एनडीए की जीत के बाद दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में जीत का जश्न

बिहार विधानसभा चुनावों में एनडीए की जीत के बाद दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में जीत का जश्न मनाया गया.

लाइव कवरेज

  1. उमा भारती ने तेजस्वी पर की टिप्पणी, कहा- अच्छे लेकिन नहीं चला सकते थे सरकार

    बीजेपी नेता उमा भारती ने कहा है कि तेजस्वी अच्छे लड़के हैं लेकिन वो सरकार चला ही नहीं सकते थे.

    न्यूज़ एजेंसी एएनआई की ख़बर के मुताबिक़, उमा भारती ने कहा 'बिहार बाल-बाल बच गया. तेजस्वी बहुत अच्छा लड़का है. परन्तु तेजस्वी सरकार चला ही नहीं सकते थे. सरकार चलाने का काम लालू को करना था. जैसे मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ का बंटाधार कर दिया वैसे ही स्थिति बिहार में लालू के द्वारा होनी थी.'

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    उमा भारती की इस टिप्पणी पर आरजेडी नेता मनोज झा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उमा भारती जी से आग्रह है कि वो बिहार की राजनीति को समझें.

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  2. धर्मगुरु दलाई लामा ने नीतीश कुमार को दी जीत की बधाई

    तिब्बत के धर्मगुरु दलाई लामा ने बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन को जनादेश मिलने पर नीतीश कुमार को पत्र लिखकर जीत की बधाई दी है.

    उन्होंने अपने संदेश में लिखा, "मैं प्रार्थना करता हूं कि बिहार के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के मार्ग में आपके समक्ष जो भी चुनौतियां आएं आप उन्हें सफलता पूर्वक पार करते हुए आगे बढ़ें."

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  3. बिहार के राज्यपाल को आज सौंपी जाएगी निर्वाचित सदस्यों की लिस्ट

    मुख्य निर्वाचन अधिकारी एच आर श्रीनिवास आज बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के निर्वाचित सदस्यों की लिस्ट बिहार के राज्यपाल को सौंपेंगे.

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  4. ‘मुझे चेतावनी देने की ज़रूरत नहीं, वो काम जनता करेगी’

    मोदी

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    बिहार चुनाव और कई राज्यों के उप-चुनावों में जीत के बाद दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि कुछ परिवार की पार्टियां लोकतंत्र के लिए ख़तरा हैं.

    साथ ही उन्होंने कुछ राज्यों में पार्टी कार्यकर्ताओं की हत्या पर भी अपनी राय रखी.

    उन्होंने कहा, “परिवार की पार्टियों का जाल लोकतंत्र के लिए ख़तरा बनता जा रहा है. परिवार की पार्टियां या परिवारवादी पार्टियां लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा ख़तरा हैं. दुर्भाग्य से अनेक दशकों तक देश का नेतृत्व करने वाली पार्टी एक परिवार के चंगुल में फंसकर रह गई है. ऐसे में भारतीय जनता पार्टी का दायित्व और बढ़ जाता है."

    "हमें अपनी पार्टी में भीतर का लोकतंत्र बनाए रखना है. तभी तो देश का प्रधानमंत्री मंच से कह सकता है, 'नड्डा जी आगे बढ़ो हम तुम्हारे साथ हैं.' जिनमें राष्ट्र हित सर्वोपरि है जिनमें लोकतंत्र में प्रतिबद्धता है, मैं वैसे युवाओं को निमंत्रित करता हूं. देश के युवाओं से मेरा आह्वान है कि वो आगे आएं और बीजेपी के माध्यम से देश की सेवा में जुट जाएं. अपने सपनों को साकार करने के लिए, हाथ में कमल लेकर चल पड़ें.”

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “जो लोग लोकतांत्रिक तरीक़े से हमारा मुक़ाबला नहीं कर पा रहे हैं. उन्होंने कार्यकर्ताओं की हत्या करने का रास्ता अपनाया है. उन्हें लगता है कि भाजपा के लोगों को मौत के घाट उतारकर के अपने मंसूबे पूरे कर लेंगे. मैं उन्हें आग्रहपूर्वक समझाने का प्रयास करता हूं, मुझे चेतावनी देने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि वो काम जनता करेगी."

    "चुनाव आते हैं जाते हैं, जय-पराजय होती रहती है लेकिन यह मौत का खेल लोकतंत्र में कभी नहीं चल सकता. मौत का खेल-खेलकर के कोई मत नहीं पा सकता है.”

  5. महिलाएं हमारी साइलेंट वोटर हैं: पीएम मोदी

    पीएम मोदी

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की महिलाओं को धन्यवाद कहते हुए कहा कि यह नारी शक्ति ही उनकी साइलेंट वोटर है.

    साथ ही उन्होंने कहा कि बीजेपी-एनडीए के कार्यकर्ता नीतीश कुमार के नेतृत्व में सभी संकल्पों को सिद्ध करेंगे.

    उन्होंने कहा, “मैं कल से अख़बारों में और टीवी पर देख रहा हूं कि साइलेंट वोटर की बात की जा रही है. यह साइलेंट वोटर देश की माताएं, बहनें और महिलाएं हैं. यह बीजेपी है जिसके शासन में महिलाओं को सम्मान भी मिलता है और सुरक्षा भी मिलती है.”

    पीएम मोदी ने कहा, “कल के नतीजों में देश की जनता ने फिर ये तय कर दिया है कि 21वीं सदी में देश की राजनीति का मुख्य आधार सिर्फ़ और सिर्फ़ विकास ही होगा. बैंक खाते, गैस कनेक्शन, घर, स्वरोज़गार के लिए सुविधाएं, अच्छी सड़कें, अच्छी रेलवे, अच्छे स्टेशन, बेहतर हवाई अड्डे, इंटरनेट कनेक्टिविटी अहम मुद्दे हैं.”

    “जनता बार-बार बता रही है कि विकास सबसे बड़ा मुद्दा है, आगे भी यही चुनाव का आधार रहने वाला है. हम हर वो काम करेंगे जो देश को आगे ले जाए, हम हर वो फ़ैसला लेंगे जो देश हित में हो, देश के लोगों के हित में हो.”

  6. ब्रेकिंग न्यूज़, कल के नतीजे लोकसभा चुनाव के नतीजों का विस्तार हैं: पीएम मोदी

    नरेंद्र मोदी

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार चुनाव और कई राज्यों के उप-चुनावों में मिली बीजेपी और एनडीए की जीत पर पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया.

    दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में उन्होंने देश की जनता, चुनाव आयोग, सुरक्षाबलों और स्थानीय प्रशासनों का धन्यवाद किया.

    पीएम मोदी ने कहा, “चुनाव भले ही कुछ सीटों पर और कुछ क्षेत्रों में हुआ है लेकिन कल पूरे देश की नज़रें टीवी, ट्विटर पर थीं. चुनाव आयोग की वेबसाइट पर थीं. लोकतंत्र के प्रति हम भारतीयों की जो आस्था है उसकी मिसाल पूरी दुनिया में कहीं नहीं मिलती.”

    “चुनाव के बाद अगले दिन ख़बर आती थी कि इतने बूथ लूट लिए गए, इतने बूथों पर फिर मतदान होगा लेकिन आज ख़बर आती है, इतने प्रतिशत मतदान हुआ, इतनी महिलाओं ने मतदान किया. बिहार से मतदान के बाद ख़बर आती थी कि इतने लोग मारे गए लेकिन आज एक भी बूथ पर दोबारा मतदान नहीं हो रहा है. कोरोना के इस संकट काल में चुनाव कराना आसान नहीं था लेकिन हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं इतनी मज़बूत हैं कि उन्होंने दुनिया को दिखा दिया है.”

    उन्होंने कहा कि इन चुनाव परिणामों में बीजेपी और एनडीए को अपार समर्थन मिला है, इसके लिए सभी कार्यकर्ताओं को जितनी बधाई दूं वो कम है, कल जो नतीजे आए उसके मायने बहुत बड़े हैं, लोकसभा चुनाव में जो नतीजे आए थे यह उसका व्यापक विस्तार है.

  7. नीतीश कुमार का आया ट्वीट, जनता और पीएम मोदी का किया धन्यवाद

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    बिहार चुनावों में एनडीए की जीत के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ट्वीट करके पहली प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने ट्वीट करके जनता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया है.

    उन्होंने लिखा,“जनता मालिक है. उन्होंने एनडीए को जो बहुमत प्रदान किया है, उसके लिए जनता-जनार्दन को नमन है. मैं पीएम श्री नरेंद्र मोदी जी को मिल रहे उनके सहयोग के लिए धन्यवाद करता हूं.”

  8. ‘देश की जनता ने पीएम मोदी के काम पर मुहर लगाई है’

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    बिहार चुनावों में मिली जीत के बाद बुधवार को दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ता जीत का जश्न मना रहे हैं.

    इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे. उससे पहले पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा यह सिर्फ़ बिहार चुनाव नहीं था बल्कि इसमें कई राज्यों के उप-चुनाव भी थे, उसके लिए देश की जनता को धन्यवाद.

    उन्होंने कहा, “यह चुनाव कोविड-19 के पश्चात पहला बड़ा चुनाव था. हम सबको दिक़्क़त थी कि लोगों को साथ लेकर चलना कितना कठिन होगा लेकिन बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात, मणिपुर, तेलंगाना और कर्नाटक की जनता ने कमल का बटन दबाकर जीत पर मुहर लगाई है. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी जी के काम पर मुहर लगाई है.”

  9. अमित शाह, जेपी नड्डा और राजनाथ सिंह बीजेपी मुख्यालय पहुंचे

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    एनडीए को बिहार चुनावों में मिली जीत के बाद बुधवार को दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ता जीत का जश्न मना रहे हैं.

    इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे.

    इससे पहले पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पार्टी मुख्यालय पहुंच चुके हैं.

  10. बिहार बीजेपी ने किया कार्यकर्ताओं का धन्यवाद

    बिहार बीजेपी की बैठक

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    बिहार चुनाव में एनडीए की जीत के बाद बुधवार को पटना में बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में चुनाव प्रबंधन समिति की बैठक का आयोजन किया गया.

    बैठक में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर संजय जायसवाल, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानन्द राय, स्वास्थ्य मंत्री व चुनाव प्रबंधन समिति के संयोजक डॉक्टर मंगल पांडे, पाटलिपुत्र सांसद रामकृपाल यादव, महाराजगंज सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल आदि नेताओं ने चुनाव अभियान को सफल बनाने के लिए समिति के सभी सदस्यों व कार्यकर्ताओं को धन्यवाद दिया.

  11. बीजेपी मुख्यालय में जीत का जश्न, पीएम मोदी करेंगे संबोधित

    मोदी का मास्क

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    बिहार चुनाव में एनडीए की जीत के बाद बुधवार को दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में जीत का जश्न मनाया जा रहा है.

    ऐसा अनुमान है कि कुछ ही समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे.

    बिहार चुनाव में मंगलवार को आए परिणामों में एनडीए को 125 सीटें मिली हैं. इसमें से सबसे अधिक बीजेपी को 74 सीटें, जेडीयू ने 43 सीटें, हम और वीआईपी ने 4-4 सीटें जीती हैं.

  12. नीतीश को दिग्विजय की सलाह, तेजस्वी को बना दें मुख्यमंत्री

    बिहार चुनाव में महागठबंधन के 110 सीटें जीतने के बाद कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने नीतीश कुमार से अपील की है कि वो बड़ा दिल दिखाते हुए तेजस्वी को मुख्यमंत्री बना दें.

    उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई समेत विभिन्न चैनलों से कहा है कि जेडीयू को चाहिए कि वह डिप्टी सीएम पद समेत एक फ़ॉर्मूला बनाकर ऐसा कर ले.

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    दिग्विजय सिंह ने ट्वीट भी किया और लिखा, “नितीश जी, बिहार आपके लिए छोटा हो गया है, आप भारत की राजनीति में आ जाएँ. सभी समाजवादी धर्मनिरपेक्ष विचारधारा में विश्वास रखने वाले लोगों को एकमत करने में मदद करते हुए संघ की अंग्रेज़ों के द्वारा पनपाई ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति ना पनपने दें. विचार ज़रूर करें.”

    उन्होंने नीतीश कुमार को संबोधित करते हुए अगला ट्वीट किया कि यही महात्मा गांधी और जयप्रकाश नारायण को सही श्रद्धांजलि होगी क्योंकि वो उन्हीं की विरासत से निकले राजनेता हैं.

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    दिग्विजय सिंह की टिप्पणी पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तंज़ कसा है. उन्होंने कहा है कि उनको पहले अपने राज्य पर ध्यान देना चाहिए.

  13. वो अपने चिराग से भस्म हो गए हैं: एलजेपी पर मांझी

    वरिष्ठ बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बिहार चुनावों में मिली एनडीए की जीत पर कहा है कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मिली जीत है और बिहार में एनडीए की जीत की सबसे बड़ी वजह विश्वनीयता है.

    एलजेपी के चुनाव अलग लड़ने पर यादव ने कहा कि एलजेपी ने एनडीए को धोखा दिया था और बिहार की जनता ने उन्हें उनकी जगह दिखा दी है.

    वहीं, एनडीए के सहयोगी दल हम के प्रमुख जीतनराम मांझी ने भी एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान पर टिप्पणी की है.

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    उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि ऐसा कहा जाता है कि जिस डाल पर आप बैठे हों उसे काटना नहीं चाहिए लेकिन चिराग पासवान ने जिसका वो हिस्सा थे उसे ही हराने की दिशा में काम किया.

    मांझी ने कहा कि अब परिणाम साफ़ है, डाल कट चुकी है और वो नीचे गिर चुके हैं, और ‘वो अपने चिराग से भस्म हो गए हैं.’

  14. नीतीश कुमार ही अगले मुख्यमंत्री होंगे- सुशील मोदी

    नीतीश कुमार

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    बिहार बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि नीतीश कुमार ही अगले मुख्यमंत्री होंगे.

    सुशील मोदी ने कहा, ‘’बीजेपी के नेतृत्व की ओर से ये साफ़ है कि नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री होंगे. जेपी नड्डा, अमित शाह जी सबकी ओर से स्पष्ट है कि नीतीश कुमार ही सीएम होंगे.

    ‘’किसको कितनी सीटें मिली हैं ये सवाल ही अलग है. बीजेपी को जो सीटें मिली हैं उसमें जदयू का योगदान है और जदयू को जो सीट मिली है उसमें बीजेपी का भी योगदान है. जब गठबंधन चुनाव लड़ता है और चुनाव के पहले ही सीएम पद का चेहरा तय हो जाता है तो सीटों से फ़र्क नहीं पड़ता.हाँ, ये सही है कि बाग़ी नेताओं ने लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा जिसका नुकसान हमारे गठबंधन को हुआ. ‘’

    बिहार में तीसरे नंबर की पार्टी बनी जेडीयू को सिर्फ़ 43 सीटों पर जीत मिली है, वहीं बीजेपी 74 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है. ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि राज्य का अलगा मुख्यमंत्री कौन होगा? हालांकि बीजेपी ये कह रही है कि नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री होंगे. लेकिन नीतीश कुमार की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया अब तक सामने नहीं आई है.

  15. नीतीश को लेकर नरम पड़े चिराग पासवान

    चिराग पासवान

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    लोक जनशक्ति पार्टी प्रमुख चिराग पासवान ने बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद बुधवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस की और कहा कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी राह आसान होगी. चिराग पासवान ने एनडीए से अलग होकर 137 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे लेकिन महज एक सीट पर जीत मिली है.

    हालांकि चिराग ने बीजेपी के ख़िलाफ़ उम्मीदवार न के बराबर उतारे थे. कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार की सीटें 43 तक इसलिए सीमित रह गई क्योंकि चिराग पासवान ने उनके वोट काट लिए. चिराग पासवान का पूरा कैंपेन भी नीतीश विरोधी था.

    चिराग कहते थे कि वो किसी भी हाल में नीतीश कुमार को सीएम नहीं बनने देंगे. हालांकि बुधवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस करने आए तो उनका तेवर नीतीश को लेकर थोड़ा नरम दिखा.

    क्या आप नीतीश को बधाई देंगे?

    ये पूछे जाने पर पहली बार उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा - पहले बन तो जाएँ.

    दोबारा ये सवाल करने पर उन्होंने कहा,”बिल्कुल, अंततोगत्वा पुनः वो हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे. मैंने हमेशा इस बात को कहा है कि सबसे पहले तो मैं बिहारी हूँ, तो बिहारी होने के नाते कोरोना काल में भी मैंने सारे सवाल मेरे मुख्यमंत्री से उठाए थे, चाहे वो कोटा के बच्चों का हो या प्रवासी मज़दूरों का हो, और अगले पाँच साल भी मेरे सवाल जो भी मुख्यमंत्री रहे उन्हीं से रहेंगे, मुझे पता नहीं ये घोषणा हुई है कि नहीं, लेकिन अगर नीतीश कुमार जी मुख्यमंत्री बनते हैं तो मेरी पार्टी की ओर से उनको ढेर सारी शुभकामनाएँ दूँगा. मैंने हमेशा कहा है कि उनके लिए मेरा व्यक्तिगत सम्मान उनके लिए जैसा था वैसा ही रहेगा, राजनीतिक विरोध जैसा कल भी था, आज भी है, वो मतभेद ज़रूर रहेगा.’’

    चिराग पासवान ने कहा, ''हमारा जनाधार और वोट प्रतिशत बढ़ा है. पार्टी नई ताक़त के साथ सामने आई है और 2025 में हमारी राह आसान होगी. तमाम विपरीत परिस्थितियों में जिस तरह हमारे उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा उस पर मुझे गर्व है. आने वाले समय के लिए इससे एलजेपी के लिए मज़बूत ज़मीन तैयार होगी. हम लोगों को सीटों की समझ नहीं थी और हम जिस गठबंधन का हिस्सा थे उससे भी हमें संदेश काफ़ी देरी से मिला. बाद में तय हुआ कि चुनाव साथ नहीं लड़ना है. मेरे पिता का निधन हुआ. 10 दिनों तक मैं चुनाव प्रचार का हिस्सा नहीं रहा ऐसे में हमें प्रचार का समय भी नहीं मिला.''

    चिराग ने कहा, ''ऐसा नहीं है कि हम अप्रासंगिक हो गए हैं. लोजपा को लगभग 6 फ़ीसदी वोट मिला है. ‘बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट’ की दिशा में काम करता रहूंगा. नरेंद्र मोदी का धन्यवाद, उनकी वजह से ही बिहार में एनडीए की सरकार बनी है. जब प्रधानमंत्री खुद इसकी मॉनिटरिंग करेंगे तो बिहार आगे बढ़ेगा.''

    चिराग पासवान

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  16. ओवैसी तेजस्वी के लिए बनेंगे सबसे बड़ा दर्द?

    ओवैसी

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    हैदराबाद के लोकसभा सांसद और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन पार्टी के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की बिहार में धमाकेदार एंट्री से राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के कान खड़े हो गए हैं.

    कहा जा रहा है कि ओवैसी के पैर जमाने से बिहार में लालू यादव का एमवाई यानी मुसलमान-यादव समीकरण दरक जाएगा. दूसरी तरफ़ ओवैसी को भी बिहार में पैर जमाने के लिए इस समीकरण को तोड़ना होगा.

    ओवैसी की पार्टी ने बिहार में सीमांचल की जिन पाँच सीटों पर जीत दर्ज की हैं वे हैं- पूर्णिया ज़िले की बैसी और अमौर, किशनगंज की बहादुगंज और कोचाधामन के साथ अररिया में जोकिहाट.

    ओवैसी के इस प्रदर्शन का मतलब है कि जो वोट आरजेडी और कांग्रेस को मिलता था वो ओवैसी की पार्टी को मिला. इन पाँचों सीटों पर मुसलमानों की आबादी 50 से 70 फ़ीसदी है.

    ओवैसी की पार्टी 2015 के विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी. लेकिन पिछले साल उपचुनाव में किशनगंज से AIMIM को जीतने में कामयाबी मिली थी. AIMIM ने इस बार कुल 24 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और पाँच पर जीत मिली है. AIMIM को बिहार में इस बार कुल 1.25 फ़ीसदी वोट मिले हैं.

    कांग्रेस अब भी वही बात कह रही है कि AIMIM बीजेपी की बी टीम है.बिहार में मुसलमान 16.87 फ़ीसदी हैं. इस लिहाज़ से बिहार की चुनावी राजनीति में मुस्लिम समुदाय की ख़ासी अहमियत है.

    अगर ओवैसी बिहार में मुसलमानों को अपने पीछे लामबंद करने में कामयाब रहते हैं तो आरजेडी के लिए आने वाले दिनों में और मुश्किल स्थिति हो सकती है.

    2011 की जनगणना के अनुसार बिहार के किशनगंज में 67.98, पूर्णिया में 38.46, कटिहार में 44.47 और अररिया में 42.95 फ़ीसद मुसलमान हैं. ओवैसी का पूरा ध्यान इन्हीं इलाक़ों पर है. हालांकि ओवैसी कहते हैं कि वो सीमांचल से बाहर भी बिहार में पार्टी और संगठन पर ध्यान देंगे लेकिन वो अपनी जड़ें पहले इन्हीं इलाक़ों में मज़बूत करना चाहते हैं. कांग्रेस का कहना है कि ओवैसी के कारण सीमांचल में महागठबंधन को ख़ासा नुक़सान हुआ है.

    वीडियो कैप्शन, बिहार चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम कमाल कर पाएगी?
  17. तेजस्वी मुख्यमंत्री बनते-बनते क्या इसलिए रह गए?

    तेजस्वी यादव

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    तेजस्वी यादव के चुनावी कैंपेन की बहुमत नहीं हासिल करने के बावजूद तारीफ़ हो रही है. कहा जा रहा है कि तेजस्वी मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए. लेकिन राष्ट्रीय जनता दल के भीतर भी कई नेताओं का मानना है कि तेजस्वी ने कांग्रेस को 70 सीटें देकर सबसे बड़ी ग़लती की थी.

    कांग्रेस को 70 में से महज़ 19 सीटों पर ही जीत मिली है और बहुमत से पीछे रह जाने में यह अहम कारण बना. दूसरी तरफ़ महागठबंधन की एक और सहयोगी सीपीआईएमएल ने 19 में से 12 सीटें जीत शानदार प्रदर्शन किया. आरजेडी नेता शिवानंद तिवारी कहते हैं कि पार्टी को को कांग्रेस के सामने इतना नहीं झुकना चाहिए था.

    यहां तक कि कांग्रेस 2015 के विधानसभा चुनाव परिणाम को भी नहीं दोहरा पाई. तब कांग्रेस 41 सीटों पर लड़ी थी और उसने 27 सीटों पर जीत हासिल की थी. कांग्रेस के लिए बुरी ख़बर केवल बिहार से ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश से भी आई. मध्य प्रदेश में चंबल के इलाक़े में 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव था लेकिन यहां भी कांग्रेस 9 सीटों पर सीमित रह गई.

    अगर कांग्रेस यहां 25 सीटें जीत जाती तो शिवराज सिंह चौहान की सरकार गिर जाती. कांग्रेस का कहना है कि सीटों के बँटवारे में देरी, कमज़ोर उम्मीदवारों का चयन, कमज़ोर संगठन और प्रदेश स्तर के अप्रभावी नेतृत्व के कारण हार मिली है. इसके साथ ही चुनावी अभियान में गठबंधन के साथियों में कोई समन्वय का नहीं होना भी कारण बताया जा रहा है.

    बिहार के पूरे चुनावी कैंपेन में राहुल और तेजस्वी की कोई एक साथ रैली नहीं हुई. प्रियंका गांधी भी कैंपेन में नहीं आईं. आरजेडी, लेफ़्ट और कांग्रेस के बीच सीटों का बँटवारा मतदान के ठीक 25 दिन पहले हो पाया था. ये भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस को आरजेडी ने वो सीटें दीं जहां उसके लिए जीतना आसान नहीं था.

    कांग्रेस के एक पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि 70 सीटें भले मिलीं लेकिन जो सीटें मिलनी चाहिए थीं वो पार्टी ले नहीं पाई. उनका कहना है कि आरजेडी ने वही सीट दी जहां उसके लिए जीत हासिल करना मुमकिन नहीं था. कांग्रेस का कहना है कि उसे वही सीट मिली जहां एनडीए बहुत मज़बूत था.

    तेजस्वी यादव

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  18. चिराग पासवान के कारण तेजस्वी की जीत हुई बड़ी?

    तेजस्वी यादव

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    राघोपुर में तेजस्वी यादव को 38174 मतों से जीत मिली है. तेजस्वी यादव को कुल 97404 वोट मिले जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी बीजेपी के सतीश कुमार को 59230 मत मिले. वहीं तीसरे नंबर पर लोक जनशक्ति पार्टी के राकेश रौशन रहे. राकेश रौशन को कुल 24947 वोट मिले.

    राघोपुर में यादव मतदाता सबसे ज़्यादा सवा लाख के क़रीब हैं. यादवों के बाद राजपूत मतदाताओं की संख्या 40 हज़ार के आसपास है. तेजस्वी यादव के सामने इस बार भी बीजेपी के यादव उम्मीदवार सतीश कुमार थे.

    कहा जा रहा था कि तेजस्वी को सतीश कड़ी टक्कर दे सकते हैं लेकिन चिराग पासवान ने राजपूत उम्मीदवार उतार तेजस्वी की जीत बिल्कुल आसान कर दी. राजपूतों का वोट आरजेडी के तुलना में बीजेपी को ज़्यादा मिलता रहा है. ऐसे में राकेश रौशन के आने से बीजेपी का वोट कटा और तेजस्वी की जीत बड़ी हो गई.

    अगर सतीश कुमार और राकेश रौशन का वोट जोड़ दें तो 84177 हो जाता है. राकेश रौशन उम्मीदवार नहीं होते और उनका वोट सतीश कुमार को मिल जाता तो तेजस्वी महज़ 13227 वोट से ही जीतते.

    राकेश रौशन के आने से राघोपुर में राजपूतों के बीच नारा दिया गया था- पहले कुल तब फूल यानी पहले जाति तब बीजेपी का निशान कमल का फूल. राघोपुर से सतीश कुमार ने 2010 के विधानसभा चुनाव में तेजस्वी की माँ राबड़ी देवी को मात दी थी. यहां से राबड़ी देवी 2005 में चुनाव जीती थीं और लालू यादव 1995 और 2000 में.

    तेजस्वी यादव

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  19. क्या नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बनेंगे?

    नीतीश कुमार

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    बिहार विधानसभा के चुनावी नतीजे आ गए. मतगणना के दौरान ही आरजेडी ने चुनाव आयोग पर सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगया और कहा कि जनादेश का अपहरण किया जा रहा है. आख़िरकार जीत एनडीए को मिली लेकिन सबसे बड़ी पार्टी आरजेडी (75) बनकर उभरी है.

    तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले गठबंधन ने एनडीए को कड़ी चुनौती दी लेकिन बहुमत से पीछे रह गया. चिराग पासवान की एलजेपी महज एक सीट जीत पाई लेकिन इससे नीतीश कुमार को ख़ासा नुक़सान हुआ. बीजेपी के भीतर ही नीतीश कुमार को लेकर सवाल उठ सकता है.

    बीजेपी ने 74 सीटें जीती हैं और नीतीश की पार्टी ने महज़ 43. ऐसे में नीतीश सीएम बनेंगे या नहीं यह सवाल भी प्रमुखता से उभरकर सामने आ रहा है. नीतीश कुमार की इस जीत पर अभी कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन कहा जा रहा है उनके मन में एलजेपी को लेकर कसक है कि बीजेपी ने उसे रोका नहीं. इस चुनाव में दोनों अहम गठबंधनों पर दो पार्टियों का गहरा असर रहने की बात की जा रही है.

    लोक जनशक्ति पार्टी और ओवैसी की पार्टी AIMIM.ओवैसी को पाँच सीटों पर जीत मिली है और एलजेपी को महज़ एक सीट पर. लेकिन ओवैसी ने सीमांचल में महागठबंधन को झटका दिया है और चिराग ने नीतीश को लगभग हर सीट पर प्रभावित किया है. जेडीयू को 2015 में 71 सीटों पर जीत मिली थी जबकि इस बार 43 पर ही मिली.

    जेडीयू ने जितनी सीटों पर चुनाव लड़ा था उनमें से 35 फ़ीसदी पर ही जीत मिली जबकि बीजेपी को 70 फ़ीसदी सीटों पर जीत मिली है. बिहार के कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि चिराग को जो असाइनमेंट मिला था उसे उन्होंने पूरा कर लिया है. उन्होंने नीतीश कुमार को अच्छा-ख़ासा नुक़सान पहुंचा दिया है और अब उनका भविष्य बीजेपी के हाथों में है.

    चिराग ने चुनाव के नतीजे आने के बाद ट्वीट कर कहा, ''मुझे पार्टी पर गर्व है की सत्ता के लिए पार्टी झुकी नहीं. हम लड़े और अपनी बातों को जनता तक पहुँचाया. जनता के प्यार से इस चुनाव में पार्टी को बहुत मज़बूती मिली है. बिहार की जनता का धन्यवाद.''

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  20. ओवैसी की बिहार में शानदार एंट्री

    बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद अगर सबसे ज़्यादा किसी की चर्चा है तो वे हैं हैदराबाद के लोकसभा सांसद और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी.

    ओवैसी की पार्टी ने पाँच सीटों पर जीत दर्ज की है. बिहार में इससे पहले AIMIM को 2019 में एक उपचुनाव में जीत मिली थी. ओवैसी की विपक्षी पार्टियां आलोचना कर रही हैं उनकी वजह से बीजेपी को फ़ायदा मिला है.

    वहीं ओवैसी ने अपनी जीत के बाद कहा, ''राजनीति आप अपनी ग़लतियों से सीखते हैं. हमारी पार्टी के बिहार प्रमुख अख़्तरुल ईमान ने बिहार में सभी बड़ी पार्टियों से संपर्क किया था लेकिन सबने अछूत समझा. मेरी पार्टी ने बड़े मुस्लिम नेताओं से भी मुलाक़ात की थी लेकिन सबने अछूत की तरह व्यवहार किया. लेकिन बिहार की जनता ने उन्हें आईना दिखा दिया है.''

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