले में अपनी शुरुआती जाँच रिपोर्ट सौंपी है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस घटना के पीछे साइबर हमले की वजह हो सकती है.
हालांकि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह का कहना है कि सरकार के पास ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे ये साबित होता हो कि अक्तूबर, 2020 को मुंबई में पावर ब्लैकआउट की घटना चीन या पाकिस्तान के किसी साइबर हमले के कारण हुई हो.
समाचार एजेंसी एएनआई से आरके सिंह ने कहा, "साइबर हमले चीन या पाकिस्तान ने किए, ये कहने के लिए हमारे पास कोई सबूत नहीं है. कुछ लोग ये कह रहे हैं कि इन हमलों के लिए ज़िम्मेदार समूह चीनी है लेकिन हमारे पास इसका कोई सबूत नहीं है. चीन भी निश्चित रूप से इसे नहीं मानेगा."
उन्होंने ये भी कहा कि दो टीमों ने इसकी जाँच की थी और ये पाया ता कि मानवीय चूक से ये पावल ब्लैकआउट हुआ था.
आरके सिंह ने कहा, "मुंबई के पावर ब्लैकआउट की दो टीमों ने जाँच की थी और अपनी रिपोर्ट में कहा था कि ये ब्लैकआउट किसी साइबर हमले की वजह से नहीं बल्कि मानवीय चूक के कारण हुआ था.
एक टीम ने अपनी रिपोर्ट में साइबर हमले की बात कही थी लेकिन उसका संबंध मुंबई के ग्रिड के नाकाम होने से नहीं था." हालांकि आरके सिंह ने ये बात मानी कि देश के दक्षिणी और उत्तरी क्षेत्र के लोड डिस्पैच सेंटर को साइबर हमलों का निशाना बनाया गया था.
12 अक्तूबर को मुंबई में क्या हुआ था?
12 अक्तूबर 2020 को मुंबई के एक बड़े हिस्से में ग्रिड फ़ेल होने के कारण बिजली चली गई थी. इससे मुंबई और आस-पास के महानगर क्षेत्र में जनजीवन पर गंभीर असर पड़ा था.
इसकी वजह से लोकल ट्रेनें अपने सफ़र के बीच में ही रुक गई थीं और कोरोना महामारी के बीच हो रही छात्रों की ऑनलाइन कक्षाएँ भी बाधित हुई थीं.
बिजली गुल होने से उस दौरान मुंबई सेंट्रल, थाणे, जोगेश्वरी, वडाला, चेंबूर, बोरीवली, दादर, कांदीवली और मीरा रोड जैसे इलाक़े बुरी तरह प्रभावित हुए थे.
2020 की शुरुआत से ही रिकॉर्डेड फ्यूचर्स इनसिक्ट ग्रुप को चीन के इस प्रोयोजित समूह की ओर से भारतीय प्रतिष्ठानों पर बड़े पैमाने पर लक्षित घुसपैठ की गतिविधि देखने को मिली है.
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में छपी इस ख़बर के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या मुंबई में 12 अक्तूबर को हुआ पावर कट चीन की तरफ से भारत को एक सख़्त चेतावनी तो नहीं थी.
दूसरी तरफ़ चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिंग ने सोमवार को इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए इसे बिना सबूत 'ग़ैर-ज़िम्मेदाराना और ग़लत इरादों' से लगाया गया आरोप बताया है.