उत्तर प्रदेश के किसानों के विरोध-प्रदर्शन और दिल्ली जाने
की मांग के बाद अब पंजाब के किसानों ने भी दिल्ली जाने की मांग को लेकर एक मार्च निकाला
है.
किसानों ने एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य की क़ानूनी गारंटी की मांग पर यह मार्च निकाला है.
किसानों के मार्च के दौरान ही केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को एमएसपी को लेकर संसद में जवाब दिया. उन्होंने राज्यसभा में कहा, “हमारी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सभी कृषि उत्पाद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर ख़रीदे जाएं. यह मोदी सरकार की गारंटी है."
शिवराज सिंह चौहान ने संसद में प्रश्नकाल के दौरान एमएसपी के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में यह आश्वासन दिया.
शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर भी एमएसपी को लेकर निशाना साधा. उन्होंने कहा, "जब दूसरी तरफ़ के हमारे दोस्त सत्ता में थे, तो उन्होंने रिकॉर्ड पर कहा था कि वे एमएस स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिशों को स्वीकार नहीं कर सकते.”
शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा साल 2019 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को उत्पादन लागत पर 50 प्रतिशत लाभ देकर न्यूनतम समर्थन मूल्य की गणना करने का फ़ैसला किया था.
किसानों का यह मार्च हरियाणा और पंजाब के शंभू बॉर्डर पर रोक दिया है. जिस वजह से किसान शंभू बॉर्डर पर ही रुके हैं.
शंभू बॉर्डर पर किसानों को रोकने की कोशिश में पुलिस ने उन पर आंसू गैस के गोले भी छोड़े हैं.
किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने शंभू बॉर्डर पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “हमने शांति पूर्वक सरकार से अपील की है कि हमें आगे जाने दिया जाए. देश हमारा है, हम इसके नागरिक हैं. हम किसी दूसरे देश के नागरिक नहीं हैं. हमारे साथ दुश्मन देश के नागरिकों जैसा सलूक नहीं किया जाना चाहिए.''
किसानों के मार्च पर कृषि एंव किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा, “किसानों को आकर बात करनी चाहिए. उनके लिए दरवाज़े हमेशा खुले हुए हैं. अगर वे हमें बुलाते हैं तो हम भी जाने को तैयार हैं.”