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ग्रेटा टूलकिट: जयशंकर ने कहा, जांच में बहुत कुछ पता चला है
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ चल रहे किसान आंदोलन पर विदेशी सिलेब्रिटीज़ के ट्वीट पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि वे लोग इस विषय पर ज़्यादा नहीं जानते हैं.
लाइव कवरेज
कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी जेल से रिहा हुए
राकेश टिकैत ने यूपी में चक्का जाम नहीं करने का फ़ैसला जल्दबाज़ी में लिया - किसान नेता दर्शन पाल
वरिष्ठ किसान नेता दर्शन पाल ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में ‘चक्का जाम’ नहीं करने का फ़ैसला “जल्दबाज़ी” में लिया था और ‘बेहतर होता अगर वो इस योजना के बारे में पहले संयुक्त किसान मोर्चा से चर्चा करते.’
उन्होंने कहा, “टिकैत जी को लगा कि उत्तराखंड और यूपी में दंगे हो सकते हैं, इसके बाद तुरंत उन्होंने प्रेस में बयान दिया. अगर और लोगों से बात करके कोई बयान देते तो अच्छा होता. उन्होंने बाद में हमसे बात की, मैं मानता हूं कि जल्दबाज़ी में ऐसा नहीं करना चाहिए था.”
शरद पवार की सचिन तेंदुलकर को नसीहत – अपने क्षेत्र से अलग विषय पर बोलने में बरतें सावधानी
एनसीपी नेता शरद पवार ने पूर्व भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को नसीहत दी है कि वो किसी दूसरे क्षेत्र के बारे में बोलते वक़्त सावधानी बरतें.
हाल में जब रिहाना और ग्रेटा थनबर्ग जैसी अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने किसान आंदोलन के समर्थन में ट्वीट किए थे तो कुछ भारतीय हस्तियों की तरह सचिन तेंदुलकर ने भी इसपर प्रतिक्रिया दी थी और लिखा था कि "भारत की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता. भारत में जो भी हो रहा है बाहरी ताकतें उसकी दर्शक हो सकती हैं लेकिन प्रतिभागी नहीं. भारतीय भारत को जानते हैं और फ़ैसला उन्हें ही लेना है. आइए एक राष्ट्र के रूप में एकजुट रहें."
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, शरद पवार ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “उन्होंने (भारतीय हस्तियों ने) जो स्टैंड लिया उसपर कई लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. सचिन तेंदुलकर को मेरी सलाह है कि वो अपने क्षेत्र के बाहर के किसी विषय पर बोलते हुए सावधानी बरतें.”
पवार ने केंद्र सरकार पर किसानों के आंदोलन को बदनाम करने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार उन्हें खालिस्तानी और आतंकवादी कहकर किसान आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रही है. देश के अन्नदाता का अपमान करने का ये अच्छा तरीक़ा नहीं है.”
पवार ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और नितिन गडकरी जैसे वरिष्ठ नेता आगे आकर आंदोलनकारी किसानों से बात करते हैं तो समाधान निकला जा सकता है.
उन्होंने कहा, “अगर वरिष्ठ नेता पहल करते हैं, तो किसान नेताओं को भी उनके साथ बैठना चाहिए.”
साथ ही उन्होंने कहा, “आज़ादी के बाद से ऐसा कभी नहीं हुआ कि प्रदर्शनकारियों को सड़कों पर कीलें लगाकर रोका गया हो. पहले, पूरे देशभर से लोग प्रदर्शनकारी किसानों का समर्थन कर रहे थे. अब भारत के बाहर के लोग भी प्रदर्शनकारी किसानों को अपना समर्थन दे रहे हैं. सरकार को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए.”
सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद भी मुनव्वर फ़ारूक़ी की नहीं हुई रिहाई
कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद भी इंदौर की जेल से रिहा नहीं हो सके हैं.
फ़ारूक़ी का परिवार और अधिवक्ता इंदौर में जेल के बाहर उनकी रिहाई का इंतज़ार कर रहे थे.
उन्हें उम्मीद थी कि रात साढ़े आठ बजे तक उन्हें रिहा कर दिया जाएगा. लेकिन उन्हें रिहा नहीं किया गया.
जेल के बाहर मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता ज़ैद पठान ने बीबीसी को बताया, “फ़ारूक़ी को रिहा न किए जाने से हम निराश तो हैं लेकिन नाउम्मीद नहीं. सुप्रीम कोर्ट का आदेश कुछ तो मायने रखता है. हमें उम्मीद है फ़ारूक़ी को छोड़ दिया जाएगा.”
वहीं उनकी लीगल टीम से जुड़े अधिवक्ता अशहर वारसी ने कहा, “जेल प्रशासन का कहना है कि हमें सुप्रीम कोर्ट की तरफ़ से स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं और इस वजह से रिहा नहीं किया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश में ये प्रॉडक्शन वारंट पर स्टे का स्पष्ट निर्देश है. बावजूद इसके रिहा न किया जाना सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है.”
बीबीसी ने इंदौर जेल के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन कोई जवाब नहीं मिल सका.
कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी को 1जनवरी को इंदौर पुलिस ने गिरफ़्तार किया था. उनके अलावा चार अन्य लोगों को गिरफ़्तार किया गया था. इन सभी पर हिंदू देवी-देवताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर अभद्र टिप्पणी का आरोप लगाया गया था.
मुनव्वर फ़ारूक़ी इंदौर के मुनरो कैफ़े में अपना कार्यक्रम करने के लिये आये थे. उसी दौरान हिंदू रक्षक संगठन के नेताओं ने वहां पहुंच कर हंगामा कर दिया.
आयोजक और कॉमेडियन को उसके बाद थाने ले जाया गया. तभी से मुनव्वर फ़ारूक़ी जेल में हैं और कई बार उन्होंने ज़मानत के लिये आवदेन किया है.
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बैंच ने उनकी ज़मानत याचिका ख़ारिज करते हुए कहा था, "ऐसे लोगों को बख़्शा नहीं जाना चाहिए."
शुक्रवार को फ़ारूक़ी को सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिल गई थी.
हालांकि उन पर उत्तर प्रदेश में भी मुक़दमा दर्ज किया गया है और यूपी पुलिस भी उनकी हिरासत चाहती है.
उत्तर प्रदेश की तरफ़ से उनका प्रॉडक्शन वारंट इंदौर जेल भेजा गया था.
हालांकि दिल्ली में मुनव्वर फ़ारूक़ी की लीगल टीम से जुड़े अधिवक्ता केशवम चौधरी ने बीबीसी से कहा है, “सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार प्रॉडक्शन वारंट पर स्टे है.”
वहीं, शनिवार शाम को पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने ट्वीट करके सवाल किया कि उन्हें अब तक रिहा क्यों नहीं किया गया है?
ग्रेटा टूलकिट: जयशंकर ने कहा, जांच में बहुत कुछ पता चला है
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ चल रहे किसान आंदोलन पर विदेशी सिलेब्रिटीज़ के ट्वीट पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि वे लोग इस विषय पर ज़्यादा नहीं जानते हैं.
एस. जयशंकर ने कहा, “कुछ सिलेब्रिटीज़ ने कुछ कारणों से ऐसे विषयों पर राय ज़ाहिर की जिनकी उन्हें बहुत जानकारी नहीं थी और इसी वजह से विदेश मंत्रालय को प्रतिक्रिया देनी पड़ी.”
उन्होंने ये भी कहा है कि टूलकिट की जांच में बहुत कुछ पता चला है और अधिक जानकारियां मिलने का इंतज़ार है.
दिल्ली पुलिस ने पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग की तरफ़ से ट्वीट की गई एक 'प्रोटेस्ट टूलकिट' को लेकर एफ़आईआर दर्ज की है.
18 वर्षीय थनबर्ग ने बुधवार को टूलकिट ट्वीट की थी. उन्होंने ये ट्वीट डिलीट कर दिया था और बाद में एक और ट्विट में फिर से टूलकिट ट्वीट किया था.
इस दस्तावेज़ में बताया गया है कि कैसे किसान प्रदर्शनों का सोशल मीडिया पर समर्थन करें और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाएं.
दिल्ली पुलिस ने गूगल और सोशल मीडिया कंपनियों को ईमेल लिखकर इस दस्तावेज़ को तैयार करने वाले लोगों के बारे में जानकारी मांगी है.
पॉप स्टार रिहाना, पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग और अमेरिकी उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस की रिश्तेदार मीरा हैरिस ने भारत में चल रहे किसान आंदलोन के समर्थन में ट्वीट किए थे जिनके बाद दुनियाभर में इस आंदोलन की मीडिया कवरेज हुई है.
भारत के विदेश मंत्रालय ने इसे प्रोपेगेंडा बताते हुए इसके ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर अभियान चलाया था जिसके तहत भारत के बड़े सितारों ने ट्वीट किए थे.
इनमें क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, गायिका लता मंगेशकर, अभिनेता अक्षय कुमार भी शामिल हैं.
ब्रेकिंग न्यूज़, कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी की अब तक रिहाई न होने पर चिदंबरम ने किया ट्वीट
कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से अतंरिम ज़मानत मिलने के बाद शनिवार देर शाम पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने ट्वीट करके पूछा है कि फ़ारूक़ी को अब तक रिहा क्यों नहीं किया गया है?
उन्होंने ट्वीट में लिखा, “मुनव्वर फ़ारूक़ी को अब तक जेल से रिहा क्यों नहीं किया गया है जबकि सुप्रीम कोर्ट से कल सुबह उनको अंतरिम ज़मानत दी जा चुकी है.”
उन्होंने अगले ट्वीट में लिखा, “इस आदेश को जारी हुए तक़रीबन 30 घंटे हो चुके हैं. अभी भी आदेश को एमपी पुलिस और जेल प्रशासन नज़रअंदाज़ कर रहा है. क्या यह एमपी के मुख्यमंत्री की जानकारी में या उनकी जानकारी के बिना हो रहा है?”
'बीबीसी इंडिया बोल', किसानों ने किया चक्का जाम, कितनी कारगर होगी ये रणनीति? विवादित क़ानूनों को वापस लेगी सरकार या गतिरोध यूं ही जारी रहेगा? आज इंडिया बोल में इसी मुद्दे पर चर्चा सुनिए संदीप सोनी के साथ.
रिहाना के बाद अब हॉलीवुड स्टार सुज़ेन सरांडन भी किसानों के समर्थन में उतरीं
रिहाना, लिली सिंह और जे सीन जैसी सेलिब्रिटीज़ के बाद अब हॉलीवुड स्टार सुज़ेन सरांडन ने भी किसानों के आंदोलन के समर्थन में ट्वीट किया है.
सुज़ेन ने ट्वीट किया है, “भारत में किसानों के विरोध-प्रदर्शन के साथ खड़ी हूँ. पढ़िए कि वे कौन हैं और क्यों विरोध कर रहे हैं.”
इस ट्वीट के साथ उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट का लिंक शेयर किया है जिसका शीर्षक, “भारत में किसान विरोध-प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?”
अभिनेत्री जमीला जमील ने भी किसानों के आंदोलन को अपने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में समर्थन दिया है. उन्होंने लिखा है कि उन्हें विरोध कर रहे किसानों का समर्थन करने की वजह से लगातार महिला विरोधी अपशब्दों का सामना करना पड़ रहा है.
रात 12 बजे तक दिल्ली के सिंघु, ग़ाज़ीपुर और टिकरी बॉर्डर पर इंटरनेट बंद रहेगा
दिल्ली के सिंघु, ग़ाज़ीपुर और टिकरी बॉर्डर और उसके आसपास के इलाकों में आज 11.59 तक इंटरनेट बंद रहेगा.
प्रशासन की तरफ से कहा गया है कि सार्वजनिक सुरक्षा और किसी भी आपात स्थिति को टालने के लिए यह फैसला लिया गया है.
इससे पहले हरियाणा सरकार ने सोनीपत और झज्जर में शाम पांच बजे तक इंटरनेट बंद रखने की घोषणा की थी जिसकी वजह से सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर इंटरनेट सेवा प्रभावित होती.
जनवरी के महीने में किसानों के आंदोलन के मद्देनज़र हरियाणा सरकार ने 29 जनवरी को 17 ज़िलों में 30 जनवरी तक इंटरनेट सेवाएं बंद करने की घोषणा की थी.
ब्रेकिंग न्यूज़, बातचीत के लिए तैयार लेकिन दबाव में कोई बातचीत नहीं होगी - राकेश टिकैत
किसानों के देशभर के 'चक्का जाम' के बाद राकेश टिकैत ने खुले मंच से अपने भाषण में कहा है कि 'हम बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन दबाव में आकर कोई बातचीत नहीं होगी बल्कि बराबरी में आकर बातचीत होगी.'
उन्होंने कहा, "हमने सरकार को क़ानून रद्द करने के लिए 2 अक्टूबर तक समय दिया है. उसके बाद हम आगे की योजना बनाएंगे."
उन्होंने कहा कि 'हमारा मंच भी वही होगा और पंच भी वही होगा. वो कील बोएंगे हम फसल बोएंगे.'
उन्होंने कहा कि 'बिना एमएसपी पर कानून बनाए हम घर वापस नहीं जाने वाले हैं. कोई यह गलतफहमी में ना रहे कि तीनों क़ानून वापस ले लेंगे और आंदोलन ख़त्म हो जाएगा. एमएसपी पर गारंटी देने को लेकर क़ानून बनाना होगा.'
राकेश टिकैत ने कहा कि जो लोग यहाँ ट्रैक्टर लेकर आए उनके यहाँ नोटिस भेजा रहा है. मैं पूछता हूँ कि किस क़ानून के तहत लिखा है कि ट्रैक्टर सड़कों पर नहीं चल सकता.
पश्चिम बंगाल की जनता ममता को 'गुडबाय' कहने को तैयार- जेपी नड्डा
पश्चिम बंगाल के दौरे पर गए बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा है कि प्रदेश की जनता आने वाले चुनावों में ममता बनर्जी को ‘गुडबाय’ कहने और बीजेपी को सत्ता सौंपने के लिए तैयार हो चुकी है.
नड्डा एक महीने के कृषक सुरक्षा अभियान के आखिरी दौर के सिलसिले में बंगाल पहुँचे थे. उन्होंने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी नीतियों की वजह से प्रदेश में विकास नहीं हो सका है.
उन्होंने ममता बनर्जी पर हमला करते हुए कहा कि उनके अहंकार की वजह से प्रदेश में किसानों को प्रधानमंत्री किसान योजना का लाभ नहीं मिला.
उन्होंने कहा कि ममता बंगाल में किसानों के साथ अन्याय कर रही हैं.
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत देशभर के किसानों को 6000 रुपये देते हैं लेकिन ममता अपने अहंकार की वजह से इस योजना को बंगाल में लागू नहीं होने दे रही हैं. इसकी वजह से 70 लाख किसान पिछले दो सालों में सालाना 6000 रुपये से वंचित रहे हैं.”
उन्होंने प्रदेश में कृषि को लेकर मूलभूत सुविधाओं के अभाव के लिए भी ममता सरकार को दोषी ठहराया.
सरियों और कीलों की जगह गांव की मिट्टी और पौधे
जब सीनियर टिकैत के कहने पर दिल्ली में जुट गए थे लाखों किसान
, पंजाब में पटियाला के पास नेशनल हाइवे-7 पर भी किसानों ने चक्का जाम किया है. उनसे बात कर रहे हैं बीबीसी संवाददाता अरविंद छाबड़ा
ब्रेकिंग न्यूज़, किसानों के चक्का जाम को लेकर दिल्ली में पुलिस की भारी सख़्ती
26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के 10 दिनों के बाद एक बार फिर प्रदर्शनकारी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली को छोड़कर दोपहर से तीन घंटों का चक्का जाम कर रहे हैं.
हालांकि फिर भी शहरों के अंदर प्रशासन कोई जोखिम नहीं ले रहा है और एहतियात बरते हुए है.
संयुक्त किसान मोर्चा ने तीनों कृषि क़ानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर चक्का जाम का आह्वान किया है. यह पूरे देश के सभी अहम राष्ट्रीय और राजकीय उच्च मार्गों पर किया जा रहा है.
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा था, "उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली में कोई सड़क जाम नहीं किया जाएगा. इसके अलावा पूरे देश में चक्का जाम होगा. इसकी वजह यह है कि कभी भी दिल्ली बुलाया जा सकता है इसलिए इसे स्टैंड बाई पर रखा गया है."
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली के आसपास सभी धरना स्थलों पर पहले से ही चक्का जाम है.
फिर भी दिल्ली में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था लगाई गई है और बैरिकेडिंग मज़बूत की गई है. इससे दिल्ली के कई अहम रास्तों पर ट्रैफिक जाम होने की संभावना है.
दिल्ली की तीन सीमाओं सिंघु, टिकरी और ग़ाज़ीपुर में अतिरिक्त एहतियात बरता जा रहा है.
ग़ाज़ीपुर में वाटर कैनन तैनात किए गए हैं. टिकरी बॉर्डर पर 20 स्तरो पर अवरोधक खड़े किए गए हैं. इसमें कांक्रीट की दीवार से लेकर कंटीले तार तक शामिल हैं.
यहाँ तक की सबसे संकीर्ण रास्तों को भी बंद कर दिया गया है. लाल किले के पास भी अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है. क़रीब 50,000 पुलिस वाले, पैरामिलिट्री बल और रिजर्व बल दिल्ली-एनसीआर में तैनात किए गए हैं. पुलिस ने बताया है कि 12 मेट्रो स्टेशन को एलर्ट पर रखा गया है. इनमें से आठ स्टेशनों से प्रवेश बंद कर दिए गए हैं.
दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिशनर आलोक कुमार ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा है, "26 जनवरी से सुरक्षा व्यवस्था मज़बूत कर दी गई है. ऊपर से नज़र रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है. संवेदनशील इलाक़ों में सीसीटीवी कैमरा लगाए गए हैं."
पुलिस हाई अलर्ट पर है. वो सोशल मीडिया पर अफ़वाह फैलाने वालों पर नज़र बनाए हुए हैं. दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता चिनमॉय बिस्वाल ने बताया,"हम दूसरे राज्यों की पुलिस के साथ संपर्क में है.”
तीन प्रमुख धरना स्थलों पर पहले से ही इंटरनेट बंद किए जा चुके हैं.
एनएफआईडब्लू की एनी राजा ने आईटीवो के पास किसान आंदोलनों के कई महिला समर्थकों के साथ मार्च किया. उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस विरोध-प्रदर्शन करने से रोक रही है. यह सिर्फ़ किसानों का सवाल नहीं है यह देश के सभी नागरिकों के जीवन-मरण का सवाल है.
महिलाओं ने मार्च के दौरान नारा लगाया, “किसान विरोधी बिल वापस लो.”
मार्च के दौरान पुलिस ने महिलाओं को जबरदस्ती हिरासत में भी लिया.
हर पाकिस्तानी के ऊपर अब एक लाख 75 हज़ार रुपए का क़र्ज़
पाकिस्तान की सरकार ने संसद में बताया है कि पिछले वित्तीय वर्ष के अंत में पाकिस्तान में प्रति व्यक्ति क़र्ज़ अब बढ़कर एक लाख 75 हज़ार रुपए हो चुका है. इसके साथ ही दो साल के अंदर हर पाकिस्तानी नागरिक के ऊपर 54,901 रुपए का अतिरिक्त बोझ बढ़ा है. यह क़रीब 46 फ़ीसद का इजाफा है.
वित्त वर्ष 2020-21 के राजकोषीय नीति बयान में वित्त मंत्रालय ने यह भी माना है कि सरकार राजकोषीय घाटे को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के चार फ़ीसद तक कम करने में नाकाम रही है. इस तरह से उसने 2005 के ऋण सीमा अधिनियम (एफ़आरडीएल एक्ट) का उल्लंघन किया है.
कुल रोजकोषीय घाटा जीडीपी का 8.6 फ़ीसद रहा है जो कि इस अधिनियम के तहत निर्धारित सीमा से दोगुना कम रहा है.
पाकिस्तान की संसद में राजकोषीय घाटे को लेकर यह रिपोर्ट गुरुवार को पेश की गई. हालांकि यह संभवतः अब तक की सबसे कम जानकारी वाली राजकोषीय रिपोर्ट है.
अधिकारियों का कहना है कि ऋण नीति कार्यालय ने तो वित्त मंत्रालय को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी लेकिन उसे महज 11 पन्नों का करने का आदेश हुआ.
जबकि एफ़आरडीएल एक्टके तहत सरकार इस बात को लेकर बाध्य है कि राजकोषीय नीति के ऊपर आई रिपोर्ट में “केंद्र सरकार की ओर से राजकोष को लेकर सभी संभावित नीतियों के फैसले का विस्तार से विश्लेषण शामिल किया जाए.”
पाकिस्तानी अख़बार एक्सप्रेस ट्रिब्युन के अनुसार 11 पन्नों की इस रिपोर्ट में कई अप्रासंगिक जानकारियाँ दी गई हैं और ज़्यादातर महत्वपूर्ण जानकारियाँ जो 2019-20 के दौरान नीतियों का हिस्सा रही हैं, वो ग़ायब थीं.
राजकोषीय नीति पर आई इस रिपोर्ट से पता चलता है कि पांच राज्य सरकारों का व्यय पिछले वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान 28 सालों में सबसे ज़्यादा रहा है. उसकी तुलना में अर्थव्यवस्था के कुल आकार के हिसाब से विकास के मद में खर्च 10 सालों में सबसे कम रहा है.
अर्थव्यवस्था के आकार के हिसाब से कुल व्यय 21 सालों में सबसे ज्यादा रहा है. यह जीडीपी का 23.1 फ़ीसद रहा है.
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महेंद्र सिंह टिकैत ने अचानक विशाल धरना क्यों ख़त्म कर दिया था