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WHO के नेतृत्व में वैक्सीन की किसी खोज में अमरीका शामिल नहीं होगा
कोरोना महामारी पर दुनिया भर की हलचलों पर बीबीसी हिंदी की विशेष पन्ना.
लाइव कवरेज
कोरोना के कारण ग़रीबी में जेंडर गैप बढ़ा है: यूएन

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संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि कोरोना महामारी ने दशकों से पुरुषों और महिलाओं में आमदनी के फ़र्क़ को दूर करने की कोशिशों पर पानी फेर दिया है.
यूएन का कहना है कि अगले साल तक मर्दों की तुलना में औरतों की हालत ज़्यादा ख़राब होगी और अफ़्रीक़ी और लैटिन अमरीकी देशों में असंगठित कामगारों पर इसका सबसे ज़्यादा असर होगा.
यूएन विमेन की प्रमुख ने कहा कि महिलाओं की ग़रीबी में इज़ाफ़ा इस बात को दर्शाते हैं कि हमने अपने समाज और अर्थव्यवस्था को किस तरह बनाया है और उनमें कितनी कमियां हैं.
कोरोना लॉकडाउन के कारण जो सेक्टर सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं, उनहीं में महिलाएं ज़्यादा काम करती हैं.
रिटेल, रेस्त्रां, होटल के सेक्टर में मर्दों की तुलना में औरतों ने ज़्यादा नौकरियां गंवाईं हैं.
यूएन के एक अनुमान के अनुसार कोरोना महामारी के कारण अगले साल तक नौ करोड़ 60 लाख लोगों को अत्यंत ग़रीबी की तरफ़ धकेल दिए जाएंगे.
साल 2021 में अत्यंत ग़रीबी में रहने को मजबूर 25 से 34 साल तक के हर 100 मर्दों की तुलना में 118 महिलाएं अत्यंत ग़रीबी की शिकार होंगी और यूएन का अनुमान है कि साल 2030 तक महिलाओं के लिए ये संख्या बढ़कर 121 हो जाएगी.
यूएन सरकारों पर दबाव डाल रही है कि वो कम आमदनी और असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं की मदद के लिए और क़दम उठाएं.
कोरोना: पुरुषों के मुक़ाबले 'ज़्यादा मज़बूत' साबित हो रही हैं महिलाएँ?
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पोप फ़्रांसिस ने 26 हफ़्तों के बाद लोगों को दिया दर्शन

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कैथोलिक ईसाइयों के सर्वोच्च धार्मिक गुरु पोप फ़्रांसिस ने 26 हफ़्तों के बाद अपने श्रद्धालुओं को दर्शन दिए.
उन्होंने इस मौक़े पर लिबनान के झंडे को चूमा. कुछ ही दिनों पहले लिबनान में एक धमाका हुआ था जिसमें 150 से ज़्यादा लोग मारे गए थे और हज़ारों ज़ख़्मी हो गए थे.
पोप ने लिबनान के लिए प्रार्थना की. इसके अलावा उन्होंने बच्चों को दूर से ही आशीर्वाद दिया और पादरियों से हाथ मिलाया.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार पोप के दर्शन करने क़रीब 500 लोग आए थे और पोप उनके बीच काफ़ी ख़ुश नज़र आ रहे थे.
कोरोना महामारी के कारण लोग दो फ़ुट की दूरी पर खड़े थे.
बिना किसी टिकट के किसी को भी यहां आने की इजाज़त थी लेकिन कोरोना के कारण मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य था.
इससे पहले मार्च के शुरुआती हफ़्ते में पोप ने अपने साप्ताहिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था.
कीर्तीश का कार्टून

असमः सिलचर सेंट्रल जेल के भीतर बना कोविड केयर सेंटर

दिलीप कुमार शर्मा,
गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए
असम के सिलचर सेंट्रल जेल के अंदर कोरोना संक्रमण फैलने से बीते 48 घंटों के भीतर 75 क़ैदी और दो कर्मचारी कोविड पॉज़िटिव पाए गए हैं.
जेल प्रशासन के अनुसार कोरोना संक्रमित सभी पुरुष क़ैदी हैं और अधिकतर में कोरोना के लक्षण देखने को मिले हैं.
इस बीच जेल प्रशासन ने जेल में बंद सभी 450 क़ैदियों का कोरोना टेस्ट करवाने का फ़ैसला किया है.
फ़िलहाल कोरोना संक्रमित क़ैदियों के लिए प्रशासन ने जेल के भीतर ही कोविड केयर सेंटर बनाया है जहां क़ैदियों का इलाज किया जा रहा है.
दरअसल रविवार को जेल में बंद 32 क़ैदी और एक कर्मचारी कोरोना पॉज़िटिव पाए जाने के बाद दूसरे दिन क़ैदियों का फिर से टेस्ट किया गया था जिसमें 43 क़ैदी और एक स्टाफ़ पॉज़िटिव पाए गए.
एक जेल अधिकारी का कहना है कि अगर किसी कोरोना पॉज़िटिव क़ैदी की तबीयत बिगड़ती है तो बेहतर स्वास्थ्य सेवा के लिए उनका इलाज बाहर करवाया जाएगा.
कछार ज़िले के अतिरिक्त उपायुक्त सुमित सत्ववान ने मीडिया को बताया, "जेल के अंदर 45 बिस्तरों वाला कोविड केयर सेंटर बनाया गया है और अगर ज़रूरत पड़ी तो सेंटर में बिस्तरों की संख्या बढ़ाई जाएगी. इसके अलावा कुछ ऐसे मरीज़ भी हैं जिनका इलाज बाहर अस्पताल में किया जा रहा है. यह संवेदनशील मामला है और आवश्यकता के अनुसार कोविड क़ैदियों को बेहतर इलाज के लिए बाहर अस्पताल में भर्ती करवा रहें है."
इससे पहले राज्य की 10 जेलों में कुल 535 क़ैदी कोरोनो वायरस से संक्रमित पाए गए थे जिनमें 435 क़ैदी गुवाहाटी सेंट्रल जेल के थे.
सिंगापुर के पीएम ने कोरोना से निपटने में ग़लती स्वीकार की

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सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग ने कोरोना वायरस से निपटने में सरकार के ज़रिए की गई ग़लतियों के लिए माफ़ी माँगी है.
एक ग़लती प्रवासी मज़दूरों के मामले में हुई थी, जब कोरोना महामारी के दौरान 20-20 मज़दूरों को एक ही रूम में रखा गया था.
संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार को और जल्दी और आक्रामक तरीक़े से कार्रवाई करनी चाहिए थी.
सिंगापुर ने शुरू में जिस तरह से कोरोना महामारी का मुक़ाबला किया था इसके लिए पूरी दुनिया में उसकी तारीफ़ हो रही थी लेकिन फिर अचानक वहां कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने लगे और यहां तक कि एस समय में तो उनकी संख्या एशिया में सबसे अधिक होने लगी थी.
अब तक 56 हज़ार लोग संक्रमित हुए हैं जिनमें से क़रीब 50 हज़ार लोग कम आमदनी वाले प्रवासी मज़दूर हैं जो कि दक्षिण एशिया के अलग-अलग देशों से आए हैं और वह ठसा-ठस भरे डॉरमेटरी में रहने को मजबूर हैं.
बाद में सिंगापुर में सारे डॉरमेटरी को बंद कर दिया गया और तीन महीने के सख़्त लॉकडाउन के दौरान सरकार ने व्यापक स्तर पर टेस्टिंग करवाया.
सिंगापुर की सीमा अब भी बंद है और वहां की अर्थव्यवस्था भी मुश्किल में है. सरकार पर इस बात का दबाव है कि उसने मज़ूदरों की सुरक्षा के लिए उपाय क्यों नहीं किया और अगर सरकार ने उनका ख्याल रखा होता तो उसका देश पर क्या असर होता.
WHO के नेतृत्व में वैक्सीन की किसी खोज में अमरीका शामिल नहीं होगा

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अमरीका ने कहा है कि कोरोना की वैक्सीन खोजने की किसी भी अंतरराष्ट्रीय पहल में वो शामिल नहीं होगा क्योंकि इसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन भी शामिल है.
वाशिंगटन पोस्ट अख़बार के अनुसार सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन की मंज़ूरी मिल जाने और उसका लाइसेंस मिलने के बाद सभी तक वैक्सीन की न्यायसंगत पहुँच सुनिश्चित कराने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के नेतृत्व में 172 देशों की पहल में अमरीका शामिल नहीं होगा.
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जड डीरे ने एक बयान जारी कर कहा है कि अमरीका, "वायरस की हार सुनिश्चित कराने के लिए अमरीका अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर काम करता रहेगा, लेकिन भ्रष्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन और चीन से प्रभावित मल्टीलेटरल संस्थाओं के दबाव में नहीं आएंगे."
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना वायरस के मामले में विश्व स्वास्थ्य संगठन पर हमला करते हुए आरोप लगाया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जिस तरह से गाइडलाइन जारी किया है उससे पता चलता है कि वो चीन के साथ खड़ा है.
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ख़ुद को किया आइसोलेट
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने एक अधिकारी के संक्रमित होने के बाद स्वयं को तीन दिनों के लिए आइसोलेट कर लिया है.
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18 से 44 साल के लोगों में मिले कोरोना के 54 प्रतिशत मामले
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भारत में कोरोना वायरस के कुल मामलों में से 54 प्रतिशत 18 से 44 साल के लोगों में पाए गए हैं. जबकि मरने वालों में 51 प्रतिशत संख्या 60 साल या इससे ज़्यादा उम्र के लोगों की है.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना के मामलों का एक ग्राफ ट्वीट करके इस संबंध में जानकारी दी है.
मंत्रालय के मुताबिक 17 साल से कम उम्र के लोगों में 8 प्रतिशत कोरोना के मामले और एक प्रतिशत मौत देखी गई है.
वहीं, 18 से 25 साल की उम्र के 14 प्रतिशत युवाओं में कोरोना के मामले मिले हैं और एक प्रतिशत मौत हुई है.
26 से 44 साल के लोगों में 26 प्रतिशत मामले कोरोना के मिले हैं और 11 प्रतिशत की मौत हुई है.
इसी तरह 45 से 60 साल की उम्र वालों में 36 प्रतिशत मौतें और 26 प्रतिशत कोरोना के मामले सामने आए हैं.
भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल 78,357 मामले सामने आए हैं और 1045 लोगों की मौत हो गई है.
इसके साथ देश में कोरोना वायरस के मामलों की कुल संख्या 37,69,524 हो गई है. इसमें 8,01,282 एक्टिव मामले हैं.
मोदी-निर्मित आपदाओं से जूझ रहा भारत: राहुल गांधी

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि भारत मोदी-निर्मित आपदाओं से जूझ रहा है.
उन्होंने एक ट्वीट करते हुए जीडीपी में गिरावट, बेरोज़गारी, करोना वायरस के बढ़ते मामले, जीएसटी और सीमा पर बाहरी हमले जैसे छह मसले उठाए और उन्हें मोदी-निर्मित आपदा कहा.
राहुल गांधी ने ट्वीट किया, "मोदी-निर्मित आपदाओं से जूझ रहा भारत: जीडीपी में एतिहासिक गिरावट - 23.9, 45 सालों में उच्च स्तर पर बेरोजगारी, 12 करोड़ नौकरियां जाना, राज्यों को जीएसटी का बकाया ना देना, दुनिया भर में कोविड-19 के रोजाना सबसे ज़्यादा मामले व मौतें और हमारी सीमाओं पर बाहरी आक्रमण."
राहुल गांधी अर्थव्यवस्था की बिगड़ती हालत, कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों और भारत-चीन सीमा पर तनाव को लेकर मोदी सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं.
इससे पहले उन्होंने कहा था कि एनडीए सरकार पिछले छह सालों से अनौपचारिक क्षेत्र पर हमला बोल रही है. नोटबंदी, जीएसटी और लॉकडाउन का उद्देश्य अनौपचारिक क्षेत्र को बर्बाद करना था.
कोरोना वायरस: क्या भारत में लॉकडाउन पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ?

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भारत में बीते पांच दिनों से हर रोज़ संक्रमण के 75 हज़ार से अधिक नए मामले सामने आ रहे हैं. मौजूदा समय में किसी भी दूसरे देश में हर रोज़ संक्रमण इतने अधिक नए मामले सामने नहीं आ रहे हैं. रोज़ाना के नए मामलों की संख्या भारत में सबसे अधिक है.
हालांकि अब भी संक्रमण के सबसे ज़्यादा कुल मामले अमरीका में हैं और दूसरे स्थान पर ब्राज़ील है. संक्रमण के कुल मामलों के लिहाज़ से भारत तीसरे पायदान पर है. लेकिन एक दिन में सबसे ज्यादा संक्रमण के मामलों में भारत पहले स्थान पर पहुँच चुका है.
सिर्फ़ यहीं नहीं एक दिन में सबसे अधिक संक्रमण के मामले अब तक किसी भी देश में भारत के आंकड़े के बराबर नहीं पहुँचे हैं. जिस गति से भारत में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं उससे बहुत हद तक संभव है कि आने वाले दिनों में कुल संक्रमण के मामले में भी भारत पहले स्थान पर पहुँच जाए.
भारत में लॉकडाउन में छूट के साथ ही संक्रमण के मामले भी बढ़ने लगे थे.
1 जून से केंद्र सरकार ने पहली बार लॉकडाउन की पाबंदियों में छूट देने की शुरुआत की जिसे अनलॉक-1 कहा गया.
गोवा के मुख्यमंत्री हुए कोरोना पॉज़िटिव
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गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं. उनकी टेस्ट रिपोर्ट पॉज़िटिव आई है.
वो एसिम्पटोमैटिक हैं और होम आईसोलेशन में चले गए हैं.
प्रमोद सावंत ने ट्वीट करके अपने कोरोना पॉज़िटिव होने की जानकारी दी.
मुख्यमंत्री ने लिखा, “मैं आप सभी को बताना चाहता हूं कि मैं कोरोन पॉज़िटिव हूं. मैं एसिम्पोटमैटिक हूं और इसलिए होम आईसोलेशन में चला गया हूं. मेरा घर से काम करना ज़ारी रखूंगा. जो भी मेरे संपर्क में आए हैं उन्हें सलाह है कि ज़रूरी सावधानियां बरतें.”
ब्रेकिंग न्यूज़, कोरोना महामारी के कारण गन्ने की कटाई में हो रही देरी

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कोरोना वायरस के चलते भारत में गन्ने की फसल की कटाई में देरी हो रही है. इसका असर दुनिया भर में चीनी की आपूर्ति पर पड़ सकता है.
फसल कटाई के दौरन बड़ी संख्या पर मज़दूरों की ज़रूरत होती है. लेकिन, इस साल कोरोना वायरस के डर से लोग कहीं आने-जाने में डर रहे हैं.
भारत में गन्ने की फसल की कटाई अक्टूबर में शुरू होती है. इसके लिए प्रवासी मज़दूर अपने गांव वापस लौटते हैं. लेकिन, अब मज़दूर ना मिलने से समस्या ख़ड़ी हो गई है.
फसल कटने में देरी के चलते भारतीय मिलों में चीनी के उत्पादन में देरी होगी. वो भी ऐसे समय में जब ब्राज़ील में चीनी का उत्पादन गिरने वाला है और गन्ने के एक बड़े उत्पादक थाईलैंड में 10 सालों में सबसे कम फसल हुई है. ऐसे में दुनिया भर में चीनी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है.
वेस्ट इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बी.बी. थोम्बरे ने न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स को बताया, “हमें मौसम की शुरुआत में कुछ देरी होने की आशंका है. बहुत कुछ इस पर निर्भर करता है कि स्थानीय स्तर पर कितना काम उपलब्ध है और अक्टूबर में कोरोना वायरस संक्रमण की क्या स्थिति रहती है.”
भारत हर साल 370 मिलियन टन गन्ने का उत्पादन करता है और ब्राज़ील के बाद दूसरे स्थान पर है.
कोरोना: दोबारा संक्रमण कितना ख़तरनाक?
वीडियो कैप्शन, कोरोना: दोबारा संक्रमण कितना ख़तरनाक? अगर किसी को एक बार कोरोना हो जाए तो उससे उबरने के बाद शरीर में क्या बदलाव आते हैं.
क्या शरीर का इम्यून सिस्टम कोरोनावायरस के प्रति होशियार हो जाता है.
क्या फिर उस शख़्स को दोबारा कोरोना नहीं होगा.
वो और उसके आसपास के लोग वायरस से कितने सुरक्षित हो जाएंगे. कवर स्टोरी में इसी पर बात.
कोरोना संक्रमण ठीक होने के बाद आप कब तब हैं सुरक्षित?
वीडियो कैप्शन, कोरोना ठीक होने के बाद आप कब तब हैं सुरक्षित? एक बार कोरोना से ठीक होने के बाद हम इस वायरस से कितने और कब तक सुरक्षित हैं.
क्यों कई लोग संक्रमण होने के बाद ठीक हो जाते हैं और क्यों कोरोना कई लोगों की जान ले लेता है.
बीबीसी की विज्ञान संवाददाता रेबेका मोरेल की ये रिपोर्ट देखिए.
भारत: 24 घंटे में आए कोरोना के 78,357 मामले

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भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल 78,357 मामले सामने आए हैं और 1045 लोगों की मौत हो गई है.
इसके साथ देश में कोरोना वायरस के मामलों की कुल संख्या 37,69,524 हो गई है. इसमें 8,01,282 एक्टिव मामले हैं.
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक कोरोना वायरस से अब तक 29,019,09 लोग ठीक हो चुके हैं और 66,333 लोगों की जान चली गई है.
देश में कोरोना के सबसे ज़्यादा 7,92,541 मामले महाराष्ट्र में हैं और लक्षद्वीप में कोरोना का एक भी मामला सामने नहीं आया है.
ब्रेकिंग न्यूज़, पिछले तीन दशकों में ऑस्ट्रेलिया में पहली मंदी

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इमेज कैप्शन, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन कोरोना वायरस ने ऑस्ट्रेलिया की तीन दशकों की आर्थिक वृद्धि को रोक दिया है. ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक इस साल की दूसरी तिमाही में ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. इससे पहले पहली तिमाही में 0.3 प्रतिशत की गिरावट आई थी.
ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में 1959 के बाद से ये सबसे बड़ी गिरावट है. लगातार दो तिमाहियों में अर्थव्यवस्था में संकुचन आने पर उसे मंदी कहा जाता है. ऑस्ट्रेलिया ही एक ऐसी बड़ी अर्थव्यवस्था थी जो 2008 की वैश्विक मंदी से बच पाई थी.
इसकी वजह मुख्यतौर पर चीन में ऑस्ट्रेलिया के प्राकृतिक संसाधनों की मांग को बताया जाता है. इस साल की शुरुआत में जंगलों में लगी आग और कोरोना वायरस के शुरुआती प्रभाव के कारण ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था को नुक़सान पहुंचा था.
इसके बाद लॉकडाउन के चलते पूरे देश में बंद पड़े कारोबार ने अर्थव्यवस्था की हालत और ख़राब कर दी. सरकार और सेंट्रल बैंक के उठाए गए कदमों से भी कुछ खास असर नहीं हुआ.
वस्तु एवं सेवाओं पर खर्च बहुत कम होने के कारण पिछले 61 सालों में ये सबसे ख़राब आर्थिक वृद्धि बन गई है. ऑस्ट्रेलिया में आखिरी बार मंदी 1990 के मध्य में आई थी जो 1991 के अंत तक चली थी.


