कोरोना टीकाकरण अभियान के बाद नागरिकता क़ानून लागू होगा: अमित शाह
गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष सीएए पर अल्पसंख्यकों को गुमराह कर रहा है और यह क़ानून भारत के अल्पसंख्यकों की नागरिकता पर कोई असर नहीं डालेगा.
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ब्रेकिंग न्यूज़, कोविड-19 टीकाकरण अभियान के बाद नागरिकता क़ानून लागू होगा: अमित शाह
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने
गुरुवार को पश्चिम बंगाल के ठाकुरनगर में एक रैली में कहा कि कोविड-19 टीकाकरण के
बाद सरकार नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के तहत शरणार्थियों को नागरिकता देना
शुरू करेगी.
उन्होंने इस दौरान कहा कि विपक्ष
सीएए पर अल्पसंख्यकों को गुमराह कर रहा है. उन्होंने आश्वासन दिया कि यह क़ानून
भारत के अल्पसंख्यकों की नागरिकता पर कई असर नहीं डालेगा.
उन्होंने कहा, “ममता दीदी ने कहा कि हम झूठे वादे करते हैं. उन्होंने सीएए का विरोध शुरू कर
दिया और कहा कि वो इस क़ानून को अनुमति नहीं देंगी. बीजेपी जो वादे करती है वो
पूरा करती है. हम इस क़ानून को लेकर आए और शरणार्थियों को नागरिकता मिलेगी.”
उन्होंने कहा कि इस क़ानून से मतुआ समुदाय को लाभ होगा.
मतुआ मूलतः वे लोग हैं जो विभाजन के बाद पूर्वी पाकिस्तान और
फिर बांग्लादेश के गठन के समय भारत आ गए थे.
चीन पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भ्रम फैला रहे हैं- कांग्रेस
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चीन को लेकर संसद में दिए गए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के भाषण के बाद कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि रक्षामंत्री चीन को लेकर भ्रम फैला रहे हैं.
उन्होंने कहा, "55 इंच की छाती वाले प्रधानमंत्री चीन का नाम तक नहीं लेते."
उन्होंने सरकार से सवाल किए कि कब तक अप्रैल 2020 वाली यथास्थिति की बहाली होगी.
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, "मोदी सरकार ने कहा था कि लद्दाख के सभी क्षेत्रों से सेना हटेगी, लेकिन अब वो सिर्फ पैंगोंग झील की बात क्यों कर रहे हैं?"
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना फिंगर 4 से लेकर फिंगर 8 तक पेट्रोलिंग करती रही है. भारत फिंगर 8 के बाद चीन की सीमा मानता है.
"लेकिन आज के बयान के मुताबिक सेना फिंगर 3 तक सीमित हो जाएगी. क्या सरकार फिंगर 3 से फिंगर 8 को एक
नया बफ़र ज़ोन नहीं बना रही?"
सुरजेवाला ने कहा कि रक्षा मंत्री के बयान के
बाद लगता है कि सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कैलाश रेंजेस से सेना को वापस लौटना पड़ेगा, जहां भारत चीन के मुकाबले ज़्यादा मज़बूत स्थिति में है.
"चीन ने एलएसी से 18 किलोमीटर अंदर वाई जंक्शन तक घुसपैठ कर रखी है और भारतीय सेना को अपनी ज़मीन पर पेट्रोलिंग
करने से रोक रखा है."
सुरजेवाला ने वीके सिंह के बयान पर निशाना साधते हुए कहा, "वीके सिंह ने बयान देकर चीन
को मौका दिया कि वो भारत को अतिक्रमणकारी बताए, लेकिन प्रधानमंत्री चुप्पी साधे हैं. उन्हें बर्खास्त क्यों नहीं करते?"
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', सुनिए फ़ैसल मोहम्मद अली के साथ.
ब्रेकिंग न्यूज़, राहुल गांधी ने संसद में कहा, 'आज इस देश को सिर्फ़ चार लोग चलाते हैं - हम दो, हमारे दो'
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने
गुरुवार को संसद में मोदी सरकार द्वारा लाये गए कृषि क़ानूनों पर जमकर हमला बोला.
बुधवार को पीएम मोदी ने कहा था कि ‘अच्छा होता कि कांग्रेस पार्टी नये कृषि क़ानूनों के रंग से ज़्यादा उनके
इंटेंट और कंटेंट पर चर्चा करती.’
पीएम मोदी की इस टिप्पणी का जवाब
देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि “कल सदन में बोलते हुए पीएम मोदी ने
कहा कि हमें इन क़ानूनों के कंटेंट (विषय वस्तु) और इंटेंट (उद्देश्यों) पर बात
करनी चाहिए थी. इसलिए उन्हें ख़ुश करने के लिए आज मैं कृषि क़ानूनों के इंटेंट और
कंटेंट पर ही बात करूंगा.”
“इनके द्वारा लाये गये पहले क़ानून का कंटेंट है कि
कोई भी व्यक्ति देश में कहीं भी, कितना भी अनाज, फल और सब्ज़ी ख़रीद सकता है. अगर
अनलिमिटेड (असीमित) ख़रीद की इजाज़त होगी तो मण्डी में कौन जायेगा? तो पहले क़ानून का कंटेंट और उसका लक्ष्य मण्डियों
को ख़त्म करना है.”
“दूसरे क़ानून का कंटेंट भारत में जमाखोरी को लाइसेंस
देने का है. दूसरे क़ानून का कंटेंट है कि बड़े से बड़े उद्योगपति जितना भी अनाज,
जितना भी फल, जितनी भी सब्ज़ी जमा करना चाहें, वो जमा कर सकते हैं.”
“तीसरे क़ानून का कंटेंट है कि जब किसान अपने अनाज के
लिए, अपनी सब्ज़ी के लिए, अपने फलों के लिए सही दाम मांगे, तो उसे अदालत में नहीं
जाने दिया जायेगा.”
जिस समय राहुल गांधी सदन में तीन कृषि क़ानूनों के बारे में बोल रहे थे, तब बीजेपी के सांसद सदन में हल्ला कर रहे थे. उनकी दलील थी कि ‘गांधी को आम बजट पर अपनी राय रखनी है, वे कृषि क़ानूनों पर अब नहीं बोल सकते.’
लेकिन राहुल गांधी ने अपना भाषण जारी रखा. उन्होंने कहा, “फ़ैमिली प्लानिंग का एक नारा था – ‘हम दो, हमारे दो.’ आज ये नारा दूसरे रूप में आया है. इसमें इन क़ानूनों का इंटेंट (उद्देश्य) छिपा है. आज इस देश को चार लोग चलाते हैं, यानी ‘हम दो, हमारे दो’. इनके नाम सब जानते हैं. ये इन्हीं चार की सरकार है. सरकार चाहती है कि उनके दो मित्रों में जो बड़ा मित्र है, उसे पूरे हिन्दुस्तान के अनाज, फल और सब्ज़ी को बेचने का अधिकार दे दो. ये है इनके पहले क़ानून का इंटेंट. इससे नुक़सान छोटे व्यापारियों का होगा और फेरी वालों का होगा.”
इसके बाद राहुल गांधी ने कहा, “इनके दूसरे क़ानून का इंटेंट, अपने दूसरे मित्र को अनाज, फल और सब्ज़ी की जमाखोरी का सारा अधिकार देने का है. ये कहते हैं कि हमने तो किसानों को विकल्प दिया है. मैं कहता हूँ, हाँ इन्होंने विकल्प दिया है. तीन विकल्प दिये हैं- भूख, बेरोज़गारी और आत्महत्या. दरअसल, मामला ये है कि भारत में सबसे बड़ा व्यापार अब खेती है, 40 प्रतिशत आबादी इस पर जीती है, ये 40 लाख करोड़ रुपये का धंधा है. उस पर इनकी नज़र है.”
अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने कहा, “जब ये क़ानून लागू होंगे, तो जो इस देश के किसान हैं, छोटे व्यापारी हैं, छोटे मज़दूर हैं, उनका धंधा बंद हो जायेगा. किसानों के खेत जायेंगे, छोटे दुकानदारों की दुकानें बंद हो जायेंगी. तब सिर्फ़ दो लोग – हम दो, हमारे दो – इस देश को चलायेंगे.”
दंगे कराने के बाद आप बंगाल चाहते हो?: बीजेपी पर ममता बनर्जी
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कोलकाता में एक रैली के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री
ममता बनर्जी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘आप मुझे गाली दे
सकते हो लेकिन मुझे नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते हो.’
उन्होंने कहा, “किसानों को लूटने के बाद आप मुझे मेरे धर्म का पालन नहीं करने दे रहे हो, दंगे
कराने के बाद आप बंगाल चाहते हो? मैं इन लोगों के आगे घुटने नहीं टेकूंगी.”
ममता बनर्जी ने कहा, “ईमानदारी से खेलिए. आप लेफ़्ट और कांग्रेस को अपनी टीम में लेकर खेलिए हम
अकेले खेलेंगे. मैं अकेली गोलकीपर रहूंगी और देखते हैं कि आप कितने गोल कर पाते
हैं.”
ब्रेकिंग न्यूज़, उत्तराखण्ड: ऋषि गंगा नदी में पानी बढ़ने की वजह से चमोली ज़िले में बचाव कार्य रोकना पड़ा
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ऋषि गंगा नदी का जल स्तर एक बार
फिर बढ़ने के कारण चमोली ज़िले में राहत और बचाव का काम रोकना पड़ा है.
एसडीआरएफ़ ने बताया है कि तपोवन
टनल के पास पानी पहुँचने की वजह से काम रोका गया है. जेसीबी मशीनों, अन्य उपकरणों
और बचाव दलों को टनल के पास से हटाया गया है और रैणी गाँव के पास अलर्ट जारी किया
गया है.
इस बीच, चमोली ज़िले के पुलिस
अधीक्षक यशवंत चौहान ने नदी के आसपास बसे लोगों से अलर्ट रहने की अपील की है.
उत्तराखण्ड के डीजीपी अशोक कुमार ने
कहा है कि ‘ऋषि गंगा नदी में पानी बढ़ने की वजह से बचाव कार्य रोकना पड़ा है. इसे ध्यान में रखते हुए हमने नदी के आसपास के
इलाक़े खाली कराने का आदेश दिया है.’
बचाव कार्य में जुटे एनटीपीसी, आईटीबीपी,
एसडीआरएफ़ और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने गुरुवार को प्रेस से बात की.
उन्होंने बताया कि तपोवन टनल से जितना मलबा निकाला जा रहा है, अंदर से और मलबा
बाहर आ रहा है. अनुमान है कि इस टनल में कुछ लोग अब भी फंसे हुए हैं.
7 फ़रवरी को उत्तराखण्ड के चमोली
ज़िले में ग्लेशियर फटने की वजह से ऋषि गंगा नदी में उफ़ान आया था जिसने तपोवन हाइड्रो-पावर
प्रोजेक्ट को तबाह कर दिया था.
स्थानीय प्रशासन के अनुसार,
अलग-अलग इलाक़ों से अब तक 34 शव निकाले जा चुके हैं और क़रीब 170 लोग अब भी लापता
हैं.
गुरुवार सुबह ही, उत्तराखण्ड की
गवर्नर बेबी रानी मौर्य ने चमोली ज़िले में तपोवन टनल का दौरा किया था. वहाँ उन्हें
लापता लोगों के परिजनों का सामना करना पड़ा. ये परिवार बीते चार दिन से अपने लापता
सदस्यों का इंतज़ार कर रहे हैं.
अमित शाह बोले- जय श्रीराम लोग बंगाल में नहीं बोलेंगे तो क्या पाकिस्तान में बोलेंगे
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गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि ममता बनर्जी ने बंगाल के अंदर ऐसा कर दिया है कि जय श्रीराम बोलना गुनाह हो गया है.
अमित शाह ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, ''ममता दीदी बंगाल में जय श्रीराम नहीं बोला जाएगा तो क्या पाकिस्तान में बोला जाएगा? मुझे बताओ भाइयों, बताओ बहनों, जय श्रीराम बोलना चाहिए या नहीं बोलना चाहिए? मेरे साथ दोनों हाथ उठाइए और गगनभेदी नारा लगाइए जय श्रीराम... ममता दीदी को यह अपमान लगता है लेकिन हमलोग इसे बोलकर गौरव महसूस करते हैं.''
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ब्रेकिंग न्यूज़, पैंगोंग लेक के उत्तर और पश्चिमी तट से सेना हटाने का समझौता हुआ: राजनाथ सिंह
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में कहा कि पैगोंग लेक इलाक़े से दोनों पक्ष सेना हटाने के लिए तैयार हो गए हैं. इससे पहले चीन ने बुधवार को इसकी घोषणा की थी.
राजनाथ सिंह ने कहा, ''मुझे सदन को यह बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि हमारे दृढ़ इरादे और टिकाऊ बातचीत के फलस्वरूप चीन के साथ पैंगोंग लेक के उत्तर और पश्चिमी तट पर सेना के पीछ हटने का समझौता हो गया है.''
राजनाथ सिंह ने कहा, ''पैंगोंग लेक इलाक़े में चीन के साथ सैनिकों के पीछे हटने का जो समझौता हुआ है उसके अनुसार दोनों पक्ष आगे की तैनाती को चरणबद्ध, समन्वय और प्रामाणिक तरीक़े से हटाएंगे.''
राजनाथ सिंह ने कहा, ''मैं इस सदन को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि इस बातचीत में हमने कुछ भी खोया नहीं है. सदन को यह जानकारी भी देना चाहता हूं कि अभी भी LAC पर तैनाती और पट्रोलिंग के बारे में कुछ विवाद बचे हैं. इन पर हमारा ध्यान आगे की बातचीत में रहेगा. दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि द्विपक्षीय समझौते और नियमों के तहत सैनिकों के पीछे हटने की पूरी प्रक्रिया जल्द से जल्द निपटा लिया जाए. चीन भी देश की संप्रभुता की रक्षा के हमारे संकल्प से अवगत है. यह अपेक्षा है कि चीन द्वारा हमारे साथ मिलकर बचे हुए मुद्दों को हल करने का प्रयास किया जाएगा.''
राजनाथ सिंह ने कहा, ''मैं इस सदन से आग्रह करना चाहता हूं कि मेरे साथ संपूर्ण सदन हमारी सेना की इन विषम और भीषण बर्फ़बारी की परिस्थितियों में भी शौर्य एवं वीरता के प्रदर्शन की प्रशंसा करे. मैं सदन को यह भी बताना चाहता हूं कि भारत ने चीन को हमेशा यह कहा है कि द्विपक्षीय रिश्ते दोनों पक्षों के प्रयास से ही विकसित हो सकते हैं, साथ-साथ सीमा के प्रश्न को भी बातचीत के ज़रिए हल किया जा सकता है.''
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राजनाथ सिंह ने कहा, ''LAC पर शांति में किसी प्रकार की प्रतिकूल स्थिति का द्विपक्षीय संबंधों पर बुरा असर पड़ता है. कई उच्चस्तरीय संयुक्त बयान में भी यह ज़िक्र किया गया है कि LAC और सीमाओं पर शांति कायम रखना द्विपक्षीय संबंधों के लिए अत्यंत आवश्यक है.''
राजनाथ सिंह ने कहा, ''चीन अपनी सेना की टुकडि़यों को उत्तरी तट में फिंगर 8 के पूरब की दिशा की तरफ़ रखेगा. इसी तरह भारत भी अपनी सेना की टुकडि़यों को फिंगर तीन के पास अपनी स्थायी चौकी धन सिंह थापा पोस्ट पर रखेगा. इसी तरह की कार्रवाई दक्षिणी तटीय इलाक़े में भी दोनों पक्षों द्वारा की जाएगी. ये क़दम आपसी समझौते के तहत बढ़ाए जाएंगे और जो भी निर्माण आदि दोनों पक्षों द्वारा अप्रैल 2020 से उत्तरी और दक्षिणी तट पर किया गया है उन्हें हटा दिया जाएगा और पुरानी स्थिति बना दी जाएगी.''
अमेरिका में ‘ट्रंप-विरोधी’ एक नई पार्टी बनाने की तैयारी कर रहे कुछ पूर्व रिपब्लिकन अधिकारी
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समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट
के अनुसार, दर्जनों पूर्व रिपब्लिकन अधिकारी एक ‘ट्रंप-विरोधी’ तीसरी पार्टी के गठन की तैयारी कर रहे हैं.
इस तथाकथित तीसरी पार्टी के गठन को
लेकर हुई चर्चा में जो रिपब्लिकन अधिकारी शामिल रहे, उनमें से चार अधिकारियों के
हवाले से समाचार एजेंसी ने यह रिपोर्ट तैयार की है.
बताया गया है कि यह एक ‘सेंटर-राइट’ नज़रिया रखने वाली पार्टी होगी जो
अमेरिका के लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखेगी और ‘सैद्घांतिक रूढ़िवाद’ का पालन करेगी.
रिपोर्ट के अनुसार, ''फ़िलहाल इस
बारे में बहुत शुरुआती स्तर की बातचीत हुई है.''
बताया गया है कि शुक्रवार को इस
बारे में बात करने के लिए 120 से अधिक पूर्व रिपब्लिकन अधिकारियों ने एक ज़ूम कॉल
आयोजित की थी. इस बैठक में ट्रंप के कार्यकाल के दौरान हुई क़ानून व्यवस्था और
लोकतांत्रिक मूल्यों की कथित अवहेलना पर भी चर्चा हुई.
इस बैठक में पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड
रीगन, जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश, जॉर्ज डब्ल्यू बुश और ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने
शिरकत की. साथ ही कुछ पूर्व राजदूत और रिपब्लिकन पार्टी के पूर्व रणनीतिकार भी इस
बैठक में शामिल थे.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स को कुछ अन्य
नेताओं ने भी अपनी पहचान ज़ाहिर ना करने की शर्त पर, रिपब्लिकन पार्टी से टूटकर एक
नई पार्टी बनाये जाने के बारे में बताया है.
इवान मैकमुलिन, जो हाउस रिपब्लिकन
कॉन्फ़्रेंस के चीफ़ पॉलिसी डायरेक्टर रहे और 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में
निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनावी दौड़ में शामिल थे, उन्होंने समाचार एजेंसी
रॉयटर्स को बताया कि ‘उन्होंने कई अन्य रिपब्लिकन अधिकारियों के साथ मिलकर यह
ज़ूम कॉल आयोजित की थी और इस बैठक में वो सब लोग शामिल थे जो रिपब्लिकन पार्टी पर
डोनाल्ड ट्रंप के कब्ज़े को लेकर चिंतित हैं.’
बताया गया है कि इस बैठक में ट्रंप
द्वारा लगाये गये चुनावी धांधली के आरोपों और उसके बाद 6 जनवरी को कैपिटल हिल पर
हुई हिंसा को लेकर सबसे अधिक चर्चा हुई. इस बैठक में यह बात भी सामने आयी कि कुछ
रिब्लिकन नेता डोनाल्ड ट्रंप के चुनावी धांधली के दावों के बिल्कुल ख़िलाफ़ थे.
हालांकि, अब भी पार्टी का एक बड़ा वर्ग डोनाल्ड ट्रंप का वफ़ादार बताया जाता है.
बाइडन ने पहली बार की चीन से बात और रखी ये शर्त
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अमेरिका और चीन के बीच चल रहे तनावपूर्ण रिश्तों के बीच नए
राष्ट्रपति जो बाइडन ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से फ़ोन पर पहली बार बात की
है.
बाइडन ने ट्वीट करके बताया, ‘’मैंने आज राष्ट्रपति शी से बात की और चीन
के लोगों को लूनर नए साल की बधाई दी. मैंने चीन के व्यापार के तरीकों को लेकर भी
चिंता व्यक्त की, इसके अलावा मैंने वहां हो रहे मानवाधिकार के उल्लंघन और ताइवान
के साथ होने वाली ज़ोर-ज़बरदस्ती पर भी चिताएं प्रकट कीं. मैंने उनसे कहा है कि
अमेरिका चीन के साथ तभी काम करेगा जब इसका फ़ायदा अमेरीकी लोगों को होगा.‘’
चीन और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर की शुरूआत ट्रंप प्रशासन
के दौर में हुई. जो बाइडन के प्रशासन का चीन को लेकर क्या रूख़ होगा इस पर सबकी
नज़रें बनीं हुई हैं.
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अमेरिका और चीन के बीच
टकरार की वजह
1972 में अमेरिका के तत्कालीन
राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से सामान्य रिश्ते बनाने की
ओर कदम बढ़ाया था, तब से लेकर अब दोनों देशों के रिश्ते सबसे ख़राब दौर में पहुंच चुके हैं.
रिश्ते ख़राब होने की शुरुआत
2013 में तब से हुई जब राष्ट्रपति शी जिनपिंग सत्ता में आए. शी जिनपिंग अपने पहले के
राष्ट्रपतियों के मुक़ाबले ज़्यादा मुखर और दबंग माने जाते हैं.
चीन ने तनाव को और हवा तब
दी जब वो हॉन्ग-कॉन्ग के लिए कठोर सुरक्षा क़ानून लाया और चीन में अल्पसंख्यक वीगर
मुस्लिमों के कथित दमन की रिपोर्ट्स आने लगीं. लेकिन ट्रंप प्रशासन के साथ चीन का टकराव
एक वैचारिक वैश्विक नज़रिए के चलते बहुत ज़्यादा बढ़ गया.
शीत युद्ध की याद ताज़ा करते
हुए उन्होंने चीनी नेताओं पर आरोप लगाया कि वो अपना वैश्विक वर्चस्व कायम करने के लिए
तानाशाही कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने अमेरिका और चीन के मुक़ाबले को आज़ादी और उत्पीड़न
का संघर्ष बताया.
अमेरिका ने चीन
पर टैरिफ़ बढ़ाना शुरू कर दिया, इसके जबाव में चीन ने भी यही किया. इस तरह दोनों देशों के बीच ट्रेड-वॉर शुरू हो गई.
बीते साल जुलाई में अमेरिका
ने ह्यूस्टन स्थित चीनी वाणिज्य दूतावास को बंद करने का आदेश दिया.
अमरीका के इस कदम का चीन ने
भी जल्द ही जवाब दे दिया. उसने पश्चिमी चीनी शहर चेंगडू में अमरीका को अपना कांसुलेट
बंद करने का आदेश दिया. कांसुलेट पर कोई नीति बनाने की ज़िम्मेदारी नहीं होती. लेकिन
व्यापार करने और किसी तरह की पहुंच के लिए इसकी अहम भूमिका होती है.
ये उस राजनयिक बुनियादी ढांचे पर एक और चोट थी जिसके
ज़रिए दोनों देश एक दूसरे से बातचीत करते थे.
चीनी सरकार का मानना है कि
अमेरिका प्रशासन, चीन को रोकना चाहता है ताकि वो अमेरिका से आर्थिक रूप से आगे ना निकल जाए. चीनी
सरकार में कई लोग ख़ास तौर पर इस बात को लेकर नाराज़ हैं कि अमरीका ने चीनी टेलिकम्युनिकेशन
टेक्नोलॉजी को लेना बंद कर दिया है.
सबकी नज़रें बाइडन प्रशासन पर हैं कि वह इसे
लेकर क्या क़दम उठाएंगे.
जर्मनी की तरह बनना चाहता है सऊदी अरब
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सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुल्लाजीज़ बिन सलमान
ने कहा है कि आने वाले दिनों में सऊदी अरब अक्षय ऊर्जा से क्षेत्र में ‘दूसरा ज़र्मनी’ बनकर उभरेगा. देश में 50 फ़ीसदी ऊर्जा की निर्भरता अक्षय ऊर्जा के ज़रिए
पूरी की जाएगी.
बुधवार को रियाद में चल रहे फ्यूचर इन्वेस्टेमेंट इनिशिएटिव
(एफ़आईआई) समिट में उन्होंने ये बात कही.
अब्दुल्लाज़ीज़ ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा की हमारी इस योजना
से सैकड़ों-हज़ारों तेल के बैरल बचेंगे.
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के किंगडम विज़न 2030 का
उद्देश्य पोस्ट हाइड्रोकार्बन युग के लिए अर्थव्यवस्था की तेल पर निर्भरता के इतर उसमें
विविधता लाना है.
इस योजना के तहत आने वाले 10 सालों में 60 गीगावाट की अक्षय
ऊर्जा की क्षमता विकसित की जाएगी. जिसमें फोटोवोल्टिक सौर ऊर्जा के 40 गीगावाट, केंद्रित सौर ऊर्जा
के तीन गीगावाटऔर पवन ऊर्जा के 16 गीगावाट शामिल होंगे.
ऊर्जा मंत्री ने कहा, ‘’हम जो भी करेंगे
उसमें कार्बन उत्सर्जन कम होगा. आर्थिक स्तर पर ये एक बड़ा मसला होगा. सऊदी को एक
तर्कशील और अच्छे देश के तौर पर देखा जाएगा क्योंकि हम दुनिया को जो देंगे वो बहुत
ज्यादा होगा. आने वाले सालों में हम कई यूरोपीय देशों से अपनी तुलना कर सकेंगे.‘’
उन्होंने बताया कि सऊदी अरब हाईड्रोकार्बन के इस्तेमाल और
उत्सर्जन को रिसाइकल करेगा. इससे वह ब्लू हाइड्रोजन और ग्रीन हाइड्रोजन का अग्रणी देश
बनेगा.
क्या होता है ग्रीन और ब्लू हाइड्रोजन
रॉकेट ईंधन के रूप में लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाने वाला
हाइड्रोजन मुख्य रूप से तेल शोधन में और उर्वरकों के लिए अमोनिया का उत्पादन करने के
लिए उपयोग किया जाता है.
आज ग्रे हाइड्रोजन ज्यादातर प्राकृतिक गैस या कोयले से निकाला
जाता है, इस प्रक्रिया में
एक साल में कार्बन डाइऑक्साइड के 830 मिलियन टन का उत्सर्जन होता है.
पानी से इलेक्ट्रोलिसिस के ज़रिए निकाला जाने वाला
हाईड्रोजन ‘’ ग्रीन हाइड्रोजन‘’ कहलाता है. इसकी कीमत 1.50 डॉलर प्रतिकिलो तक
होती है.
वहीं, प्रकृतिक गैस से निकाला जाने वाला हाइड्रोजन से
उत्सर्जन कम होता है और इसे ‘ब्लू हाईड्रोजन’ कहते हैं.
कनाडा से तनातनी के बीच पीएम मोदी और ट्रूडो ने की बात
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कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने किसान आंदोलन को लेकर बयान दिया था तो भारत से सख़्त नाराज़गी जताई थी और भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि इससे द्विपक्षीय संबंध ख़राब होंगे.
भारत ने कहा था कि कनाडा के प्रधानमंत्री ने एक आंतरिक मुद्दे पर टिप्पणी की है. इसके बाद से दोनों देशों के रिश्तों पर मानों बर्फ़ जम गई थी. लेकिन बुधवार को दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच फ़ोन पर बात से स्थिति बदलती हुई दिख रही है. जस्टिन ट्रूडो ने न केवल कोविड वैक्सीन की आपूर्ति के लिए बात की बल्कि इंडो-पैसिफिक और अन्य कई वैश्विक मुद्दों पर भी बात की.
इस
बातचीत में कनाडाई प्रधानमंत्री ट्रूडो ने प्रधानमंत्री मोदी को बताया कि कनाडा को
भारत से कितनी कोरोना वायरस वैक्सीन की ख़ुराक़ की ज़रूरत है.
कनाडा के प्रधानमंत्री की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि दोनों प्रधानमंत्रियों ने लोकतांत्रिक सिद्धांतों, हाल के प्रदर्शनों और संवाद के ज़रिए समाधान की अहमियत पर बात की. दोनों नेताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि वैश्वीक अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए मिलकर काम करने की ज़रूरत है.
प्रधानमंत्री मोदी ने
इसे लेकर एक ट्वीट करते हुए लिखा, 'मेरे मित्र जस्टिन ट्रूडो का फ़ोन आने पर ख़ुशी
हुई. उन्हें आश्वासन दिया कि कनाडा ने कोविड वैक्सीन की जितनी खुराकों की मांग की है
उसकी आपूर्ति भारत सुनिश्चित करेगा. इसके साथ ही हमने जलवायु परिवर्तन और वैश्विक आर्थिक
सुधार जैसे अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी साझेदारी के लिए सहमति जताई.’’
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इस बातचीत के बाद कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो ने भी ट्वीट
किया-‘’आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मेरी फ़ोन पर कई ज़रूरी
मुद्दों को लेकर बातचीत हुई. हमने तय किया कि हम एक-दूसरे के संपर्क में बने
रहेंगे.‘’
भारत की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ट्रूडो ने कहा कि
अगर दुनिया कोविड-19 से जंग जीतने में कामयाब रही, तो
यह भारत की ज़बरदस्त दवा बनाने की क्षमता और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में
दुनिया के साथ इस क्षमता को साझा करने से होगा.
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श्रीलंका में कोरोना से मौत पर मुसलमान शवों को दफ़ना सकेंगे
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श्रीलंका में अब कोविड-19 से मरने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों को शव दफ़नाने की इजाज़त होगी. इस अधिकार के लिए लोग सड़कों पर प्रदर्शन भी कर रहे थे. बुधवार को प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने संसद में घोषणा की कि मुसलमान अब अपने परिजनों के शवों को दफ़ना सकेंगे.
श्रीलंकाई संसद में एक
सांसद के पूछे गए सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री राजपक्षे ने सदन में ये बात कही
है.
दरअसल, श्रीलंका में
कोविड-19 के कारण होने वाली मौत पर शवों को जलाना अनिवार्य कर दिया गया था. इसकी
वजह बताते हुए कहा गया था कि शवों को दफ़नाने से उसमें मौजूद वायरस भू-जल को
प्रदूषित कर सकता है.
इस फ़ैसले के विरोध
में मुस्लिम और ग़ैर-मुस्लिम लोग बीते साल से प्रदर्शन कर रहे थे. सरकार के इस
फ़ैसले को ना सिर्फ़ अवैज्ञानिक बताया गया बल्कि मुस्लिम समुदाय और उनकी मान्यताओं के
लिए असंवेदनशील भी कहा गया.
इस मामले पर संयुक्त
राष्ट्र और अमेरिका ने चिंता भी व्यक्त की थी.
विश्व स्वास्थ्य संगठन और श्रीलंका के डॉक्टरों के एक समूह ने
कहा था कि कोविड-19 से मरे लोगों के शवों को जलाया या दफ़नाया जा सकता है.
राजपक्षे के इस बयान का स्वागत करते हुए
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट किया है, "हम श्रीलंका के संसद में श्रीलंकाई पीएम महिंदा
राजपक्षे के आश्वासन का स्वागत करते हैं, जिससे कोविड-19
से मरने वाले मुसलमानों को दफ़नाने की अनुमति मिल गई है."
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श्रीलंका के मुस्लिम सासंद रिशार्द बतिउद्दीन ने
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए खुशी ज़ाहिर की है और कहा है कि सरकार को पुराने आदेश को
वापस लेते हुए इसे जल्द लागू करना चाहिए.
उन्होंने कहा, "कई लोगों के शवों को अब तक जलाया जा चुका है और उनके परिवार काफ़ी पीड़ा में हैं. मैं ख़ुश हूं कि सरकार ने कम से कम इस वक़्त ही
सही लेकिन दयाभाव तो दिखाया. इसे जल्द से जल्द लागू करना ज़रूरी है क्योंकि हर दिन
लोगों की मौत हो रही है."
श्रीलंका मुख्य रूप से बौद्ध देश है और दूसरी सबसे बड़ी
आबादी हिंदू है. बौद्धों और हिंदू धर्म के अमुसार शवों को जलाने की परंपरा है.श्रीलंका में लगभग सात फ़ीसदी मुसलमान हैं जिसकी
संख्या 2.2 करोड़ है.
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