भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत ने दुनिया को 'युद्ध नहीं बुद्ध दिया है, शांति का संदेश दिया है.'
रूस के दौरे के बाद ऑस्ट्रिया पहुंचे नरेंद्र मोदी ने बुधवार को भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए भारत की अर्थव्यवस्था, राजनीति, नीतियों और ऑस्ट्रिया और भारत के बीच ऐतिहासिक संबंधों का ज़िक्र किया.
उन्होंने कहा, "भारत और ऑस्ट्रिया के रिश्ते ऐतिहासिक रहे हैं. क़रीब 200 साल पहले वियना की यूनिवर्सिटी में संस्कृत की पढ़ाई शुरू हो गई थी."
उन्होंने गांधी जी की शिष्या मीरा बेन का ज़िक्र करते हुए कहा कि उनका अंतिम समय वियना में ही बीता था.
पीएम मोदी ने इस दौरान भारत के आम चुनाव का भी ज़िक्र किया. उन्होंने बीते जून में संपन्न हुए भारत चुनावों के बारे में कहा, "अभी कुछ ही हफ़्ते पहले हुए चुनाव में 65 करोड़ लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. और इतने बड़े चुनाव के नतीजे कुछ ही घंटों में आ जाते हैं."
उन्होंने इसका श्रेय भारत की चुनावी मशीनरी और भारतीय लोकतंत्र को दिया.
उन्होंने कहा, "इन चुनावों में सैकड़ों राजनीतिक दलों के 8000 से ज्यादा उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया. इस स्तर का और इतनी विविधता वाले चुनाव के बाद जनता ने अपना जनादेश दिया है."
उन्होंने कहा, "60 साल के बाद एक सरकार को लगातार तीसरी बार सेवा का अवसर भारत में मिला है. कोविड महामारी के बाद हमने दुनिया में चारों तरफ़ राजनीतिक अस्थिरता देखी है. ज़्यादातर देशों में सरकारों के लिए बने रहना आसान नहीं रहा. दोबारा चुनकर आना बहुत बड़ी चुनौती रही है."
"ऐसी स्थिति में भारत की जनता ने मुझ पर, मेरी पार्टी पर और एनडीए पर भरोसा किया है. यह जनादेश इस बात का प्रमाण है भारत स्थिरता और निरंतरता चाहता है. यह निरंतरता बीते दस सालों के कार्यक्रमों और नीतियों की है."
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 41 साल बाद पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री ऑस्ट्रिया पहुंचा है.
इससे पहले अपने तीसरे कार्यकाल में मोदी ने अपनी पहली विदेशी द्विपक्षीय यात्रा के तौर पर रूस को चुना था.
जिस दिन मोदी पहुंचे उसी दिन यूक्रेन में बच्चों के एक अस्पताल पर मिसाइल से हमला हुआ, जिसमें कई लोग मारे गए. इसके बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ पीएम मोदी की मुलाक़ात पर यूक्रेन ने सवाल उठाए.
ऑस्ट्रिया के एकदिवसीय दौरे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को स्वदेश लौट आए हैं.