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उत्तराखंड: सीएम रावत ने बताया- 125 लोग लापता, 7 शव बरामद

उत्तराखंड के चमोली ज़िले में आज सुबह ग्लेशियर टूटने से धौलीगंगा नदी में बाढ़ आ गई. ऋषिगंगा और तपोवन पावर प्रोजेक्ट बाढ़ में बह गए.

लाइव कवरेज

  1. उत्तराखंड: तपोवन सुरंग में बचाव कार्य फिर से शुरू हुआ

    उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि एनटीपीसी की 900 मीटर लंबी तपोवन सुरंग में बचाव कार्य रात क़रीब 11.30 बजे फिर से शुरू कर दिया गया.

    इससे एक घंटे पहले पीआईबी उत्तराखंड ने डीजीपी कुमार के हवाले से बताया था कि पानी का स्तर बढ़ने से तपोवन टनल में बचाव काम रोकना पड़ा है.

    डीजीपी अशोक कुमार ने बचाव काम फिर से शुरू होने का एक वीडिया ट्वीट कर लिखा, “पानी का स्तर बढ़ने से दूसरी टनल में बचाव कार्य अस्थायी रूप से रोक दिया गया था. बचाव काम फिर शुरू हो चुका है. मशीनें फिर से सुरंग के प्रवेश द्वार से कीचड़ हटाने का काम कर रही हैं. कुछ एजेंसियां ग़लत जानकारी दे रही हैं.”

    राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी एक ट्वीट किया और कहा कि हमारे जवान रात में भी बचाव कार्यों में लगे हुए हैं.

    भारतीय सेना के ट्विटर हैंडल से भी तस्वीरें पोस्ट की गईं, जिसमें जवान बचाव कार्य के लिए सुरंग के अंदर जाते दिख रहे हैं. ट्वीट में बताया गया कि काम रात में भी जारी रहेगा.

  2. पीएम मोदी सोमवार को राज्य सभा में बहस का दे सकते हैं जवाब, कांग्रेस ने जारी किया व्हिप

    कांग्रेस पार्टी ने अपने राज्य सभा सदस्यों को सोमवार को स्थगन तक उच्च सदन में मौजूद रहने का व्हिप जारी किया है.

    शुक्रवार को राज्य सभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर लंबी बहस चली, जिसमें 25 पार्टियों के 50 सांसदों ने बात रखी. ये चर्चा तीन दिन तक चली.

    समाचार एजेंसी एएनआई ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि ये चर्चा सबसे लंबी बहसों में से एक थी, जिसमें सबसे ज़्यादा सदस्यों ने हिस्सा लिया.

    बीजेपी के 18, कांग्रेस के सात और अन्य पार्टियों के 25 सदस्यों ने इस बहस में हिस्सा लिया. इस बहस के लिए क़रीब 15 घंटे तय किए गए थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को बहस का जवाब दे सकते हैं.

    सरकार और विपक्षी पार्टियों ने धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए वक़्त को 15 घंटे और बढ़ाने पर सहमति जताई थी.

    विपक्ष ने शुरू में नए कृषि क़ानूनों पर अलग से चर्चा की मांग की थी, लेकिन बाद में इसे धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के हिस्से के रूप में करने पर राज़ी हो गए थे.

  3. उत्तराखंड: पानी का स्तर बढ़ने से एनटीपीसी की तपोवन सुरंग में बचाव काम रोका गया

    उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार के मुताबिक़, पानी का स्तर बढ़ने की वजह से एनटीपीसी की 900 मीटर लंबी तपोवन सुरंग में बचाव काम रोकना पड़ा है.

    डीजीपी कुमार ने बताया कि "हमने 150 मीटर तक सुरंग को खोद लिया है, लेकिन जल स्तर बढ़ने के बाद हमें काम रोकना पड़ा. ज़्यादातर लापता लोग दो प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे. हमें उम्मीद है कि सोमवार सुबह तक उनकी पहचान को लेकर तस्वीर साफ़ हो जाएगी."

    तपोवन इलाक़े में मौजूद,डीजीपी अशोक कुमारने बताया, “एनटीपीसी बड़ा प्रोजेक्ट था. वहां क़रीब 150 लोग काम कर रहे थे, उनमें से एक छोटी टनल से हमने 12 लोगों को रेस्क्यू कर लिया है. एक बड़ी टनल में 25-30 लोग बताए जा रहे थे. उसमें दोनों तरफ से मलबा भरा हुआ है. उसको हम लोग खोलने का प्रयास कर रहे हैं. अभी तक वहां से सात शव मिल चुके हैं. शाम को दोबारा पानी भर गया था. टनल को खोलने का रेस्क्यू ऑपरेशन अभी पूरा नहीं हो पाया है. क़रीब 150 मीटर हमने इसको खोद लिया है. क़रीब 900 मीटर लंबी टनल है. लोग किस एंड पर होंगे, ये खुलने के बाद ही पता चलेगा. हमारा ये ऑपरेशन जारी रहेगा. मुझे उम्मीद है कल सुबह 9-10 बजे तक पिक्चर पूरी तरह से क्लियर हो जाएगी.”

    इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से बात की और उत्तराखंड में दुर्भाग्‍यपूर्ण स्थिति की समीक्षा की.

  4. उत्तराखंड में ITBP के जवानों ने सुरंग में फंसे लोगों को निकाला

  5. बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 7 फरवरी 2021, सुनिए फ़ैसल मोहम्मद अली के साथ.

  6. ब्रेकिंग न्यूज़, ग्लेशियर टूटने की घटना के बाद सीएम रावत की प्रेस कॉन्फ़्रेंस

    उत्तराखंड के चमोली ज़िले में ग्लेशियर टूटने के बाद आई आपदा के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया है कि इस घटना में तक़रीबन 125 लोग लापता हैंऔर सात शव बरामद किए गए हैं.

    उन्होंने इस दुर्घटना में मरने वाले लोगों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये मुआवज़े की घोषणा की है.

    इसके साथ ही मुख्यमंत्री रावत ने बताया कि इस घटना में 180 भेड़-बकरियां भी बह गई हैं और जिस जगह यह ग्लेशियर टूटा वहां के रैणी गांव में अभी तक पांच लोगों की मौत की अपुष्ट जानकारी है.

    उन्होंने बताया कि इस दुर्घटना में स्थानीय लोगों के कम हताहत होने की संभावना है क्योंकि बांध पर काम करने वाले स्थानीय लोग रविवार को छुट्टी पर रहते हैं.

    मुख्यमंत्री रावत ने कहा, “अभी तक की ज़रूरत के हिसाब से हमारे पास संसाधन उपलब्ध है. हेलीकॉप्टर पर्याप्त मात्रा में हैं. जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किए जाएंगे. बचाव दल भी हमारे पास उपलब्ध हैं.”

    “एनडीआरएफ़ की टीम दिल्ली से यहां पहुंची है. वह जौली ग्रांट से बसों के ज़रिए आगे के लिए रवाना हुई है. कल कुछ लोग और एनडीआरएफ़ की तरफ़ से आएंगे.”

    “ज़िलाधिकारी, एसपीऔर ज़िला चिकित्साधिकारी वहां कैंप किए हुए हैं. हमने वहां का पहले एरियल सर्वे किया और फिर सड़क से रैणी गांव में जहां तक जाया जा सकता है, हम वहां पहुंचे और जायज़ा लिया.एनडीआरएफ़ की 60 लोगों की टीम वहां पहुंच गई हैं.”

    “एक बड़ा सड़क पुल और चार अन्य झूला पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं. धौलीगंगा के उस इलाक़े का सड़क मार्ग से संपर्क टूट गया है. वहां 17 गांव हैं जिनमें से 7 गांवों के लोग सर्दी की वजह से प्रवास कर गए हैं. 11 गांवों में लोग हैं. वहां सेना के हेलीकॉप्टर पहुंच चुके हैं.”

    मुख्यमंत्री ने क्या-क्या कहा, पढ़ें उनके शब्दों में

    सुबह 11 बजकर बीस मिनट पर मुझे इसकी जानकारी मिली. तत्काल ज़िला प्रशासन से संपर्क करके पुष्टि करने के लिए कहा गया.

    हमें पता चला कि वहां एक ग्लेशियर टूटने से भारी नुकसान की संभावना है.

    ऋषिगंगा रेणी गांव के दो हिस्से हैं. एक सड़क पर है, एक सड़क से ऊपर है. वहीं 13 मेगावाट से कुछ अधिक क्षमता का पावर प्रॉजेक्ट है. इसमें 35 लोग काम करते थे. वहां पुलिस के चार जवान भी सुरक्षा में तैनात थे. दो छुट्टी पर थे. दो वहां मौजूद थे. वो दोनों लापता हैं. 29-30 के क़रीब ऋषिगंगा प्रॉजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी लापता हैं.

    उसी से पांच किलोमीटर नीचे एनटीपीसी का निर्माणाधीन प्रोजेक्ट है. मोटी-मोटी जानकारी के मुताबिक 176 मज़दूर ड्यूटी के लिए निकले थे. वहां पर दो सुरंगे हैं. एक सुरंग में पंद्रह लोग थे, वो मोबाइल से संपर्क में आ गए थे. दूसरी सुरंग में अनुमान के मुताबिक 30-35 लोग संभावित हैं.

    जब हिमस्खलन हुआ, तो 35-40 लोग वहां वापस आ गए. उन्हें बचा लिया गया. उनमें से एक मामूली तौर पर घायल है. कोई ख़तरे वाली बात नहीं है. अभी तक सात शव बरामद हुए हैं.

    जो दूसरी सुरंग हैं जिसमें 35-40 लोगों के होने की संभावना है उसमें मलबा अंदर तक प्रवेश कर गया है जिसकी वजह से सुरंग में प्रवेश करना बहुत मुश्किल था. हमारे आईटीबीपी के जवान वहां रस्सियों के सहारे पहुंचे हैं. वहां तक मशीनें पहुंचाना संभव नहीं है. 35.-40 फिट तक उसमें गाद भरा हुआ है.

    आईटीबीपी के जवान रस्सी से वहां पहुंचे हैं और सुरंग में दाख़िल हुए हैं. अंदर मज़दूरों से संपर्क नहीं हो पाया है.

  7. आईटीबीपी ने सुंरग में फंसे 16 लोग बचाए

    आईटीबीपी के राहत और बचाव दल ने तपोवन के पास एक सुरंग से 16 लोगों को ज़िंदा बचाया है.

    आईटीबीपी के मुताबिक इस बचाव अभियान में 250 जवानों की तीन टीमों को लगाया गया है.

    ग्लेशियर टूटने की वजह से आई बाढ़ में तवोपन पॉवर प्रोजेक्ट को भारी नुक़सान पहुंचा है.

    अधिकारियों का कहना है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है.

  8. पानी शांत हुआ, अब ख़तरे की बात नहीं: डीजीपी अशोक कुमार

    उत्तराखण्ड के डीजीपी अशोक कुमार ने फ़ेसबुक पर एक वीडियो जारी यह जानकारी दी है कि ‘श्रीनगर से आगे नदी का बहाव सामान्य हो गया है. देवप्रयाग और निचले इलाक़ों के लोगों के लिए अब ख़तरे की बात नहीं है.’

    उन्होंने कहा कि ‘पुलिस राहत और बचाव के कार्यों में पूरी ताक़त से लगी हुई है.’

  9. अब तक 9-10 शव निकाले गये: आईटीबीपी प्रमुख

    उत्तराखण्ड के चमोली में ग्लेशियर टूटने की घटना को लेकर आईटीबीपी के डीजी एस.एस देसवाल ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि 'बचाव कार्य में 9-10 शवों को नदी से निकाला गया है.'

    उन्होंने कहा, “तपोवन बांध के पास एक टनल में निर्माण कार्य जारी था, जहाँ 20 लोग फंसे हैं. आईटीबीपी की टीम वहाँ पर बचाव कार्य कर रही है.”

  10. तपोवन बांध के पास टनल से लोगों को बचाने का ऑपरेशन जारी

    उत्तराखण्ड के चमोली ज़िले में ग्लेशियर टूटने के बाद हुई त्रासदी के बाद प्रशासन का बचाव कार्य जारी है.

    इस आपदा में ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट लगभग पूरी तरह बह चुका है जबकि तपोवन बांध को भी ख़ासा नुक़सान पहुंचा है.

    तपोवन के पास एक टनल में लोगों के फंसे होने की आशंका है जिसके बाद वहां सेना और राहत बल की टीमें बचाव कार्य चला रही हैं.

  11. राष्ट्रपति कोविंद ने ग्लेशियर टूटने की घटना पर किया ट्वीट

  12. सीएम रावत ने कहा- 'ताज़ा वीडियो से पता चलता है कि बाढ़ की सम्भावना अब बहुत कम है'

    उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ट्विटर पर कर्णप्रयाग का एक वीडियो पोस्ट किया है.

    इस वीडियो के साथ उन्होंने लिखा है, “कर्णप्रयाग में आज 3 बजकर 10 मिनट पर नदी में पानी के बहाव की स्थिति से साफ़ है कि बाढ़ की सम्भावना बहुत कम है. हमारा विशेष ध्यान सुरंगों में फँसे श्रमिकों को बचाने पर है और हम सभी प्रयास कर रहे हैं. किसी भी समस्या से निपटने के सभी ज़रूरी प्रयास कर लिए गये हैं.”

    इसके अलावा सीएम रावत ने सहायता केंद्र के नंबर जारी किये हैं. उन्होंने लिखा है कि ‘अगर आप प्रभावित क्षेत्र में फंसे हैं, आपको किसी तरह की मदद की ज़रूरत है, तो कृपया आपदा परिचालन केंद्र के नम्बर 1070 या 9557444486 पर संपर्क करें. कृपया घटना के बारे में पुराने वीडियो से अफ़वाह ना फैलाएं.’

  13. ब्रेकिंग न्यूज़, सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि आज की घटना के बारे में उन्हें अब तक क्या पता है

    उत्तरखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रेस से बात करते हुए कहा है कि ‘सुबह क़रीब दस बजे ऋषिगंगा के ऊपर एक ग्लेशियर फटा, जिससे ऋषिगंगा में उफान आया. इसका असर 13.2 मेगावाट के ऋषिगंगा प्रोजेक्ट पर पड़ा है. ऋषिगंगा प्रोजेक्ट में काम कर रहे क़रीब 15 से 20 मज़दूर लापता हैं.’

    “इस हादसे में मानवीय छति कितनी हुई है, इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ कह पाना अभी कठिन है. लेकिन सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ़ को फ़ौरन मौक़े पर रवाना किया गया था. आईटीबीपी और एसएसबी की टीमें भी मौक़े पर हैं.”

    “ऋषिगंगा प्रोजेक्ट का जो मलबा था, वो आगे धौलीगंगा में बढ़ा जिससे तपोवन में एनटीपीसी के प्रोजेक्ट को भी नुकसान पहुँचा है. इसके अलावा तपोवन में 520 मेगावाट के तपोवन विष्णुगाढ़ प्रोजेक्ट को भी आंशिक क्षति पहुँची है. यहाँ काम कर रहे 47 मज़दूर लापता हैं.”

    “विष्णुप्रयाग में धौलीगंगा का मलबा अलकनन्दा में मिल गया, लेकिन आगे बढ़ते हुए अलकनन्दा का बहाव सामान्य होता गया. अलकनन्दा पर कॉफ़र डैम को कोई नुक़सान नहीं पहुँचा है और आगे अलकनन्दा पर किसी तरह के नुक़सान की भी ख़बर नहीं है.”

    “अभी पानी की जो तीव्रता है, वो चमोली तक पहुँचते-पहुँचते काफ़ी कम हो गई है. इस हादसे के बाद नदी किनारे जो भी गतिविधियां होती हैं, उन्हें तत्काल रोक दिया गया है. श्रीनगर में जो बाँध है, उसे पानी छोड़ने के आदेश दिये गए हैं.”

    इस बीच आईटीबीपी के प्रवक्ता ने उत्तराखण्ड की घटना के बारे में कहा है कि ‘तपोवन में एनटीपीसी की साइट पर काम कर रहे लगभग 150 मज़दूर लापता हैं, जिनकी संभवत: मौत हो गई है. हमारी टीम को अब तक तीन शव मिले हैं.’

    आईटीबीपी ने बताया है कि ‘रिणी के पास ब्रिज टूटने से बॉर्डर से सटी कई चौकियों से संपर्क बाधित हो गया है.’

    केंद्रीय जल-शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि ‘वे पूरी स्थिति पर नज़र बनाये हुए हैं और उत्तराखण्ड सरकार की हर संभव मदद करने के लिए तैयार हैं.’

  14. 50-100 लोग लापता, दो शव बरामद हुए: उत्तराखण्ड के डीजीपी अशोक कुमार

    समाचार एजेंसी पीटीआई ने उत्तराखण्ड के डीजीपी अशोक कुमार के हवाले से लिखा है कि लगभग 50-100 लोग लापता हैं. 2 शव बरामद हो चुके हैं और कुछ लोग इस घटना में घायल हुए हैं.

    डीजीपी ने कहा है कि ‘स्थिति अब नियंत्रण में लग रही है, मगर तपोवन-रिणी में लगा पूरा पावर प्रोजेक्ट नदी में बह गया है.’

    वहीं समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में आईटीबीपी के अधिकारियों ने कहा है कि उनके जवानों को तपोवन इलाक़े में स्थित एनटीपीसी की साइट से तीन शव बरामद हुए हैं.

    इस बीच भारतीय सेना ने उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को बाढ़ की स्थिति के बारे में बताया है.

    भारतीय सेना के अधिकारियों ने कहा है कि सेना के चार कॉलम, दो मेडिकल टीम और एक इंजीनियरिंग टास्क फ़ोर्स रिणी भेजी गयी है.

    बताया गया है कि सेना के हेलीकॉप्टर भी लगातार स्थिति का जायज़ा ले रहे हैं.

  15. ग्लेशियर टूटने से उत्तराखंड में तबाही, नदियां उफ़ान पर

  16. गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- 'वायु सेना को भी अलर्ट पर रखा गया है'

    भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि ‘इस कठिन समय में मोदी सरकार उत्तराखण्ड की जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है.’

    उन्होंने एक वीडियो के ज़रिये यह सूचना दी है कि ‘एनडीआरएफ़, आईटीबीपी और एसडीआरएफ़ की टीमें वहाँ पहुँच गई हैं. वायुसेना को भी अलर्ट पर रखा गया है.’

    अमित शाह ने कहा, “जोशीमठ के आसपाय यह बड़ी घटना हुई है. पहाड़ से एक ग्लेशियर टूटकर नदी में गिरने के कारण पानी का बहाव बहुत बढ़ा है. दो नदियों में जल स्तर तेज़ी से बढ़ा है. कुछ लोगों के हताहत होने की ख़बर भी हमें मिली है. इस संकट से उत्तराखण्ड के लोगों को निकालने के लिए हम सभी प्रयास कर रहे हैं.”

  17. उमा भारती ने कहा- 'हरिद्वार तक आ सकती है तबाही'

    उत्तरखण्ड की घटना पर बीजेपी नेता उमा भारती ने सिलसिलेवार ट्वीट किये हैं.

    उन्होंने लिखा है कि ‘हरिद्वार में भी अलर्ट जारी हो गया है यानी तबाही हरिद्वार तक आ सकती है.’

    अपने ट्वीट में उमा भारती ने लिखा, “जोशीमठ से 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पैंग गाँव (ज़िला चमोली) के ऊपर एक ग्लेशियर फिसलने से ऋषि गंगा पर बना हुआ पावर प्रोजेक्ट ज़ोर से टूटा है और वो एक तबाही लेकर आगे बढ़ रहा है. मैं गंगा मैया से प्रार्थना करती हूँ कि वो सबकी रक्षा करें. मैं कल उत्तरकाशी में थी. आज हरिद्वार पहुँची हूँ. यह हादसा जो हिमालय में ऋषि गंगा पर हुआ, यह चिंता एवं चेतावनी दोनों का विषय है.”

    उन्होंने लिखा, “इस संबंध में मैंने, जब मैं मंत्री थी तब अपने मंत्रालय की तरफ़ से हिमालय-उत्तराखंड के बांधों के बारे में जो ऐफ़िडेविट दिया था, उसमें यही आग्रह किया था कि हिमालय एक बहुत संवेदनशील स्थान है, इसलिये गंगा एवं उसकी मुख्य सहायक नदियों पर पावर प्रोजेक्ट नहीं बनने चाहिए. तथा इससे उत्तराखण्ड की जो 12% की क्षति होती है, वो नेशनल ग्रिड से पूरी कर देनी चाहिये.”

    अंत में उन्होंने लिखा है कि ‘ज़िला चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी समेत सभी ज़िलों में रहने वाले अपने आत्मीय जनों से मैं अपील करती हूँ कि इस आपदा से प्रभावित लोगों की रक्षा व सेवा के कार्यों में लग जाइये.’

  18. उत्तराखंड में फटा हिमालयी ग्लेशियर, अलकनंदा के आसपास की आबादी ख़तरे में

    उत्तराखंड के चमोली ज़िले में ग्लेश्यिर टूटने से नदी में उफान. नदी के कई तटबंध टूटने के बाद बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया है. इससे ऋषिगंगा प्रोजेक्ट को नुकसान पहुँचने की संभावना जताई गई है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पावर प्रोजक्ट में काम कर रहे 150 मज़दूर ग़ायब हैं.

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत घटना स्थल के लिए रवाना हुए. उन्होंने ट्वीट कर अफ़वाह पर ध्यान नहीं देने और पुराने वीडियो नहीं शेयर करने का आग्रह किया है.

    उन्होंने अपने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि इससे ऋषिगंगा प्रोजेक्ट को नुकसान पहुँचने की संभावना है.

    उन्होंने लिखा कि नदी में अचानक पाने आने से अलकनंदा के निचले क्षेत्रों में भी बाढ़ की संभावना है. तटीय क्षेत्रों में लोगों को अलर्ट किया गया है. नदी किनारे बसे लोगों को क्षेत्र से हटाया जा रहा है.

    समाचार एजेंसी एएनआई ने आईटीबीपी के हवाले से बताया कि उत्तराखंड के चमोली ज़िले के रेनी गाँव के पास विशाल बाढ़ को देखा गया है जिसने नदियों के कई तट और घरों को तोड़ डाले हैं. आईटीबीपी के जवान लोगों की मदद को भेजे गए हैं. जोशीमठ के पास रेनी गाँव में राहत का काम चल रहा है.

    चमोली पुलिस के हवाले से एएनआई ने लिखा कि "तपोवन क्षेत्र में एक ग्लेशियर के टूटने से ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट क्षतिग्रस्त हो गया है. अलकनंदा नदी के किनारे रहने वाले लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है."

  19. म्यांमार में सैन्य तख़्तापलट के ख़िलाफ़ दूसरे दिन भी बड़े प्रदर्शन जारी

    म्यांमार के यंगून शहर में रविवार को भी हज़ारों लोग सैन्य तख़्तापलट के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं.

    लोग सैन्य शासकों के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतर आये हैं. इनमें महिलाओं और पुरुषों के अलावा कुछ बच्चे भी हैं.

    लोग हाथों में नज़रबंद की गईं नेता आंग सान सू ची के पोस्टर थामे हुए हैं और अधिकांश लोगों ने लाल रंग के कपड़े पहने हैं.

    लाल रंग आंग सान सू ची की नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी पार्टी का रंग है.

    प्रदर्शन में शामिल लोग नारे लगा रहे हैं कि ‘हमारे वोट का सम्मान करो.’ ग़ौरतलब है कि नवंबर में हुए आम चुनावों में सू ची की पार्टी को बड़ी जीत हासिल हुई थी.

    शनिवार को सैन्य शासकों के आदेश पर म्यांमार में इंटरनेट की सुविधा बंद कर दी गई थी, पर इसके बावजूद लोग प्रदर्शनों के वीडियो और तस्वीरें बाहर निकाल पाने में सफल हुए हैं.

    इन प्रदर्शनों में शामिल लोगों ने हाथों में लाल गुब्बारे लिये हुए हैं. वहीं कुछ लोग अपनी कारों का हॉर्न बजाकर इन प्रदर्शन के लिए अपना समर्थन ज़ाहिर कर रहे हैं.

    म्यो विन नाम के एक 37 वर्षीय प्रदर्शनकारी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से बातचीत में कहा कि ‘हम तब तक आगे बढ़ते रहेंगे और लड़ते रहेंगे, जब तक हमें लोकतंत्र वापस नहीं मिल जाता.’

    यंगून यूनिवर्सिटी के पास स्थानीय पुलिस बलों की भारी तैनाती की गई है. पुलिस की तैयारी देखकर लगता है कि वो किसी भी अप्रिय घटना का सामना करने के लिए तैयार है.

    अब तक कहीं भी सेना ने प्रदर्शनों को रोकने की कोशिश नहीं की है. सेना म्यांमार के नागरिकों को अपना असंतोष ज़ाहिर करने दे रही है. लेकिन बीबीसी में दक्षिण-पूर्व एशिया के संवाददाता जोनाथन हेड के अनुसार, लोग यह मान रहे हैं कि प्रदर्शन ज़्यादा बड़े हुए तो सेना कोई कार्रवाई कर सकती है.

    म्यांमार के अन्य शहरों में भी रविवार को कुछ छोटे-मोटे प्रदर्शन होने की ख़बर है.

    उधर, आंग सान सू ची और उनकी कैबिनेट के कई वरिष्ठ नेता अब भी अपने घरों में नज़रबंद हैं. सैन्य शासकों ने 1 फ़रवरी को उन्हें नज़रबंद किया था और देश में इमरजेंसी की घोषणा कर दी थी.

  20. किसान आंदोलन का 74वां दिन, सुरक्षाबलों की भी भारी तैनाती

    केंद्र सरकार के कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसानों का आंदोलन जारी है.

    पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और अन्य कई राज्यों के किसान दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर डटे हुए हैं. आज आंदोलन का 74वां दिन है.

    एक ओर जहां किसान सड़कों पर डटे हुए हैं वहीं बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की भी तैनाती है.

    ये तस्वीरें टिकरी बॉर्डर की हैं.

    कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों ने शनिवार को देशव्यापी चक्का जाम किया था लेकिन उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को इससे दूर रखा गया था.

    शनिवार को चक्का जाम के बाद गाज़ीपुर में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार को जब ठीक लगे हमसे बात कर ले. हमारा मंच भी वही है और पंच भी वही.

    उन्होंने यह भी कहा कि किसान सरकार से किसी दबाव में बातचीत नहीं करेंगे, जब प्लेटफॉर्म बराबरी का होगा तभी बातचीत होगी.