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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता से हुए संघर्षविराम समझौते के बाद हमास सभी इसराइली बंधकों को रिहा करने वाला है.
इफ़्तेख़ार अली और आनंद मणि त्रिपाठी
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता से हुए संघर्षविराम समझौते के बाद हमास सभी इसराइली बंधकों को रिहा करने वाला है.
रिहाई का सटीक समय अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसराइल, हमास और अमेरिका-तीनों की तरफ़ से बयान आए हैं.
यहां जानिए किसने क्या कहा है? अंतिम समय सीमा क्या है?
बंधकों को रिहा करने के लिए हमास के पास सोमवार दोपहर 12:00 बजे तक का समय है.
इसराइल ने क्या कहा?
इसराइली सरकार की प्रवक्ता शॉश बेड्रोसियन ने कहा है कि इसराइल को उम्मीद है कि सभी 20 जीवित बंधकों को सोमवार सुबह रेड क्रॉस को एकसाथ सौंपा जाएगा, जिसके बाद उन्हें इसराइल लाया जाएगा.
प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा है कि इसराइल बंधकों को लेने के लिए तैयार है.
ग़ज़ा से क्या जानकारी मिली है?
ग़ज़ा की हमास-नियंत्रित सिविल डिफेंस ने कहा है कि उसने जीवित इसराइली बंधकों की गिनती पूरी कर ली है और रिहाई से पहले उन्हें अलग-अलग स्थानों पर भेज दिया गया है.
बीबीसी को सूत्रों ने बताया है कि हमास अभी भी सात हाई-प्रोफाइल क़ैदियों, जिनमें मरवान बरग़ूती और अहमद सादात शामिल हैं, की रिहाई की मांग कर रहा है.
उनका कहना है कि अगर इन सात में से सिर्फ़ दो को भी रिहा कर दिया गया, तो आज ही सभी बचे हुए बंधकों को छोड़ दिया जाएगा.
अमेरिका का क्या कहना है?
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एनबीसी के कार्यक्रम मीट द प्रेस में कहा कि "बंधकों की रिहाई किसी भी वक्त हो सकती है."
उन्होंने यह भी जोड़ा कि राष्ट्रपति ट्रंप के सोमवार इसराइल पहुंचने पर रिहा किए गए लोगों से मुलाक़ात करेंगे.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौरे से पहले इसराइली संसद भवन और प्रमुख सड़कों के आसपास अमेरिकी झंडे लहरा रहे हैं.
हालांकि तैयारियों के बीच ग़ज़ा में बंदी बनाए गए इसराइली बंधकों की रिहाई को लेकर चिंता बनी हुई है.
इसराइली अधिकारियों का कहना है कि 48 बंधकों में से लगभग 20 अभी जीवित हैं.
ट्रंप प्रशासन की मध्यस्थता से तैयार हुए समझौते के तहत ग़ज़ा में हिरासत में लिए गए करीब दो हज़ार लोगों और इसराइल की जेलों में बंद 250 फ़लस्तीनी कैदियों को रिहा किया जाना है.
इनमें से 1,700 ग़ज़ावासी वे हैं जिन्हें बिना किसी औपचारिक आरोप के गिरफ्तार किया गया था, जबकि बाकी 250 कैदी लंबी सज़ा काट रहे हैं.
हमास ने इसराइल से मांग की है कि वह समझौते की उस शर्त का पालन करे जिसमें सात प्रमुख फ़लस्तीनी कैदियों में से कम से कम दो की रिहाई का वादा किया गया था.
इधर, ग़ज़ा में लागू अस्थायी युद्धविराम के चलते मानवीय सहायता की आवाजाही शुरू हो गई है. समझौते के अनुसार, प्रतिदिन 600 ट्रक ग़ज़ा में प्रवेश कर रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र ने इसराइल से अपील की है कि वह सभी क्रॉसिंग पॉइंट्स खोल दे, ताकि मानवीय सहायता बिना किसी रुकावट के फ़लस्तीनी इलाकों तक पहुंच सके.

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मध्य प्रदेश के दमोह ज़िले के सतरिया गांव में एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक युवक को कथित रूप से दूसरे व्यक्ति के पैर धोकर पानी पीने के लिए मजबूर किया गया.
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. बताया गया है कि यह विवाद एक मीम पोस्ट को लेकर शुरू हुआ था.
20 वर्षीय युवक पुरुषोत्तम कुशवाहा ने कुछ समय पहले अनुज पांडे नाम के एक व्यक्ति की फोटो पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद गांव में बैठक बुलाकर उससे पैर धोकर माफ़ी मांगने के लिए कहा गया.
पुरुषोत्तम ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, “मैंने पोस्ट कर दी थी लेकिन बाद में हटा ली थी. फिर भी गांव के कुछ लोगों ने पंचायत में मुझसे पैर धुलवाए और वही पानी पिलाया.”
उन्होंने यह भी कहा कि यह सब दबाव में हुआ, लेकिन वे इसे राजनीतिक रंग नहीं देना चाहते.
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने संबंधित व्यक्ति और अन्य लोगों पर धर्म, जाति, भाषा, या जन्मस्थान जैसे आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता या घृणा को बढ़ावा देने वाली बीएनएस की धारा 196(1)(बी) के तहत मामला दर्ज किया है.
दमोह के पुलिस अधीक्षक श्रुत कीर्ति सोमवंशी ने कहा, “मामले की जांच जारी है, साक्ष्यों के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी.”
रविवार 12 अक्तूबर को अनुज पांडे का फोन लगातार बंद आ रहा था.
अनुज पांडे के भाई दीनदयाल पांडे ने बीबीसी हिन्दी से कहा, “हम लोगों ने कोई ज़बरदस्ती नहीं की है. सामने वाले ने अपनी मर्ज़ी से गुरु होने के नाते अनुज के पैर धोए थे. उन्होंने अनुज की फोटो पर जूतों की माला पहनाई थी और उसी हरक़त की माफ़ी मांगी थी”
हालांकि बीबीसी से पुरूषोतम ने कहा कि उन पर दबाव बनाकर अनुज पांडे के पैर धुलवाए गए थे, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वो इस मामले को राजनीतिक तूल नहीं देना चाहते हैं.
राजनीतिक दलों ने भी बयान दिए हैं. कांग्रेस ने इस घटना को “मानवता और संवैधानिक मूल्यों के ख़िलाफ़” बताया, जबकि बीजेपी का कहना है कि “सरकार की ज़ीरो टॉलरेंस नीति स्पष्ट है, किसी भी भेदभाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.”
फिलहाल सतरिया गांव में शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है.

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कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को राज्य के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में अपने कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. '
खड़गे ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “मैंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि आरएसएस की गतिविधियों को सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में अनुमति न दी जाए. उनकी गतिविधियां युवाओं के मस्तिष्क को प्रभावित करती हैं, जो न देश के हित में है और न समाज के.”
कर्नाटक के मंत्री ने यह भी कहा कि आरएसएस को पुरातात्विक स्थलों या राज्य-स्वामित्व वाले मंदिरों में भी कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.
खड़गे ने कहा, “वे चाहें तो निजी परिसरों में अपने कार्यक्रम करें, लेकिन सरकारी ज़मीनों का उपयोग सामूहिक ब्रेनवॉश के लिए नहीं होना चाहिए.”
उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए सवाल किया, “अगर यह विचारधारा इतनी अच्छी है, तो भाजपा नेताओं के बच्चे इसमें क्यों नहीं शामिल होते? कितनों ने त्रिशूल दीक्षा ली है या गौरक्षक बने हैं? सांप्रदायिक हिंसा के दौरान भाजपा नेताओं के बच्चे सड़कों पर क्यों नहीं दिखते?”
खड़गे ने आरएसएस की विचारधारा को “संविधान-विरोधी” बताते हुए कहा, “यही लोग हैं जिन्होंने संविधान को अस्वीकार किया और मनुस्मृति को संविधान बनाना चाहा. पहले वे खुद उसका पालन करें, फिर दूसरों को उपदेश दें.”

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आईसीसी महिला वर्ल्ड कप में रविवार को खेले जा रहे मुकाबले में भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया के सामने जीत के लिए 331 रन का लक्ष्य रखा है.
भारतीय टीम पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 48.5 ओवर में 330 रन बनाकर ऑलआउट हो गई.
ओपनर स्मृति मंधाना ने 66 गेंद में 80 रन की पारी खेली. वहीं प्रतिका रावल ने 75 रन बनाए. ऋचा घोष ने 22 गेंद में 33 रन की पारी खेली.
वहीं ऑस्ट्रेलिया के लिए ऐनाबेल सदरलैंड ने 9.5 ओवर में 40 रन देकर पांच विकेट हासिल किए. इसके अलावा सोफ़ी मोलिन्यू ने तीन विकेट हासिल किए.

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पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने अफ़ग़ानिस्तान सीमा के पास तालिबान के ठिकानों पर “भारी जवाबी कार्रवाई” की है.
सीमाई प्रांत में पाकिस्तान के हमले के बाद अफ़ग़ानिस्तान ने भी कार्रवाई की थी जिसमें उसने 58 पाकिस्तानी सैन्यकर्मी के मारे जाने का दावा किया था.
पाकिस्तानी सेना के बयान में कहा गया है कि यह हमला “बिना किसी उकसावे के” किया गया था और इसका उद्देश्य सीमावर्ती इलाक़ों को अस्थिर करना था.
सेना के अनुसार, जवाबी कार्रवाई में हवाई हमले, आर्टिलरी फ़ायर और ज़मीनी छापे शामिल थे. कई तालिबान चौकियां, शिविर और समर्थन नेटवर्कों को निशाना बनाया गया.
पाकिस्तान का दावा है कि इस ऑपरेशन में 200 से ज़्यादा संदिग्ध मारे गए, कई ठिकाने नष्ट किए गए और कुछ अफ़ग़ान चौकियों पर अस्थायी नियंत्रण हासिल किया गया. हालाँकि, पाकिस्तानी सेना ने यह भी स्वीकार किया कि झड़पों में उसके 23 सैनिक मारे गए और 29 घायल हुए हैं.
पाकिस्तान सरकार ने तालिबान से यह मांग की है कि वह "अफ़ग़ान धरती से सक्रिय आतंकवादी समूहों को तत्काल रोकें."
इस्लामाबाद ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसे हमले जारी रहे, तो पाकिस्तान “अपने आत्मरक्षा के अधिकार के तहत” जवाबी कार्रवाई जारी रखेगा. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है, और अफ़ग़ान पक्ष की ओर से फ़िलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.
वहीं अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने दावा किया है कि पाकिस्तान के हमले के जवाब में की गई कार्रवाई में 58 पाकिस्तानी सैन्यकर्मी मारे गए हैं और 30 घायल हुए हैं.
काबुल में रविवार को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि 'जवाबी कार्रवाई' में 20 पाकिस्तानी चौकियों पर क़ब्ज़ा कर लिया गया था, लेकिन लड़ाई ख़त्म होने के बाद उन्हें वापस कर दिया गया.
ज़बीहुल्लाह मुजाहिद के दावे पर अभी तक पाकिस्तान की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. हालांकि, गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने शनिवार रात दावा किया था कि अफ़ग़ानिस्तान की कार्रवाई का प्रभावी जवाब दिया गया है.
प्रवक्ता ने यह भी पुष्टि की कि झड़पों के दौरान नौ तालिबान कर्मी मारे गए और 20 से अधिक घायल हुए हैं.
ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने आरोप लगाया कि आईएसआईएस का प्रमुख पाकिस्तान में है और यह संगठन अब भी ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह और बलूचिस्तान प्रांतों में सक्रिय है.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीनी सामानों पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ़ लगाने की चेतावनी के बाद चीन ने अमेरिका पर “दोहरे मापदंड” अपनाने का आरोप लगाया है.
चीन के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने शुक्रवार को कहा कि अगर ट्रंप प्रशासन अपनी धमकी पर अमल करता है, तो चीन जवाबी क़दम उठाएगा.
प्रवक्ता ने कहा, “चीन संभावित व्यापार युद्ध से नहीं डरता और अपने वैध अधिकारों की रक्षा के लिए हर ज़रूरी क़दम उठाएगा.”
यह बयान ट्रंप की उस टिप्पणी के बाद आया है जिसमें उन्होंने चीन के दुर्लभ खनिज निर्यात पर नियंत्रण कड़े करने की निंदा की थी.
ट्रंप ने चीन पर “बहुत शत्रुतापूर्ण रवैया” अपनाने और “दुनिया को बंधक बनाने” की कोशिश का आरोप लगाया था.
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी थी कि अगर चीन इस नीति से पीछे नहीं हटता, तो वह इस महीने के अंत में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित बैठक से ख़ुद को अलग कर सकते हैं.
विश्लेषकों का कहना है कि यह बयानबाज़ी अमेरिका-चीन व्यापार संबंधों में नई अनिश्चितता ला सकती है और वैश्विक बाज़ारों पर असर डाल सकती है.

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बीबीसी उर्दू के मुताबिक़, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने सीमावर्ती इलाक़ों में अफ़ग़ानिस्तान की ओर से हुई कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की है और कहा कि पाकिस्तान अपनी रक्षा के संबंध में कोई समझौता नहीं करेगा.
उन्होंने सेना की कार्रवाई की तारीफ़ करते हुए कहा कि अग्रिम कार्रवाइयों ने दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया.
प्रधानमंत्री ने सेना प्रमुख फ़ील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तानी सेना की पेशेवर क्षमता की सराहना की और कहा, "हमारी रक्षा मज़बूत हाथों में है और हम देश के हर कोने की रक्षा करना जानते हैं."
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि हर उकसावे का कड़ा और प्रभावी जवाब दिया जाएगा.
शहबाज़ ने यह भी कहा कि "पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान को आतंकवादी तत्वों के बारे में कई बार सूचित किया है, ताकि अफ़ग़ान धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान के ख़िलाफ़ न हो."
विदेश मंत्री का भी आया बयान
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने सीमावर्ती घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए कहा कि तालिबान की सीमा पर कथित गोलीबारी और छापेमारी "गंभीर उकसावा" है.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की कार्रवाई तालिबान के "सैन्य बुनियादी ढांचे और आतंकवादी ठिकानों" के ख़िलाफ़ है और इसका उद्देश्य नागरिकों को निशाना बनाना नहीं है.
डार ने कहा, "हमारी रक्षात्मक प्रतिक्रिया में शांतिपूर्ण अफ़ग़ान नागरिक आबादी को निशाना बनाना शामिल नहीं है. हम नागरिक हताहतों से बचने के लिए अत्यधिक सावधानी बरत रहे हैं."
उन्होंने तालिबान सरकार से उन तत्वों के ख़िलाफ़ ठोस कार्रवाई की मांग दोहराई जो पाक-अफ़ग़ान संबंधों को पटरी से उतारना चाहते हैं.

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दुर्गापुर में एक निजी मेडिकल छात्रा से गैंगरेप के आरोप के मामले पर कहा है कि यह घटना “चिंताजनक और स्तब्ध करने वाली” है, लेकिन कॉलेज प्रशासन को भी छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए.
ममता बनर्जी ने कहा, “यह एक निजी कॉलेज है. तीन हफ़्ते पहले ओडिशा के समुद्र तट पर तीन लड़कियों के साथ बलात्कार हुआ था. ओडिशा सरकार वहां क्या कार्रवाई कर रही है? यह लड़की एक निजी मेडिकल कॉलेज में पढ़ती थी. वह रात 12:30 बजे कैसे बाहर आई? जहां तक मुझे जानकारी है, यह घटना जंगल वाले क्षेत्र में हुई. मुझे नहीं पता वहां क्या हुआ, जांच जारी है.”
ममता बनर्जी ने कहा, “कॉलेज को लड़कियों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना चाहिए और रात में कॉलेज से बाहर नहीं जाना चाहिए.”
उन्होंने कहा, “वह इलाक़ा जंगल के पास है. पुलिस सभी से पूछताछ कर रही है. किसी को छोड़ा नहीं जाएगा. तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है और दोषियों को कड़ी सज़ा दी जाएगी.”
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की घटनाएं “किसी भी राज्य में निंदनीय हैं.”
उन्होंने कहा, “ऐसी वारदातें मणिपुर, उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा में भी हुई हैं. वहां भी सरकारों को सख़्त क़दम उठाने चाहिए. हमारे राज्य में हमने एक-दो महीने में चार्जशीट दायर की और अदालत ने दोषियों को फांसी की सज़ा सुनाई.”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि निजी मेडिकल कॉलेजों को अपने छात्रों, ख़ासकर छात्राओं की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने यह भी दोहराया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और दोषियों को “कड़ी से कड़ी सज़ा” दी जाएगी.
पुलिस ने बताया कि मेडिकल छात्रा का बयान दर्ज कर लिया गया है और एफएसएल टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं.

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि जून 1984 का ऑपरेशन ब्लू स्टार एक "ग़लती" थी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने "उसकी क़ीमत अपनी जान देकर चुकाई."
चिदंबरम ने शनिवार को हिमाचल प्रदेश के कसौली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही.
उन्होंने कहा, "यहां मौजूद किसी भी सैन्य अधिकारी का अपमान नहीं करना चाहता, लेकिन (ब्लू स्टार) गोल्डन टेम्पल को वापस लेने का ग़लत तरीका था."
पूर्व गृह मंत्री ने कहा, "कुछ साल बाद हमने सेना को शामिल किए बिना गोल्डन टेम्पल को वापस लेने का सही तरीक़ा दिखाया."
पी. चिदंबरम ने कहा कि इस "ग़लती" के लिए इंदिरा गांधी को अकेले ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.
उन्होंने कहा, "ब्लू स्टार ग़लत तरीक़ा था और मैं मानता हूं कि इंदिरा गांधी ने उस ग़लती की क़ीमत अपनी जान देकर चुकाई. लेकिन वह ग़लती सेना, पुलिस, ख़ुफ़िया एजेंसियों और सिविल सेवा, सबके सामूहिक फै़सले का नतीजा थी."
जून 1984 के पहले सप्ताह में दरबार साहिब परिसर में हुई भारतीय सेना की कार्रवाई को 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' के नाम से जाना जाता है.
भारत सरकार के दावे के अनुसार यह सैन्य अभियान जरनैल सिंह भिंडरावाले और उसके हथियारबंद साथियों को दरबार साहिब परिसर से बाहर निकालने के लिए चलाया गया था.
नमस्कार!
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अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने दावा किया है कि पाकिस्तान के हमले के जवाब में की गई कार्रवाई में 58 पाकिस्तानी सैन्यकर्मी मारे गए हैं और 30 घायल हुए हैं.
काबुल में रविवार को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि 'जवाबी कार्रवाई' में 20 पाकिस्तानी चौकियों पर क़ब्ज़ा कर लिया गया था, लेकिन लड़ाई ख़त्म होने के बाद उन्हें वापस कर दिया गया.
ज़बीहुल्लाह मुजाहिद के दावे पर अभी तक पाकिस्तान की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. हालांकि, गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने शनिवार रात दावा किया था कि अफ़ग़ानिस्तान की कार्रवाई का प्रभावी जवाब दिया गया है.
प्रवक्ता ने यह भी पुष्टि की कि झड़पों के दौरान नौ तालिबान कर्मी मारे गए और 20 से अधिक घायल हुए हैं.
ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने आरोप लगाया कि आईएसआईएस का प्रमुख पाकिस्तान में है और यह संगठन अब भी ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह और बलूचिस्तान प्रांतों में सक्रिय है.
उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान से आईएसआईएस का सफ़ाया हो चुका है. उन्होंने आरोप लगाया कि आईएसआईएस के प्रशिक्षण केंद्र पाकिस्तान में स्थापित हैं. इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर ध्यान देना चाहिए.
उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री की भारत यात्रा किसी देश के ख़िलाफ़ नहीं है और किसी को इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए.

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पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में एक निजी कॉलेज की छात्रा के साथ गैंगरेप के आरोप में पुलिस ने रविवार को उसके सहपाठी समेत तीन युवकों को गिरफ़्तार किया है.
दुर्गापुर न्यूटाउन थाने के एक पुलिस अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बीबीसी हिन्दी से इसकी पुष्टि की है.
पुलिस ने बताया कि गिरफ़्तार युवकों से पूछताछ की जा रही है. इसके साथ ही कॉलेज परिसर के आस-पास ड्रोन से तलाशी ली जा रही है.
ओडिशा की रहने वाली छात्रा शुक्रवार रात को अपने एक सहपाठी के साथ कॉलेज परिसर से बाहर निकली थी. आरोप है कि वहां कुछ युवकों ने उसके साथ छेड़छाड़ की और उसे जबरन नजदीक के जंगल में ले जाकर उसके साथ गैंगरेप किया.
पुलिस ने उसी रात उस सहपाठी को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी. शनिवार देर रात दो और युवकों को हिरासत में लिया गया और पूछताछ के बाद सुबह तीनों को गिरफ़्तार कर लिया गया. पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस मामले में दो और लोगों की तलाश की जा रही है.
इस बीच, इस घटना के सामने आने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने अपने एक बयान में कहा है कि शुक्रवार को वह छात्रा क़रीब डेढ़ घंटे तक परिसर से बाहर रही थी.
बयान के मुताबिक वह पहले अपने एक सहपाठी के साथ बाहर निकली थी. लेकिन फिर अकेले वापस लौट आई थी. लेकिन कुछ देर बाद वह दोबारा बाहर निकल गई. उसके क़रीब 40 मिनट बाद वह अपने सहपाठी के साथ ही परिसर में लौट आई थी. अपने हॉस्टल पहुंच कर उसने अपने मित्रों को घटना की जानकारी दी. उसके बाद उसको अस्पताल में भर्ती कराया गया.
राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य अर्चना मजूमदार ने पीड़ित छात्रा से मुलाक़ात की है.
आयोग ने पुलिस महानिदेशक को पत्र भेज कर इस घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है.

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उत्तर प्रदेश के बागपत ज़िले में शनिवार को एक मौलवी की पत्नी और दो नाबालिग बेटियां घर पर मृत पाई गईं. मामले में पुलिस ने जांच के बाद दो नाबालिगों को हिरासत में लिया है.
बागपत के एसपी सूरज कुमार राय ने घटना के बारे में पूरी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि हत्या के पीछे दो नाबालिग शामिल हैं.
उन्होंने कहा, "एक मस्जिद में एक कमरे में मुफ़्ती साहब अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते थे. मुफ़्ती किसी काम से बाहर गए हुए थे. उसी दौरान उनकी पत्नी और दोनों बच्चों का शव मिला."
एसपी ने बताया, "जांच टीम ने वीडियो फुटेज देखकर दो संदिग्धों की पहचान की. पूछताछ में पता चला कि दोनों बच्चे मौलवी से तालीम लेते थे. मौलवी अक्सर उनकी पिटाई करते थे, जिससे नाराज़ होकर दोनों ने इस घटना की योजना बनाई."
उनका कहना है कि दोनों नाबालिगों की निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल किया गया हथियार बरामद कर लिया गया है.
उन्होंने बताया, "इनमें से एक बच्चे को 10 अक्तूबर को मुफ़्ती ने पीटा था. इसके बाद उसने अपने साथी के साथ मिलकर योजना बनाई. जब मुफ़्ती किसी काम से बाहर गए हुए थे और परिवार कमरे में सो रहा था, तब उन्होंने यह वारदात की. पुलिस ने दोनों नाबालिगों को हिरासत में ले लिया है."

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अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार के विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी के भारत दौरे पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने कहा है कि तालिबान भारत के लिए एक रणनीतिक क्षेत्र है.
ओवैसी का यह बयान ऐसे समय आया है जब तालिबान के विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी भारत दौरे पर हैं. यह 2021 में तालिबान के दोबारा सत्ता में आने के बाद किसी अफ़ग़ान मंत्री का पहला भारत दौरा है.
इस पर ओवैसी ने कहा, "हम मांग करते हैं कि पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित किए जाएं. तालिबान भारत के लिए एक रणनीतिक क्षेत्र है."
उन्होंने कहा, "अगर चाबहार बंदरगाह बनेगा, तो हम अफ़ग़ानिस्तान में बहुत कुछ विकास कार्य करेंगे."
एआईएमआईएम प्रमुख का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में भारत की उपस्थिति ज़रूरी है.
भारत ने अब तक तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है.

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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भारत में मुस्लिम आबादी को लेकर की गई टिप्पणी की आलोचना की है.
उन्होंने इसे "हिंदू-मुस्लिम में आग भड़काने" और आगामी चुनावों से पहले मतदाताओं को ध्रुवीकृत करने का प्रयास बताया.
खेड़ा ने यह भी सवाल उठाया कि गृह मंत्री ने अपने 11 वर्षों के कार्यकाल में इस मुद्दे को क्यों नहीं उठाया.
शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखे एक पोस्ट में पवन खेड़ा ने कहा, "उन्होंने एक्स पर मुस्लिम आबादी में बढ़ोतरी की ओर इशारा किया, ताकि भारत में व्यापक 'मुस्लिम घुसपैठ' का संकेत दिया जा सके."
उन्होंने कहा, "इस स्थिति में एक तार्किक सवाल यह है कि अगर मुस्लिम आबादी, जैसा कि उन्होंने दावा किया, 'घुसपैठ' के कारण बढ़ी है, तो गृह मंत्री पिछले 11 सालों में वास्तव में क्या कर रहे थे?"
अमित शाह ने क्या कहा था?
10 अक्तूबर को एक कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि 1951 से 2011 तक हुई जनगणनाओं में धर्मों में आबादी वृद्धि में अंतर मुख्य रूप से घुसपैठ के कारण है.
उन्होंने कहा कि मुस्लिम आबादी 24.6 प्रतिशत की दर से बढ़ी है, जबकि हिंदू आबादी 4.5 प्रतिशत घट गई है.

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दिल्ली में अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार के विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में महिला पत्रकारों को शामिल नहीं किए जाने के मुद्दे पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सवाल उठाए हैं.
उन्होंने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, "यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. सब जानते हैं कि तालिबानी सोच किस तरह की है. महिला पत्रकारों के साथ जो अफ़ग़ान एंबेसी में हुआ, भले ही वह भारतीय विदेश मंत्रालय के नियंत्रण में नहीं आता हो, लेकिन मैं उम्मीद करती हूं कि विदेश मंत्रालय इस पर संज्ञान ले और तालिबान को पत्र लिखे."
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, "हमारे देश में प्रेस की स्वतंत्रता और समानता का अधिकार है. महिलाओं के साथ समान तरीके़ से व्यवहार किया जाता है. इस तरह उन्हें बाहर रखना और शामिल न करना बहुत ही शर्मनाक है."
तालिबान के विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी की नई दिल्ली में शुक्रवार को हुई प्रेस कॉन्फ़्रेंस को लेकर कई महिला पत्रकारों ने कहा है कि उन्हें वहाँ नहीं बुलाया गया.
नई दिल्ली में अफ़ग़ान दूतावास में हुई प्रेस कॉन्फ़्रेंस के लिए क़रीब 16 पुरुष रिपोर्टरों को चुना गया था. पत्रकारों ने यह पाया कि महिलाओं और विदेशी मीडिया को वहां से वापस रखा गया.
महिला पत्रकारों ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है.
मुत्तक़ी गुरुवार को भारत पहुंचे थे और शुक्रवार को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक हुई थी.

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अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार के विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी के भारत दौरे पर दिए गए बयान पर पाकिस्तान ने 'कड़ी आपत्ति' जताई है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा बताने पर आपत्ति जताई. मंत्रालय ने इसे "संबंधित यूएन सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का स्पष्ट उल्लंघन" करार दिया.
भारत-अफ़ग़ानिस्तान संयुक्त बयान के मुताबिक़, अफ़ग़ानिस्तान ने अप्रैल में जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले की कड़ी निंदा की. साथ ही भारत की जनता और सरकार के प्रति अपनी सहानुभूति और एकजुटता व्यक्त की.
इससे पहले, अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में गुरुवार को ज़ोरदार धमाके हुए थे. इसके लिए अफ़ग़ानिस्तान ने पाकिस्तानी सेना को ज़िम्मेदार ठहराया और उसे 'परिणाम भुगतने' की चेतावनी दी थी.
वहीं, पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि उसने अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन से पाकिस्तान के ख़िलाफ़ काम करने वाले 'आतंकवादी तत्वों' की जानकारी बार-बार साझा की है.
मुत्तक़ी ने भारत में एक चुनिंदा पत्रकार समूह के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "पाकिस्तान को यह ग़लती दोहरानी नहीं चाहिए. हमारे मसले बातचीत से हल हो सकते हैं, युद्ध से नहीं."
यह 2021 में तालिबान के दोबारा सत्ता में आने के बाद किसी अफ़ग़ान मंत्री का पहला भारत दौरा है.
भारत ने अब तक तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है.

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अमेरिका की एक संघीय अपील कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन इलिनोइस में नेशनल गार्ड तैनात नहीं कर सकता है.
शिकागो स्थित अमेरिकी अपील कोर्ट की सातवीं सर्किट बेंच ने यह भी कहा है कि फिलहाल यह बल संघीय नियंत्रण में बना रह सकता है.
यह फै़सला निचली अदालत के उस आदेश को आंशिक रूप से बरकरार रखता है, जिसमें शिकागो क्षेत्र में नेशनल गार्ड्स की तैनाती को रोक दिया गया था.
अदालत ने कहा था कि ऐसी तैनाती "नागरिक अशांति को बढ़ावा दे सकती है" और "आग में घी डालने जैसा काम करेगी".
ट्रंप इससे पहले लॉस एंजेलिस, वॉशिंगटन डीसी और ओरेगन के पोर्टलैंड जैसे डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाले शहरों में नेशनल गार्ड्स भेज चुके हैं.