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कोरोना वायरस: सऊदी अरब की शान अरामको को एपल ने पछाड़ा
एपल ने सऊदी अरब की कंपनी आरामको को पछाड़ दिया और ख़ुद दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बन गई है. अरामको के लिए यह झटका है.
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कोरोना वायरस के दौर में प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए क्या-क्या मुश्किलें
ब्रेकिंग न्यूज़, सऊदी अरब की शान अरामको को एपल ने पछाड़ा

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एपल के शेयर में शुक्रवार को 7.1 फ़ीसद का रिकॉर्ड उछाल देखा गया. कंपनी के तिमाही नतीजों में शानदार प्रदर्शन के बाद शेयर में उछाल आया. कोरोना वायरस की महामारी के कारण दुनिया भर में तेल की मांग में भारी गिरावट आई है और इसका असर सऊदी की तेल कंपनी अरामको पर भी पड़ा है.
इस उछाल से एपल ने सऊदी अरब की कंपनी आरामको को पछाड़ दिया और ख़ुद दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बन गई है.
शुक्रवार को बाज़ार के खुलते ही एपल कंपनी के शेयर की क़ीमत 412 अमरीकी डॉलर हो गई.
अगर उसी रेट पर बाज़ार बंद होता है तो ऐपल कंपनी का बाज़ार भाव 1.786 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगा.
सऊदी की कंपनी आरामको पिछले साल पब्लिक कंपनी हुई थी और उसका बाज़ार भाव 1.76 ट्रिलियन डॉलर था.
इसी साल जून में एपल ने 1.5 ट्रिलियन डॉलर का बाज़ार-भाव हासिल किया था और कंपनी के शेयर में ताज़ा उछाल ने इसके बाज़ार-भाव को 1.78 ट्रिलियन डॉलर बना दिया है.
शुक्रवार दिन भर बाज़ार में ऐपल और आरामको एक दूसरे को आगे-पीछे करते रहे.
तीसरी तिमाही में एपल कंपनी में 11 फ़ीसद का विकास देखा था और इसका राजस्व 59.7 अरब डॉलर था जबकि मुनाफ़ा 11.25 अरब डॉलर था.
बाज़ार के कई विशेषज्ञों की राय के विपरीत कोरोना महामारी के दौरान एपल कंपनी के सामानों को ख़ासकर आई-पैड और मैक को लोगों ने ज़्यादा ख़रीदा है.
ब्रेकिंग न्यूज़, अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भारत की मुश्किलें और बढ़ीं

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कोरोना वायरस की महामारी ने भारत की अर्थव्यवस्था की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. भारत का राजस्व घाटा जून तक पिछले तीन महीने में बढ़कर 88.52 अरब डॉलर हो गया है.
अर्थशास्त्रियों ने अप्रैल में शुरू हुए 2020/21 वित्तीय वर्ष में भारत के राजस्व घाटे का अनुमान जीडीपी का 7.5% लगाया था. इससे पहले सरकार का अनुमान 3.5% था. रॉयटर्स पोल में इस वित्तीय वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था में 5.1% की गिरावट का अनुमान लगाया गया है.
इसी पोल में कहा गया है कि अगर स्थिति और बिगड़ी तो यह गिरावट 9.1% तक जा सकती है. यह 1979 के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे बदतर हालत होगी. शुक्रवार को सरकार की तरफ़ से जारी आँकड़ों के मुताबिक़ जून तक पिछले तीन महीने में कुल संघीय टैक्स वसूली में एक साल पहले की तुलना में 46 फ़ीसदी की गिरावट आई है.
रक़म के रूप में यह गिरावट 18.05 अरब डॉलर है. ऐसा तब है जब सरकार तेल पर टैक्स लगातार बढ़ाती रही है. भारत में अभी कोरोना से 16 लाख से ज़्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और 35,747 लोगों की मौत हो चुकी है. पिछले तीन महीनों में सरकार का खर्च 13% बढ़कर 8.16 ट्रिलियन रुपया हो गया है जो कि एक साल पहले 7.22 ट्रिलियन रुपया था.
सरकार का खर्च मुफ़्त में अनाज और ग्रामीण रोज़गार पर बढ़ा है. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि दो महीने के लॉकडाउन के कारण एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत में टैक्स वसूली में भारी गिरावट आई है. ऐसे में सरकार सरकारी कंपनियों का निजीकरण कर राजस्व जुटाने की कोशिश कर रही है..
उधर भारत की टॉप रिफाइनरी कंपनी इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन (आईओसी) के जून की तिमाही की कमाई में 47 फ़ीसदी की गिरावट आई है. कोरोना वायरस के कारण तेल की मांग में भारी कमी आई है. पहली तिमाही में भी इसकी कमाई में 41% की गिरावट आई थी.
कोरोना वायरस की महामारी के कारण दुनिया भर में लॉकडाउन लगा और इसके कारण तेल की मांग में भारी कमी आई है. आईओसी की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया है कि इस साल अप्रैल में राष्ट्रीय स्तर पर लागू लॉकडाउन के कारण बिक्री बुरी तरह से प्रभावित हुई थी. प्लांट की पूरी क्षमता का भी इस्तेमाल नहीं हो पाया.
कोरोना संकट के बीच स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया को बंपर मुनाफा

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देश के बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के मुनाफे में साल की पहली तिमाही में 81 फ़ीसदी का उछाल दर्ज किया गया है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ एसबीआई को लाइफ़ इन्स्योरेंस बिज़नेस में हिस्सेदारी की बिक्री और पुराने कर्जों में कमी से ये फायदा हुआ है.
बैंक के शेयरों में 4.1 फीसदी का उछाल भी दर्ज किया गया है. भारतीय बैंक महामारी से जूझ रही अर्थव्यवस्था में बैंकों को अपने कर्ज वसूलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
रिज़र्व बैंक ने इस सिलसिले में जो भी कदम उठाए हैं, इससे बैंकों के वित्तीय स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ा है.
वित्तीय वर्ष 2020-21 की पहली तिमाई में स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की परिसंपत्तियों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है.
पिछली तिमाही की तुलना में बैड लोन (वैसे कर्ज जिनकी किश्तें डिफॉल्ट हो गई हों) 6.15 फीसदी से सुधर कर 5.44 फीसदी तक पहुंचा है.
ब्रेकिंग न्यूज़, भारत को क्यों लगता है कि हर्ड इम्युनिटी की राह पर जाना बड़ी क़ीमत चुकाने वाला साबित होगा?

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भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश में कोरोना महामारी के ख़िलाफ़ हर्ड इम्युनिटी कोई रणनीतिक विकल्प नहीं हो सकता है.
भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने गुरुवार को ये बात कही.
हर्ड इम्युनिटी क्या है?
अगर कोई बीमारी आबादी के बड़े हिस्से में फैल जाती है और इंसान की रोग प्रतिरोधक क्षमता उस बीमारी के संक्रमण को बढ़ने से रोकने में मदद करती है तो जो लोग बीमारी से लड़कर पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, वो उस बीमारी से 'इम्युन' हो जाते हैं, यानी उनमें प्रतिरक्षात्मक गुण विकसित हो जाते हैं.
उनमें वायरस का मुक़ाबला करने को लेकर सक्षम एंटी-बॉडीज़ तैयार हो जाता है. जैसे-जैसे ज़्यादा लोग इम्युन होते जाते हैं, वैसे-वैसे संक्रमण फैलने का ख़तरा कम होता जाता है.
इससे उन लोगों को भी परोक्ष रूप से सुरक्षा मिल जाती है जो ना तो संक्रमित हुए और ना ही उस बीमारी के लिए 'इम्युन' हैं.

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समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ विशेषज्ञों का कहना है कि हर्ड इम्युनिटी तभी होती है जब आबादी के एक हिस्से में वैक्सीन या फिर संक्रमण से ठीक होने के बाद प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाए.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में ओएसडी (ऑफ़िसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) राजेश भूषण ने कहा, "भारत जैसे बड़ी आबादी और बड़े आकार वाले देश में हर्ड इम्युनिटी कोई रणनीतिक विकल्प नहीं हो सकता है. ये केवल एक नतीजा हो सकता है और उसके लिए भी बड़ी क़ीमत चुकानी होगी. इसका मतलब होगा कि हज़ारों या लाखों मरीज़ संक्रमित होंगे, वे इलाज के लिए अस्पताल जाएंगे, नतीजतन बड़ी संख्या में लोगों की मौत होगी. इसलिए हर्ड इम्युनिटी कभी भी रणनीतिक विकल्प नहीं हो सकती है."
"हर्ड इम्युनिटी केवल टीकाकरण के ज़रिए हासिल की जा सकती है और फ़िलहाल ये भविष्य के गर्भ में ही है. इसलिए ये महत्वपूर्ण है कि लोग कोरोना महामारी रोकने के लिए निर्धारित एहतियाती उपायों जैसे फेस मास्क पहनने, सोशल डिस्टेंसिंग और हाथ की स्वच्छता का पालन करें."
भारत में एक दिन में कोरोना संक्रमण के 55 हज़ार मामले
वीडियो कैप्शन, भारत में एक दिन में कोरोना संक्रमण के 55 हज़ार मामले भारत में कोरोना वायरस के मामलों में एक बार फिर रिकॉर्ड बढ़त देखने को मिली है. पिछले 24 घंटों में भारत में 55 हज़ार से अधिक नए मामले सामने आए हैं.
स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों में बताया गया है कि बीते 24 घंटों में 55078 नए मामले दर्ज हुए हैं.
यह एक दिन में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. वैसे भी यह रिकॉर्ड हर दूसरे-तीसरे दिन टूट ही रहा है.
इन नए मामलों के साथ, भारत में अब कोरोना के कुल संक्रमितों की संख्या 16 लाख के पार हो गई है.
यह आंकड़ा अब 16,38,870 तक पहुंच गया है. यह लगातार दूसरा दिन है जब भारत में 50 हज़ार से अधिक नए मामले सामने आए हैं.
पिछले 24 घंटों में देश के कुल छह राज्यों में कोरोना के मामलों में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई है.
अमरीका में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों की वजह आख़िर क्या है?
वीडियो कैप्शन, अमरीका में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों की वजह आख़िर क्या है? अमरीका में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों की वजह आख़िर क्या है?
क्या ज्यादा टेस्ट होने की वजह से ज़्यादा मामले सामने आ रहे हैं?
या कहीं ऐसा तो नहीं कि अमरीका में कोरोना वायरस, इंफेक्शन के दूसरे दौर में पहुंच गया है?
भारत में एक दिन में कोरोना संक्रमण के 55 हज़ार मामले
भारत में कोरोना वायरस के मामलों में एक बार फिर रिकॉर्ड बढ़त देखने को मिली है. पिछले 24 घंटों में भारत में 55 हज़ार से अधिक नए मामले सामने आए हैं.
स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों में बताया गया है कि बीते 24 घंटों में 55078 नए मामले दर्ज हुए हैं. यह एक दिन में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. वैसे भी यह रिकॉर्ड हर दूसरे-तीसरे दिन टूट ही रहा है.
इन नए मामलों के साथ, भारत में अब कोरोना के कुल संक्रमितों की संख्या 16 लाख के पार हो गई है. यह आंकड़ा अब 16,38,870 तक पहुंच गया है.
यह लगातार दूसरा दिन है जब भारत में 50 हज़ार से अधिक नए मामले सामने आए हैं. पिछले 24 घंटों में देश के कुल छह राज्यों में कोरोना के मामलों में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई है.
वीडियो कैप्शन, भारत में एक दिन में कोरोना संक्रमण के 55 हज़ार मामले ब्रेकिंग न्यूज़, वियतनाम में कोरोना से पहली मौत
वियतनाम में कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से पहली मौत का मामला सामने आया है. वियतनाम की सरकारी मीडिया के अनुसार वहां कोविड-19 के एक मरीज़ की मौत हो गई है.
वियतनाम ने क्वारंटीन और फ़िज़िकल डिस्टेंसिंग के कड़े नियम लागू किए थे जिसकी वजह से यहां संक्रमण काफ़ी हद तक काबू में था. लेकिन पिछले कुछ दिनों में पर्यटन के केंद्र और समुद्री तट पर बसे डानांग शहर में संक्रमण के कई मामले दर्ज किए गए हैं.
संक्रमण के केंद्र की अब तक पहचान नहीं हो पाई है.

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ब्रेकिंग न्यूज़, कोरोना वायरस का असर: फ़्रांस और स्पेन आर्थिक मंदी की चपेट में

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नए आंकड़ों से पता चलता है कोरोना वायरस महामारी के कारण फ़्रांस की अर्थव्यवस्था में रिकॉर्ड गिरावट (13.8%) दर्ज की गई है. अमरीका और जर्मनी के बाद अब फ़्रांस की अर्थव्यवस्था भारी गिरावट का शिकार हुई है.
फ़्रांस में निर्यात, निवेश और उपभोक्ताओं का खर्च तेज़ी से गिरा है. ये आंकड़े जारी करनी वाली एजेंसी का कहना है कि अप्रैल का महीना फ़्रांस के लिए सबसे बुरा रहा.
मई और जून में पाबंदियों में ढील दिए जाने के बाद थोड़ा सुधार आया था, हालांकि आर्थिक गतिविधियां औसत से नीचे ही थीं. इन आंकड़ों से ये भी पता चलता है कि पिछली तीन तिमाहियों से फ़्रांस में आर्थिक मंदी है.
फ़्रांस के अलावा स्पेन भी कोरोना वायरस महामारी के कारण आर्थिक मंदी की चपेट में आ गया है. स्पेन की अर्थव्यवस्था में भी बाकी देशों के मुकाबले ज़्यादा गिरावट आई है.
स्पेन की जीडीपी में साल की दूसरी तिमाही में लगभग 20 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.
पहली तिमाही में भी पांच फ़ीसदी से ज़्यादा गिरावट दर्ज की गई थी. इस मंदी की वजह से पिछले छह वर्षों में हुई वृद्धि बेअसर हो गई है. गिरावट के ये आंकड़े पहले लगाए गए अनुमानों से भी ज़्यादा बुरे हैं.
अमरीका में कोरोना संक्रमण के रिकॉर्ड मामलों की पूरी कहानी

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दुनियाभर के मीडिया में इन दिनों जो ख़बरें छप रही हैं, उनमें दो शब्द ज़रूर होते हैं. पहला कोरोना और दूसरा अमरीका.
इसकी वजह ये है कि अमरीका में कोरोना इंफेक्शन का ग्राफ मई-जून में थोड़ा नीचे जाने के बाद, जुलाई आने से पहले दोबारा तेज़ी से चढ़ने लगा.
और फिर वो दिन भी आया जब 24 घंटे के भीतर कोरोना इंफेक्शन के 55 हज़ार से ज्यादा नए मामले हर दिन सामने आने लगे.
अब तस्वीर ये है कि पूरी दुनिया में कोरोना संक्रमण के जितने मामले हैं, उनमें से एक चौथाई अमरीका में हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, अमरीका में अभी तक 40 लाख से ज्यादा लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं.
इतना ही नहीं, अमरीका में अब तक एक लाख 43 हज़ार से ज्यादा लोग, दम तोड़ चुके हैं.
अमरीका में कोरोना इंफेक्शन के तेज़ी से बढ़ते मामलों ने कई सवालों को जन्म दिया है. उनमें ये सवाल भी शामिल है कि अमरीका में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों की वजह आख़िर क्या है?
क्या ज्यादा टेस्ट होने की वजह से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं, या कहीं ऐसा तो नहीं कि अमरीका में कोरोना वायरस, इंफेक्शन के दूसरे दौर में पहुंच गया है?
जापान में फिर बढ़े मामले, लग सकती है इमर्जेंसी

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जापान में एक बार फिर से संक्रमण के मामलों में तेज़ी आ रही है जिसके बाद राजधानी टोक्यो के गवर्नर ने चेतावनी दी है कि अगर हालात बिगड़े तो शहर में फिर से इमर्जेंसी लगा दी जाएगी.
जापान में गुरूवार को पहली बार 1,000 से ज़्यादा मामले दर्ज किए गए. जापान के राष्ट्रीय प्रसारक एनएचके के मुताबिक़ इससे पहले जापान में अभी तक किसी एक दिन में सर्वाधिक 981 मामले ही सामने आए थे.
एक सप्ताह पहले ही जापान में पर्यटन को प्रोत्साहन देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक अभियान चलाया गया था.
हालाँकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस फ़ैसले पर हैरानी जताई थी.
संक्रमण केवल टोक्यो ही नहीं, वहाँ से बाहर भी फैल रहा है.
दूर-दराज के टापुओं से भी नए मामले सामने आए हैं.
इवाते जापान का एकमात्र प्रीफ़ेक्चर या इलाक़ा बचा था जहाँ अब तक कोई भी मामला नहीं हुआ था, पर वहाँ भी बुधवार को कुछ मामले सामने आए.
ब्रेकिंग न्यूज़, WHO की इमर्जेंसी कमिटी की आज बैठक

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इमेज कैप्शन, विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडहानोम ग़ेब्रेयसुस दुनिया भर में कोरोना महामारी की ताज़ा स्थिति की समीक्षा के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की इमर्जेंसी कमिटी की आज बैठक होने जा रही है.
इस कमिटी की छह महीने पहले हुई बैठक में कोविड-19 की बीमारी को 'वर्ल्ड हेल्थ इमर्जेंसी' घोषित करने का फ़ैसला किया गया था.
बैठक में इस बात पर फोकस किया जाएगा कि कोरोना महामारी पर काबू पाने के लिए और क्या किया जा सकता है.
बहुत से वैज्ञानिकों का ये मानना है कि महामारी रोकने के लिए अब वैक्सीन ही एकमात्र उपाय रह गया है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन की इमर्जेंसी कमिटी ने जब जनवरी के महीने में कोविड-19 को 'वर्ल्ड हेल्थ इमर्जेंसी' घोषित किया था तब तक महज कुछ सौ मामले ही रिपोर्ट किए गए थे और चीन के बार इस महामारी के कारण एक भी व्यक्ति की जान नहीं गई थी.
आज हालात ये हैं कि दुनिया भर में कोरोना संक्रमण के एक करोड़ साठ लाख से भी ज़्यादा मामले रिपोर्ट किए जा चुके हैं और साढ़े छह लाख लोगों की मौत हो चुकी है.
मोटे लोगों को कोरोना से ज़्यादा ख़तरा
वीडियो कैप्शन, COVER STORY: मोटे लोगों को कोरोना से ज़्यादा ख़तरा हेल्थ एक्सपर्ट आगाह कर रहे हैं कि अगर आप मोटे हैं या ओवरवेट हैं तो आशंका कि कोविड-19 के कारण आप गंभीर रूप से बीमार पड़ सकते हैं.
ऐसी सूरत में मौत का जोखिम भी ज़्यादा है. वज़न जितना ज़्यादा होगा, ख़तरा उतना ही बढ़ जाएगा.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन भी ये बात मानते हैं कि जब वो कोरोना संक्रमित हुए थे तो उनका वज़न उनके लिए समस्या बन गया था.
ब्रेकिंग न्यूज़, भारतः संक्रमण का आँकड़ा 16 लाख के पार, 55 हज़ार नए मामले

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भारत में कोरोना संक्रमित लोगों की कुल संख्या बढ़कर 16 लाख से ऊपर चली गई है.
बीते 24 घंटों में 55,079 नए मामले सामने आए हैं, 779 लोगों की मौत हुई है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के नए आँकड़ों के बाद कोरोना संक्रमित लोगों की कुल संख्या बढ़कर 16,38,871 हो गई है.
मृतकों की कुल संख्या बढ़कर 35,747 हो गई है.
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बोल्सोनारो बोले, हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन से हुआ ठीक; विपक्ष बोला, संक्रमण हुआ ही नहीं था

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ब्राज़ील के राष्ट्रपति जेर बोल्सोनारो ने एक बार फिर से हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन दवा की हिमायत करते हुए कहा है कि उनका संक्रमण इससे ठीक हो गया.
मगर विपक्ष ने आरोप लगाया कि उन्हें संक्रमण हुआ ही नहीं था.
बोल्सोनारो को 7 जुलाई को संक्रमण हुआ था जिसके बाद वो तीन हफ़्ते के लिए क्वारंटीन पर चले गए थे.
गुरूवार को वो पहली बार किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में सामने आए.
और गुरूवार को ही ब्राज़ील सरकार ने कहा कि बोल्सोनारो की पत्नी मिशेल बोल्सोनारो का टेस्ट पॉज़िटिव पाया गया है.

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गुरूवार को राष्ट्रपति बोल्सोनारो ने एक बार फिर हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन दवा को कारगर बताते हुए कहा कि उन्होंने ये दवा ली और ये उनके काम आई.
मगर उन्होंने ये नहीं बताया कि उनकी पत्नी ने ये दवा ली है या नहीं.
लेकिन बोल्सोनारो के प्रतिद्वंद्वी और ब्राज़ील के पूर्व राष्ट्रपति लुला डीसिल्वा का कहना है कि उन्हें शक है कि राष्ट्रपति बोल्सोनारो को कोरोना संक्रमण हुआ था.
लुला डीसिल्वा ने कहा, "मुझे लगता है उन्होंने अपने संक्रमण को ईजाद किया ताकि वो अपने इलाज का प्रोपेगेंडा कर सकें."
ब्राज़ील में अब तक सरकार के पाँच मंत्री भी संक्रमित हो चुके हैं. गुरूवार को देश के विज्ञान और तकनीक मंत्री भी पॉज़िटिव पाए गए.
ओडिशा: अदिवासी बहुल कोरापुट में प्रशासन ने लगाया 48 घंटों का शटडाउन

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सुब्रत कुमार पति
भुवनेश्वर, ओडिशा से
कोरोना संक्रमण के 66 नए मामले सामने आने के बाद ओडिशा के आदिवासी बहुल कोरापुट जिले में प्रशासन ने 48 घंटों का शटडाउन लगा दिया है. ये शटडाउन 30 की मध्यरात्री से शुरु हो कर 1 अगस्त की मध्यरात्री तक लागू रहेगा.
प्रशासन का कहना है कि जिले में तेज़ी से फैलते कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए यह कदम उठाए गए हैं.
कोरापुट के कलेक्टर मधुसूदन मिश्रा ने एक बयान जारी कर कहा है कि "संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए ये शटडाउन लगाया गया है. शटडाउन के दौरान दूसरे जिलों से कोरापुट आने पर प्रतिबंध होगा."
लोगों को शटडाउन के नियमों को मानने की अपील करते हुए मिश्रा ने कहा कि नियमों का उलंघन करने वालों के ख़िलाफ़ पुलिस शख्त कार्रवाई करेगी.
गौरतलब है कि ओडिशा राज्य में पहले ही सरकार ने 31 जुलाई तक लॉकडाउन लगाया हुआ है, हालांकि इस दौरान ज़रूरी सेवाओं पर छूट दी गई है.
2011 में हुई जनगणना के मुताबिक़ कोरापुट की कुल आबादी का 50 फीसदी हिस्सा अदिवासी हैं. इसके अलावा अलावा यहां 14.25 फीसदी लोग अनुसूचित जाति से हैं.
कोरापुट के जयपुर शहर में सिर्फ एक ही कोरोना हॉस्पिटल है जहां 150 बेड और 4 आईसीयू बेड हैं.
कोरापुट में पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 66 नए मामले दर्केज किए गए हैं और यहां कुल संक्रमितों की संख्या 690 हो गई है.
ओडिशा में कुल संक्रमितों की संख्या अब 30,378 हो गई है और यहां अब तक कोरोना से 169 लोगों की मौत हुई है.
कोविड-19 मामलों की निगरानी के लिए तीन सौ सदस्यों की विशेष समिति
प्रभाकर मणि तिवारी
कोलकाता से,बीबीसी हिंदी के लिए

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पश्चिम बंगाल में कोरोना के रिकवरी रेट में सुधार के सरकार के दावे के बीच गुरुवार को कोरोना संक्रमण से 46 लोगों की मौत हो गई और 2,434 नए मामले सामने आए हैं.
बीते मार्च में कोरोना का पहला मामला सामने आने के बाद यह एक दिन में मौतों और संक्रमितों की सबसे ज्यादा संख्या है. यह स्थिति तब है जब बुधवार को राज्य में पूर्ण लॉकडाउन था.
इस बीच, सरकार ने कोविड-19 अस्पतालों, क्वारंटीन सेंटरों और सेफ हाउसों में संक्रमितों के इलाज पर निगरानी के लिए डाक्टरों की एक तीन सौ-सदस्यीय समिति का गठन किया है.
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी. सरकार ने दावा किया है कि राज्य में रिकवरी रेट बढ़ कर 68.33 फीसदी तक पहुंच गई है जो 64 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से बेहतर है.
अकेले कोलकाता में बीते 24 घंटों के दौरान 750 नए मामले सामने आए और 16 लोगों की मौत हुई.
बुधवार को कोलकाता में 688 नए मामले सामने आए थे. बीती 18 जुलाई से राज्य में रोजाना कोरोना के दो हज़ार से ज्यादा नए मामले सामने आए हैं.
कुवैत ने लगाई भारतीयों के प्रवेश पर रोक
कुवैत ने देश में भारतीय नागरिकों के प्रवेश पर रोक लगा दी है.
कुवैत की सरकार ने फ़ैसला लिया है कि वो पिछले तक़रीबन साढ़े तीन माह से बंद पड़ी अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं को एक अगस्त से फिर से शरू करेगी.
गुरुवार सुबह कुवैत सरकार ने घोषणा की कि पहली अगस्त से भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, ईरान और फिलीपींस से आने वालों को छोड़कर अन्य देशों में रहने वाले कुवैती नागरिक और प्रवासी आवाजाही कर सकते हैं.
भारतीय विदेश मंत्रालय को भारतीय नागरिकों पर लगाई गई इस पाबंदी की जानकारी है और वो इस मामले को प्रशासनिक स्तर पर सुलझाने की कोशिश कर रहा है.

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