बर्मा: लोकतंत्र की लड़ाई के 25 साल

बर्मा में लोग आठ अगस्त 1988 को लोकतंत्र के लिए सड़कों पर उतर आए थे. 25 साल बाद राजधानी रंगून में इस घटना की सालगिरह मनाई जा रही है.

बर्मा में लोकतंत्र के लिए संघर्ष की शुरुआत की 25 वीं वर्षगांठ
इमेज कैप्शन, आठ अगस्त 2013 को बर्मा में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन की 25वीं सालगिरह मनाई जा रही है. 25 साल पहले 1988 में आज ही के दिन देश में सैकड़ों लोग लोकतंत्र की आवाज़ बुलंद करने के लिए सड़कों पर उतर आए थे.
बर्मा में लोकतंत्र के लिए संघर्ष की शुरुआत की 25 वीं वर्षगांठ
इमेज कैप्शन, ऐसा पहली बार हो रहा है कि बर्मा की राजधानी रंगून में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन की वर्षगांठ सार्वजनिक तौर पर मनाई जा रही है.
बर्मा में लोकतंत्र के लिए संघर्ष की शुरुआत की 25 वीं वर्षगांठ
इमेज कैप्शन, आंदोलन की शुरुआत के छह हफ्ते बाद ही कम से कम 3,000 प्रदर्शनकारी मारे गए, विरोध कर रहे हजारों लोग जेल भेज दिए गए और यह साफ हो गया कि सेना ने पूर्ण रूप से नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है.
बर्मा में लोकतंत्र के लिए संघर्ष की शुरुआत की 25 वीं वर्षगांठ
इमेज कैप्शन, 1988 के आंदोलन के दौरान आंग सांग सू ची बर्मा में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन की नेता के तौर पर उभरीं. वे फिलहाल बर्मा में विपक्ष की नेता हैं और यह उम्मीद की जा रहा है कि वे इन समारोहों में अपना भाषण देंगी.
बर्मा में लोकतंत्र के लिए संघर्ष की शुरुआत की 25 वीं वर्षगांठ
इमेज कैप्शन, आंदोलन के दिनों की स्मृति में देश में फोटो प्रदर्शनियाँ आयोजित की जा रही हैं. बीते दिनों के संघर्ष और दमन को याद करने के लिए नकली जेल भी बनाए गए हैं.
बर्मा में लोकतंत्र के लिए संघर्ष की शुरुआत की 25 वीं वर्षगांठ
इमेज कैप्शन, मौजूदा सुधारवादी सरकार ने लोकतंत्र समर्थक आंदोलन की वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किए जाने वाले समारोहों को अपनी मौन सहमति दी है.
बर्मा में लोकतंत्र के लिए संघर्ष की शुरुआत की 25 वीं वर्षगांठ
इमेज कैप्शन, बीबीसी के बर्मा संवाददाता जोनाथन हेड के मुताबिक सेना के कुछ पूर्व अफसरों के हिंसा में फँसे होने के बावजूद यह इजाजत दी गई है.
बर्मा में लोकतंत्र के लिए संघर्ष की शुरुआत की 25 वीं वर्षगांठ
इमेज कैप्शन, नवंबर 2010 में चुनावों के बाद एक नाममात्र की नागरिक सरकार ने सत्ता सँभाल ली और इसके साथ ही सैन्य शासन की समाप्ति हो गई. राष्ट्रपति थीन सेन की अगुवाई वाली नई सरकार ने राजनीतिक और आर्थिक सुधारों की दिशा में कई कदम उठाए हैं. इसमें राजनीतिक बंदियों की रिहाई और मीडिया सेंसरशिप में राहत जैसे फैसले शामिल हैं.