असम के सिलचर शहर से जिरीबाम के रास्ते खाने-पीने का सामान लेकर इंफाल जा रहे एक ट्रक को बुधवार सुबह संदिग्ध चरमपंथियों ने आग लगा दी.
यह घटना जिरीबाम शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर तामेंगलोंग के तौसेम थाना क्षेत्र की है. दरअसल नेशनल हाईवे 37 से कई ट्रक आवश्यक सामान लेकर इंफाल की तरफ जा रहे थे. तभी कुछ हथियारबंद लोगों ने लहंगनोम गांव और ओल्ड केफुंडई गांव के बीच फायरिंग कर ट्रकों को रोकने की कोशिश की और बाद में एक ट्रक को आग लगा दी.
इस घटना की पुष्टि करते हुए तामेंगलोंग जिला पुलिस के एक अधिकारी ने बीबीसी से कहा, "यह घटना आज (बुधवार) सुबह करीब 6 बजे की है. चावल, प्याज और आलू सहित आवश्यक वस्तुओं से लदे करीब 8 ट्रक जिरीबाम के रास्ते नेशनल हाईवे-37 पर नोनी की ओर जा रहे थे."
"तभी अज्ञात हथियारबंद उग्रवादियों ने फायरिंग कर वाहनों को रोक लिया और एक ट्रक में आग लगा दी. हालांकि बाकी के ट्रक मौके से किसी तरह सुरक्षित निकल गए. पुलिस की टीम अपराधियों की शिनाख्त कर उन्हें पकड़ने के लिए अभियान चला रही है."
मणिपुर में बीते एक महीने में खासकर जिरीबाम ज़िले में हिंसा की एक दर्जन घटनाएं सामने आई है. बीते सोमवार को सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए 10 संदिग्ध उग्रवादियों की मौत की घटना के बाद से जिले में कर्फ्यू है और 6 लोग लापता है.
ऐसी तनावपूर्ण स्थिति के मध्यनजर केंद्र सरकार ने तत्काल प्रभाव के साथ केंद्रीय सुरक्षाबलों की 20 अतिरिक्त कंपनियों को मणिपुर रवाना कर दिया है. इन कंपनियों में सीआरपीएफ और बीएसएफ के लगभग 2400 जवान शामिल है.
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लगातार खराब हो रही कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए तत्काल प्रभाव से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की टुकड़ियों को तैनात करने का निर्देश दिया है.
गृह मंत्रालय ने बुधवार को एक फैक्स संदेश से भेजे आदेश में कहा कि राज्य की कानून-व्यवस्था को नियंत्रण में लाने के लिए सीआरपीएफ और बीएसएफ की 20 अतिरिक्त टुकड़ियों को भेजा जा रहा है. मणिपुर सरकार से अनुरोध है कि वह संबंधित सुरक्षाबलों के साथ परामर्श करके विस्तृत तैनाती योजना तैयार करे.
गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार इन 20 अतिरिक्त सुरक्षाबलों की टुकड़ियों के साथ ही अब मणिपुर में रैपिड एक्शन फोर्स समेत केंद्रीय बलों की कुल 218 कंपनियां तैनात है.उधर जिरीबाम में लापता 6 लोगों का अभी कोई सुराग नहीं मिला है. इस बीच मैतेई समुदाय के 13 नागरिक समाज संगठनों ने इलाके में बुधवार शाम से 24 घंटे का बंद बुलाया है.
जिरीबाम में रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया है कि मोटबुंग गांव की तरफ कई इलाकों में कल रात से फायरिंग हो रही है. जबकि मुठभेड़ में मारे गए लोगों के शव अब तक परिवार वालों को नहीं सौंपा गया है. मणिपुर पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबलों की टीम लापता 6 लोगों को तलाशने के लिए जिले के कई अंदरूनी ग्रामीण इलाकों में लगातार अभियान चला रही है.
मुठभेड़ को लेकर सीआरपीएफ-पुलिस पर लगे आरोपों का जवाब
जिरीबाम जिले में सोमवार को सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए 10 संदिग्ध उग्रवादियों की मौत की घटना के बाद सीआरपीएफ और राज्य पुलिस पर कई सवाल उठ रहे है. इन्हीं सवालों का जवाब देते हुए मणिपुर पुलिस ने एक बयान जारी किया है.
दरअसल कुकी जनजाति के कई संगठनों का आरोप है कि 10 युवकों को मारने वाली घटना एक फर्जी मुठभेड़ थी.
इसी के जवाब में मणिपुर पुलिस ने लिखित बयान में कहा, "सोशल मीडिया पर कई संगठनों की प्रेस विज्ञप्तियां सामने आई, जिनमें जिरीबाम जिले के अंतर्गत बोरोबेक्रा के जकुरधोर में 11 नवंबर, 2024 की घटना के संबंध में सीआरपीएफ और मणिपुर पुलिस के खिलाफ निराधार दावे किए गए हैं, जिसमें अधिकारियों पर गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है."
" 11 नवंबर, 2024 को लगभग ढाई से 3 बजे के बीच बोरोबेक्रा पुलिस स्टेशन जहां विस्थापित लोगों को आश्रय दिया गया था और जिरीबाम जिले के जकुरधोर स्थित सीआरपीएफ पोस्ट पर एक साथ चरमपंथियों द्वारा आरपीजी और स्वचालित हथियारों सहित भारी परिष्कृत हथियारों से हमला किया गया था. उक्त हमले में चरमपंथियों ने आसपास के कुछ घरों को भी जला दिया था. जवाबी कार्रवाई की गई और गोलीबारी बंद होने के बाद इलाके की तलाशी ली गई. इस तरह वहां सैन्य वर्दी में सशस्त्र चरमपंथियों के 10 शव बरामद किए गए, साथ ही युद्ध जैसे हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए."
पुलिस ने बताया, "हथियारबंद चरमपंथियों पर घात लगाकर हमला नहीं किया गया था, बल्कि सुरक्षाबलों की जवाबी फायरिंग में वे मारे गए. अगर सुरक्षाबलों ने जवाबी फायरिंग नहीं की होती तो नुकसान कहीं ज़्यादा हो सकता था."