ट्रंप की विवादित प्रवासी नीति बदलने की वजह

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इमेज कैप्शन, इस वायरल तस्वीर ने ट्रंप की प्रवासी नीतियों पर सवाल उठाए थे.
    • Author, इरम अब्बासी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बुधवार को अमरीका और मेक्सिको की बॉर्डर नीति से जुड़े 'अवैध प्रवासियों को उनके बच्चों से अलग करने के फ़ैसले' को पलट दिया.

उन्होंने एक आदेश जारी कर ये वादा किया कि अब प्रवासी परिवार एक साथ रह सकेंगे.

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ट्रंप का ये आदेश अप्रवासन नीति पर उनके प्रशासन की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के ख़िलाफ़ हुए अभूतपूर्व सार्वजनिक विरोध के बाद आया.

ट्रंप प्रशासन के प्रवासी क़ानून पर विवाद उस वक़्त बढ़ गया था जब ज़ंजीर लगे दरवाज़ों के पीछे प्रवासियों के बच्चों की कुछ तस्वीरें मीडिया में आई थीं. इन तस्वीरों को देखकर बच्चों के लिए बने इन केंद्रों की तुलना नाज़ी यातना शिविरों से की गई थी.

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योजना की रूपरेखा

हालांकि डोनल्ड ट्रंप के इस आदेश में उन 2,300 बच्चों के बारे में कुछ नहीं कहा गया है जिन्हें टेक्सास के अलावा देश के अन्य प्रवासी शिविरों में रखा गया है.

ये आदेश अवैध रूप से सीमा पार करने वाले परिवारों को मुक़दमे के दौरान एक साथ हिरासत में रखने की ट्रंप प्रशासन की योजना की रूपरेखा तय करता है.

यह योजना संभवतः साल 1997 में आई कोर्ट की उस व्यवस्था का उल्लंघन है जो बच्चों को हिरासत में रखे जाने की सीमा तय करती है.

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राष्ट्रपति ट्रंप ने ओवल ऑफ़िस में आदेश पर हस्ताक्षर के दौरान कहा, "हम सीमा पर सख़्ती बनाए रखेंगे, लेकिन हम परिवारों को एक साथ रखने जा रहे हैं."

उन्होंने कहा, "मुझे परिवारों को अलग रखने का नज़रिया पसंद नहीं आया."

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ ट्रंप ने बच्चों को उनके मां-बाप से अलग रखने की अपनी इस नीति को पलटने का फ़ैसला, अपनी पत्नी और बेटी के कहने पर लिया.

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2,300 से अधिक बच्चों की स्थिति

क़ानूनी विशेषज्ञों ने जो समस्याएं गिनाई हैं उनमें सबसे प्रमुख सवाल ये है कि पहले से ही उनके परिवारों से अलग किए गए उन 2,300 बच्चों की तक़दीर पर क्या फ़ैसला होगा?

वॉशिंगटन स्थित लेखक, वक़ील और मानवाधिकार कार्यकर्ता क़ासिम राशिद कहते हैं, "हालांकि यह बच्चों को उनके माता-पिता से अलग करने से रोकता है. लेकिन अभी नहीं पता कि क्या ये प्रावधान स्थायी है. हमें बच्चों और उनके माता-पिता को अलग करने की नीति पर स्पष्ट समाधान की ज़रूरत है और यह कार्यकारी आदेश ऐसी कोई पेशकश नहीं करता."

राशिद ने कहा, "दूसरी बात, जिन 2,300 बच्चों को उनके माँ-बाप से अलग कर अमानवीय सुविधाओं वाले शिविरों में रखा गया है, इस कार्यकारी आदेश में उनपर कुछ नहीं कहा गया."

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एक अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ता वजाहत अली के मुताबिक़, "प्रशासन वास्तव में इन बच्चों को बंधक बना रहा है ताकि इसे सौदेबाज़ी के लिए उपयोग किया जा सके जिससे कांग्रेस सीमा पर दीवार खड़ी करने के लिए फ़ंड पारित करे और घिनौनी अप्रवासन नीति बनाने के लिए मजबूर हो जाए."

अली ने विस्तार से समझाया कि ये कार्यकारी आदेश कितना असंवेदनशील था.

उन्होंने कहा, "अगर राष्ट्रपति चाहते तो सिर्फ़ एक फ़ोन कॉल से इस नीति को समाप्त कर सकते थे. लेकिन उनके इर्द-गिर्द जमे हुए उनके कट्टरपंथी साथी ऐसा नहीं चाहेंगे. इसलिए उन्होंने सोचा कि वे उन बच्चों को इस्तेमाल करेंगे जिनका किसी दस्तावेज़ में कोई ज़िक्र नहीं है. ताकि वे उनका उपयोग करके बॉर्डर वॉल के लिए फ़ंड हासिल करेंगे. ये ऐसे संकेत हैं जो उन्हें एक नायक तो नहीं बनाते हैं."

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लेकिन क्या क़ानूनन ऐसा किया जा सकता है?

कार्यकारी आदेश में ये लिखा है कि अवैध ढंग से सीमा पार करने वालों को अनिश्चितकालीन हिरासत में रखा जा सकता है.

ये आदेश साल 1997 के उस समझौते का उल्लंघन करता है जिसमें तय किया गया था कि नाबालिगों को केवल 20 दिनों तक ही हिरासत में रखा जा सकता है.

इस लिहाज़ से ये आदेश अमरीका के संघीय और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करता है.

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मानवाधिकार कार्यकर्ता क़ासिम राशिद कहते हैं, "अमरीकी कानून के शीर्षक 8 यूएससी 1158 के अनुसार, शरण की माँग करना कोई अपराध नहीं है. शरण की माँग कर रहे लोगों को गिरफ़्तार कर लेना अपने ही नियम-क़ानूनों और सिद्धांतों का उल्लंघन करना है. इसलिए, भले ही कार्यकारी आदेश में अप्रवासन से जुड़े मामलों में सुधार होने का दावा किया गया है, लेकिन इससे हालात बिगड़ेंगे ही. सरकार इन बच्चों को शिविरों में रखने के लिए जो व्यापक संसाधन ख़र्च कर रही है, उसकी जगह शरण माँग रहे लोगों को उन्हें क़ानूनी सलाह देनी चाहिए और देखना चाहिए कि संविधान के अनुसार क्या क़ानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है."

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अनिश्चित काल तक हिरासत

क़ासिम राशिद मानते हैं कि ट्रंप के नए कार्यकारी आदेश ने मूल रूप से अमरीका में ऐसे शिविर तैयार कर दिये हैं जहाँ सिर्फ़ वो परिवार बसे हैं जिनकी अमरीकी दस्तावेज़ों में कोई जगह नहीं है. वो कानून के हिसाब से बच्चों को ज़्यादा वक़्त तक नहीं रख सकते थे तो उन्होंने बच्चों के बदले परिवारों को हिरासत में ले लिया ताकि उन्हें अनिश्चित काल तक हिरासत में रखा जा सके.

अमरीका के कई महापौर ट्रंप के इस कार्यकारी आदेश और परिवारों को तोड़ने की नीति का विरोध कर रहे हैं. इस विरोध को कई स्थानीय चुनाव अभियानों में प्रमुख मुद्दा भी बनाया गया है.

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