बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि विपक्ष के कुछ महत्वपूर्ण नेताओं ने नागरिकता संशोधन क़ानून पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और लोगों को गुमराह करने की कोशिश की.
भारत की संसद में लगातार दो दिन चर्चा के पश्चात बहुमत की वोटिंग के साथ नागरिकता संशोधन क़ानून बना. इसे असंवैधानिक कहना, गैरक़ानूनी कहना देश को बड़गलाने की कोशिश है, भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश है.
संसद में विपक्ष के पास संख्या नहीं थी तो वो हार गयी लेकिन सड़क पर उद्डंतता, अनुशासनहीनता को बढ़ावा दे रही है. यह विपक्ष गैरज़िम्मेदार है. यह निंदनीय है. सभी दलों को ज़िम्मेदारी से काम करना चाहिए. विपक्ष ने हर विषय पर लगातार इस देश के लोगों को भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश करता रहा है.
पी चिदंबरम ने कहा कि अगर जम्मू-कश्मीर मुसलमान राज्य नहीं होता तो अनुच्छेद 370 हो हटाया नहीं जाता. सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद भी ओवैसी जैसे नेता अदालत पर ही हमला कर रहे थे.
ट्रिपल तलाक़ में देश की सर्वोच्च अदालत ने उसे गैर संवैधानिक बताते हुए संसद से क़ानून बनाने को कहा लेकिन विपक्ष के लोग हिंदू-मुसलमान के नाम पर देश को बांटने की कोशिश कर रहे थे.
अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.
ये पढ़े लिखे छात्र हैं, वे जानते हैं कि इस क़ानून में देश के किसी भी नागरिक के किसी भी अधिकार का हनन नहीं होता, उनके किसी भी अधिकार को सरकार नहीं छीनती है. लेकिन उन्हें भड़का कौन रहा है?
कुछ नेता हैं जो उन्हें भड़काने की कोशिश कर रहे हैं.
वर्षों पहले जेएनयू में जब बगावती नारे लगे थे तो राहुल गांधी, डी राजा, प्रकाश करात, सीताराम येचुरी गए थे. आज भी ये विपक्ष के लोग उसी अंदाज में लोगों को भड़काने का काम रहे हैं.
अभी शनिवार को राहुल गांधी रीलॉन्च हो रहे थे और रविवार से ही ये आगजनी शुरू हो जाती है.
ओवैसी देश के नए जिन्ना के रूप में काम कर रहे हैं.
ममता बनर्जी ने आज कोलकाता में खड़े हो कर पूरा भाषण हिंदी में क्यों दिया.
पूरे देश में उन्माद की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रही हैं
मुसलमानों के वोट का टेंडर खुला है, विपक्ष में होड़ लगी है कि कौन लेगा.
इस नए संशोधन क़ानून से हिंदू, मुसलमान या हिंदुस्तान के किसी नागरिक का कुछ भी हनन नहीं हो रहा है.
क़ानून व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा है कि "आप छात्र हो सकते हैं लेकिन आपका यह अधिकार नहीं है कि आप शांति को तोड़ें, सार्वजनिक संपत्ति पर हमला करें."