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हिंदू कभी भारत-विरोधी नहीं हो सकता: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि कोई भी हिंदू कभी भी भारत-विरोधी नहीं हो सकता है. ओवैसी ने दिया जवाब.
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हिंदू कभी भारत विरोधी नहीं हो सकता है: मोहन भागवत
दिल्ली में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में शुक्रवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अगर कोई हिंदू है तो उसे देशभक्त होना ही पड़ेगा क्योंकि यही उसका मूल चरित्र और स्वभाव है.
भागवत ने कहा कि कभी-कभी उसकी देशभक्ति को जागृत करना पड़ा सकता है लेकिन वह (हिंदू) कभी भी भारत विरोधी नहीं हो सकता है.
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने कहा था कि उनकी देशभक्ति धर्म से निकली है.
भागवत के इस बयान के बाद एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट करके उन पर जवाबी पलटवार किया है.
उन्होंने ट्वीट में लिखा है, “क्या भागवत जवाब देंगे: गांधी के हत्यारे गोडसे के बारे मे क्या कहना है? नेल्ली नरसंहार, 1984 सिख विरोधी दंगे और 2002 गुजरात नरसंहार के ज़िम्मेदार लोगों के लिए क्या कहना है?”
उन्होंने अगले ट्वीट में लिखा, “एक धर्म के अनुयायियों को अपने आप देशभक्ति का प्रमाण जारी किया जा रहा है और जबकि दूसरे को अपनी पूरी ज़िंदगी यह साबित करने में बितानी पड़ती है कि उसे यहां रहने और ख़ुद को भारतीय कहलाने का अधिकार है.”
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ब्रेकिंग न्यूज़, भारत और ब्रिटेन के बीच 8 जनवरी से फिर शुरू होगी उड़ान सेवा
केंद्रीय नागर विमानन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी ने ट्वीट किया है कि भारत और ब्रिटेन के बीच 8 जनवरी 2021 से विमान उड़ानें बहाल हो जाएंगी.
उन्होंने बताया कि 23 जनवरी तक सिर्फ़ हफ़्ते में 15 उड़ानें ब्रिटेन से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद के बीच चलेंगी और डीजीसीए इसको लेकर सारी जानकारियां जल्द सार्वजनिक करेगा.
ग़ौरतलब है कि ब्रिटेन में कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन पाए जाने के बाद दोनों देशों के बीच विमान उड़ान पर अस्थाई रोक लगा दी गई थी.
किसान प्रदर्शनकारियों की सरकार को चेतावनी, 4 जनवरी तक मुद्दा सुलझाएं
सिंघु बॉर्डर पर शुक्रवार को साल 2021 के पहले दिन प्रेस कॉन्फ़्रेंस करते हुए किसान संगठनों ने घोषणा की है कि अगर उनकी मांगें अगली बैठक (4 जनवरी) में नहीं मानी गईं तो वे मार्च निकालेंगे.
स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने इस दौरान कहा, “4 जनवरी को सरकार से अगले स्तर की बातचीत होनी है. अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो हम कुंडली-मानेसर-पलवल राजमार्ग पर 6 जनवरी को मार्च करेंगे. हम तारीख़ की घोषणा करेंगे कि कब शाहजहांपुर सीमा से आगे बढ़ना है.”
भारतीय किसान यूनियन के नेता युद्धवीर सिंह ने कहा कि 4 जनवरी तक अगर सरकार ने फ़ैसला नहीं लिया तो किसान फ़ैसला करेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को गंभीरता से नहीं ले रही है जिस तरह से उन्होंने शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया वो हमें भी वैसा करना चाहती है लेकिन ऐसा दिन नहीं आएगा.
इस दौरान योगेंद्र यादव ने कहा कि ऐसा कहा जा रहा है कि 50 फ़ीसदी मुद्दे सुलझ गए हैं जो झूठ है, किसानों की सिर्फ़ दो मांगें हैं- पहली तीनों कृषि क़ानून रद्द हों और दूसरी एमएसपी की क़ानूनी गारंटी मिले.
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा है कि वो कोई ज्योतिषी नहीं हैं जो यह बता सकें कि 4 जनवरी को प्रदर्शनकारी किसानों के साथ होने वाली बैठक आख़िरी होगी.
उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि 4 जनवरी को होने वाली बैठक से किसानों और कृषि क्षेत्र के हित में कुछ निकलेगा.
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', सुनिए संदीप सोनी से.
ब्रेकिंग न्यूज़, कोविशील्ड को एसईसी से मिली हरी झंडी, हो सकती है भारत की पहली कोरोना वैक्सीन
कोरोना वैक्सीन के लिए केंद्र सरकार की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (एसईसी) ने कुछ शर्तों के साथ ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राज़ेनेका द्वारा विकसित ‘कोविशील्ड’ नामक वैक्सीन के ‘आपातकालीन इस्तेमाल’को मंज़ूरी देने की सिफ़ारिश की है.
पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया के पास कोविशील्ड वैक्सीन के उत्पादन की ज़िम्मेदारी है.
इस वैक्सीन को दो दिन पहले ही ब्रिटेन ने भी ‘आपातकालीन इस्तेमाल’ की मंज़ूरी दी थी.
कोविशील्ड पहली कोरोना वैक्सीन होगी जिसे कुछ शर्तों के साथ भारत में इस्तेमाल की मंज़ूरी मिल सकती है. हालांकि, इस पर अभी अंतिम निर्णय डीसीजीआई को लेना है.
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया के अलावा, फ़ाइज़र और भारत बायोटेक भी अपनी-अपनी वैक्सीन के इस्तेमाल की मंज़ूरी के लिए आवेदन कर चुके हैं.
सिंघु बॉर्डर: नये साल पर हुआ नगर कीर्तन, किसानों को 4 जनवरी की बैठक का इंतज़ार
नए साल के अवसर पर सिंघु बॉर्डर पर ‘नगर कीर्तन’ आयोजित किया गया. इस दौरान 'खालसा यूथ ग्रुप' ने वहाँ पगड़ी लंगर का आयोजन भी किया.
सिंघु बॉर्डर पर किसानों को कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते हुए 37 दिन हो गये हैं और किसानों की नज़रें अब केंद्र सरकार के साथ होने वाली अगली बैठक पर हैं.
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बताया है कि 4 जनवरी को केंद्र सरकार के साथ अगली बैठक होने वाली है. उस बैठक में नये क़ानूनों की वापसी और एमएसपी पर क़ानून बनाने पर चर्चा होगी.
उन्होंने बताया कि शुक्रवार को किसान संगठनों की एक बैठक होने वाली है जिसमें इस बात पर चर्चा होगी कि अब तक हुई बैठकों में क्या-क्या हुआ और अगली बैठकों में क्या होगा.
किसानों का एक दल दिल्ली-यूपी के गाज़ीपुर बॉर्डर पर भी प्रदर्शन कर रहा है. यहाँ भी किसानों को डटे हुए 35 दिन हो गये हैं.
शुक्रवार को किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी के सुखविंदर सिंह सभरा ने कहा कि “तीनों कृषि क़ानून रद्द होने चाहिए. अगर 4 जनवरी को इसका कोई हल नहीं निकाला जाता तो आने वाले दिनों में संघर्ष और तेज़ किया जायेगा.”
पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं 319 भारतीय
भारत और पाकिस्तान ने 'कॉन्सुलर एक्सेस समझौते' के तहत अपनी-अपनी जेलों में बंद एक-दूसरे के क़ैदियों की सूची आपस में साझा की है.
पाकिस्तान ने बताया है कि उसके यहाँ कुल 319 भारतीय जेलों में बंद हैं. इनमें 49 आम नागरिक और 270 मछुआरे हैं.
वहीं भारत ने बताया है कि उसके यहाँ पाकिस्तान के 340 क़ैदी हैं. इनमें 263 आम नागरिक और 77 मछुआरे शामिल हैं.
भारत और पाकिस्तान ने 21 मई, 2008 को 'कॉन्सुलर एक्सेस समझौते' पर हस्ताक्षर किये थे.
इस समझौते के तहत दोनों देश अपनी-अपनी जेलों में बंद क़ैदियों की सूची साल में दो बार, 1 जनवरी और 1 जुलाई को साझा करते हैं.
देश में कोरोना टीकाकरण के ड्राई रन को लेकर हुई बैठक
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने ट्वीट कर बताया है कि देश में कोरोना के टीकाकरण के प्रबंधन के लिए ड्राई रन की तैयारी के मद्देनज़र दिल्ली में बैठक हुई है.
उन्होंने बताया है कि कल से इस प्रक्रिया के हर क़दम को लेकर और को-विन प्लैटफ़ॉर्म की विशेषताओं को लेकर एक मॉक ड्रिल होगी.
भारत-पाकिस्तान ने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची साझा की
भारत और पाकिस्तान ने बयान जारी कर बताया है कि शुक्रवार को दोनों देशों ने अपने-अपने यहां मौजूद परमाणु प्रतिष्ठानों और दक्षता की सूची एक-दूसरे को सौंपी है.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया कि कूटनीतिक चैनलों के ज़रिए एक-दूसरे के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले न करने के समझौते के तहत यह सूची दी गई है.
भारत ने बताया कि 31 दिसंबर 1988 को हुआ यह समझौता 27 जनवरी 1991 को लागू हुआ था. इस समझौते के तहत जनवरी की पहली तारीख़ को दोनों देश अपने यहां मौजूद परमाणु प्रतिष्ठानों और दक्षताओं के बारे में बताते हैं.
1 जनवरी 1992 के बाद यह लगातार 30वीं सूची है जो दोनों देशों ने एक-दूसरे को सौंपी है.
पाकिस्तान ने बताया कि इस्लामाबद में भारतीय उच्चायोग के प्रतिनिधियों को शुक्रवार को दिन में 11 बजे पाकिस्तान की सूची सौंपी गई है.
सिंघु बॉर्डर पर मौजूद किसानों को नये साल से क्या उम्मीदें हैं?
IND VS AUS: टी नटराजन को मिला नए साल का तोहफ़ा, उमेश यादव की जगह लेंगे
भारतीय क्रिकेट टीम के तेज़ गेंदबाज़ टी नटराजन को नए साल का तोहफ़ा मिल गया है. साल के पहले ही दिन उन्हें ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टेस्ट टीम में जगह मिल गई है.
उमेश यादव के घायल होकर चार टेस्ट मैचों की सिरीज़ से बाहर होने के बाद नटराजन का यह मौक़ा हाथ लगा है.
शुक्रवार को बीसीसीआई ने इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी.
नटराजन ने टी-20 मैचों में शानदार गेंदबाज़ी की थी.
नटराजन के शानदार प्रदर्शन से हार्दिक पांडया इतना प्रभावित हुए थे कि उन्होंने अपना मैन ऑफ़ द सिरीज़ का अवार्ड नटराजन को यह कहते हुए दे दिया था कि नटराजन ज़्यादा हक़दार थे.
भारत में फोर्ड-महिंद्रा का लगने वाला जॉइंट वेंचर हुआ रद्द
कार कंपनी फोर्ड ने गुरुवार को कहा कि कोविड-19 महामारी से पैदा हुई चुनौतियों के कारण भारत की महिंद्रा एंड महिद्रा लिमिटेड कंपनी के साथ ज्वॉइंट वेंचर पर हो रही बातचीत को बंद किया जा रहा है.
कंपनियों ने अलग-अलग बयानों में कहा कि यह निर्णय पिछले 15 महीनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में आए बदलाव के कारण लिया गया.
कंपनी ने एक बयान में कहा, “वैश्विक अर्थव्यवस्था और कारोबारी माहौल पिछले साल अक्टूबर जैसे नहीं हैं."
दोनों कंपनियों के बीच ज्वॉइंट वेंचर पर फैसला करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर थी.दोनों ने किसी डील पर पहुंचने या तारीख को आगे बढ़ाने के बजाय समझौते पर बातचीत को समाप्त करने का फ़ैसला किया.
अक्तूबर 2019 में फोर्ड और महिंद्रा ने कहा था कि वे उभरते बाजारों के लिए और वाहनों के उत्पादन की लागत में कटौती के लिए भारत में एक ज्वाइंट वेंचर बनाएंगे.कंपनियों ने कहा कि उस समय उन्होंने तीन नए यूटिलिटी वाहन को लॉन्च करने की उम्मीद की थी. इसकी शुरुआत एक मिडसाइज एसयूवी के साथ होनी थी.
उन वाहनों के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, "अभी ज्वॉइंट वेंचर के अलावा किसी और मुद्दे पर बात नहीं होगी.”
नेपाल के सियासी संकट से क्या चीन को ख़ाली हाथ लौटना पड़ा?
लद्दाख में सरहद पर तनाव को लेकर चीनी सेना का बयान
चीन के सैन्य प्रवक्ता के मुताबिक़ चीन और भारत के बीच कोर कमांडर स्तर के नौवें दौर की बैठक को लेकर विचार-विमर्श हो रहा है.
चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स से मुताबिक़ चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता तैन केफ़ी ने बताया कि नवंबर में हुई चीन-भारत कमांडर स्तर की बैठक के आठवें दौर के बाद से दोनों पक्षों ने सीमा पर सैन्य टुकड़ियों के बीच शांति बनाए रखने और उनके मैनेजमेंट को बेहतर बनाने पर लगतार चर्चाएं की हैं.
चीनी प्रवक्ता के मुताबिक सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति स्थिर है.
उन्होंने ने कहा कि चीन सैन्य और राजनयिक चैनलों के माध्यम से भारत के साथ बातचीत बनाए रखने के लिए तैयार है और उन्हें उम्मीद है कि भारत भी इसी लक्ष्य के लिए काम करेगा, बैठकों में हुई सहमतियों पर अमल करेगा और सीमा पर तनाव कम करने के लिए ठोस कदम उठाएगा.
किसानों ने कहा, अभी एक फ़ीसदी बात आगे बढ़ी है
सरकार और किसानों के बीच पराली जलाने को लेकर लाए गए अध्यादेश पर समझौता तो हो गया है लेकिन ऐसा नज़र आ रहा है कि केंद्र इस पर तब तक आगे की कार्रवाई नहीं करेगी जब तक किसान संगठनों के दूसरे मुद्दों का हल नहीं निकल जाता.
दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण को देखते हुए अध्यादेश लाया गया था जिसमें पराली जलाने पर सज़ा का प्रावधान है. किसानों की एक मांग ये भी है कि उन्हें सज़ा के प्रावधान से बाहर रखा जाए.
द हिंदू अख़बार को कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बुधवार को किसानों के साथ हुई बातचीत में सैद्धांतिक रूप से सरकार मान गई है.
उन्होंने कहा, “अभी बातचीत चल रही है. एक बार अंतिम फ़ैसले पर पहुंच जाएं तो टाइमलाइन वगैरह पर भी चर्चा होगी. सैद्धांतिक रूप से फ़ैसला ये हुआ है कि सरकार को किसानों की दो मांगें स्वीकार्य हैं.”
किसान नेताओं का कहना है कि सरकार के साथ इन मांगों पर समझौते से आगे कि बातचीत के लिए भरोसा बढ़ेगा. हालांकि वे इस बात पर भी ज़ोर देते हैं कि ये वाले मुद्दे विवादित कृषि क़ानूनों को हटाने की मांग की तुलना में बहुत छोटे थे.
भारतीय किसान यूनियन-टिकैत के जनरल सेक्रेटरी युद्धवीर सिंह ने कहा, “सरकार की तरफ़ से अभी मौखिक हामी है. कोई लिखित समझौता नहीं हुआ है. लेकिन वे पराली वाले मुद्दे पर आसानी से कार्रवाई कर सकते हैं और प्रदूषण बोर्ड को बदलाव करने के लिए बोल सकते हैं. पहले उन्हें करने देते हैं.”
ऑल इंडिया किसान सभा के जनरल सेक्रेटरी हनन मुल्ला ने कहा, “उन्होंने जिस बात हामी भरी है, उन्हें करने देते हैं. लेकिन ये छोटा मुद्दा है. हमारी बड़ी मांग है उन तीनों क़ानूनों को वापस लेने की. तो असल में बुधवार की बातचीत के बाद अभी एक फ़ीसद बात आगे बढ़ी है और 99 फ़ीसद गतिरोध अब भी है. ये 50 फ़ीसद प्रोग्रेस नहीं है जैसा कि दावा किया जा रहा है.”
प्रदर्शन में शामिल सभी किसान संगठनों के संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि मुख्य मुद्दे पर कोई ठोस हल नही निकल पाया है.
संयुक्त किसान मोर्चा के बयान के मुताबिक़, “हालांकि दो अध्यादेशों को वापस लेने का आश्वासन एक बड़ी जीत है और ये फ़ैसला देश के संघीय ढांचे की रक्षा करेगा और निजीकरण से बचाएगा.”
जल्द आ सकती है भारत की स्वदेशी कोरोना वैक्सीन
ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया वीजी सोमानी ने गुरुवार को इशारा किया कि भारत की स्वदेशी कोरोना वैक्सीन अप्रूवल के काफ़ी क़रीब है.
वीजी सोमानी ने बायोटेक्नोलॉजी विभाग के एक वेबिनार में संकेत दिया, जिसमें कई वैक्सीन विशेषज्ञ, संक्रामक रोग विशेषज्ञ और वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों के प्रतिनिधि भी शिरकत कर रहे थे.
उन्होंने कहा, “शायद हमारे लिए हैपी न्यू इयर होगा”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गुरुवार को कहा था कि वैक्सीन आने ही वाली है.
उन्होंने कहा था, “पहले मैं कहता था कि दवाई नहीं तो ढिलाई नहीं. अब मैं कह रहा हूं दवाई भी और कड़ाई भी. 2021 के लिए यही हमारा मंत्र है.”
केरल: बीजेपी विधायक ने बताया, क्यों किया कृषि क़ानूनों का विरोध
केरल की विधानसभा ने गुरुवार को सर्वसम्मति से विवादित कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पास किया था.
इस विशेष सत्र में बीजेपी के इकलौते विधायक ओ राजगोपाल ने प्रस्ताव का विरोध नहीं किया जिसकी वजह से बीजेपी नेतृत्व के लिए अजीब स्थिति पैदा हो गई.
राजगोपाल ने सत्र के बाद मीडिया से कहा कि उन्होंने प्रस्ताव का समर्थन किया है और लोकतंत्र की भावना के लिए आम सहमति का साथ दिया.
बाद में उन्होंने स्पष्टीकरण भी दिया कि वे कृषि क़ानूनों या केंद्र सरकार के विरोध में नहीं हैं.
उन्होंने प्रस्ताव पर वोट नहीं किया और स्पीकर ने प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास होने की घोषणा कर दी.
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे प्रस्ताव का समर्थन करते हैं तो उन्होंने कहा कि प्रस्ताव के कुछ बिंदुओं को लेकर उनकी चिंताएं थीं जो उन्होंने अपने भाषण में कही भी.
उन्होंने कहा, “मैंने अपनी राय दी. लेकिन वो सहमति नहीं है. मैं मानता हूं. क्या ये लोकतंत्र की भावना नहीं है?”
उनके मुताबिक़ उन्होंने बीजेपी के लिए कोई समस्या खड़ी नहीं की.
“मेरे हिसाब से ये लोकतांत्रिक भावना है.”
विपक्षी यूडीएफ़ ने प्रस्ताव का समर्थन किया लेकिन इसकी आलोचना भी की कि ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ तीखा नहीं है.
यूडीएफ़ का कहना था कि राज्य इन केंद्रीय क़ानूनों को काउंटर करने के लिए अपने स्तर पर क़ानून बनाने में भी देरी कर रहा है.