सिंघु बॉर्डर से गिरफ़्तार हुए पत्रकार मनदीप पुनिया ज़मानत पर रिहा हुए

बुधवार रात क़रीब सवा नौ बजे मनदीप को दिल्ली की तिहाड़ जेल से रिहा किया गया. वे केंद्रीय कारागार संख्या-8 में क़ैद थे.

लाइव कवरेज

  1. ब्रेकिंग न्यूज़, सिंघु बॉर्डर से गिरफ़्तार हुए पत्रकार मनदीप पुनिया ज़मानत पर रिहा हुए, बोले- ‘जेल से किसानों पर रिपोर्ट लिखकर लाया हूँ’

    मनदीप पुनिया

    स्वतंत्र पत्रकार मनदीप पुनिया ज़मानत पर जेल से रिहा हो गये हैं.

    बुधवार रात क़रीब सवा नौ बजे मनदीप को दिल्ली की तिहाड़ जेल से रिहा किया गया. वे केंद्रीय कारागार संख्या-8 में क़ैद थे.

    जेल से बाहर आकर उन्होंने प्रेस से बात की. इस दौरान उन्होंने कहा कि ‘वे पत्रकारिता की अपनी ड्यूटी पहले की तरह जारी रखेंगे.’

    बीबीसी संवाददाता प्रशांत चाहल से बातचीत में मनदीप पुनिया ने कहा कि “मैं उन सभी पत्रकार बंधुओं का शुक्रिया अदा करूंगा जो मेरे साथ खड़े रहे. ईमानदार रिपोर्टिंग की इस वक़्त हमारे देश को बहुत ज़रूरत है. मगर ऐसे समय में, जब सरकार लोगों से कुछ छिपाना चाह रही हो, तब पत्रकारिता करना मुश्किल हो जाता है. सत्ता को सच का पता होता है, पर वो सच लोगों को पता चलना चाहिए. पत्रकारिता का पेशा, कोई ग्लैमर से भरपूर पेशा नहीं है. ये बड़ा मुश्किल काम है और इस मुश्किल काम को भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में बड़ी ईमानदारी से किया जा रहा है.”

    उन्होंने कहा, “मैं देश के संविधान में विश्वास रखता हूँ. मुझे ज़मानत मिली, इसके लिए मैं माननीय अदालत को धन्यवाद कहूंगा, पर क्या मेरी गिरफ़्तारी होनी चाहिए थी? ये बड़ा सवाल है.”

    गिरफ़्तार होने से पहले, मनदीप पुनिया क़रीब दो महीने से किसान आंदोलन को कवर कर रहे थे. इस बीच उन्होंने कुछ फ़ेसबुक लाइव भी किये थे जिनमें उन्होंने सिंघु बॉर्डर पर हुई पत्थरबाज़ी के बारे में विस्तार से चर्चा की थी.

    जेल से रिहा होने के बाद मनदीप ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बारे में कोई बात नहीं की.

    लेकिन स्वतंत्र पत्रकारों के ख़िलाफ़ लगातार हो रहे मुक़दमों पर उन्होंने सवाल किया. उन्होंने कहा कि ‘केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन जैसे पत्रकारों को रिहा किया जाना चाहिए.’ उत्तर प्रदेश में हाथरस पीड़िता के घर जाते वक़्त स्वतंत्र पत्रकार सिद्दीक कप्पन को गिरफ़्तार कर लिया गया था.

    रिहा होने के बाद मनदीप ने एक ट्वीट भी किया है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि “मुझे रिपोर्टिंग करने से रोका गया और जेल भेज दिया गया. मैंने जेल में गिरफ़्तार हुए किसानों से बातचीत की है और उन पर लोग जल्द ही मेरी रिपोर्ट पढ़ेंगे. जेलों में बंद अन्य पत्रकारों को रिहा किया जाना चाहिए. पत्रकारों का काम होता है ग्राउंड ज़ीरो से रिपोर्ट करना और वो हम करते रहेंगे.”

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    क्या है पूरा मामला?

    शनिवार शाम क़रीब सात बजे सिंघु बॉर्डर से मनदीप पुनिया को दिल्ली पुलिस ने गिरफ़्तार किया गया था.

    दिल्ली पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ भारतीय दण्ड संहिता की धारा-186 (सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालना), 353 (सरकारी कर्मचारी पर हमला करना), 332 (जान-बूझकर व्यवधान डालना) और 341 (गै़र-क़ानूनी हस्तक्षेप) के तहत मुक़दमा दर्ज किया.

    इस पर सुनवाई करते हुए मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने रविवार को उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. लेकिन मंगलवार को चीफ़ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट सतवीर सिंह लांबा की कोर्ट ने 25 हज़ार रुपये के निजी मुचलके पर मनदीप को ज़मानत दे दी.

    शनिवार को एक वायरल वीडियो के ज़रिये मनदीप की गिरफ़्तारी का पता चला था. उस वीडियो में पुलिस एक व्यक्ति को खींचकर ले जाने की कोशिश करती हुई दिख रही थी.

    इसके बाद देर रात मनदीप पुनिया के बारे में पत्रकारों ने ट्वीट करना शुरू किया कि पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया है, लेकिन उन्हें कहाँ ले जाया गया इसकी जानकारी सुबह तक लोगों को नहीं मिल सकी थी.

  2. ब्रेकिंग न्यूज़, ICJ में ईरान की जीत, अमेरिका के लगाए प्रतिबंधों पर कोर्ट करेगा सुनवाई

    अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (आईसीजे) ने कहा है कि वो अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने के संबंध में लाए गए ईरान के मामले की सुनवाई करेगा.

    हेग स्थित आईसीजे में बुधवार को 16 जजों की खंडपीठ ने इस मामले को न सुनने को लेकर अमेरिका की गुज़ारिश को खारिज कर दिया है.

    अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से अपने हाथ खींच लिए थे और उस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे. ईरान की अर्थव्यवस्था पर इन प्रतिबंधों का गंभीर असर पड़ा है.

    ईरानी विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने आईसीजे के फ़ैसले को ईरान की क़ानूनी जीत करार दिया है. उन्होंने कहा है कि अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय समझौतों का सम्मान करना चाहिए.

    अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ऑफ़ जस्टिस

    इमेज स्रोत, www.icj-cij.org

  3. #IndiaAgainstPropaganda हैशटैग से लता मंगेशकर ने भी किया ट्वीट

    #IndiaAgainstPropaganda इस समय भारत में टॉप ट्विटर ट्रेंड बना हुआ है. कई सेलेब्रिटीज़ और राजनेताओं ने इस हैशटैग के साथ ट्विटर पर अपने विचार रखे हैं.

    'स्वर कोकिला' लता मंगेशकर ने भी ट्विटर पर अपने विचार साझा किये हैं.

    उन्होंने लिखा है- भारत एक गौरवशाली राष्ट्र है. एक गौरवांवित भारतीय होने के नाते मेरा पूरा यक़ीन है कि बतौर राष्ट्र हमारी कोई भी समस्या हो या परेशानी, हम उसे सौहार्दपूर्ण तरीक़े से, जनहित की भावना के साथ हल करने में पूरी तरह से सक्षम हैं.

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  4. किसान आंदोलन को लेकर लोकसभा में हंगामा, कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित

    एक तरफ दिल्ली की सरहदों पर किसान डटे हुए हैं तो दूसरी तरफ किसानों के मुद्दों को लेकर संसद में भी शोर जारी है.

    बुधवार को लोकसभा में बार-बार विपक्ष ने किसान आंदोलन और केंद्र सरकार द्वारा पास किए गए कृषि क़ानूनों का मुद्दा उठाया जिसके कारण चार बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.

    तीसरी बार सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद जब शाम सात बजे जब सदन की कार्यवाही एक बार फिर शुरू हुई, बीजेपी नेता मीनाक्षी लेखी ने विपक्ष से अपील की कि वो शांतिपूर्वक तरीके से सदन का काम आगे बढ़ने दें. उन्होंने कहा, “संसद मुद्दों पर चर्चा करने के लिए है.”

    हालांकि विपक्ष का शोर जारी रहा और सदन को नौ बजे तक स्थगित करना पड़ा. नौ बजे भी विपक्ष से शोरशराबे के बीच सदन लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को कल तक के लिए सदन की कार्यवाही रोकनी पड़ी.

    उन्होंने कहा, "जनता ने आपको तालियां बजाने और नारे लगाने के लिए सदन में नहीं भेजा. आपको चर्चा करने, बहस करने के लिए भेजा गया है. आप जनता के मुद्दे उठाइए."

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    सदन को आज 4.30 तक, 5 बजे तक, सात बजे तक फिर 9 बजे तक स्थगित करना पड़ा था.

    बुधवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद से ही विपक्ष के नेता सरकार से तीनों कृषि क़ानूनों को वापिस लेने की मांग कर रहे थे.

  5. चीनी कोरोना वैक्सीन के साथ पाकिस्तान ने शुरू किया टीकाकरण अभियान

    पाकिस्तान ने चीन में बनी कोरोना वायरस वैक्सीन के साथ अपने फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया है. सबसे पहले देश में स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना का टीका दिया जाएगा.

    इस्लामाबाद समेत देश के अन्य हिस्सों में अस्पतालों के कोरोना वार्ड में काम करने वाले डॉक्टरों को आज कोरोना वैक्सीन का पहला इंजेक्शन दिया गया है.

    चीन ने साइनोफार्म की बनाई कोरोना वैक्सीन की दस लाख खुराक पाकिस्तान को दी है, जिसके साथ यहां टीकाकरण अभियान की शुरुआत की गई है.

    पाकिस्तान के योजना मंत्री असद उमर ने वैक्सीन के लिए चीन का धन्यवाद किया और कहा पाकिस्तान चीन से और भी वैक्सीन खरीदने वाला है.

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    असद उमर ने कहा, “फिलहाल हमने चीन की उन दो कंपनियों से कोरोना की वैक्सीन खरीदने का फ़ैसला किया है जिनसे साथ हम पहले से बातचीत कर रहे थे. इनमें से एक वैक्सीन का ट्रायल पाकिस्तान में हुआ है. बड़ी मात्रा में वैक्सीन खरीदने के लिए हम पहले ही बुकिंग कर चुके हैं. जैसे ही इन वैक्सीन के ट्रायल के नतीजे आ जाएंगे हम वैक्सीन खरीदना शुरु कर देंगे.”

  6. ट्विटर को किसानों के जनसंहार संबंधी सामग्रियों पर नोटिस, कार्रवाई की चेतावनी

    ट्विटर

    इमेज स्रोत, REUTERS/Kacper Pempel

    केंद्र सरकार ने ट्विटर को किसान आंदोलन से जुड़े कुछ हैशटैग्स पर नोटिस जारी करते हुए दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई ने ख़बर दी है कि सरकार ने ट्विटर को किसानों का जनसंहार होने संबंधी हैशटैग्स से जुड़ी सामग्रियों को हटाने के अपने आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है.

    ऐसा नहीं करने पर उसके ख़िलाफ़ 'दंडात्मक कार्रवाई' की चेतावनी दी गई है.

    एजेंसी ने सरकारी सूत्रों के हवाले से लिखा है कि ट्विटर ने ऐसी सामग्रियों को ब्लॉक करने के आदेश के बावजूद ऐसे कई खातों और ट्वीट्स को अनब्लॉक कर दिया था.

    सरकार ने अपनी नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के आधा दर्जन फ़ैसलों का हवाला देते हुए बताया है कि सरकारी आदेश क्या होता है और अधिकारियों के क्या अधिकार हैं.

    आईटी मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि ट्विटर अदालत की भूमिका नहीं निभा सकता और आदेश का पालन नहीं करने को जायज़ नहीं ठहरा सकता.

    भारत सरकार ने 30 जनवरी को ट्विटर को ऐसे लगभग 250 ट्वीट्स और ट्विटर अकाउंट्स को ब्लॉक करने का आदेश दिया था जिनमें ऐसे हैशटैग्स लगे थे जिनमें बिना किसी आधार के आरोप लगाया गया था कि मोदी सरकार किसानों का 'जनसंहार' करने की योजना बना रही है.

  7. बिहार: विरोध प्रदर्शन करने पर नहीं बनेगा चरित्र प्रमाणपत्र, ना सरकारी नौकरी मिलेगी ना सरकारी ठेका

    नीरज प्रियदर्शी

    बीबीसी हिंदी के लिए, पटना से

    प्रदर्शन

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    बिहार सरकार के डीजीपी के हवाले से जारी एक आदेश ने विवादों को जन्म दे दिया है.

    नागरिकों के चरित्र प्रमाण पत्र जारी करने से जुड़े इस आदेश में साफ - साफ लिखा है, "यदि कोई व्यक्ति विधि-व्यवस्था की स्थिति, विरोध प्रदर्शन, सड़क जाम, इत्यादि मामलों में संलिप्त होकर किसी आपराधिक कृत्य में शामिल होता है और उसे इस कार्य के लिए पुलिस द्वारा चार्जशीट किया जाता है तो उनके संबंध में चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन में विशिष्ट एवं स्पष्ट रूप से प्रविष्टि की जाये. ऐसे व्यक्तियों को गंभीर परिणामों के लिए तैयार रहना होगा क्योंकि उन्हें सरकारी नौकरी/ठेके आदि नहीं मिल पायेंगे."

    बिहार सरकार की ओर से इसके पहले भी सोशल मीडिया पर सरकारी अधिकारियों, नेताओं के बारे कथित रूप से अभद्र और आपत्तिजनक लिखने पर पाबंदी लगााई जा चुकी है जिसे लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए गए थे. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस सरकारी आदेश के हवाला देते हुए इसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का तुगलकी फरमान करार है.

    उन्होंने कहा है, "मुसोलिनी और हिटलर को चुनौती दे रहे नीतीश कुमार कहते है अगर किसी ने सत्ता व्यवस्था के विरुद्ध धरना-प्रदर्शन कर अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग किया तो आपको नौकरी नहीं मिलेगी, मतलब नौकरी भी नहीं देंगे और विरोध भी प्रकट नहीं करने देंगे. बेचारे 40सीट के मुख्यमंत्री कितने डर रहे है?"

    सवाल पुलिस विभाग से भी पूछे जा रहे हैं कि इस तरह का आदेश सरकार के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन करने के लोकतांत्रिक अधिकार को छीनना है.

    पुलिस मुख्यालय के एडीजी जितेंद्र कुमार कहते हैं,"इस आदेश का गलत मतलब निकाला जा रहा है. किसी का भी चरित्र प्रमाणपत्र जारी करने के लिए उसके पिछले आपराधिक रिकॉर्ड को देखा जाता है. जहां तक बात सड़क जाम करने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के लोकतांत्रिक अधिकार की है तो वह हमेशा अक्षुण्ण रहेगा. आदेश में स्पष्ट लिखा हुआ है कि आपराधिक संलिप्तता पाए जाने और चार्जशीट होने पर ही कार्रवाई होगी."

    अपनी सरकार के आदेश का बचाव जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार भी करते हैं, वे कहते हैं,"आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई तो पहले से होती आई है. विपक्ष का काम ही है सरकार का दुष्प्रचार करना. संविधान के अनुच्छेद 19 (ब)) के तहत हर नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है. हमारी पार्टी और सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है."

  8. बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर'

    बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', सुनिए फ़ैसल मोहम्मद अली से.

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  9. ब्रेकिंग न्यूज़, किसान आंदोलनः मोदी सरकार का चलना मुश्किल हो जाएगा, राकेश टिकैत की चेतावनी

    राकेश टिकैत

    इमेज स्रोत, EPA/Harish tyagi

    भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत ने मोदी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर कृषि क़ानून वापस नहीं हुए तो उनका सत्ता में बने रहना मुश्किल हो जाएगा.

    हरियाणा के जींद ज़िले में किसानों की महापंचायत में टिकैत ने कहा कि किसान आंदोलन धीमा नहीं होगा और “इस आंदोलन का कोई नेता नहीं हैं, इसके नेता किसान हैं.“

    उन्होंने कहा, “आंदोलन लंबा चलेगा और धीमा नहीं होगा. हमारे जिन किसान प्रतिनिधियों से सरकार बातचीत कर रही थी, उनसे सरकार बातचीत करना जारी रखे. जो भी वो कहेंगे वो हम करेंगे.”

    टिकैत ने मोदी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, "सरकार कान खोलकर सुन ले, हमने अभी बिल वापसी की बात की है, अगर इस नौजवान ने गद्दी वापसी की बात कर दी तो क्या करोगे?"

    ”इस आंदोलन को कोई दबा नहीं कर सकते, हमारी ये लड़ाई ज़मीन बचाने की है. हम तिजोरी में अनाज बंद नहीं होने देंगे.”

    दिल्ली में किसानों को जमा होने से रोकने की कोशिशों पर हमला करते हुए टिकैत ने नारे लगवाते हुए कहा - "जब-जब राजा डरता है, किलेबंदी करता है."

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    महापंचायत के दौरान मंच टूटने पर उन्होंने कहा “पंचायत में मंच टूट गया, अच्छा हुआ, भाग्यवान लोगों के मंच टूटते हैं... ये लोग भी वही हैं, ये ट्रैक्टर भी वही हैं. “

    समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार जींद में मौजूद एक किसान निर्मल सिंह ने कहा कि “किसान पहले कह चुके हैं कि क़ानून वापस न होने तक हम डटे रहेंगे.“

    एक और किसान संसार सिंह ने कहा कि “किसान बहुत मुसीबत में हैं. मोदी जी और मनोहर लाल खट्टर जी किसानों को झूठा आश्वासन दे रहे हैं. क़ानून न वापस हुआ तो हम वापस नहीं जांएंगे.“

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  10. रिहाना के ट्वीट के बाद सरकार के समर्थन में आए सचिन, विराट और लता मंगेशकर

  11. ब्रेकिंग न्यूज़, RSS के लोगों को छोड़कर बाक़ी सब आतंकवादी हैं: राहुल गांधी

    राहुल गांधी

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    राहुल गांधी ने कहा कि किसान आंदोलन के चलते भारत की छवि को बड़ा धक्का लगा है.

    अब से थोड़ी देर पहले हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेस में उन्होंने कहा, "आज जो कुछ किसानों के साथ हो रहा है उसे देखा जाए तो भारत की छवि को धक्का लगा है और सवाल ये उठ रहा है कि देश अपने नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार कर रहा है."

    उन्होंने कहा, “किसान अपना हक़ मांग रहे हैं. किसान लड़ रहे हैं तो उन्हें आतंकवादी कहा जा रहा है. क्या RSS के लोगों को छोड़कर बाक़ी सब आतंकवादी हैं?“

    “मैंने पहले भी सवाल किया है कि लोगों को लाल क़िले में क्यों घुसने दिया गया, ये जवाब गृह मंत्री को देना होगा.“

    प्रेस कॉन्फ्रेस में उन्होंने किसानों के मुद्दों के साथ-साथ भारत-चीन सीमा विवाद का भी ज़िक्र किया और कहा “सच बात तो ये है कि सरकार अब इस स्थिति को काबू कर नहीं पा रही है और बीजेपी की नकामी अब सामने आ रही है. मैं देख सकता हूं कि हमारे सामने बेहद मुश्किल स्थिति है और ये देश के लिए ख़तरनाक़ है.“

    “देश की जरूरत है कि प्रधानमंत्री छोटे और मध्यम बिज़नेस को पैसा दें और अर्थव्यवस्था को बढ़ाए जो अपने आप में चीन को भी कड़ा संदेश साबित होगा. प्रधानमंत्री से मेरी गुज़ारिश है कि वो अपना काम करें, उनका काम किसानों के हाथ पकड़ कर उनसे पूछना है कि उन्हें क्या चाहिए.“

    चीन को लेकर उन्होंने कहा, “चीन हिंदुस्तान के भीतर आ कर हमारी हज़ारों किलोमीटर की ज़मीन ले जाता है लेकिन आपने चीन को संदेश दिया कि हम सेना के लिए अपना बजट नहीं बढ़ांगे, हम अपनी सेना को सपोर्ट नहीं करेंगे.“

    “लद्दाख में तैनात हमारे सैनिक भी यही सोच रहे होंगे की मुश्किलों के बीच सरकार सेना को पैसा नहीं दे रही है. इस वक्त हमारी सेना की कमिटमेन्ट सौ फीसदी है और ऐसे में सरकार की कमिटमेंट एक सौ दस फीसद होनी चाहिए.“

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  12. ट्रैक्टर रैली: हिंसा की जाँच से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

    सुप्रीम कोर्ट ने 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा की जाँच की माँग करनेवाली याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है.

    बीबीसी के सहयोगी पत्रकार सुचित्र मोहन्ती के मुताबिक़ मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े और न्यायाधीश एएस बोपन्ना तथा वी रामसुब्रह्मण्यम की खंडपीठ ने ट्रैक्टर रैली के दौरान हिंसा से संबंधित तीनों याचिकाकर्ताओं को अपनी माँग को सरकार के सामने रखने के लिए कहा.

    न्यायाधीश बोबड़े ने कहा,"हमें विश्वास है कि सरकार इस दिशा में जाँच कर कार्रवाई कर रही है. हमने प्रेस में देखा कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि क़ानून अपना काम करेगा, तो हम इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहते. आप सरकार के पास जा सकते हैं."

    अदालत ने साथ ही मीडिया के बारे में दायर उस याचिका को भी ठुकरा दिया जिसमें कहा गया था कि अदालत मीडिया को निर्देश दे कि वो बिना किसी प्रमाण के किसानों को "आतंकवादी" ना कहे.

    किसान आंदोलन

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  13. जींद में किसानों की महापंचायत के दौरान स्टेज टूटा

    हरियाणा के जींद ज़िले में किसानों की महापंचायत के दौरान स्टेज टूट गया.

    महापंचायत में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में किसान वहां पहुंचे थे. यहां किसान नेता राकेश टिकैत भी मौजूद थे.

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  14. किसानों के समर्थन में आम लोगों और छात्र संगठनों ने निकाला मार्च

    दिल्ली की सीमाओं पर बैठकर तीन क़ृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे किसानों के समर्थन में कुछ छात्र संगठनों और आम लोगों ने बुधवार सुबह मंडी हाउस से एक जुलूस निकाला.

    इस मार्च में बच्चों से लेकर बूढ़ों और छात्रों ने हिस्सा लिया. मार्च में शामिल होने वाले लोगों ने भारत सरकार से तीनों क़ानूनों को वापस लेने की अपील की.

    देखें तस्वीरें –

    किसान आंदोलन
    किसान आंदोलन
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    किसान आंदोलन
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  15. ब्रेकिंग न्यूज़, कोरोना: सऊदी अरब ने भारत समेत 20 देशों के लोगों की यात्रा पर लगाई पाबंदी

    सऊदी

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    सऊदी अरब ने मंगलवार को कोरोना वायरस महामारी के मद्देनज़र 20 देशों के लोगों को अपने यहां आने पर प्रतिबंध लगा दिया है और इनमें भारत भी शामिल है.

    सऊदी अरब ने महामारी को फैलने से रोकने के लिए अमेरिका पर भी यह अस्थाई प्रतिबंध लगाया है लेकिन इसमें राजनयिकों, सऊदी नागरिकों, स्वास्थ्यकर्मियों और उनके परिवारों को छूट दी गई है.

    समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार, सऊदी अरब ने इस सूची में अपने पड़ोसी राष्ट्रों मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात को भी शामिल किया है.

    इनके अलावा तुर्की, आयरलैंड, इटली, पुर्तगाल, स्वीडन, स्विट्ज़रलैंड, अर्जेंटीना, ब्राज़ील, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ़्रीका, पाकिस्तान भी इसमें शामिल हैं.

  16. खेल के किस्से LIVE: दुनिया के सभी बड़े बैडमिंटन टूर्नामेंटों में अपना लोहा मनवाने से लेकर ओलंपिक में सिल्वर मेडल तक...., बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु के अनसुने किस्से लेकर हाज़िर हैं रेहान फ़ज़ल और राखी शर्मा.

  17. FB Live: नई दिल्ली में मंडी हाउस पर किसानों के समर्थन में प्रदर्शन, नई दिल्ली में मंडी हाउस पर किसानों के समर्थन में प्रदर्शन. ज़्यादा जानकारी के साथ बीबीसी संवाददाता सलमान रावी. (कैमरा- देबलिन)

  18. किसान आंदोलन पर देश-दुनिया की नामचीन हस्तियों ने क्या-क्या कहा..

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  19. राष्ट्रद्रोह मामले में सुप्रीम कोर्ट जाएंगे थरूर और राजदीप सरदेसाई

    शशि थरूर

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    कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर और पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने अपने ख़िलाफ़ राष्ट्रद्रोह समेत कई धाराओं वाली एफ़आईआर के ख़िलाफ़ सर्वोच्च अदालत जाने का फ़ैसला किया है.

    उत्तर प्रदेश की नोएडा पुलिस ने शशि थरूर, राजदीप सरदेसाई, मृणाल पांडेय समेत कई पत्रकारों के ख़िलाफ़ 26 जनवरी को हुई हिंसा के मामले में एफ़आईआर दर्ज की थी.

    इस एफ़आईआर में शिकायतकर्ता ने लिखा था कि सरदेसाई समेत अन्य व्यक्तियों जिनके ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की गई है, उन्होंने जानबूझकर गुमराह करने वाली और उकसाने वाली ख़बर प्रसारित की.

    शिकायत में कहा गया था- "ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया कि पुलिस द्वारा आंदोलनकारी एक ट्रैक्टर चालक की हत्या कर दी. यह एक ज्ञात तथ्य है कि उपद्रवी तत्वों द्वारा उकसाने वाली कार्यवाही तथा बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों को घायल कर देने के बाद भी पुलिस बल द्वारा संयम का परिचय देते हुए व्यावसायिक दक्षता के साथ उन उपद्रवी लोगों को शांत कराया गया.''

    शिकायत में ये भी लिखा गया कि नामित अभियुक्तिगण द्वारा प्रदर्शनकारियों को हिंसा के लिए उकसाने और अपने राजनैतिक व व्यक्तिगत लाभ के लिए आंदोलनकारियों को भड़काने के उद्देश्य से जानबूझकर ग़लत और गुमराह करने वाली सूचना का प्रसारण किया गया. इनके ट्वीट्स से उत्पन्न माहौल के कारण प्रदर्शनकारी लाल क़िले के परिसर तक पहुंच गए. और वहां धार्मिक व अन्य झंडे लगा दिए जहां भारत का राष्ट्र ध्वज फहराया गया था.''

    इस एफ़आईआर में राजदीप सरदेसाई, मृणाल पांडेय, जफ़र आग़ा, परेशनाथ, अनंतनाथ और विनोद के. जोस समेत एक अज्ञात व्यक्ति का नाम शामिल किया गया था.

    इन लोगों के ख़िलाफ़ 153 –A, 153 – B, 295 – A, 298, 504, 506, 505 (2), 124 – A, 34, 120 – B और 66 जैसी धाराएं लगाई गई हैं.

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  20. दीप सिद्धू की जानकारी देने पर मिलेंगे 1 लाख रुपये: दिल्ली पुलिस

    दीप सिद्धू

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    दिल्ली पुलिस ने लाल क़िला हिंसा मामले में दीप सिद्धू की जानकारी देने पर 1 लाख रुपये का इनाम देने का फ़ैसला किया है.

    समाचार एजेंसी के मुताबिक़, दिल्ली पुलिस ने 26 जनवरी को हुई हिंसा के मामले में दीप सिद्धू, जुगराज सिंह, गुरजोत सिंह, गुरजंत सिंह के बारे में जानकारी देने पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है.

    वहीं, जजबीर सिंह, बूटा सिंह, सुखदेव सिंह और इक़बाल सिंह की जानकारी देने पर पचास हज़ार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है.

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