ईरान: संदिग्ध परमाणु स्थलों पर मिला यूरेनियम लेकिन नहीं मिले जवाब

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संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था के प्रमुख ने इस बात पर चिंता जताई है कि ईरान ने उन तीन जगहों पर यूरेनियम मिलने के बाद पूछे गए सवाल के अब तक जवाब नहीं दिए हैं जिनके बारे में उसने पहले से नियामक संस्था को कोई जानकारी नहीं दी थी.
आईएईए प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के सदस्य देशों को बताया कि उन तीन जगहों के निरीक्षण के दौरान परमाणु पदार्थ या हानिकारक उपकरण पाए गए थे.
उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान इस बारे में बिना देरी किए, जितनी जल्दी हो सके जवाब दे. उन्होंने कहा, "इस मामले में अगर ईरान आगे नहीं बढ़ता तो यह 'उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण प्रकृति का है,' इस पर आश्वासन को पाने में एजेंसी के सामर्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा."
उधर ईरान ने ज़ोर देकर कहा कि वो सहयोग कर रहा है.
माना जा रहा है कि इन तीन जगहों पर ईरान के परमाणु समझौते में हस्ताक्षर से बहुत पहले 2000 के दशक के शुरुआती वर्षों में परमाणु संबंधी गतिविधियाँ हुई थीं.
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ईरान परमाणु संकट से जुड़ी मूल बातें
- विश्व शक्तियों को ईरान पर भरोसा नहीं-कुछ देशों का मानना है कि ईरान परमाणु शक्ति बनना चाहता है क्योंकि वो परमाणु बम बनाना चाहता है. लेकिन ईरान इससे इनकार करता रहा है.
- लिहाजा, ईरान और छह अन्य बड़े देशों के बीच 2015 में एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ कि ईरान अपने कुछ परमाणु कार्यक्रमों को बंद करेगा तब उस पर वो कठोर जुर्माना या प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा जिससे उसकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचे.
- तो अब समस्या क्या है? पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस समझौते से हटने और प्रतिबंधों को दोबारा लगाने के बाद ईरान ने एक बार फिर प्रतिबंधित परमाणु कार्यक्रम शुरू कर दिया. अब भले ही राष्ट्रपति बनने के बाद जो बाइडन फिर से इस समझौते में शामिल होना चाहते हैं लेकिन दोनों पक्ष ये कह रहे हैं कि इस ओर दूसरे पक्ष को पहला कदम बढ़ाना चाहिए.
ईरान का कहना है कि उसने कभी भी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं की लेकिन आईएईए के इकट्ठा किए सबूतों के अनुसार साल 2003 से पहले तक ईरान ने इन ठिकानों पर "परमाणु हथियार बनाने से जुड़े कई काम किए हैं."
2019 में आईएईए ने ईरान से अनुरोध किया कि वो अपनी अघोषित परमाणु गतिविधियों और पदार्थों से जुड़े कुछ सवालों के जवाब दे.

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यह पहल तब की गई जब इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा था कि इसराइल को मिले हज़ारों दस्तावेज़ों से इस बात का पता चलता है कि ईरान ने पूरी दुनिया से झूठ कहा है कि उसने कभी परमाणु हथियार बनाने की कोशिशें नहीं कीं और 2015 के बाद भी परमाणु हथियारों के कार्यक्रम पर वो चोरी-छिपे काम कर रहा था.
नेतन्याहू ने तब बताया था कि उनके पास तेहरान में एक गुप्त स्टोरेज से इसराइली ख़ुफ़िया विभाग को मिली डेटा की 'प्रतियां' हैं. उन्होंने कहा कि उनके पास 55 हज़ार पन्नों के सबूत हैं, साथ ही 183 सीडी हैं जिनमें 55 हज़ार फाइलें हैं, ये तमाम फाइलें परमाणु हथियार कार्यक्रम 'प्रोजेक्ट अमाद' से संबंधित हैं.
नेतन्याहू ने तेहरान में जिस गुप्त परमाणु गोदाम के मिलने की बात कही थी, समझा जा रहा है कि आईएईए के निरीक्षकों को वहीं प्राकृतिक यूरेनियम के मानव निर्मित कण और एनरिच यूरेनियम (समवर्धित यूरेनियम) के समस्थानिक रूप से परिवर्तित कण मिले हैं.
समवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु रिएक्टर के इंधन के साथ साथ परमाणु हथियार बनाने में भी किया जाता है.
प्रयवेक्षकों ने दो अन्य अज्ञात जगहों पर भी यूरेनियम कणों का पता लगाया है- एक जहाँ धातु डिस्क के रूप में प्राकृतिक यूरेनियम की संभावित उपस्थिति थी और दूसरा जहाँ परमाणु पदार्थों का संभावित उपयोग या भंडारण या परमाणु से जुड़ी गतिविधियाँ चलाई जाती थीं.
उन्होंने एक चौथे जगह के बारे में भी सवाल पूछे जहाँ परमाणु सामानों का इस्तेमाल और भंडारण किया जाता था. इस जगह पर आउटडोर पारंपरिक विस्टोफ के ज़रिए उनका परीक्षण किया जा सकता था.

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ग्रॉसी ने आईएईए के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर को सोमवार को बताया कि, "कई महीनों के बाद भी ईरान ने इन तीन जगहों पर परमाणु कणों की मौजूदगी पर आवश्यक स्पष्टीकरण नहीं दिया."
उन्होंने कहा, "मुझे इस बात कि चिंता है कि ईरान में तीन अघोषित जगहों पर परमाणु सामग्रियों की मौजूदगी है लेकिन एजेंसी को इन जगहों के बारे में पता नहीं है. न ही ईरान ने इस पर पूछे गए सवालों के जवाब दिए हैं या धातु डिस्क के रूप में प्राकृतिक यूरेनियम की मौजूदगी पर ही कोई स्पष्टीकरण दिया है."
बीते हफ़्ते ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख ने ग्रॉसी को लिखित आश्वासन दिया कि वो "एजेंसी के साथ सहयोग करने के अपने अधिकतम प्रयास कर रहे हैं."
ग्रॉसी ने आईएईए बोर्ड से यह भी कहा कि एजेंसी के साथ ईरान के कम सहयोग के फ़ैसले से जांच और निगरानी गतिविधियों पर असर पड़ा है. उसने आखिरी बार इस समझौते का उल्लंघन तब किया था जब 2018 में अमेरिका इससे बाहर हुआ था.
अब ईरान अपने परमाणु स्थलों के सर्विलांस कैमरे के फुटेज को 24 जून तक संग्रहित करने के लिए राज़ी हो गया है, जबकि जो बाइडन प्रशासन के साथ प्रतिबंधों को हटाने के लिए बातचीत जारी है. अगर इसका कोई नतीजा नहीं निकला तो इन फुटेज को डिलीट कर दिया जाएगा.
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