सऊदी अरब से भारत ने साफ़ कहा, नोट पर छपी अंतरराष्ट्रीय सीमा में सुधार हो
सऊदी अरब के नए बैंक नोट पर छपी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में भारत ने सुधार करने के लिए कहा है. देश-दुनिया की बड़ी ख़बरें और लाइव अपडेट यहाँ देखें.
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सऊदी अरब से भारत ने साफ़ कहा, नोट पर अंतरराष्ट्रीय सीमा सुधारी जाए
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सऊदी
अरब के नए बैंक नोट पर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को लेकर भारत ने खाड़ी देश से अपनी
चिंता को साझा करते हुए इसे सुधारने की मांग की है.
बीते
सप्ताह जारी हुए नोट को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इस पर बयान जारी
किया और खाड़ी देश से ‘तत्काल सुधारात्मक क़दम’उठाने
की मांग की.
20 रियाल के बैंक नोट में दुनिया का नक़्शा छपा हुआ है जो
सऊदी अरब ने जी-20 समूह की अध्यक्षता को चिन्हित करने के लिए जारी किया है. इसमें
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख़ को भारत का हिस्सा नहीं दिखाया गया है.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने
कहा कि सऊदी अरब से इस मामले में ‘तत्काल सुधारात्मक क़दम’
उठाने के लिए कहा गया है और इस बात पर ज़ोर देते हुए साफ़ किया है
कि केंद्र शासित राज्य जम्मू-कश्मीर और लद्दाख़ भारत के अभिन्न अंग हैं.
अनुराग
श्रीवास्तव ने साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, “हमने बैंक
नोट देखा है जो भारत की बाहरी क्षेत्रीय सीमाओं को ग़लत तरीक़े से प्रस्तुत करता
है. सऊदी अरब मौद्रिक प्राधिकरण ने 24 अक्तूबर को जी-20
समूह की अध्यक्षता को चिन्हित करने के मौक़े पर यह जारी किया था.”
“हम
अपनी इस गंभीर चिंता को सऊदी अरब के साथ साझा कर चुके हैं. हमने नई दिल्ली में
उनके राजदूत और साथ ही रियाद में इस बारे में बताया है. सऊदी पक्ष से कहा गया है
कि वह इसको लेकर तत्काल सुधारात्मक क़दम उठाए.”
कई
रिपोर्ट के अनुसार, इस नक़्शे में पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के
गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र को भी पाकिस्तान का हिस्सा नहीं दिखाया गया है.
ब्रेकिंग न्यूज़, कश्मीर: संदिग्ध चरमपंथियों ने तीन बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या की
कश्मीर के कुलगाम ज़िले के काज़ीगुंड में संदिग्ध चरमपंथियों ने बीजेपी के तीन कार्यकर्ताओं की गोली मारकर हत्या कर दी है.
मारे जाने वालों में बीजेपी युवा मोर्चा के महासचिव फ़िदा हुसैन, उमर हजाम और उमर बेग़ शामिल हैं.
जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के प्रवक्ता अल्ताफ़ ठाकुर ने एक
बयान जारी कर तीनों पार्टी कार्यकर्ताओं के मारे जाने की कड़ी निंदा की है.
उन्होंने इनकी हत्या को बर्बर बताया है.
अल्ताफ़ ठाकुर ने कहा कि ईद-ए-मीलाद-उन-नबी
के पावन मौके पर भी निहत्थे नागरिकों को नहीं बख़्श रहे हैं. उन्होंने पुलिस से
अपराधियों को जल्द से जल्द ढूंढ निकालने और कड़ी सज़ा देने की अपील की.
कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं और जन
प्रतिनिधियों पर हाल के कुछ महीनों में लगातार जानलेवा हमले हुए हैं.
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ब्रेकिंग न्यूज़, फ़्रांस हमला: महातिर मोहम्मद ने किए विवादास्पद ट्वीट, पीएम मोदी ने जताया शोक
फ़्रांस के नीस शहर में गुरुवार को हुए चाकू हमले को लेकर
दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. अलग-अलग देशों के प्रतिनिधियों और सर्वोच्च
नेताओं से लेकर धर्मगुरुओं ने इस बारे में काफ़ी कुछ कहा हैं.
इन सबमें सबसे ज़्यादा चर्चा मलेशिया के पूर्व
प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद के बयानों की है. 95 वर्षीय महातिर मोहम्मद ने एक के
बाद एक कई विवादास्पद ट्वीट किए हैं.
उनके ट्वीट्स की जमकर आलोचना हो रही है. लोग इन्हें नफ़रत और पूर्वाग्रह से भरा बता रहे हैं.
ट्विटर ने कहा है कि उनके ट्वीट्स भड़काऊ और हिंसा का महामंडन करते हैं. हालाँकि ट्विटर ने उनके ट्वीट हटाए नहीं हैं.
वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता ने मताहिर मोहम्मद के ट्वीट्स की निंदा की है और लिखा है, “95 साल की उम्र में भी यह व्यक्ति इस क़दर ज़हर से भरा हुआ है.”
वहीं, पोप फ़्रांसिस ने नीस हमले में मारे गए लोगों के लिए शोक व्यक्त किया है.
उन्होंने ट्वीट किया, “मैं नीस में कैथोलिक समुदाय के करीबी हूँ. मैं चर्च के पास हुए हमले से बेहद दुखी हूँ. मैं हमले में मारे गए लोगों, उनके परिजनों और फ़्रांस के प्यारे लोगों के लिए प्रार्थना करता हूँ कि वो बुराई का जवाब भलाई से दें.”
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीस में हुए हमले को आतंकवादी हमला बताते हुए इसकी निंदा की है.
उन्होंने ट्वीट किया, “मैं आज के फ़्रांस में हुए हालिया आतंकी हमलों की कड़ी निंदा करता हूं. फ़्रांस में पीड़ितों और उनके परिजनों के साथ हमारी गहरी संवेदनाएं हैं. भारत आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में फ़्रांस के साथ खड़ा है.”
नीस में एक संदिग्ध हमलावर ने तीन लोगों की चाकू से मारकर जान ले ली. मारे जाने वालों में एक महिला भी शामिल हैं, हमलावर ने जिनका सिर काट दिया.
पुलिस का कहना है कि हमलावर बार-बार ‘अल्लाहू अकबर’ चिल्ला रहा था. फ़्रांस में कुछ ही दिनों पहले एक शिक्षक की भी इसी तरह सरेआम सिर काटकर हत्या कर दी थी.
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बिहार चुनावः पीएम मोदी और राहुल गांधी की रैलियों में आए लोग क्या बोले?
अक्षय कुमार की फ़िल्म 'लक्ष्मी बॉम' का नाम बदलकर 'लक्ष्मी' हुआ
अक्षय कुमार की आने वाली फ़िल्म लक्ष्मी बॉम से बदलकर
लक्ष्मी कर दिया गया है. इस फ़िल्म में अक्षय कुमार एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति की
भूमिका निभा रहे हैं.
राघव लॉरेन्स के निर्देशन में बनी इस फ़िल्म को गुरुवार को सेंसर सर्टिफ़िकेट मिला और इसके बाद फ़िल्म निर्माताओं ने सेंसर बोर्ड के सदस्यों
के साथ चर्चा की.
बताया गया कि चर्चा के बाद लोगों की धार्मिक भावनाओं का
ख़याल रखते हुए फ़िल्म का नाम 'लक्ष्मी बॉम' से बदलकर 'लक्ष्मी' कर दिया गया है.
हाल
ही में मुकेश खन्ना समेत कुछ अन्य कलाकारों और लोगों ने फ़िल्म के टाइटल पर सवाल
उठाए थे और इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप लगाया था.
हॉरर-कॉमेडी फ़िल्म‘लक्ष्मी’ नौ नवंबर को रिलीज़ होगी.
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बिहार के मुंगेर ज़िले में लोगों
का गुस्सा देखते हुए चुनाव आयोग ने ज़िले के डीएम और एसपी, दोनों को उनकी ड्यूटी
से हटाने का निर्देश दिया है.
साथ ही चुनाव आयोग ने मुंगेर में
हुई घटना (हिंसा) की जाँच के आदेश भी दिये हैं जो मगध प्रमण्डल के कमिश्नर असंगबा
चुबा आव करेंगे.
इसके बाद रचना पाटिल को मुंगेर का नया डीएम और मानवजीत सिंह ढिल्लो को नया एसपी बनाया गया है.
रचना पाटिल - नई डीएम और मानवजीत सिंह ढिल्लो- नए एसपी बने हैं.
चुनाव आयोग ने यह बड़ी कार्रवाई
मुंगेर में दशहरे पर माँ दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुई फ़ायरिंग और
उसमें एक युवक की मौत के बाद की है.
विपक्ष ने प्रदेश की नीतीश कुमार
सरकार पर इस घटना को लेकर ज़ोरदार हमला बोला है और झड़प में कथित तौर पर पुलिस की
गोलीबारी में एक युवक की मौत को ‘जलियाँवाला बाग़ जैसी घटना’ बताया है.
इस घटना से नाराज़ स्थानीय लोगों
ने गुरुवार को ज़िला मुख्यालय स्थित एसपी कार्यालय और एसडीओ आवास पर काफ़ी तोड़फोड़
की. इस घटना के बाद से मुंगेर में तनाव बना हुआ है.
ताज़ा हाल
बीबीसी हिंदी के सहयोगी पत्रकार नीरज प्रियदर्शी के मुतािबक़ दुर्गा प्रतिमा विसर्जन
के दौरान बिहार के मुंगेर में हुई हिंसा को लेकर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का आक्रोश
शांत होता नहीं दिख रहा है.
विधानसभा चुनाव के
मतदान में शांत रहे लोग अगले दिन भड़क उठे. शहर और आसपास के इलाकों में पुलिस के ख़िलाफ़
जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ.
सैकड़ों की संख्या
में सड़क पर उतरे गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने शहर के तीन थानों कासिम बाज़ार,
कोतवाली और को पूरब सराय में आग लगा दी.
ज़िले के
एसपी और कलेक्टर के दफ्तर और आवास पर पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और नारेबाज़ी हुई. दूसरे अन्य पुलिस अधिकारियों के
दफ्तरों में भी तोड़फोड़ की गई. पुलिस के दर्जनों वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं.
मतदान के दिन भी लोगों
का गुस्सा देखने को मिला था. शाम को कैंडिल मार्च निकाला गया. प्रतिमा विसर्जन के दौरान
हुई हिंसा का ही असर था कि मुंगेर में पूरे बिहार में सबसे कम सिर्फ़ 47.36 फ़ीसदी वोटिंग हुई.
बीते सोमवार की रात
शहर के दीनदयाल चौक के समीप हुई गोलीबारी और हिंसा में पुलिस के मुताबिक़ "गोलीबारी
असामाजिक तत्वों की तरफ़ से हुई, जिसमें एक युवक की
मौत हो गई और दर्जनों घायल हुए",
वहीं, स्थानीय लोगों के अनुसार "पुलिस ने गोलियां
बरसाई, एक से अधिक जानें गईं हैं,
मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है."
स्थानीय लोगों की
माँग
स्थानीय निवासियों
और श्रद्धालुओं का आरोप है कि मुंगेर की एसपी लिपि सिंह के आदेश पर ही पुलिस ने विसर्जन
करने जा रहे लोगों पर गोलियां बरसाईं.
बीबीसी की तरफ़ से
की गई कोशिशों में फ़िलहाल मुंगेर पुलिस को कोई भी अधिकारी इस मामले पर बात करने के
लिए तैयार नहीं है.
पुलिस की कार्रवाई
का विरोध कर रहे स्थानीय लोग और श्रद्धालु इस बात से संतुष्ट नहीं हैं कि डीएम और एसपी
को हटा दिया गया.
एबीवीपी से जुड़े
मुंगेर के युवा विक्की यादव ने बीबीसी से कहा, "पुलिस की गोलीबारी में हमारे लोगों की जान गई है. जो गया है
वह लौटकर तो नहीं आ सकता, मगर हम चाहते हैं
कि जिनके आदेश पर गोलियां चलाई गईं उनके ख़िलाफ़ धारा 302 के तहत हत्या का मुक़दमा दर्ज किया जाए. जब तक एसपी और डीएम
के खिलाफ 302 नहीं लगता है,
हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा."
विक्की के मुताबिक़
"प्रतिमा विसर्जन के दौरान पुलिस की बर्बरता हमारी आस्था के ऊपर प्रहार है. इसकी
कीमत पुलिस को चुकानी पड़ेगी."
ब्रेकिंग न्यूज़, फ़्रांस: नीस शहर में कई लोगों पर चाकू से हमला, दो की मौत
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फ़्रांस के स्थानीय मीडिया से मिल
रही रिपोर्टों के अनुसार, फ़्रांस के नीस शहर में एक हमलावर ने चाकू से कई लोगों को
निशाना बनाया है. इस हमले में कम से कम तीन लोगों की मौत की ख़बर है, जबकि कुछ लोग
घायल हुए हैं.
नीस के मेयर क्रिश्चियन एस्ट्रोसी
ने कहा है कि इस हमले से संबंधित एक शख़्स को गिरफ़्तार कर लिया गया है.
उन्होंने कहा है कि यह जिस तरह का
हमला है, उससे ‘आतंकी हमले के संकेत’ मिलते हैं. यह हमला नोट्रे-डैम बैसेलिका के क़रीब हुआ है.
नीस भूमध्य सागर के तट पर स्थित
दक्षिणी फ़्रांस का एक प्रमुख शहर है.
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील
की है कि वो फ़्रेंच रिवेरा सिटी के इलाक़े में जाने से बचें.
उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को सुप्रीम कोर्ट से राहत, हाई कोर्ट के आदेश पर रोक
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उच्चतम न्यायालय ने उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच सीबीआई से कराने की बात कही थी.
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार को उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने की बात कही थी.
गुरुवार को रावत ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि ‘नैनीताल उच्च न्यायालय ने आदेश करने से पहले उनका पक्ष नहीं सुना.’
सरकार के वकील ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि एक निर्वाचित सरकार को इस तरह अस्थिर नहीं किया जा सकता.
उन्होंने सवाल किया कि ‘बिना दूसरे पक्ष की बात सुने इस तरह का आदेश भला कैसे किया जा सकता है?’
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अटॉर्नी जनरल ने उच्चतम न्यायालय से
कहा कि ‘एक प्रदेश के मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ इस तरह एफ़आईआर
दर्ज नहीं की जा सकती. इससे चुनी हुई प्रदेश सरकार अस्थिर होगी.’
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत
पक्ष की यह दलील सुनने के बाद उच्चतम न्यायालय ने उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के
आदेश पर रोक लगा दी.
त्रिवेंद्र सिंह रावत पर एक
पत्रकार– उमेश शर्मा ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाये थे.
शर्मा ने इस साल 24 जून को सोशल मीडिया
पर एक पोस्ट डाली थी जिसमें दावा किया गया था कि झारखण्ड के अमृतेश चौहान ने नोटबंदी
के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के निजी लाभ के लिए एक सेवानिवृत्त प्रोफ़ेसर हरेंद्र
सिंह रावत और उनकी पत्नी डॉक्टर सविता रावत के खाते में पैसे जमा कराये थे.
इस पोस्ट में अपने दावे के समर्थन में
शर्मा ने बैंक खाते में हुए लेन-देन का विवरण भी डाला था.
इस पर हरेंद्र सिंह रावत ने 31 जुलाई
को देहरादून में इन आरोपों को झूठा और आधारहीन बताते हुए शर्मा पर ब्लैकमेल करने का
आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी.
शर्मा ने उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय
से अपनी याचिका में यह अपील की थी कि सरकार द्वारा उनके ऊपर देहरादून थाने में
दर्ज मुक़दमे निरस्त किए जाएं.
न्यायालय ने शर्मा की याचिका में
की गई शिकायत का स्वत: संज्ञान भी लिया और आदेश दिया कि याचिका में लगाए गए
आरोपों के आधार पर मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ सीबीआई मुक़दमा दर्ज करे.
ब्रेकिंग न्यूज़, गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल का निधन
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गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल का निधन हो गया है. वे 92 साल के थे.
केशुभाई पटेल को गुरूवार को अहमदाबाद के एक अस्पताल में भर्ती करवाय गया था जहाँ उन्होंने आँखें मूँदीं.
केशुभाई पटेल दो बार गुजरात के मुख्यमंत्री रहे.
पहली बार वो 1995 में मुख्यमंत्री बने मगर सात महीने बाद पार्टी में बग़ावत के बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया.
दूसरी बार वो 1998 में मुख्यमंत्री बने.मगर तीन साल बाद 2001 में भुज में आए भूकंप के बाद राज्य में अव्यवस्था, पार्टी में असंतोष और ख़राब सेहत की वजह से उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया.
उनके बाद भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केशुभाई पटेल के निधन पर गहरा दुख जताते हुए ट्वीट किया है - "केशुभाई ने कई युवा कार्यकर्ताओं को सिखाया और बढ़ाया जिनमें मैं भी था. हर कोई उनके मिलनसार स्वभाव को पसंद करता था. उनका जाना एक अपूरणीय क्षति है."
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी केशुभाई पटेल के निधन पर संवेदना जताई है.
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मायावती बोलीं - सपा को हराने के लिए बीजेपी को वोट करना मंज़ूर
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बहुजन समाज पार्टी में एक बार फिर से बग़ावत हो गई है. मायावती ने गुरुवार को अपने सात बाग़ी विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया. इन विधायकों ने उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव में पार्टी उम्मीदवार रामजी गौतम का विरोध किया था.
इन सात विधायकों में चौधरी असलम अली, हाकिम लाल बिंद, मोहम्मद मुजतबा, असलम रैनी, सुषमा पटेल, हरगोविंद भार्गव और बंदना सिंह शामिल हैं.
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर नौ नवंबर को चुनाव है. अगले महीने उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव में बीएसपी ने अपना एक उम्मीदवार उतारा था.
बीएसपी के 10 विधायकों ने पार्टी के उम्मीदवार के नाम को प्रस्तावित किया था. अचानक से चार विधायकों ने अपना समर्थन वापस ले लिया.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार बीएसपी के इन चारों विधायकों ने रिटर्निंग ऑफिसर से मुलाक़ात की थी और कहा था कि बीएसपी के सीनियर नेता और राज्यसभा उम्मीदवार रामजी गौतम ने जो नामांकन पेपर भरा है उसमें उनके समर्थन का हस्ताक्षर फ़र्ज़ी हैं.
एक बाग़ी विधायक ने स्वीकार किया है कि उन्होंने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाक़ात की थी. बीएसपी के कई और विधायकों ने पार्टी से नाराज़गी जताई है.
हालांकि इन विधायकों ने बीएसपी सुप्रीमो मायावती के बारे में कुछ नहीं कहा है. मायावती ने पूरे घटनाक्रम पर समाचार एजेंसी एएनआई से कहा है लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी से गठबंधन के दौरान ही उन्हें अहसास हो गया था कि यह बहुत बड़ी ग़लती हुई है.
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मायावती ने कहा, ''हमने फ़ैसला किया है कि भविष्य में उत्तर प्रदेश में होने वाले एमएलसी के चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को हराना है. इसके लिए हमें बीजेपी या किसी अन्य पार्टी को भी वोट देना पड़े तो देंगे. मैं उस बात को भी यहां कहना चाहती हूं कि जब हमने लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ लड़ने का फ़ैसला किया तो इसके लिए कड़ी मेहनत की थी. लेकिन गठबंधन के पहले दिन से ही सपा के मुखिया एससी मिश्रा जी से कहते रहे कि अब तो गठबंधन हो गया है तो बहनजी को दो जून 1995 के मामले को भूला कर केस वापस ले लेना चाहिए, चुनाव के दौरान केस वापस लेना पड़ा.''
मायावती ने कहा, ''चुनाव का नतीजा आने के बाद इनका जो रवैया हमारी पार्टी ने देखा है, उससे हमें ये ही लगा कि केस को वापस लेकर बहुत बड़ी ग़लती थी और इनके साथ गठबंधन नहीं करना चाहिए था. इनका एक और दलित विरोधी चेहरा हमें कल राज्यसभा के पर्चों के जांच के दौरान देखने को मिला. इसमें सफल न होने पर ये 'खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे' की तरह पार्टी जबरदस्ती बीएसपी पर बीजेपी के साथ सांठगांठ करके चुनाव लड़ने का ग़लत आरोप लगा रही है.''
फ़्रांस को लेकर पाकिस्तान में बढ़ी सरगर्मी, शोएब अख़्तर भी बरसे
फ़्रांस को लेकर पाकिस्तान में इन दिनों काफ़ी सरगर्मी है. फ़्रांसीसी पत्रिका शार्ली हेब्दो में पैग़ंबर मोहम्मद के कार्टून फिर से छपने को लेकर जितनी तीखी प्रतिक्रिया पाकिस्तान से आई है उतनी सऊदी अरब से भी नहीं आई है. इस कार्टून का फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने समर्थन किया था. फ़्रांस और मैक्रों के विरोध के मामले में पाकिस्तान पूरी तरह से तुर्की की लाइन में आ गया है.
तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन जिस तरह से मैक्रों और फ़्रांस को लेकर बोल रहे हैं उसी तरह पाकिस्तानी पीएम इमरान ख़ान भी मुखर हैं. इस मामले को इमरान ख़ान ने इस्लामोफ़ोबिया से जोड़ा है और कहा कि इससे लड़ने के लिए दुनिया भर के मुस्लिम देशों को एकजुट हो जाना चाहिए. दूसरी तरफ़ अर्दोआन फ़्रांसीसी सामान के बहिष्कार की अपील कर रहे हैं.
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पाकिस्तान की राजनीति से ही इस पर केवल प्रतिक्रिया नहीं आ रही है बल्कि फ़िल्मी हस्तियों और क्रिकेटरों के बीच से भी प्रतिक्रिया आई है.
पाकिस्तानी अभिनेता एहसान ख़ान ने कहा कि फ़्रांस की सरकार की प्रतिक्रिया उसके बुनियादी सिद्धांतों के उलट है. एहसान ख़ान ने ट्वीट कर कहा, ''अगर फ़्रांस वाक़ई एक गणतंत्र है तो किसी दूसरे मज़हब को अपमानित नहीं होने देना चाहिए. हम अपने पैग़ंबर के अनादर का स्पष्ट तौर पर विरोध करते हैं. इसे रोका जाना चाहिए.''
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पाकिस्तानी अभिनेता फ़िरोज़ ख़ान ने मैक्रों को लेकर लिखा है कि पैग़ंबर मोहम्मद के बाद ही कोई है. फ़िरोज़ ख़ान ने #MacronApologizetoMuslims का हैषटैग भी लगाया है.
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पाकिस्तानी अभिनेता यासिर हुसैन ने इंस्टाग्राम पर लिखा है, ''अगर फ़्रांस अपने सदर की तौहीन बर्दाश्त नहीं कर रहा तो हम अपने नबी की तौहीन कैसे बर्दाश्त करें.''
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वहीं पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब अख़्तर ने ट्वीट कर लिखा है, ''मैक्रों का कहना है कि वो कार्टून के मामले में नहीं झुकेंगे. मैक्रों ये भी कह रहे हैं कि मुस्लिम देश फ़्रांसीसी सामान का बहिष्कार नहीं करें. अगर आपके पास नफ़रत फैलाने की आज़ादी है तो हमें आपकी नफ़रत को ख़ारिज करने की आज़ादी है.''
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पाकिस्तानी अभिनेता हमज़ा अली अब्बासी ने ट्विटर पर लिखा है, ''किसी चीज़ की आलोचना और असहमति आपका अधिकार है लेकिन जानबूझकर किसी का अपमान करना या उकसाना आपका अधिकार नहीं है.''
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फ़्रांस ने राष्ट्रपति मैक्रों पर बढ़ते हमलों के बीच भारत को कहा शुक्रिया
फ़्रांस ने भारत के समर्थन को लेकर शुक्रिया कहा है. भारत में फ़्रांस के राजदूत इमैनुएल लीनैन ने कहा कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ दोनों देश एक साथ खड़े रहे हैं.
फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के ख़िलाफ़ कई इस्लामिक देशों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. यहां की सरकारें भी राष्ट्रपति मैक्रों के ख़िलाफ़ हमला कर रही हैं. ऐसे में भारत ने फ़्रांस का समर्थन किया है और कहा है कि इमैनुएल मैक्रों पर निजी हमला अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी सिद्धांत का उल्लंघन है.
भारत के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कहा है कि फ़्रांसीसी शिक्षक की हत्या जिस तरीक़े से की गई वो पूरी दुनिया को हैरान करने वाला है. भारत इसकी कड़ी निंदा करता है. भारत ने फ़्रांसीसी शिक्षक को श्रद्धांजलि भी दी. भारत ने कहा कि आतंकवाद को किसी भी तर्क के सहारे सही नहीं ठहराया जा सकता है.'
दूसरी तरफ़ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने फ़्रांस को लेकर बढ़े विवाद के बीच दुनिया भर के इस्लामिक देशों के कथित इस्लामोफ़ोबिया के ख़िलाफ़ साथ आने की अपील की है. इमरान ख़ान ने इसे लेकर 28 अक्टूबर को एक पत्र जारी किया था. इमरान ख़ान ने कहा है कि अब वक़्त आ गया है कि दुनिया भर के इस्लामिक देश इस मसले पर साथ मिलकर लड़ें.
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में भी फ़्रांस के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पास किया गया था. बांग्लादेश में भी मैक्रों को लेकर विरोध हो रहा है. फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने व्यंग्यात्मक फ्रेंच पत्रिका शार्ली हेब्दो में पैग़ंबर मोहम्मद पर छपे कार्टून का समर्थन किया था. तब से ही वो इस्लामिक देशों के निशाने पर हैं.
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ट्रंप की चुनावी रैलियों से कोराना फैलना तय: डॉ फ़ाउची
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अमरीका में कोरोना महामारी की रोकथाम को देेखने वाले वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एंथनी फाउची ने राष्ट्रपति
ट्रंप के चुनाव प्रचार की आलोचना की है. उन्होंने बीबीसी से एक इंटरव्यू में कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप की
चुनावी रैलियों से कोविड-19 फैलना तय है.
डॉ फाउची ने कहा कि लोगों का बिना मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के इस तरह जुटना संभावित सुपरस्प्रेडिंग
आयोजन है.
उन्होंने व्हाइट हाउस में
एक सभा के बाद ट्रंप प्रशासन के कई कर्मचारियों के कोरोना पॉज़िटिव होने की घटना
का हवाला दिया.
डॉ फाउची ने कहा कि वो इस
बात को मानते थे कि अमरीका में पूरे देश में लॉकडाउन लगाना मददगार हो सकता था और इसपर विचार हो रहा था.
उन्होंने माना कि इसकी एक
आर्थिक क़ीमत चुकानी पड़ी लेकिन ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण दिखाता है कि मेलबर्न में
लगाया गया लॉकडाउन बहुत असरदार हो सकता है.
दरअसल मेलबर्न कोरोना महामारी से बुरी तरह
प्रभावित हुआ था, जिसके बाद वहां तब तक लॉकडाउन जारी रहा जब तक कि वहाँ कोरोना संक्रमण के मामले आने पूरी तरह से बंद
नहीं हो गए.
दिसंबर तक आ सकती है ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन
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सीरम इंस्टीच्यूट ऑफ़ इंडिया
(एसआईआई) ने कहा है कि ऑक्सफोर्ड की कोविड वैक्सीन दिसंबर तक तैयार हो सकती है.
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की
वैक्सीन के उत्पादन के लिए एस्ट्राजेनेका नाम की दवा कंपनी ने एसआईआई से क़रार किया हुआ है. सीरम इंस्टीच्यूट ने बुधवार को कहा कि ChAdOx1 एनकोव-19 वैक्सीन कैंडिडेट दिसंबर तक तैयार हो सकता है.
इसे भारत में कोविशील्ड नाम
दिया गया है.
सीरम इंस्टीच्यूट भारत
में इस वैक्सीन का लेट-स्टेज ट्रायल कर रहा है. एनडीटीवी के साथ एक इंटरव्यू में
संस्था के सीईओ अदार पूनावाला ने आगे कहा कि 10 करोड़ डोज़ की पहले बैच
2021 की दूसरी या तीसरी तिमाही तक मुहैया हो जानी चाहिए.
पूनावाला ने कहा, “दिसंबर तक हमारे ट्रायल
ख़त्म हो जाने चाहिए और फिर हम शायद भारत में जनवरी तक इसे लॉन्च कर दें.”
हालांकि उन्होंने कहा कि ये बहुत हद तक ब्रिटेन के क्लीनिकल ट्रायल के डेटा पर
निर्भर करेगा, जो पूरा होने ही वाला है.
वहीं समाचार एजेंसी
पीटीआई के मुताबिक़, भारत के स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कोरोना के मामले में
अगले तीन महीने तक सतर्क रहने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है. उन्होंने ऐसा त्योहारों के
मौसम के चलते बढ़े कोविड के ख़तरे को देखते हुए कहा.
उन्होंने एक ट्वीट के ज़रिए ये भी बताया कि क्लीनिकल ट्रायल के एडवांस फेज़ में चल रहे दुनियाभर के
नौ वैक्सीन कैंडिडेट में से तीन भारत के हैं और भारत सरकार ने उन लोगों की सूची
तैयार कर ली है जिन्हें वैक्सीन आने पर सबसे पहले दी जा सकती है.
उनके मुताबिक़
इनमें डॉक्टर, फ्रंटलाइन वर्कर और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोग शामिल
होंगे.
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