लाइव, सीजेपी ने कहा- 'धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग से कोई समझौता नहीं'

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर रहा था कि विपक्षी दल छात्रों के आंदोलन में राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं.

सारांश

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लाइव कवरेज

दीपक मंडल

  1. सीजेपी ने कहा- 'धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग से कोई समझौता नहीं'

    कॉकरोच जनता पार्टी

    इमेज स्रोत, ANI

    इमेज कैप्शन, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की प्रेस कॉन्फ़्रेंस के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर कोई समझौता नहीं होगा

    दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता ने कहा है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के लेकर कोई समझौता नहीं होगा.

    कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, "मैंने आज सोनम वांगचुक से कई बार बात की. उन्होंने सभी प्रदर्शन करने वालों से अपील भी की है कि वे शांति बनाए रखें और इस प्रदर्शन को सही तरीके से करें. इस देश में पहले हुए प्रदर्शनों में, सत्ताधारी दल की ओर से असामाजिक तत्त्वों की घुसपैठ कराई गई और फिर दोष आंदोलन पर मढ़ दिया गया. ऐसा नहीं होना चाहिए."

    केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर उन्होंने कहा, "जे.पी. नड्डा को शर्म आनी चाहिए. लोग यहां 30 दिनों से ज़्यादा समय से बैठे हैं और वे कह रहे हैं कि राजनीति नहीं होनी चाहिए. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े को लेकर कोई समझौता नहीं होगा, उन्हें जाना होगा. तब तक ये प्रदर्शन चलता रहेगा."

    इससे पहले केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर रहा कि विपक्षी दल इस आंदोलन में राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं.

    उन्होंने कहा था, ''हम चर्चा के लिए तैयार हैं. गहन चर्चा हो. संसद ही उपयुक्त स्थान है जहां गहराई से चर्चा की जा सकती है. हम ठोस नीति लेकर आएं क्योंकि बच्चे देश का भविष्य हैं. ये सरकार के साथ-साथ विपक्ष की भी ज़िम्मेदारी है."

  2. अमेरिका और सऊदी अरब के बीच ऐतिहासिक परमाणु समझौता

    ट्रंप और प्रिंस सलमान

    इमेज स्रोत, Reuters

    अमेरिका और सऊदी अरब ने एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.

    इस समझौते से खाड़ी का यह देश अपना नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विकसित कर सकेगा.

    अमेरिकी ऊर्जा विभाग के अनुसार, यह "शांतिपूर्ण परमाणु सहयोग समझौता" है.

    इसके तहत अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में बड़े पैमाने पर काम करने का अवसर मिलेगा.

    समझौते का पूरा ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है. लेकिन अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, भविष्य में इसके तहत सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्द्धन की अनुमति मिल सकती है.

    संवर्द्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु बिजलीघरों के लिए ईंधन के रूप में किया जाता है.

    हालांकि, इसी तकनीक का उपयोग परमाणु बम बनाने के लिए भी किया जा सकता है.

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसा होता है, तो यह अमेरिका की ओर से पहली बार होगा. इससे पहले से ही अस्थिर पश्चिम एशिया में परमाणु हथियारों के प्रसार का खतरा बढ़ सकता है.

    अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने बताया कि परमाणु सहयोग समझौते के साथ एक द्विपक्षीय सुरक्षा निगरानी समझौते (बाइलेटरल सेफगार्ड्स एग्रीमेंट) पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं.

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