कोरोना अपडेटः केंद्र और राज्य द्वारा उठाए गए क़दमों में ख़ामियां: प्रवासी मज़दूरों पर सुप्रीम कोर्ट

देशभर में फंसे प्रवासी मज़दूरों की स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है और केंद्र एवं राज्यों को नोटिस जारी किया है.

लाइव कवरेज

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  2. फ्रांस ने कार इंडस्ट्री के लिए मदद का ऐलान किया

    राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों

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    कोरोना वायरस महामारी के कारण मुश्किलों से जूझ रही फ्रांस की कार इंडस्ट्री के लिए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अरबों यूरो की मदद की घोषणा की है.

    मैक्रों ने कहा, “मौजूदा स्वास्थ्य संकट के कारण फ्रांस की कार इंडस्ट्री बुरी तरह प्रभावित हुई है. ये हमारी अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है और ये इंडस्ट्री हज़ारों लोगों को नौकरियां देता है.”

    आज उत्तरी फ्रांस के वालेयो कार पार्ट फैक्ट्री का दौरा करने के बाद मैक्रों ने कार इंडस्ट्री के लिए 8 अरब यूरो की मदद का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि वो चाहते हैं कि अगले पांच सालों में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों के उत्पादन के क्षेत्र में फ्रांस यूरोप में सबसे आगे रहे.

    उन्होंने कहा, “हमें अपने लिए एक लक्ष्य बनाना पड़ेगा. अगले पांच सालों में हमें हर साल 10 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारें देश में बनानी होंगी.”

    साथ ही उन्होंने कहा कि देश में इलेक्ट्रिक कार खरीदने वालों को मिलने वाली सब्सिडी में भी सरकार इज़ाफा करेगी. पहले लोगों को ऐसी कार खरीदने पर 6,000 यूरो की सब्सिडी मिलती जिसे बढ़ा कर 7,000 यूरो किया जाएगा.

    उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि विदेश से उत्पादन ख़्तम कर कार निर्माता फ्रांस में ही अधिक उत्पादन करने की कोशिश करें.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार फ्रांस में ये सेक्टर करीब नौ लाख लोगों को रोज़गार देता है.

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  5. ब्रेकिंग न्यूज़, केंद्र और राज्य द्वारा उठाए गए क़दमों में ख़ामियां: प्रवासी मज़दूरों पर सुप्रीम कोर्ट

    महिला

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    देशभर में फंसे प्रवासी मज़दूरों की दुर्दशा पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है और प्रवासी मज़दूरों की सहायता करने को कहा है.

    कोर्ट ने कहा कि भारत और राज्य सरकारों द्वारा उठाए गए क़दम अपर्याप्त और ख़ामियों भरे हैं

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस स्थिति को बदलने के लिए एक केंद्रित कार्रवाई की आवश्यकता है.

    कोर्ट का कहना है कि प्रवासी मज़दूरों को मुफ़्त में यात्रा, आश्रय और भोजन की सुविधा प्रदान करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा तत्काल उपाय किए जाने की आवश्यकता है.

    सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर गुरुवार को केंद्र से जवाब देने के लिए कहा है.

    मज़दूर

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    सुप्रीम कोर्ट ने और क्या कहा

    जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमआर शाह की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी.

    कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा, “वो देशभर के विभिन्न भागों में फंसे प्रवासी मज़दूरों की समस्याओं और कष्ट पर स्वतः संज्ञान ले रहा है. अख़बारों और अन्य मीडिया की रिपोर्टें लगातार प्रवासी मज़दूरों के पैदल और साइकिलों पर लंबी दूरी तय करते हुए दुर्भाग्यपूर्ण और दयनीय स्थितियों को दिखा रही हैं.”

    “पूरे देश में लॉकडाउन की इस स्थिति में समाज के इस तबक़े को संबंधित सरकारों से मदद की ज़रूरत है. ख़ासतौर पर भारत सरकार और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को कुछ ख़ास क़दम उठाने की ज़रूरत है ताकि प्रवासी मज़दूरों की मदद की जा सके.”

  6. रूस द्वितीय विश्व युद्ध परेड आयोजित करेगा: पुतिन

    इस साल 9 मई को घरों में रूसियों ने विजय दिवस मनाया

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    इमेज कैप्शन, इस साल 9 मई को घरों में रूसियों ने विजय दिवस मनाया

    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने घोषणा की है कि द्वितीय विश्व युद्ध विजय दिवस की 75वीं सालगिरह पर रूस सैन्य परेड आयोजित करेगा.

    कोरोना वायरस संक्रमण बढ़ने के बाद पुतिन ने 9 मई को होने वाली रूस की पारंपरिक विजय दिवस परेड को रद्द कर दिया था.

    आमतौर पर रूस में विजय दिवस के मौक़े पर मॉस्को के रेड स्क्वेयर पर जवान, पूर्व सैनिक, ऐतिहासिक रेड आर्मी के वाहन और आधुनिक सैन्य साज़ो-सामान देखने को मिलते हैं.

    इन सबके बजाय रूस ने क्रेमलिन के ऊपर से सैन्य वायु यान की उड़ान और माल्यार्पण समारोह आयोजित किया था.

    अब राष्ट्रपति पुतिन ने अपने रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने निर्देश दिए हैं कि वो अगले महीने इस समारोह की तैयारी करें.

    उन्होंने अपने मंत्री से मंगलवार को कहा, “हम इसे 24 जून को करेंगे, उस दिन जब 1945 में दिग्गज विजेताओं की परेड हुई थी.”

    विजय दिवस समारोह पूर्व सोवियत देशों के लिए ख़ास मौक़ा होता है, द्वितीय विश्व युद्ध में इसमें सभी देशों के 2.6 करोड़ लोग मारे गए थे.

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  8. रोज़ाना 1.1 लाख सैंपल टेस्ट हो रहे हैं: आईसीएमआर

    आईसीएमआर के महानिदेशक डॉक्टर बलराम भार्गव

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    भारतीय चिकित्सा अनुंसधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉक्टर बलराम भार्गव ने बताया है कि बीते कुछ महीनों में टेस्ट की दर बढ़कर रोज़ाना 1.1 लाख हो गई है.

    वहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि दुनिया में प्रति एक लाख जनसंख्या में 4.4 मौतें दर्ज हो रही हैं. वहीं भारत में यह प्रति एक लाख जनसंख्या में 0.3 मौतें हैं जो पूरी दुनिया में सबसे कम है.

    स्वास्थ्य मंत्रालाय ने कहा कि यह सिर्फ़ लॉकडाउन, समय पर पहचान और कोविड-19 मामलों के प्रबंधन के कारण हो सका.

  9. ब्रेकिंग न्यूज़, वुहान में 10 दिन के टेस्टिंग अभियान का अंतिम दिन

    टेस्टिंग

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    चीन के वुहान शहर की पूरी आबादी का 10 दिन में कोरोना वायरस टेस्ट करने के अभियान का आज अंतिम दिन है.

    वुहान में जब कोरोना वायरस का संक्रमण अपने चरम पर था तब कोविड-19 के 50,000 मामले थे.

    शहर का स्वास्थ्य आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि शहर में एसिम्प्टोमैटिक लोगों की वजह से संक्रमण का दूसरा दौर हो सकता है.

    सैकड़ों लोगों की संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है. हूबेई प्रांत के स्वास्थ्य आयोग का कहना है कि पूरे प्रांत में 334 लोगों को निगरानी में रखा गया है और वो एसिम्प्टोमैटिक हैं. बीते 24 घंटों में और 26 लोगों की पहचान की गई है.

    कल सरकारी मीडिया ने नागरिकों से कहा था कि जो लोग अभी तक टेस्ट नहीं करा पाए हैं वो आज शाम 5 बजे तक इसके लिए रजिस्टर कराएं.

    सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने आज कहा कि 14 से 23 मई के बीच 65 लाख टेस्ट हुए हैं और इस अभियान से पहले 30 लाख टेस्ट किए गए थे. वुहान में 1.1 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं.

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  11. बच्चों को मास्क पहनाने को लेकर विशेषज्ञों की चेतावनी

    बच्चे

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    जापान के बाल रोग एसोसिएशन ने परिजनों को सलाह दी है कि वो दो साल से कम आयु के बच्चों को मास्क न पहनाएं क्योंकि उन्हें सांस लेने में दिक़्क़त हो सकती है और दम घुटने का ख़तरा बढ़ सकता है.

    वेबसाइट पर अपने नोटिस में संगठन ने कहा है कि बच्चों की सांस नली पतली होती हैं, मास्क से सांस लेते समय उनका दिल अधिक परिश्रम करता है.

    वहीं, अमरीका के सेंटर्स फ़ॉर डिसीस कंट्रोल ने यह भी कहा है कि दो साल से कम आयु के बच्चों को मुंह नहीं ढंकना चाहिए.

  12. ब्रेकिंग न्यूज़, राहुल गांधी के बयान पर बोले जावड़ेकर, कांग्रेस मामले का राजनीतिकरण कर रही

    प्रकाश जावड़ेकर

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    केंद्रीय मंत्री एवं बीजेपी नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि 'कोरोना मामले पर राहुल गांधी का बयान एक उदाहरण है कि ऐसी स्थिति में जब पूरा देश कोरोना वायरस से लड़ रहा है तब कांग्रेस पार्टी इस मामले का राजनीतिकरण कर रही है.'

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा था कि लॉकडाउन पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है और नरेंद्र मोदी सरकार को अपनी आगे की रणनीति बतानी चाहिए.

    इस पर बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, "राहुल गांधी ने ग़लत बयान दिया है. मैं उन्हें ये बताना चाहता हूँ कि जब लॉकडाउन लागू किया गया था, उस समय सिर्फ़ तीन दिनों के अंदर मामले दोगुने हो रहे थे. अब 13 दिनों में हो रहे हैं. ये भारत की सफलता है और सबकी सफलता है."

    उन्होंने कांग्रेस पर दो तरह की बातें करने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसे समय में जब पूरी दुनिया भारत के क़दमों की सराहना कर रही है, कांग्रेस पार्टी सिर्फ़ सरकार की आलोचना कर रही है.

    राहुल गांधी

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    प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, “जब लॉकडाउन लागू हुआ था, तो कांग्रेस इससे नाराज़ थी कि इसे पूरे देश में क्यों लागू किया गया और इससे अर्थव्यवस्था तबाह हो जाएगी. अब पार्टी इसका विरोध कर रही है कि इसमें ढील क्यों दी जा रही है. ये उनकी दो तरह की बातें हैं.”

    उन्होंने कहा कि अमरीका, फ़्रांस, ब्रिटेन, इटली, स्पेन, ईरान, ब्राज़ील और चीन की तुलना में भारत इससे कम प्रभावित रहा है और पूरी दुनिया भारत की इस बात के लिए तारीफ़ कर रही है कि भारत ने सही समय पर लॉकडाउन लागू किया.

    केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने प्रवासी मज़दूरों के मामले में भी सरकार की आलोचनाओं को ख़ारिज कर दिया.

    उन्होंने कहा कि तीन लाख मज़दूरों को 3000 ट्रेन से सुरक्षित उनके घर पहुँचाया गया है.

  13. क्या कोरोना वायरस आँखों पर असर डालता है?

    आंखें

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    ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने सोमवार को कहा कि 'कोरोना वायरस संक्रमण के बाद उन्हें आंखों की रोशनी से संबंधित समस्या हुई है.'

    जॉनसन का यह बयान उनके प्रमुख सहयोगी डॉमिनिक कमिंग्स के बयान के बाद आया है.

    कमिंग्स ने कहा था कि देश में लॉकडाउन के दौरान सड़क पर अपनी आंखों को जांचने के लिए उन्होंने बर्नार्ड कैसल आने-जाने के लिए 60 मील की कार से यात्रा की थी.

    तो क्या कोविड-19 किसी व्यक्ति की आंखों की रोशनी पर असर डालती है? विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस के कारण आंखों की समस्या असामान्य है लेकिन इसके बारे में सुना नहीं है.

    इस तरह के संक्रमण के कारण आंखों में पानी, किरकिराहट और असहजता महसूस हो सकती है.

  14. चीन ने जापान के पीएम से कहा- 'कोरोना पर राजनीति ठीक नहीं'

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    चीन के विदेश मंत्री की ओर से जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे के बयान पर प्रतिक्रिया आई है.

    उन्होंने कहा है, “कोरोना वायरस के स्रोत को लेकर राजनीति करने और उसके इर्द-गिर्द नकारात्मक प्रचार करने की चीन आलोचना करता है.”

    शिंज़ो आबे ने सोमवार को दावा किया था कि कोरोना वायरस चीन से ही फ़ैला है.

    चीनी विदेश मंत्री ने कहा है कि ‘ऐसे बयान, कोरोना वायरस से लड़ने के लिए चीन और जापान के संयुक्त प्रयासों के पीछे की भावना के ख़िलाफ़ हैं.’

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  16. 'पाकिस्तान में फिर हो सकता है लॉकडाउन'

    पाकिस्तान में रेलवे स्टेशन पर यात्री

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    पाकिस्तान में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और अब देश के शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी ने चेताया है कि अगर मामले और मौतें इसी रफ़्तार से बढ़ते रहे तो देश में फिर से लॉकडाउन लगाया जा सकता है.

    डॉक्टर जफ़र मिर्ज़ा ने लोगों से सोशल डिस्टेंस बनाए रखने की अपील की है और चेतावनी दी है कि अगर ऐसे ही मामले बढ़ते रहे तो सख़्त लॉकडाउन भी लगाया जा सकता है.

    पाकिस्तान चरणबद्ध तरीके से इस महीने की शुरुआत से लॉकडाउन हटाना शुरू किया था.

    इस समय पाकिस्तान में 57 हज़ार से अधिक कोरोना संक्रमण के मामले हैं जबकि 1197 मौतें अब तक दर्ज की जा चुकी हैं.

    डॉक्टर मिर्ज़ा ने कहा, "मैं पाकिस्तानी के लोगों को चेतावनी दे रहा हूं कि अगर सावधानी नहीं बरती गई तो ये संकट एक बड़ी त्रासदी में बदल जाएगा."

  17. लॉकडाउन में ढील का असर तेल की क़ीमतों पर दिखना शुरू

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    अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बनी ‘एक आम राय’ की वजह से मंगलवार को कच्चे तेल की क़ीमतों में उछाल देखा गया है.

    राय ये है कि ‘बड़े उत्पादक देश अगर तेल के उत्पादन में कटौती जारी रखते हैं और दुनिया की अधिकांश बड़ी अर्थव्यवस्थाएं कोरोना महामारी के प्रकोप की रोकथाम के लिए शुरू हुए लॉकडाउन में धीरे-धीरे ढील बढ़ाती हैं, तो उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की क़ीमत और उसकी माँग, दोनों की स्थिति बेहतर हो जाएगी.’

    आने वाले दिनों में विमानों और गाड़ियों द्वारा होने वाली तेल खपत के लिए कुछ देशों ने तेल स्टॉक करना शुरू भी किया है. इस परिस्थिति और संभावनाओं का असर मंगलवार सुबह अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की क़ीमतों पर दिखाई दिया.

    वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) जिसे अमरीकी तेल का बेंचमार्क माना जाता है, में कच्चे तेल की कीमतों में 3.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जिसकी वजह से हर बैरल पर 1.06 डॉलर का फ़ायदा होता दिख रहा है और अब एक बैरल की क़ीमत 34.31 डॉलर हो गई है.

    अमरीका में सोमवार को ‘मेमोरियल डे’ की छुट्टी होने की वजह से वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट ने भी कोई रेट जारी नहीं किया था.

    अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट में भी कच्चे तेल के दाम में 1.7% की बढ़त दर्ज की गई है. यहाँ तेल की क़ीमत बढ़कर 36.12 डॉलर प्रति बैरल हो गई है.

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    दरअसल, सऊदी अरब ने रूस की ओर से एक अन्य ओपेक तेल आपूर्ति करार का उल्लंघन होने पर अप्रैल महीने में तेल की वैश्विक सप्लाई में बढ़त कर दी थी. इसके बाद 12 अप्रैल को ट्रंप के दबाव में दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों के बीच एक करार हुआ जिसके तहत तेल उत्पादन में कमी लाए जाने का फ़ैसला किया गया.

    ओपेक, रूस और अन्य सहयोगी तेल उत्पादक देशों ने इसके लिए ओपेक+ नाम का समूह बनाया जिसमें करार हुआ कि ये देश अपने उत्पादन में कटौती करेंगे जो वैश्विक उत्पादन के लगभग 10 फ़ीसदी के बराबर होगी.

    ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड बैंकिंग समूह के वरिष्ठ रणनीतिकार डैनियल हाइन्स ने कहा है कि "निश्चित रूप से ओपेक+ द्वारा की गई कटौती का असर हुआ है और ये असर वैसा है, जैसा आप उम्मीद कर सकते हैं."

    तेल की क़ीमतों को बढ़ाने के लिए उत्पादन में कितनी कटौती फ़िलहाल जारी रखी जाए, इस पर चर्चा के लिए ओपेक+ देशों की एक बैठक जून के शुरुआती दिनों में होनी है.

    तेल के बड़े उत्पादकों ने पिछले करार के तहत मई और जून के उत्पादन में कटौरी करने पर सहमति व्यक्त की थी.

    सभी उत्पादक चाहते हैं कि तेल की क़ीमतें जल्द सामान्य हों. फ़िलहाल तेल का जो रेट है वो इस वर्ष की शुरुआत वाले रेट से क़रीब 45 प्रतिशत कम है.

    डैनियल हाइन्स के अनुसार, ‘अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं के दोबारा शुरू होने से तेल के वायदा बाज़ार की चिंताएं कुछ कम हुई हैं जो कि अब से दो सप्ताह पहले तक भी बहुत ज़्यादा थीं क्योंकि तब अनिश्चितताएं बहुत ज़्यादा थीं और समझ नहीं आ रहा था कि क्या होने वाला है.’

  18. कोरोना वायरसः आपकी नौकरी में इन्फेक्शन का कितना ख़तरा है?

  19. राहुल गांधी ने कहा- 'हिंदुस्तान का लॉकडाउन फेल रहा'

    राहुल गांधी

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    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लॉकडाउन के फ़ैसले की आलोचना की है.

    उन्होंने कहा कि 'सरकार का काम गवर्नेंस का होता है, हमारा काम अपोज़िशन का है, सरकार पर दबाव बनाने का है. अगर कोई ख़तरा है, जिसे सरकार नज़रअंदाज़ कर रही है, उसे नज़र में लाना ही हमारा काम है.'

    पढ़िए, उन्होंने और क्या-क्या कहा:

    • मैंने फ़रवरी में ही कहा था कि बहुत ख़तरनाक हालात होने जा रहे हैं. मैं आज भी वही बात कह रहा हूं कि अगर वित्तीय मदद नहीं दी, छोटे और मध्यम उद्योगों की रक्षा नहीं की गई तो जो नुक़सान होने वाला है अभी तक वो दिखा भी नहीं है.
    • जो चेतावनी मैंने फरवरी में दी थी, वही अब दे रहा हूं. मैं पूरे सम्मान से सरकार से कह रहा हूं कि प्लीज़ आप आर्थिक क़दम उठाइये, छोटे उद्योगों की रक्षा कीजिए, नहीं तो बहुत बड़ा आर्थिक नुक़सान होने वाला है.
    • मैं नरेंद्र मोदी जी को कह रहा हूं कि जो आर्थिक पैकेज आपने दिया है, उससे कुछ नहीं होने वाला है. नरेंद्र मोदी ने जिस आर्थिक पैकेज की घोषणा की है, उससे कुछ नहीं होने वाला. लोगों को सीधे उनके खाते में पैसे दिए जाएँ. 50% लोगों के खाते में सीधे 7500 रुपए दिए जाएँ.
    • जो फ़ैसला लेने वाले लोग हैं, उनकी राय है कि अगर हमने बहुत सारा पैसा गरीब लोगों को दे दिया, मज़दूरों को दे दिया, तो बाहर देशों में गलत छवि बनेगी, हमारी रेटिंग ख़राब हो जाएगी.
    • मैं फिर से दोहरा रहा हूं. भारत की शक्ति, बाहर से नहीं बनती है, हिंदुस्तान की ताक़त हिंदुस्तान के भीतर है.
    • मज़दूरों को लग रहा है कि उन्हें अकेले छोड़ दिया गया है. कई लोगों ने मुझसे कहा कि भरोसा हमारा टूट गया है. जब कोई भारतीय इन शब्दों का इस्तेमाल करता है तो मुझे अच्छा नहीं लगता.
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    • मैं नहीं चाहता कि किसी भी भारतीय को इन शब्दों का इस्तेमाल करना पड़े. अब अधिक से अधिक लोग कह रहे हैं कि भरोसा टूट गया. किसी का भरोसा नहीं टूटना चाहिए.
    • सरकार चाहे तो अभी मज़दूरों की मदद कर सकती है, साढ़े सात हज़ार रुपए हर महीने दे सकती है और देने भी चाहिए. ये दुर्भाग्यपूर्ण है, मेरा मानना है कि लोग पहले भारतीय हैं और फिर किसी राज्य के हैं. कोई राज्य के बाहर जाकर काम करना चाहता है, ये फ़ैसला किसी मुख्यमंत्री को नहीं लेना है बल्कि उस व्यक्ति को लेना है.
    • हर भारतीय के पास देश में कहीं भी जाकर अपने सपने पूरे करने का अधिकार हैं. ये लोग उत्तर प्रदेश की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि भारत के नागरिक हैं. हमारा काम उनके सपने पूरे करने में मदद करना है ना कि ये तय करना कि वो कहां काम करेंगे, कहां नहीं.
    • लॉकडाउन का लक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ है. प्रधानमंत्री ने कहा था कि 21 दिन में लॉकडाउन कोरोना को हरा देना. जो पहली रणनीति थी वो नाकाम हो गई है. सरकार को ये स्वीकार कर लेना चाहिए और देश को बताना चाहिए कि वो अब क्या सोच रही है. मज़दूरों की किस तरह मदद करेगी. प्रवासियों के लिए क्या किया जाएगा, ये सब चीज़ें सरकार को देश को बतानी चाहिए.
    • सीमा विवाद के डिटेल्स सरकार को पारदर्शी तरीक़े से देश को बताना चाहिए क्योंकि इस मामले पर स्पष्ट तरीके से जानकारी नहीं है. नेपाल के साथ और चीन के साथ क्या हुआ है, इस पर पारदर्शिता लानी चाहिए. प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इस मामले पर नहीं बोलना चाहता, जब तक इस मामले पर सरकार कुछ नहीं बताती मैं नहीं बोल सकता.
    • प्रधानमंत्री स्वयं ये स्वीकार करेंगे कि उनकी पहली योजना नाकाम हो गई है. हम भी यही पूछ रहे हैं कि प्रधानमंत्री ये बताएं कि अब क्या करना है. पहले तो तीन बार उन्होंने फ्रंटफुट पर खेला. लेकिन अब प्रधानमंत्री देश को दिखाई नहीं दे रहे हैं. प्रधानमंत्री बैकफुट पर चले गए हैं, मैं विपक्ष से होकर कह रहा हूं कि वो फिर से फ्रंट पर आएं.
  20. कोरोना महामारी: नागरिकों पर कैसे नज़र रख रहा है चीन

    चीन में चौराहे पर लगा निगरानी कैमरा

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    इमेज कैप्शन, चीन में चौराहे पर लगा निगरानी कैमरा

    चीन किस हद तक अपने नागरिकों की निगरानी कर रहा है इसकी झलक कोरोना महामारी के दौरान मिली है.

    रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक निगरानी स्टेशनों को महामारी वॉर रूम के तौर पर पेश किया जा रहा है. लोग कहां जा रहे हैं और किससे मिल रहे हैं, सरकार इस पर नज़दीकी नज़र रख रही है.

    चीन दुनिया की सबसे उन्नत और जटिल निगरानी प्रणाली विकसित कर रहा है. इसके तहत दसियों लाख कैमरे सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए हैं.

    इसके अलावा स्मार्टफ़ोन और फ़ेशिलय रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी से भी निगरानी की जा रही है.

    सरकारी अधिकारियों, सरकारी मीडिया और स्थानीय लोगों के मुताबिक प्रशासन लोकेशन डाटा और आईडी से जुड़ी हुई एप के ज़रिए बाहर से आए लोगों पर नज़र रख रहा है और उन्हें क्वारंटीन कर रहा है.

    इसके अलावा कैमरा सर्विलांस सिस्टम ने भी संदिग्धों की पहचान में अहम भूमिका निभाई है. इस नेटवर्क के ज़रिए संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों की पहचान की गई है.

    यही नहीं प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहे व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और लोगों की भी पहचान की जा रही है और ज़रूरत पड़ने पर सज़ा भी दी जा रही है.

    द रायटर्स ने लोगों की निगरानी में शामिल एक सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा है कि 'यह युद्ध जैसी स्थिति है. हम युद्ध के समय जैसी ही सोच रख रहे हैं'

    चीन की निगरानी प्रणाली भले ही हाई टेक हो लेकिन इसमें भी वीडियो फुटेज देखने के लिए बड़ी तादाद में लोगों की ज़रूरत है. वीडियो देखने वाले इन लोगों को ग्रिड मेंबर कहा जाता है. ये कैमरा नेटवर्क से मिल रही तस्वीरों को लगातार देखते रहते हैं.