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इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी ने ईरान पर अमेरिकी हमलों के बारे में क्या कहा?

इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) ने रविवार को ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों को लेकर प्रतिक्रिया दी है.

सारांश

लाइव कवरेज

कीर्ति रावत और इफ़्तेख़ार अली

  1. अब इस लाइव पेज को विराम देने का वक़्त आ गया है. बीबीसी संवाददाता इफ़्तेख़ार अली को दीजिए इजाज़त.

    कल हम बीबीसी लाइव पेज के ज़रिए दिन भर की बड़ी ख़बरों को लेकर फिर हाज़िर होंगे.

    फ़िलहाल, हमारे होम पेज पर मौजूद कुछ अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें.

  2. इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी ने ईरान पर अमेरिकी हमलों के बारे में क्या कहा?

    इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) ने रविवार को ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों को लेकर प्रतिक्रिया दी है.

    ओआईसी जनरल सेक्रेटरिएट ने इस्लामी गणराज्य ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले पर गहरी चिंता जताई है.

    ओआईसी ने कहा, "अमेरिकी हमला इलाक़े के तनाव को ख़तरनाक तरीके से बढ़ा सकता है जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा, शांति और स्थिरता के लिए ख़तरा हो सकता है.

    महासचिवालय ने 13 जून 2025 के उस बयान को याद किया जिसमें ईरान की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों और संधियों के उल्लंघन की निंदा की गई थी.

    इस बयान में तनाव कम करने, संयम बरतने, बातचीत का सहारा लेने और बातचीत के ज़रिए शांतिपूर्ण उपायों की ओर लौटने की अपील की गई थी.

  3. ईरान से क्या चाहता है फ़्रांस? इमैनुएल मैक्रों ने रखी ये मांग

    फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ईरान और इसराइल के बीच बढ़ते संघर्ष को लेकर कुछ अरब देशों के नेताओं से बात की है.

    उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "मैंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस, ओमान के सुल्तान, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति और क़तर के अमीर से बात की और एकजुटता जताई."

    उन्होंने कहा कि ईरान के राष्ट्रपति से मैंने एक बार फिर हमारी दृढ़ मांग दोहराई है और अपील की है कि हमारे नागरिकों, सेसिल कोहलर और जैक्स पेरिस की तुरंत रिहा किया जाए.

    फ्रांस के दो नागरिकों, सेसिल कोहलर और उनके पार्टनर जैक्स पेरिस को मई 2022 में ईरान में गिरफ्तार किया गया था. उन पर ईरान में विरोध प्रदर्शन भड़काने का आरोप है. हालांकि उनके परिवार ने इससे इनकार किया है.

    राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा, "पिछली रात हुए हमलों के बाद, मैंने तनाव कम करने की अपील की और इस ख़तरनाक स्थिति में ईरान से अत्यधिक संयम बरतने को कहा, ताकि कूटनीति की ओर लौटने का रास्ता बन सके."

    उन्होंने कहा, "पूरे क्षेत्र के लिए सबसे बुरे हालात से बचने के लिए बातचीत में शामिल होना और ईरान से परमाणु हथियार छोड़ने की स्पष्ट प्रतिबद्धता प्राप्त करना ज़रूरी है. इसका कोई विकल्प नहीं है, यही सभी के लिए शांति और सुरक्षा का एकमात्र रास्ता है."

  4. रूस ने ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद क्या मांग की?

    रूस ने ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका के हमलों की कड़ी निंदा की है.

    अमेरिका ने रविवार सुबह ईरान के फ़ोर्दो, नतांज़ और इस्फ़हान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे.

    रूस के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, "रूस ने ईरान की कई परमाणु सुविधाओं पर अमेरिका के हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करता है."

    बयान में आगे कहा गया, "हम तुरंत आक्रामकता ख़त्म करने की अपील करते हैं और स्थिति को फिर से शांतिपूर्ण और कूटनीतिक रास्ते पर लाने के प्रयासों को तेज़ करने की मांग करते हैं."

  5. अमेरिका के हमलों के बाद ईरान की सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिखा?, बेनेडिक्ट गार्मन, बीबीसी वेरिफ़ाई

    रविवार सुबह ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर अमेरिका के हमले के बाद ताज़ा सैटेलाइट तस्वीरों में ईरान के फ़ोर्दो परमाणु ठिकाने में हुई तबाही देखी गई है.

    फ़ोर्दो में पहाड़ों के बीच, ज़मीन के नीचे ईरान का परमाणु एनरिचमेन्ट सेन्टर है.

    22 जून को मैक्सार टेक्नोलॉजीस ने ईरान के इस इलाक़े की हाई रिज़ोल्यूशन तस्वीरें जारी कीं.

    इनमें देखा जा सकता है कि वहां छह नए गड्ढ़े बन गए हैं. संभव है ये अमेरिका के हमलों के बाद मिसाइल के ज़मीन के भीतर घुसने के कारण बने हों. साथ ही हमलों के कारण पहाड़ की ढलान पर धूल और मलबा भी बिखरा हुआ दिख रहा है.

    इससे पहले बीबीसी वेरिफ़ाई ने बताया था कि इस तरह ज़मीन के नीचे के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए "बंकर बस्टर" का इस्तेमाल किया जाता है.

    इस तरह के ठिकाने बमों को मैसिव ऑर्डिनेंस पेनिट्रेटर (एमओपी) नाम के बम की ज़द में आ सकते हैं.

    अब से कुछ देर पहले अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने पुष्टि की है कि सेना ने इस अभियान में एमओपी का इस्तेमाल किया था.

    मैकिन्ज़ी इंटेललिजेंस सर्विस में वरिष्ठ इमेजरी विश्लेषक स्टू रे ने बीबीसी वेरिफ़ाई को बताया, "ज़मीन के ऊपर आपको धमाके का बड़ा असर नहीं दिखेगा क्योंकि ये बम ज़मीन के ऊपर नहीं फटते बल्कि ये ज़मीन के नीचे जाकर नुक़सान पहुंचाते हैं."

  6. पाकिस्तान ने 'ईरान के कहने पर' यूएन सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई

    पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक डार ने ईरान और इसराइल के बीच बढ़ते तनाव को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के बारे में जानकारी दी है.

    उन्होंने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में दी है.

    विदेश मंत्री ने लिखा, "ईरान के आग्रह पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक आज न्यूयॉर्क समयानुसार दोपहर में बुलाई जा रही है."

    इसहाक़ डार के मुताबिक़, इस बैठक का अनुरोध ईरान ने किया है, और इसके लिए पाकिस्तान, चीन और रूस का समर्थन है.

    अमेरिका ने रविवार सुबह ईरान के फ़ोर्दो, नतांज़ और इस्फ़हान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए. जिसके बाद ईरान और इसराइल के बीच संघर्ष और फैलने का ख़तरा पैदा हो गया है.

  7. 'अमेरिका ईरान के साथ युद्ध में नहीं है'- अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस

    अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि 'अमेरिका ईरान के साथ युद्ध में नहीं है'.

    उन्होंने कहा, "हम ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं के साथ युद्ध कर रहे हैं."

    साथ ही उन्होंने कहा कि इन हमलों के साथ "अमेरिका का मानना है कि उसने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को 'तबाह' कर दिया है."

    उपराष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी अब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को 'स्थायी रूप से' समाप्त करने के लिए काम करेंगे.

    इससे पहले अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने रविवार को पेंटागन में ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा था कि "राष्ट्रपति ट्रंप शांति चाहते हैं."

    पीट हेगसेथ ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वे शांति चाहते हैं, परमाणु हथियार नहीं और ईरान को भी यही रास्ता अपनाना चाहिए."

  8. चीन ने ईरान पर अमेरिका के हमले को लेकर क्या कहा?

    चीन ने रविवार को ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा की है.

    चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "ईरान पर अमेरिका के हमलों और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी में मौजूद परमाणु सुविधाओं पर बमबारी की चीन कड़ी निंदा करता है."

    उन्होंने कहा, "अमेरिका की यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय क़ानून के उद्देश्यों और सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन है और इससे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है."

    लिन जियान ने कहा, "चीन संघर्ष में शामिल सभी पक्षों, विशेष रूप से इसराइल से अपील करता है कि वे जल्द से जल्द संघर्षविराम करें, आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और संवाद शुरू करें."

    उन्होंने कहा कि चीन अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर प्रयास करने, न्याय कायम रखने और मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए तैयार है.

    अमेरिका ने रविवार सुबह ईरान के फ़ोर्दो, नतांज़ और इस्फ़हान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए.

    ईरान पर हुए इन अमेरिकी हमलों के लिए इसराइल ने ट्रंप की तारीफ़ की है. इसके बाद माना जा रहा है कि ईरान और इसराइल के बीच संघर्ष के और फैलने का ख़तरा पैदा हो गया है.

  9. ईरान पर अमेरिका के हमले: अब तक क्या-क्या हुआ, किसने क्या कहा?

    रविवार सुबह डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों, फोर्दो, नतांज़ और इस्फ़हान पर हमले किए हैं.

    इसके बाद घटनाक्रम तेज़ी से बदल रहा है और दुनिया भर से प्रतिक्रिया आ रही है. कई देशों ने अपील की है कि संकट का हल कूटनीति के रास्ते से निकाला जाए न कि सैन्य हमलों से.

    एक नज़र डालते हैं कि सुबह से अब तक क्या-क्या हुआ और किसने क्या कहा -

    • अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि हमले के लिए अमेरिका के बी2 बमवर्षकों का इस्तेमाल किया गया "जो दुनिया की जानकारी के बिना ईरान में गए और वहां से वापस लौटे."
    • पीट हेगसेथ ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शांति चाहते हैं और किसी भी जवाबी कार्रवाई का कड़ा जवाब दिया जाएगा.
    • इसराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग ने ईरान पर अमेरिकी हमलों को 'ऐतिहासिक और साहसिक' निर्णय बताया. उन्होंने बीबीसी से कहा कि "मुझे यह साफ़ लगता है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को काफ़ी नुक़सान पहुंचा है."
    • ईरान को इन हमलों से कितना नुक़सान पहुंचा है, इस बारे में अभी भी पूरी जानकारी नहीं मिली है.
    • ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान और अमेरिका के लोगों को 'धोखा देने का' आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि ट्रंप ने "न सिर्फ़ कूटनीति के प्रति ईरान की प्रतिबद्धता का दुरुपयोग कर ईरान को धोखा दिया, बल्कि अपने वोटरों को भी धोखा दिया है."
    • ब्रिटेन ने कहा है कि वो इसराइल में मौजूद अपने नागरिकों और उनके परिजनों को इसराइल और क़ब्ज़े वाले फ़लस्तीनी इलाक़ों से निकालने के लिए विशेष उड़ान की तैयारी कर रहा है.
    • ब्रितानी विदेश मंत्री डेविड लैमी ने ईरान से अपील की है कि वो संयम बरते. उन्होंने कहा कि इन हमलों में यूके की कोई भागीदारी नहीं है. साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें इन हमलों के बारे में पहले से जानकारी दी गई थी.
    • वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर ने कहा है कि अमेरिकी हमलों का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम से पैदा हुए "गंभीर खतरे" को "कम करना" है.
    • अमेरिका ने अपने हमलों में ईरान के फोर्दो परमाणु ठिकाने के निशाना बनाया था. ये जगह तेहरान से 60 मील दूर पहाड़ियों के बीच है. इस अंडरग्राउंड ठिकाने में दो मुख्य टनल हैं और छोटी सुरंगों का जाल है.
    • आकलन के अनुसार ये सेंटर ज़मीन से नीचे 80 से 90 मीटर नीचे है और इसराइल के "बंकर बस्टर" बम इस तक नहीं पहुंच सकते. माना जा रहा है कि ये ठिकाना मैसिव ऑर्डिनेंस पेनिट्रेटर (एमओपी) नाम के 13 हज़ार किलो के अमेरिकी बम की ज़द में आ सकता है.
  10. अमेरिकी रक्षा मंत्री बोले - राष्ट्रपति शांति चाहते हैं, परमाणु हथियार नहीं

    अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने रविवार को पेंटागन में ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले के बारे में विस्तार से जानकारी दी है.

    रविवार को पेंटागन में प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरूआत में उन्होंने कहा कि अमेरिका के हमले ईरान की परमाणु क्षमताओं को 'कमज़ोर' और 'तबाह' करने के लिए किए गए थे.

    रक्षा मंत्री ने दावा किया कि इस कार्रवाई में ईरानी सैनिकों या नागरिकों पर कोई असर नहीं पड़ा है.

    उन्होंने कहा कि कई राष्ट्रपतियों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर "आख़िरी वार करने का सपना देखा था, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप से पहले कोई भी ऐसा नहीं कर सका."

    पीट हेगसेथ ने कहा, "जब राष्ट्रपति ट्रंप बोलते हैं, तो दुनिया को सुनना चाहिए."

    उन्होंने अमेरिका के हमले को "साहसी और ब्रिलिएंट" करार दिया और कहा कि अमेरिका के अलावा कोई दूसरा देश ऐसा नहीं कर सकता था.

    उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप शांति चाहते हैं.

    रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वे शांति चाहते हैं, परमाणु हथियार नहीं और ईरान को भी यही रास्ता अपनाना चाहिए."

  11. ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद क्या बढ़ सकती हैं तेल की क़ीमतें?, पीटर होस्किन्स, बीबीसी न्यूज़

    ईरान और इसराइल के बढ़ते संघर्ष की वजह से दुनिया भर में तेल की क़ीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

    माना जा रहा है कि सोमवार सुबह एशिया में ऊर्जा बाज़ार खुलने पर क़ीमतों में तेजी देखी जा सकती है.

    क्रिस्टोल एनर्जी की चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव कैरोल नखले ने बीबीसी को बताया, “अमेरिकी हमलों ने संघर्ष को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है और कई लोगों को डर है कि इससे स्थिति और बिगड़ सकती है.”

    उन्होंने कहा, “इस डर का असर तेल की क़ीमतों पर जियोपॉलिटिकल प्रीमियम के रूप में दिखाई देगा. कोई नहीं जानता कि यह कितना होगा, लेकिन सामान्य तौर पर जितना बड़ा डर, उतना बड़ा प्रीमियम.”

    पिछले महीने लगभग 20 फ़ीसदी की बढ़ोतरी के बाद ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को हफ़्ते के अंत में 77.01 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ.

    इसके बावजूद, क़ीमतें अब भी पिछले साल इसी समय की तुलना में कम हैं.

    कच्चे तेल की क़ीमतें आपकी कार में ईंधन भरवाने से लेकर सुपरमार्केट में खाद्य पदार्थों की लागत तक हर चीज़ को प्रभावित करती हैं.

  12. 'ट्रंप ने ईरान और अमेरिका की जनता को धोखा' दिया'- ईरानी विदेश मंत्री

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान और अमेरिका के लोगों के साथ 'विश्वासघात' का आरोप लगाया है.

    उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप को दुनिया के इस हिस्से में अमेरिका की महंगी और अंतहीन युद्धों से बाहर निकलने के वादे पर चुना गया था."

    ईरान के विदेश मंत्री ने कहा, "लेकिन उन्होंने न सिर्फ़ कूटनीति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का दुरुपयोग कर ईरान को धोखा दिया, बल्कि अपने वोटरों को भी धोखा दिया है."

    उन्होंने इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की ओर इशारा करते हुए कहा, "वह एक वॉन्टेड वॉर क्रिमिनल के उद्देश्य के आगे झुक गए हैं. ऐसे व्यक्ति जो इसराइली शासन के हितों को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी लोगों के जीवन और संपत्ति का शोषण कर रहे हैं."

    नवंबर 2024 में आईसीसी (इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट) ने इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट जारी किया था.

    आईसीसी ने नेतन्याहू पर ग़ज़ा में युद्ध अपराध का आरोप लगाया था, जिसे इसराइल ने नकार दिया था.

  13. ईरान और इसराइल के बढ़ते संघर्ष के बीच ब्रिटेन क्या योजना बना रहा है?

    इसराइल में फंसे अपने लोगों को निकालने के लिए ब्रिटेन विशेष उड़ान की तैयारी कर रहा है.

    अमेरिका ने रविवार सुबह ईरान के फ़ोर्दो, नतांज़ और इस्फ़हान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए.

    इसके बाद माना जा रहा है कि ईरान और इसराइल के बीच संघर्ष और बढ़ सकता है, ब्रिटेन अगले हफ़्ते की शुरुआत में अपने नागरिकों और उनके परिजनों को इसराइल और फ़लस्तीनी इलाक़ों से निकालने के लिए विशेष उड़ान की तैयारी कर रहा है.

    विदेश कार्यालय के एक बयान में कहा गया है कि ब्रिटिश नागरिकों के लिए एक पंजीकरण फॉर्म शुरू किया गया है और आगे की उड़ानों पर 'मांग के आधार पर' विचार किया जाएगा.

  14. ईरान पर अमेरिका के हमलों के बाद जापान ने जताई चिंता

    जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने रविवार को ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों को लेकर प्रतिक्रिया दी.

    पीएम इशिबा ने कहा कि जापान इस स्थिति को 'गंभीर चिंता' के साथ देख रहा है.

    उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोका जाना चाहिए.

    दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव पर उन्होंने कहा कि तनाव को कम करना 'सबसे ज़रूरी' है.

    अमेरिका ने रविवार सुबह ईरान के फ़ोर्दो, नतांज़ और इस्फ़हान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए.

    ईरान पर हुए इन अमेरिकी हमलों के लिए इसराइल ने ट्रंप की तारीफ़ की है. इसके बाद माना जा रहा है कि ईरान और इसराइल के बीच संघर्ष के और फैलने का ख़तरा पैदा हो गया है.

  15. ईरान-इसराइल संघर्ष के बीच पीएम मोदी ने की ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत

    ईरान और इसराइल के बीच संघर्ष बढ़ता जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से बात की है.

    उन्होंने इसकी जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में दी.

    पीएम मोदी ने लिखा, "हमने वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की और हालिया तनाव को लेकर गहरी चिंता जताई है."

    उन्होंने कहा, "हमने तनाव को तुरंत कम करने, संवाद और कूटनीति को आगे का रास्ता बनाने और क्षेत्र में जल्द से जल्द शांति, सुरक्षा और स्थिरता बहाल करने की अपील दोहराई है."

    अमेरिका ने रविवार सुबह ईरान के फ़ोर्दो, नतांज़ और इस्फ़हान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए.

  16. ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद अब इसराइल क्या करेगा? राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग ने बीबीसी से क्या कहा

    इसराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों को 'ऐतिहासिक और साहसिक' निर्णय बताया है.

    बीबीसी संवाददाता लॉरा कुन्सबर्ग ने इसराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग से ताज़ा स्थिति से जुड़े मामलों पर बात की.

    इस सवाल के जवाब में कि क्या ईरान की परमाणु क्षमता पूरी तरह ख़त्म कर दी गई है, राष्ट्रपति हर्ज़ोग ने कहा कि उन्हें पूरी जानकारी नहीं है.

    उन्होंने कहा, "लेकिन मुझे यह साफ़ लगता है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को काफ़ी नुक़सान पहुंचा है."

    उनसे सवाल किया गया कि क्या इसराइल ने ईरान पर हमला करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधे तौर पर अनुरोध किया था.

    इस सवाल पर हर्ज़ोग ने कहा, "हमने ये फ़ैसला अमेरिकियों पर छोड़ने का फै़सला किया है."

    इससे पहले उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि अमेरिका ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हमला करने जा रहा है. उन्होंने कहा, "जब यह हुआ तो मैं जाग गया था."

    कुन्सबर्ग ने फिर पूछा कि क्या अब इसराइल ईरान पर हमला करना बंद कर देगा?

    इस सवाल के जवाब में राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग ने कोई सीधा जवाब नहीं दिया, बस इतना कहा कि ईरान इसराइली क्षेत्र पर मिसाइलें दाग रहा है और "हमें मिसाइलों से ख़ुद को बचाने के लिए कुछ भी करना होगा".

    उन्होंने कहा, "इससे निपटने का सही तरीक़ा यह है कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुलझाया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि इससे बाहर निकलने की एक रणनीति हो."

  17. ईरान ने अमेरिका और इसराइल पर लगाया आरोप, विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने क्या कहा?

    ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका के हमलों के बाद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा है कि कूटनीति का रास्ता पहले इसराइल ने बंद किया और फिर अमेरिका ने उसे ख़त्म कर दिया.

    उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "बीते सप्ताह हम अमेरिका के साथ बातचीत कर रहे थे जब इसराइल ने हमला कर कूटनीति का रास्ता बंद करने का फ़ैसला किया."

    इसके बाद अराग़ची ने लिखा, "इस सप्ताह यूरोपीय मुल्कों और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत हो रही थी और इसी बीच अमेरिका ने कूटनीति का रास्ता बंद करने का फ़ैसला किया."

    बीते सप्ताह अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर छठे दौर की बातचीत होनी थी, लेकिन इसराइल के हमले के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी.

    अब्बास अराग़ची ने सवाल किया, "इससे आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?"

    उन्होंने लिखा, हम ब्रिटेन और यूरोपीय प्रतिनिधियों से कहना चाहते हैं कि उन्हें लगता है कि ईरान को बातचीत की मेज़ पर आना चाहिए लेकिन ईरान उस जगह पर कैसे लौट सकता है जहां से वो कभी बाहर निकला ही नहीं.

    बता दें कि 2015 में हुए परमाणु समझौते से अमेरिका 2018 में बाहर हो गया था. इसके बाद से ईरान ने कई बार परमाणु संवर्धन बढ़ाने को लेकर चेतावनी दी थी.

  18. पाकिस्तान ने ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिकी हमलों को लेकर क्या कहा?

    पाकिस्तान ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका के हमलों की निंदा की है.

    पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए एक्स पर लिखा, "पाकिस्तान ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका के हमलों की निंदा करता है, जो इसराइल के लगातार हमलों के बाद हुए हैं. हम क्षेत्र में तनाव और हिंसा और बढ़ने की आशंका को लेकर बेहद चिंतित हैं."

    पाकिस्तान ने अपने बयान मे कहा है कि ये हमले अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के सभी नियमों का उल्लंघन हैं और ईरान को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत अपनी रक्षा करने का वैध अधिकार है.

    इसके अलावा पाकिस्तान की तरफ़ से संघर्ष ख़त्म करने की अपील की गई है.

    इसहाक़ डार की पोस्ट के मुताबिक़ बयान में लिखा गया है, "हम ज़ोर देते हैं कि आम लोगों की जान और संपत्ति की रक्षा करना ज़रूरी है और इस संघर्ष को तुरंत ख़त्म किया जाना चाहिए."

    "सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों, ख़ासतौर पर अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून का पालन करना चाहिए. संवाद और कूटनीति ही क्षेत्र में संकट का समाधान निकालने का एकमात्र रास्ता है."

    इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा था "संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य अमेरिका ने ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला करके संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय क़ानून और एनपीटी का गंभीर उल्लंघन किया है."

  19. अभी तक बीबीसी संवाददाता कीर्ति रावत आप तक ख़बरें पहुंचा रही थीं.

    अब से रात 10 बजे तक बीबीसी संवाददाता इफ़्तेख़ार अली आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगे.

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  20. ईरान के हमलों में इसराइल में 16 लोग घायल

    इसराइली इमरजेंसी सर्विस मैगन डेविड एडोम (एमडीए) का कहना है कि रविवार को ईरान की ओर से किए गए हवाई हमलों में घायल हुए 16 लोगों का इलाज चल रहा है.

    इन हमलों में घायल 16 लोगों में एक 30 साल का व्यक्ति भी शामिल है, जिसकी हालत स्थिर बताई जा रही है. बाकी 15 लोग हल्के रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें मामूली चोटें आई हैं.

    इससे पहले, एमडीए ने बताया था कि रविवार सुबह ईरानी हवाई हमलों में 11 लोग घायल हुए थे.

    इसराइली पुलिस ने बताया कि ईरान के हमलों के बाद तेल अवीव में एक इमारत क्षतिग्रस्त हो गई.

    इस क्षतिग्रस्त इमारत से छह लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है. उन छह लोगों को मामूली चोटें आई हैं.

    इसी के साथ इसराइली पुलिस ने बताया कि अभी भी इमारतों के अंदर फंसे लोगों की तलाश की जा रही है.