इसराइल और मोरक्को पूर्ण राजनयिक संबंधों के लिए तैयार: ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इसराइल और मोरक्को पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने के लिए तैयार हो गए हैं.

लाइव कवरेज

  1. इसराइल और मोरक्को पूर्ण राजनयिक संबंधों के लिए तैयार: ट्रंप

    इसराइल और मोरक्को पूर्ण राजनयिक संबंधों के लिए तैयार: ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, मोरक्को के किंग मोहम्मद VI और इसराइल के बिन्यामिन नेतन्याहू

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इसराइल और मोरक्को पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने के लिए तैयार हो गए हैं.

    मोरक्को अगस्त से अबतक इसराइल के साथ समझौता करना वाला ऐसा चौथा देश बन गया है. इससे पहले संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और सूडान के साथ हाल ही में समझौते हुए हैं. मिस्र और जॉर्डन के साथ मोरक्को इसराइल के साथ रिश्ते सुधारने वाला अरब लीग का छठा सदस्य बन गया है.

    ट्रंप ने ट्वीट कर कहा, "आज एक और ऐतिहासिक दिन. हमारे दो महान दोस्त इसराइल और मोरक्को पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने के लिए तैयार हो गए हैं. मध्य-पूर्व में शांति स्थापित करने के लिए यह एक बहुत बड़ा क़दम है.''

    व्हाइट हाउस ने कहा कि ट्रंप और मोरक्को के राजा मोहम्मद VI सहमत हुए हैं कि "मोरक्को इसराइल के साथ राजनयिक संबंध फिर से बहाल करेगा और क्षेत्रीय स्थिरता को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग का विस्तार करेगा."

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    इस समझौते के तहत, अमेरिका ने विवादित पश्चिमी सहारा क्षेत्र पर मोरक्को के दावे को मान्यता देने पर सहमति दी है.

    ये मोरक्को और अल्जीरिया समर्थित पोलिसारियो फ्रंट के बीच विवाद का विषय है, जो एक स्वतंत्र राज्य स्थापित करने की मांग कर रहा है.

    मोरक्को और इसराइल के बीच ताज़ा समझौते में साल 2002 में बंद कर दिए गए तेल अवीव और रबात में संपर्क कार्यालय फिर से खोलना शामिल है. फिर दूतावास भी खोले जाएंगे. अधिकारियों के मुताबिक़, मोरक्को इसराइल के लोगों के लिए इसराइल से सीधी उड़ाने शुरू करेगा.

    इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने समझौते को “ऐतिहासिक” क़रार दिया है.

    टेलीविज़न संबोधन में उन्होंने मोरक्को के राजा को धन्यवाद दिया और कहा कि इसराइल और मोरक्को के लोगों के बीच "आधुनिक काल में मधुर संबंध" रहे हैं.

    मोरक्को ने भी बयान जारी कर समझौते की पुष्टि की है. मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन ने बयान जारी कर मोरक्को और इसराइल के बीच हुए समझौते का स्वागत किया है.

    वहीं फलस्तीन के अधिकारियों ने समझौते की निंदा की है. फलस्तीन के लोग ने हाल में अरब लीग के देशों और इसराइल के बीच हुए समझौतों की निंदा की है. उनका मानना है कि ऐसा करके अरब देश अपना वो वादा तोड़ रहे हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि जब तक फलस्तीन स्टेटहुड हासिल नहीं कर लेता तब तक वो इसराइल के साथ रिश्तों को बहाल नहीं करेंगे.

    हालांकि मोरक्को के राजा ने कहा है कि इस कदम से फलस्तीनियों के मसले पर उनकी प्रतिबद्धता पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

    बयान में कहा गया है कि राजा ने फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास से बात की थी और उन्हें आश्वासन दिया था कि वो "फिलिस्तीनी लोगों के वैध अधिकारों का बचाव करने में अपनी भूमिका से पीछे नहीं हटेंगे."

    बयान में कहा गया है कि राजा ने दो-राज्य के समाधान को अपना समर्थन दोहराया है.

  2. चीन ने ‘निशाना साधने’ वाले देशों को दिया कड़ा जवाब

    चीन ने ‘निशाना साधने’ वालों को दिया कड़ा जवाब

    इमेज स्रोत, Artyom Ivanov\TASS via Getty Images

    चीन के विदेश मंत्रालय ने बिना किसी देश का नाम लिए ख़ुद पर ‘निशाना साधने’ वालों को कड़ा जवाब दिया है. भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता जी रोंग ने एक बयान ट्वीट करते हुए लिखा कि हम ऐसी अनुचित टिप्पणियों को अस्वीकार करते हैं जिनमें किसी भी चीज़ के पीछे चीन का हाथ होने की बात कह दी जाती है. उन्होंने लिखा कि चीन के ख़िलाफ़ ऐसे बेबुनियाद आरोपों को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग की ओर से दिया चीन का जवाब पढ़ें.

    जिसमें लिखा है, “अगर आप उन चीज़ों को याद करें जो हाल के वक़्त में चीन और कुछ अन्य देशों के बीच हुईं, तो किस बार और कौन-सी चीज़ सबसे पहले चीन के उकसावे की वजह से हुई? किस बार और कौन-सी अन्य देशों के आंतरिक मामलों में चीन का हस्तक्षेप थी? किस बार और किस मामले में चीन ने दूसरे देशों के हितों को ख़तरे में डाला या नुक़सान पहुंचाया?”

    बयान में आगे लिखा है,“चाहे चीन को वायरस के लिए ज़िम्मेदार ठहराना हो, महामारी का राजनीतिकरण करना हो, चीन को कलंकित करना हो या चीनी उद्यमों को मनमाने ढंग से दबाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा की अवधारणा का दुरुपयोग करना हो और लोगों के सामान्य आपसी रिश्तों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान, आर्थिक, व्यापार और वैज्ञानिक सहयोग को कम करना हो; चाहे तथाकथित मनावाधिकार, लोकतंत्र, स्वतंत्रता के नाम पर चीन के आंतरिक मामलों में दखल देना हो, या अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मानदंडों को धता बताना हो, चीन की राजनीतिक व्यवस्था पर आक्रामक हमला हो और बेतुके तरीक़े से एकतरफा प्रतिबंध लगाना हो, कोई कैसे सोच सकता है कि चीन के पास सच बोलने का कोई अधिकार नहीं है जबकि उनके पास चीन पर हमले करने, उसकी बदनामी करने और चोट पहुंचाने का अधिकार है? क्या उन्हें लगता है कि एक संप्रभु देश के तौर पर चीन के पास अपनी ख़ुदकी संप्रभुता, सुरक्षा, विकास के हितों और राष्ट्रीय गरीमा को बचाने का अधिकार नहीं है, जबकि हर नागरिक को क़ानून के अनुसार न्यायोचित बचाव का अधिकार है? क्या उन्हें लगता है कि वो झूठे आरोप लगाकर कुछ भी बोलते रहेंगे और चीन के पास चुप रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं है?”

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  3. केंद्र सरकार ने देश के 'अन्नदाता' के ख़िलाफ़ लड़ने का फ़ैसला कर लिया है: सुखबीर बादल

    शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कृषि क़ानूनों को वापस नहीं लेने के केंद्र सरकार के फ़ैसले की कड़ी निंदा की है.

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    समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार सुखबीर सिंह बादल ने कहा, "केंद्र सरकार के आज की प्रेस कॉन्फ़्रेंस से साबित होता है कि उन्होंने देश के 'अन्नदाता' के ख़िलाफ़ लड़ने का फ़ैसला कर लिया है."

    उधर भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार किसानों की 15 माँगों में से 12 को मानने के लिए तैयार हो गई है, इसका अर्थ साफ़ है कि कृषि बिल सही नहीं थे, तो फिर उन्हें पूरी तरह रद्द क्यों ना कर दिया जाए.

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    राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों ने एमएसपी पर केवल एक क़ानून की माँग की थी लेकिन केंद्र सरकार अध्यादेश के ज़रिए तीन बिल ले आई.

    उन्होंने कहा कि किसानों का शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.

  4. प्रदर्शनकारी किसानों के साथ एक रात कैसी बीती?

  5. बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर'

    बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर' सुनिए फ़ैसल मोहम्मद अली से.

  6. बीजेपी अपने कार्यकर्ताओं को नौटंकी करने के लिए बुलाती है: ममता बनर्जी

    ममता बनर्जी

    इमेज स्रोत, ANI

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राजधानी कोलकाता की एक जनसभा में भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं को आड़े हाथों लिया है.

    समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, ''ममता बनर्जी ने कहा, उन्हें (बीजेपी) कोई काम नहीं है. कभी गृहमंत्री यहां आते हैं, कभी नड्डा आते हैं,......... ..... जब उन्हें सुनने वाला कोई नहीं होता, वो अपने कार्यकर्ताओं को नौटंकी करने के लिए कहते हैं.''

    इससे पहले, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, ''तृणमूल शासन में बंगाल अत्याचार, अराजकता और अंधकार के युग में जा चुका है.''

    केंद्रीय गृहमंत्री का ये बयान तब आया जब पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ये आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों ने उनके क़ाफ़िले पर हमला किया.

    केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है, ''लोकतंत्र में राजनीतिक नेताओं को इस तरह से निशाना बनाना बेहद चिंताजनक है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के क़ाफ़िले पर हुए हमले की गम्भीरता को देखते हुए इसकी पूरी जाँच की जानी चाहिए और इस घटना की ज़िम्मेदारी तय की जानी चाहिए.''

    जेपी नड्डा के साथ क़ाफ़िले में बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय भी थे.

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  7. किसान आंदोलन: कृषि क़ानूनों पर जारी विरोध में कहाँ हैं भूमिहीन महिला किसान?

  8. सरकार नहीं सुनेगी तो पूरे देश में रेल ट्रैक जाम करेंगे: किसान नेता बूटा सिंह

    कृषि मंत्री की प्रेस कॉन्फ़्रेंस के बाद किसान नेताओं ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर के अपना पक्ष रखा है.

    किसान नेता बूटा सिंह ने कहा कि हमने 10 दिसंबर तक का वक़्त दिया हुआ है. अगर प्रधानमंत्री हमारी बात नहीं सुनते हैं और क़ानून वापस नहीं लेते हैं तो हम रेलवे ट्रैक को जाम करेंगे. आज की बैठक में यह फ़ैसला लिया गया है कि देश के लोग अब रेल ट्रैक पर बैठेंगे. संयुक्त किसान मंच तारीख़ तय करके इसकी घोषणा करेगी.

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    किसानों ने फिर से इन बातों को दोहराया कि ये क़ानून कॉरपोरेट्स को खुली छूट देने के लिए लाई गई है.

    किसान नेताओं ने सवाल किया कि आख़िर सरकार को क़ानून वापस लेने में क्या समस्या है.

  9. कोरोना से अमेरिका में एक दिन में रिकॉर्ड मौतें

    अमेरिकी महिला

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    अमेरिका ने एक दिन में कोरोना वायरस से मरने वालों की अब तक की सबसे बड़ी संख्या की घोषणा की है.

    24 घंटे में अमेरिका में 3000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है.

    गर्मी के दिनों में अमेरिका में कोरोना से मरने वालों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई थी.

    अक्टूबर की तुलना में कोरोनो से होने वाली मौत में औसत तीन गुना इज़ाफ़ा हुआ है.

    औसतन दो लाख से ज्यादा अमेरिकी प्रतिदिन कोरोना पॉज़िटिव पाए जा रहे हैं.

  10. बंगाल सरकार को 'प्रायोजित हिंसा' के लिए जवाब देना होगा: अमित शाह

    केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार पर तीखा हमला बोला है.

    केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा है कि ''तृणमूल शासन में बंगाल अत्याचार, अराजकता और अंधकार के युग में जा चुका है.''

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  11. जिन प्रावधानों पर आपत्ति है उस पर सरकार खुले मन से विचार करने को तैयार: नरेंद्र सिंह तोमर

    नरेंद्र सिंह तोमर

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    कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने नए कृषि क़ानूनों पर प्रेस कॉफ्रेंस में कहा कि जिन प्रावधानों पर किसानों को आपत्ति है उन पर सरकार खुले मन से विचार करने को तैयार है.

    उन्होंने कहा कि नौ दिसंबर की बैठक के दौरान किसान इस बात को लेकर बैठे रहे कि क़ानून को वापस लिया जाए जबकि हम क़ानूनों में जिन मुद्दों पर आपत्ति है उस पर सुधार की बात करते रहे.

    उन्होंने एक बार फिर आश्वासन दिया कि एमएसपी पर कोई खतरा नहीं है. उन्होंने बताया कि सरकार ने कई संशोधनों को लेकर एक प्रस्ताव किसान संगठनों को सौंपा है.

    उन्होंने कहा कि सरकार मंडी के बेड़ियों से किसान को मुक्त करना चाहती है ताकि किसान अपनी फ़सल कहीं भी किसी से भी अपनी क़ीमत पर बेच सके.

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    नरेंद्र तोमर ने कहा कि ऐसी बातें कही जा रही है कि किसानों की ज़मीन पर उद्योगपति कब्जा कर लेंगे लेकिन गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और कर्नाटक में कॉट्रैक्ट फार्मिंग लंबे समय से हो रही है, वहाँ का कभी ऐसा अनुभव नहीं रहा.

    उन्होंने इस पर आगे कहा कि इन क़ानूनों के तहत सिर्फ़ प्रोसेसर और किसानों के बीच उपज को लेकर सौदा होगा. किसानों की ज़मीन को लेकर किसी भी तरह का ठेका या समझौते का प्रावधान इसमें नहीं है.

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  12. बीबीसी वेबिनार में योगेंद्र यादव और युद्धवीर सिंह ने किसानों का पक्ष रखा

    वेबिनार तस्वीर

    बीबीसी हिंदी के वेबिनार में किसानों की तरफ़ से योगेंद्र यादव और युद्धवीर सिंह ने हिस्सा लिया जबकि सरकारी सुधारों के पक्षधर कृषि मामलों को विशेष विजय सरदाना भी शामिल हुए. जानिए किसने क्या कहा?

    योगेंद्र यादव

    योगेंद्र यादव

    इन तीन कानूनों का निरस्त होने की माँग ऐसी है जिस पर हम समझौता नहीं कर सकते. सरकार संशोधन की बात कर रही है लेकिन जब बुनियादी तौर पर फ्रेमवर्क ही गलत है. हमने हाँ या ना में जवाब माँगा था, सरकार ने 20 पन्ने का फर्रा थमा दिया है, हम मानते हैं कि सरकार ने ना कह दिया है. सरकार अभी तक हमारी बात सुन तक नहीं रही है. दो महीने से बार-बार कह रहे हैं.

    सरकार जबरदस्ती गिफ्ट दे रही है, हमें गिफ्ट नहीं चाहिए, सरकार ऐतिहासिक सौगात कह रही है, गिफ्ट देने में क्या बीच का रास्ता होता है. यह सज़ा है, गिफ़्ट नहीं है, सरकार खुलकर कहे कि सज़ा दे रही है तो सज़ा को कम या ज़्यादा करने पर विचार किया जाए.

    खाद्य पदार्थों का मूल्य केवल डिमांड सप्लाई से नहीं हो सकता, ग़रीबों के बारे कौन सोचेगा, सरकार ने खाद्य पदार्थों की कीमत को बढ़ने से रोकने का सही फैसला किया है, लेकिन उसका बोझ किसान नहीं उठा सकता, इसीलिए सब्सिडी की व्यवस्था पूरी दुनिया में है.

    नरेंद्र मोदी जी ने विपक्ष के नेता के तौर पर पीएम को 2011 में चिट्ठी लिखी थी कि एमएसपी को लीगल स्टेटसस देना चाहिए, मोदी जी को अब किसी को नहीं लिखना है, अब वे खुद प्रधानमंत्री हैं.

    हमारी मांगें बहुत स्पष्ट हैं, तीनों कानून निरस्त हों, लाभकारी मूल्य की गारंटी हो, वाजिब दाम मिले, दाम चाहिए, दान नहीं चाहिए, लीगल गारंटी के मैकेनिज़्म पर बात होनी चाहिए. एपीएमसी में बहुत दिक्कत है, वह हमारे सिर पर टूटी हुई छप्पर है, लेकिन उसे हटाइए मत, उसे ठीक करिए. टूटी छप्पर दिखाकर यह मत कहिए कि देखो, खुला आकाश दिख रहा है, देखो तारे दिख रहे हैं, देखो तुम आज़ाद हो गए, ऐसा नहीं चल सकता.

    विजय सरदाना

    विजय सरदाना

    अगर 40 साल से भारत का किसान कह रहा था कि हमें सीधे बेचने दिया जाए, यह किसानों की डिमांड थी, उसके हिसाब से फैसला किया गया. कांग्रेस के मैनिफिस्टो में देखिए, महेंद्र सिंह टिकैत के वीडियो देखिए, उन्होंने कहा कि हमें मंडी सिस्टम ने बर्बाद कर दिया. सब लोग कहते रहे हैं कि हमें बाज़ार दीजिए, अब कुछ लोग कह रहे हैं कि हमें नहीं चाहिए. मेरे पास पूरे देश से किसानों के फोन आते हैं, वे कहते हैं कि पाँच प्रतिशत पंजाब के किसानों की बात क्यों सुन रहे हैं, इतने अच्छे रिफ़ॉर्म हैं, वे कहते हैं कि हमें मंडी में क्यों धकेल रहे हैं.

    सब कुछ ऑप्शनल है, मंडी में बेचो, सीधे बेचो, आप चाहते हैं. कोई किसी को बाध्य नहीं कर रहा है. हम अंतरराष्ट्रीय बाज़ार का हिस्सा हैं, मुर्गी का किसान रोज़ भारत सरकार को चिट्ठी लिख रहा था, कि भारत का मक्का बहुत महंगा है, हमें आयात करने दिया जाए. मुर्गी के फार्मर के लिए न्याय नहीं होगा क्या. वो भी तो किसान है.

    एमएसपी बढ़ाने से आयात बढ़ेगा, भारत में सोयाबीन का समर्थन मूल्य 38 रूपए है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में उसकी कीमत केवल 26 रूपए है, लोग सोयाबीन का तेल आयात कर रहे हैं, भारत की तेल मिलें बंद हो रही हैं, क्योंकि वह बहुत महंगा पड़ रहा है. समर्थन मूल्य बढ़ाते जाने से समस्या का समाधान नहीं होगा.

    किसान को इज़्ज़त का जीवन जीने का अधिकार है. किसान की इनकम कैसे बढ़े असली सवाल यही है, वह एमएसपी से आए ये ज़रूरी नहीं है. उसके और तरीके निकाले जाने चाहिए. अमरीका में कैसे होता है, वैल्यू एडिशन पर टैक्स लगाकर उसे सरकार दोबारा कृषि क्षेत्र में दे देती है सब्सिडी के तौर पर. यह समझना चाहिए कि हम भारत में ऐसा सिस्टम क्यों नहीं बना सकते, बिल्कुल बना सकते हैं.

    केरल का उदाहरण, क्या दूसरे राज्य नहीं कर सकते. एमएसपी राज्य सरकार का विषय है, वहाँ सुविधा दीजिए, कोई बाहर क्यों जाएगा. फ्रीडम होनी चाहिए. बिचौलिये खत्म होने चाहिए.

    युद्धवीर सिंह

    युद्धवीर सिंह

    भ्रम फैलाया जा रहा है, बाँटने का काम हो रहा है. पूरे देश के किसान एकजुट हैं. सरकार में केवल छह प्रतिशत बिकता है, बाकी सब खुला रहा है, किस बात की आज़ादी, आज भी 94 प्रतिशत खुले बाज़ार में बिकता है. एमएसपी को कानून बना दिया जाए, बाज़ार में कोई व्यापारी उससे कम पर न खरीदे, जो कम पर खरीदे उसे सज़ा दी जाए. पूरे देश के हर किसान को कानूनन एमएसपी मिलना चाहिए, यह हमारी माँग है.

    हर चीज़ का विकल्प निकाला जा सकता है, अमरीका में जो सब्सिडी दी जाती है उसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते. सरकार को इसका हल निकालना है. कीमतें तय करने का फार्मूला ठीक नहीं है, उसके बावजूद किसान कह रहा है कि न्यूनतम तो दे दो, इस पर सरकार गंभीर नहीं है, यह बहुत दुखद है, किसान लंबे समय से वाजिब दाम माँग रहा है. किसान को घाटे की खेती में डाल दिया गया है, कुचक्र है, इसे तोड़ना है. सरकार खुद दे, या व्यापारी से दिलवाए लेकिन वह मिलना चाहिए.

    एजेंट होगा, कंपनी होगी, कोई तो होगा, उपभोक्ता सामान पहुँच नहीं सकता, अमूल का मॉडल है, मदर डेरी का मॉडल है, सरकार लेकर तो आए. सरकार कोई फार्मूला लाए ताकि लाभकारी मूल्य की गांरटी हो ताकि हम अपना परिवार पाल सकें. अमरीका में फैमिली फार्मर एक प्रतिशत से कम हो गए हैं, भारत में साठ प्रतिशत फैमिली किसान हैं, अमरीका में एग्री बिजनेस से खेती पर कब्जा कर लिया है.

  13. सिंघु बॉर्डर से बीबीसी संवाददाता जसपाल सिंह

    हरियाणा-दिल्ली सिंघु बॉर्डर पर कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे किसानों से बात कर रहे हैं बीबीसी संवाददाता जसपाल सिंह

  14. भारत और नेपाल के बीच नियमित विमान सेवा बहाल करने पर मंज़ूरी

    काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने बताया है कि भारत और नेपाल की सरकार ने एयर ट्रासपोर्ट बबल मेकैनिज्म के तहत नियमित फ्लाइट सेवा बहाल करने पर अपनी अनुमति दे दी है.

    एयर इंडिया और नेपाल एयर लाइन्स की विमानें रोज़ उड़ान भरेंगी.

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  15. संसद की नई इमारत ‘आत्मनिर्भर भारत’ की गवाह होगी: नरेंद्र मोदी

    संसद की नई इमारत के शिलान्यास के मौक़े पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संसद का नया भवन अपनी नई पहचान क़ायम करेगा.

    उन्होंने कहा कि यह 130 करोड़ भारतीयों के लिए गर्व का दिन है. हम एक ऐतिहासिक पल के गवाह बन रहे हैं. संसद की नई इमारत पुराने और नई इमारत के सह-अस्तित्व का एक उदाहरण होगा. यह समय और ज़रूरत के हिसाब से बदलाव लाने की एक कोशिश है.

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    उन्होंने आगे कहा कि अगर संसद की पुरानी इमारत ने आज़ादी के बाद के भारत को नई दिशा दिया है तो वहीं संसद की नई इमारत ‘आत्मनिर्भर भारत’ की साक्षी होगी.

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  16. किसान आंदोलन में सुलह की राह कितनी कठिन? देखिए विशेषज्ञों की राय

  17. संसद भवनः मोदी ने किया शिलान्यास, पर नई इमारत क्यों और क्या होगा पुराने का - जानिए सबकुछ

  18. संसद के नए भवन का प्रधानमंत्री ने किया शिलान्यास

    नया संसद भवन मौजूदा संसद भवन के पास ही बन रहा है. ये एक तिकोनी इमारत होगी. मौजूदा संसद भवन वृत्ताकार है.

    इस मौके पर विभिन्न धर्मावलंबियों के गुरुओं ने अपनी-अपनी पद्धति के अनुसार प्रार्थना की.

    नरेंद्र मोदी

    इमेज स्रोत, ANI

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  19. बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर पत्थरबाजी

    समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक पश्चिम बंगाल में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर प्रदर्शकारियों ने पत्थरबाजी की है.

    प्रदर्शनकारियों ने उनके काफिले को डायमंड हार्बर में रोकने की भी कोशिश की.

    वो पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में शामिल होने के लिए दक्षिण 24 परगना जा रहे थे.

    इससे पहले बंगाल दौरे पर गए जेपी नड्डा को कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को काले झंडे दिखाए थे.

    उस वक्त वो कोलकाता के हेस्टिंग क्षेत्र में पार्टी के नए दफ्तर के उद्घाटन पर पहुँचे थे.

    इस मामले में गृह मंत्री अमित शाह ने गृह मंत्रालय को निर्देश देकर पश्चिम बंगाल सरकार से सुरक्षा मामले में हुई चूक के बाबत सवाल करने को कहा है.

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  20. कृषि बिल वापसी के अलावा कोई रास्ता नहीं दिखता - राकेश टिकैत

    भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि किसानों और सरकार के बीच गतिरोध में अब लगता है कि एकमात्र रास्ता क़ानून को वापस लेना है.

    समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार राकेश टिकैत ने कहा है कि सरकार ने बुधवार को अपने प्रस्ताव में संशोधन की बात की है मगर किसान इसके लिए तैयार नहीं हैं.

    पर सरकार कृषि क़ानूनों को वापस क्यों नहीं ले लेती? पढ़िए विस्तार से ये रिपोर्ट

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