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कृषि में ऐसे सुधार किए गए हैं जो लंबे समय से अपेक्षित थे: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
72वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का राष्ट्र के नाम संदेश .दिनभर की ज़रूरी ख़बरों के लिए बीबीसी हिंदी के इस लाइव पन्ने से जुड़े रहें.
लाइव कवरेज
दिल्ली पुलिस ने कई रास्तों पर रखे कंटेनर
दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस कार्यक्रम से ठीक पहले कई रास्तों जैसे कि दौलतपुर एरिया, जीटी करनाल रोड समेत कई इलाकों पर आवाजाही प्रतिबंधित कर दी है.
कई इलाकों में वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए कंटेनरों का इस्तेमाल किया गया है.
दिल्ली पुलिस और किसान संगठनों के बीच तय कार्यक्रम के अनुसार, 26 जनवरी को राजपथ पर आधिकारिक गणतंत्र दिवस परेड की समाप्ति के तुरंत बाद, किसानों की परेड शुरू होगी.
ये परेड लगभग 100 किमी की दूरी तय करने के बाद, शाम छह बजे तक समाप्त हो जाएगी.
कर्नल संतोष बाबू को मरणोपरांत महावीर चक्र सम्मान
भारत सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ संघर्ष में मारे गए सैनिकों को वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया है.
पिछले साल पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 15/16 जून की दरमियानी रात को चीनी और भारतीय सैनिकों के संघर्ष में 20 भारतीय सैनिकों की मौत हुई थी.
भारत सरकार ने इस संघर्ष में मारे जाने वाले 16वीं बिहार रेजिमेंट के कर्नल संतोष बाबू को महावीर चक्र से सम्मानित किया है.
कर्नल बाबू के साथ में भारत सरकार ने 16वीं बिहार रेजीमेंट के नायब सूबेदार नुदुराम सोरेन को वीर चक्र (मरणोपरांत), 81 फील्ड के हवलदार के. पिलानी को वीर चक्र , 3 मीडियम के हवलदार तेजेंदर सिंह को वीर चक्र, 16 बिहार के नायक दीपक सिंह को वीर चक्र (मरणोपरांत) और 3 पंजाब के सिपाही गुरतेज सिंह को वीर चक्र (मरोपरांत) से नवाजे जाने की घोषणा की है.
इसके साथ ही 4 पैरा (एसएफ) के सूबेदार संजीव कुमार को कीर्ति चक्र (मरणोपरांत), 21 आरआर के मेजर अनुज सूद को शौर्य चक्र (मरणोपरांत), 6 असम राइफल्स के राइफलमैन प्रणब ज्योति दास और 4 पैरा (एसएफ) के पैराट्रूपर सोनम तेसरिंग तमांग को शौर्य चक्र से नवाजे जाने का ऐलान किया गया है.
यमुना एक्सप्रेस वे पर नहीं चढ़ने दिए गए किसान
समीरात्मज मिश्र
बीबीसी हिंदी के लिए
आगरा और मथुरा के आस-पास के किसान पिछले तीन दिन से 26 जनवरी को दिल्ली में होने वाली ट्रैक्टर रैली में हिस्सा लेने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन पुलिस और प्रशासन उन्हें यमुना एक्सप्रेस वे के किसी भी रास्ते से आने नहीं दे रहा है.
सोमवार को किसानों और पुलिस के बीच लगभग हर निकास स्थल पर टकराव की नौबत आई, किसानों ने नारेबाज़ी की लेकिन पुलिस ने सड़कों को सामान लदे ट्रकों को आड़े-तिरछे तरीक़े से खड़ा करके रास्ता रोक रखा है.
यही नहीं, उन जगहों से नीचे उतरने वालों को भी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ रहा है और घंटों लंबा जाम लग रहा है.
मथुरा के पास जावरा टोल पर तो किसानों ने सड़क के किनारे से सड़क की बैरिकेडिंग और कटीले तारों को तोड़कर एक्सप्रेसवे पर घुसने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उस कोशिश को नाकाम कर दिया. वहां मौजूद कई किसानों ने बीबीसी से बातचीत के दौरान बेहद आत्मविश्वास के साथ कहा कि वो 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली में ज़रूर जाएंगे, प्रशासन उन्हें चाहे जितना रोके.
किसान नेता गजेंद्र परिहार का कहना था, “पुलिस के लोगों को ऊपर से आदेश मिला है इसलिए वो भी मजबूर हैं लेकिन हम रात भर रास्ते तलाशते रहेंगे और सुबह आप हमें परेड में देखेंगे. हमने उन जगहों को तलाश रखा है जहां से हमें एक्सप्रेसवे पर चढ़ना है और फिर दिल्ली पहुंचना है.”
दिल्ली पुलिस ने किसानों को ट्रैक्टर रैली की अनुमति दे दी है, फिर भी यूपी सरकार किसानों को दिल्ली आने से रोक रही है. हालांकि इस बारे में पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी कुछ भी बताने से इनकार कर रहे हैं लेकिन जगह-जगह लगी बैरिकेडिंग साफ़ बता रही है कि किसानों को ट्रैक्टरों के साथ प्रशासन किसी भी क़ीमत पर दिल्ली नहीं जाने देना चाहता.
नौहझील टोल प्लाज़ा के पास किसानों से वार्ता कर रहे मांठ के पुलिस क्षेत्राधिकारी धर्मेंद्र चौहान ने साफ़तौर पर कहा कि ‘हम रास्ता रोके जाने की वजह आपको नहीं बता सकते हैं, हमारे उच्चाधिकारियों से पूछिए.’
इस बीच, एक किसान नेता का कहना था कि सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टर दिल्ली जा चुके हैं, हम लोग तो सिर्फ़ पुलिस और प्रशासन को उलझाए रखने के लिए यहां खड़े हैं. हालांकि यमुना एक्सप्रेसवे से उतरकर नोएडा और दिल्ली की ओर जाने वाला रास्ता पुलिस ने बंद कर दिया है और सिर्फ़ ग्रेटर नोएडा की ओर निकलने वाला रास्ता ही खुला है.
तमाम रुकावटों के बावजूद, ग्रेटर नोएडा और नोएडा एक्सटेंशन के पास दूर-दराज से आ रहे दर्जनों ट्रैक्टर और नारे लगाते किसान ज़रूर दिखे.
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बेंगलुरु में ट्रैक्टर के बिना ही प्रदर्शन करेंगे किसान
इमरान कुरैशी
बीबीसी हिंदी के लिए
हो सकता है कि कर्नाटक में गणतंत्र दिवस के मौक़े पर किसान ट्रैक्टरों के साथ प्रदर्शन करते ना दिखे लेकिन किसान संगठनों के नेताओं का अनुमान है कि कल राजधानी बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में 20 हज़ार से ज़्यादा किसान इकट्ठा होंगे.
कर्नाटक गन्ना उत्पादक संघ के अध्यक्ष कुरुबुर शांताकुमार ने बीबीसी हिंदी को बताया, “मैसूर और तुमकुर जैसी जगहों पर किसानों को अपने ट्रैक्टरों से उतरकर बसों या कारों पर चढ़ने के लिए कहा जा रहा है.”
एक ज़िले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पहचान छिपाने की शर्त पर बताया, “निर्देश हैं कि ट्रैक्टरों को बेंगलुरु में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि उनकी वजह से ट्रैफिक जाम होगा.”
कर्नाटक राज्यसभा संघ के मानद अध्यक्ष चामरसा माली पाटिल ने बीबीसी हिंदी को बताया, “पड़ोसी ज़िलों में पुलिस के साथ खींचतान चल रही है, क्योंकि किसानों को ट्रैक्टर से यात्रा करने की अनुमति नहीं दी जा रही. कुछ जगहों पर पुलिस ख़ुद किसानों के लिए बसों का इंतज़ाम कर रही है. हमें लगता है कि बेंगलुरु में कुछ 100 ट्रैक्टर आ पाएंगे.”
बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त कमल पंत ने स्पष्ट किया, “रैली के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है. वो कारों या बसों से शहर में आ सकते हैं लेकिन हम ट्रैक्टरों को शहर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं देंगे.”
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कृषि में ऐसे सुधार किए गए हैं जो लंबे समय से अपेक्षित थे: राष्ट्रपति कोविंद
72वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि में ऐसे सुधार किए गए हैं जो लंबे समय से अपेक्षित थे.
उन्होंने कहा, “पूरी गति से आगे बढ़ रहे हमारे आर्थिक सुधारों के पूरक के रूप में, नए क़ानून बनाकर, कृषि और श्रम के क्षेत्रों में ऐसे सुधार किए गए हैं, जो लंबे समय से अपेक्षित थे. शुरू में, इन सुधारों के विषय में आशंकाएं उत्पन्न हो सकती हैं, परंतु किसानों के हित के लिए सरकार पूरी तरह समर्पित है.”
उन्होंने साथ ही कहा कि विपरीत प्राकृतिक परिस्थितियों, कई चुनौतियों और कोविड की आपदा के बावजूद किसानों ने कृषि उत्पादन में कोई कमी नहीं आने दी. उन्होंने कहा कि ‘ये कृतज्ञ देश हमारे अन्नदाता किसानों के कल्याण के लिए पूर्णतया प्रतिबद्ध है.’
उन्होंने देश के सभी किसानों, जवानों और वैज्ञानिकों को बधाई दी. राष्ट्रपति ने कम समय में वैक्सीन विकसित करने वाले भारत के वैज्ञानिकों को भी बधाई दी और ‘कहा कि दिन-रात परिश्रम करते हुए कोरोना-वायरस को डी-कोड करके बहुत कम समय में ही वैक्सीन को विकसित करके, हमारे वैज्ञानिकों ने पूरी मानवता के कल्याण के लिए एक नया इतिहास रचा है.’
साथ ही उन्होंने उन डॉक्टरों, नर्सों, स्वास्थ्य-कर्मियों, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रशासकों और सफ़ाई-कर्मियों का उल्लेख किया जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर पीड़ितों की देखभाल की है और बहुतों ने तो अपनी जान भी गंवाई.
उन्होंने भरोसा जताया कि भविष्य में इस तरह की महामारियों के ख़तरे को कम करने के उद्देश्य से, जलवायु परिवर्तन के मुद्दे को, विश्व-स्तर पर, प्राथमिकता दी जाएगी.
उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘आत्म-निर्भर भारत अभियान’ की तारीफ़ की और इसे आपदा को अवसर में बदलने वाला बताया.
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर'
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर' सुनिए संदीप सोनी से.
ट्रैक्टर रैली के लिए कोई और दिन चुन सकते थे किसान - कृषि मंत्री
दिल्ली में किसानों की गणतंत्र दिवस की ट्रैक्टर रैली से एक दिन पहले केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सोमवार को कहा कि किसान आंदोलन जल्द ही ख़त्म हो जाएगा.
समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा गतिरोध ख़त्म करने के लिए किसानों के साथ 11 दौर की बातचीत कर चुकी सरकार को अब भी हल निकलने की उम्मीद है.
उन्होंने कहा कि किसान ट्रैक्टर परेड के लिए गणतंत्र दिवस की जगह कोई और दिन भी चुन सकते थे.
तोमर ने कहा, “हम एक लोकतंत्र है और अगर कोई किसी बात से असहमत है और अलग नज़रिया रखता है तो हर किसी को प्रदर्शन करने का अधिकार है. जब हमने देखा कि कुछ किसान, हालांकि जिनकी संख्या बहुत कम है, वो प्रदर्शन कर रहे हैं तो हमें संकट को बातचीत से सुलझाना चाहिए और सरकार को अब भी हल निकलने की उम्मीद है.”
हालांकि मंत्री ने कहा कि वो दुखी हैं कि ‘पंजाब के कुछ किसान संगठनों की वजह’ से बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला.
मंत्री ने कहा कि कल एक शांतिपूर्ण ट्रैक्टर रैली सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी किसानों और पुलिस प्रशासन की है.
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा, “मुझे लगता है कि किसान गणतंत्र दिवस के बजाए कोई और दिन चुन सकते थे. लेकिन उन्होंने ट्रैक्टर परेड की घोषणा कर दी और पुलिस ने अनुमति दे दी और दोनों किसी अप्रिय घटना के बिना इसके आयोजन को सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे. दोनों की ज़िम्मेदारी है कि वो इसके शांतिपूर्ण आयोजन को सुनिश्चित करवाएं.”
किसान परेडः ढाई सौ किलोमीटर लंबा रूट, कुछ किसान संगठन नाराज़
संसद की ओर एक फ़रवरी को पैदल मार्च करेंगे किसान
दिल्ली की सीमा पर केंद्र के तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ पिछले क़रीब दो महीने से प्रदर्शन कर रहे किसान अब संसद की ओर मार्च करेंगे.
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार क्रांतिकारी किसान युनियन के दर्शन पाल ने कहा है कि अब किसान एक फ़रवरी को दिल्ली के अलग-अलग जगहों से संसद की ओर पैदल मार्च करेंगे.
हज़ारों किसान 24 नवंबर से दिल्ली-हरियाणा के सिंघु और टिकरी बॉर्डर था दिल्ली-यूपी के ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
लेकिन अभी तक किसानों ने दिल्ली के अंदर दाख़िल होने की कोई कोशिश नहीं की थी.
अब किसानों का कहना है कि वो संसद की ओर मार्च करेंगे.
माओवादियों की सेंट्रल कमेटी ने किया किसान आंदोलन का समर्थन
आलोक पुतुल
रायपुर से बीबीसी हिंदी के लिए
भाकपा माओवादी ने किसान आंदोलन को लेकर कहा है कि किसानों के सामने संघर्ष के अलावा कोई चारा नहीं है. माओवादी संगठन की केंद्रीय कमेटी के प्रवक्ता अभय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सरकार बार बार बातचीत करके इस आंदोलन को कमज़ोर करना चाहती है.
माओवादी प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा “भारत सरकार अपनी नई उदारवादी आर्थिक नीतियों के तहत पिछले साल जून में जिन तीन किसान बिलों को लेकर आयी थी, उनका आप (किसान) लोगों ने निर्विवाद रूप से विरोध किया था. लेकिन लोकसभा में उन बिलों को चर्चा में लिए बगैर ही, विपक्षी दलों के साथ सलाह मशविरा किए बिना ही केंद्र सरकार ने उन्हें कानूनी जामा पहना दिया.”
भाजपा से जुड़े किसान संगठनों की आलोचना करते हुये इस बयान में कहा गया है कि शुरुआत में भारतीय जनता पार्टी से संबंध रखने वाले किसान संगठन, किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए उनके संघर्षों में शामिल हुए थे लेकिन उन संगठनों ने बीच में ही आंदोलन से नाता तोड़ कर न सिर्फ किसानों के साथ बल्कि पूरे देश के साथ गद्दारी की.
माओवादी प्रवक्ता अभय ने बयान में कहा “2015 में जब पहली बार पीएम मोदी भूमि अधिग्रहण बिल को सामने लाए तब भारत के किसान और आदिवासी जनता ने एकताबद्ध होकर उसे कानून बनने नहीं दिया. आज के किसानों को और भी दृढ़ संकल्पित होकर कानूनों के रद्द करने के लिए दुगने जोश के साथ संघर्ष करने की आवश्यकता है. इसलिए हमारी पार्टी आह्वान करती है कि किसानों के साथ समूची उत्पीड़ित जनता एकताबद्ध होकर संघर्ष करे. भारत के किसानों व तमाम देश की जनता को चाहिए कि वह संघर्ष के जरिए भारत की खेती और देश को बचाएं.”
केंद्रीय कृषि मंत्री ने गतिरोध के जल्दी ख़त्म होने की जताई उम्मीद
बीते दो महीने से पंजाब, हरियाणा समेत की राज्यों के किसान और कामगार दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर डटे हुए हैं. कृषि क़ानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर किसान प्रदर्शन कर रहे हैं और कल यानी गणतंत्र दिवस पर वे ट्रैक्टर परेड करेंगे. पहले दिल्ली पुलिस की तरफ़ से उन्हें इसकी इजाज़त नहीं मिली थी लेकिन अब रैली के लिए सहमति मिल गई है.
किसानों की तरफ़ से बहुत पहले से ही स्पष्ट किया जा चुका है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएंगी उनका प्रदर्शन जारी रहेगा लेकिन वहीं दस से अधिक वार्ताओं के विफ़ल होने के बाद भी कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने उम्मीद जताई है कि ये गतिरोध जल्दी ही समाप्त हो जाएगा.
न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में कृषि मंत्री ने कहा, “सरकार किसानों के और कृषि के हित के लिए प्रतिबद्ध है. प्रधानमंत्री के नेतृत्व में बीते छह सालों में किसानों की आमदनी बढ़ाने, नई तकनीक से किसानों को जोड़ने का काम किया गया है. एमएसपी को डेढ़ गुना करने का काम भी पीएम के नेतृत्व में हुआ है.”
न्यूज़ एजेंसी को दिए अपने बयान में उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में समाधान हो जाएगा.
उन्होंने कहा कि किसानों के साथ ११वें दौर की बातचीत के बाद भी जब समाधान नहीं निकला तो उन्होंने किसानों से डेढ़ साल तक के लिए क़ानून को स्थगित करने की बात कही थी. उन्होंने बातचीत से हल निकालने की बात पर ज़ोर दिया.
ट्रैक्टर रैली पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, “किसानों की ट्रैक्टरी रैली किसी और दिन भी हो सकती थी लेकिन उन्होंने 26 जनवरी को ही आंदोलन करने की घोषणा की है तो अब पुलिस प्रशासन उनसे बातचीत कर रही है ताकि ये आयोजन शांतिपूवर्क हो."