बब्बर शेर की तरह टूट पड़ते थे मधु लिमये
उन्होंने दुनिया को बताया कि संसद में बहस कैसे की जाती है. लेकिन उन्होंने सांसद होने की पेंशन कभी नहीं ली और न ही पूर्व सांसद होने की सुविधाएं.
वो ताउम्र विद्रोही रहे और वय्वस्ता से कभी समझौता नहीं किया. मधु लिमये की 95 वीं जयंती पर उन्हें याद कर रहे हैं रेहान फ़ज़ल विवेचना में