तस्वीरों में इरोम का अब तक का सफ़र

मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला 16 सालों बाद अपना भूख हड़ताल तोड़ेंगी.

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इमेज स्रोत, Ian Thomas Jansen Lonnquist

इमेज कैप्शन, मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला चानू आफ़्सपा के खिलाफ़ 16 सालों का भूख हड़ताल तोड़ेंगी. पिछले महीने उन्होंने कोर्ट को बताया कि वो अपना विरोध मंगलवार को ख़त्म करेंगी.
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इमेज कैप्शन, अब वो एक स्वतंत्र प्रत्याशी के तौर पर आगामी मणिपुर विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार शुरू करेंगी. इरोम, आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर्स एक्ट (आफ़्सपा) का विरोध करती रही हैं.
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इमेज कैप्शन, आफ़्सपा के तहत सैनिक बिना वॉरेंट किसी को भी गिरफ्तार कर सकती है और कुछ परिस्थितियों में तो मारने के लिए गोली तक चला सकती है. आफ़्सपा, भारत के कई राज्यों में लागू है, जिसमें मणिपुर और भारत-प्रशासित कश्मीर शामिल हैं.
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इमेज कैप्शन, पिछले कुछ सालों से फोटोग्राफ़र ईयान थॉमस यैनसन लॉनक्विस्ट ने इरोम शर्मिला के सफ़र को करीब से देखा. एक दशक से ज्यादा वक़्त से इरोम शर्मिला को ज़बरदस्ती नाक से एक ट्यूब के ज़रिए खाना खिलाया जा रहा है.
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इमेज कैप्शन, 16 साल पहले उन्होंने अपना भूख हड़ताल शुरू किया जब मणिपुर में 10 लोगों को भारतीय सेना ने मार डाला. इरोम शर्मिला ने पिछले 16 सालों में ज्यादातर समय न्यायिक हिरासत में राजधानी इंफाल के एक अस्पताल में बिताया.
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इमेज कैप्शन, अगस्त 2014 को कोर्ट ने इरोम शर्मिला पर लगे आत्महत्या के प्रयास के आरोप को ख़ारिज़ करते हुए उन्हें रिहा कर दिया. लेकिन विरोध नहीं छोड़ने के कारण उन्हें दो दिनों बाद दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया.
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इमेज कैप्शन, अपने विरोध की पुष्टि करने के लिए इरोम शर्मिला हर दो हफ्ते में मणिपुर हाई कोर्ट में पेश होती रही हैं.
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इमेज कैप्शन, उनके विरोध को दुनियाभर से मान्यता मिली और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने उन्हें 'अंतरात्मा की कैदी' की संज्ञा दी.
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इमेज कैप्शन, मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम को हाल के सालों में स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से अच्छी-खासी तवज्जो मिली.
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इमेज कैप्शन, इरोम शर्मिला को राज्य में महिलाओं और नागरिक अधिकार गुटों का समर्थन हासिल है. मणिपुर की जिस जगह पर 10 लोगों को मारा था वहां एक मेमोरियल बनाया गया है.
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इमेज कैप्शन, राज्य की जनसंख्या करीब 25 लाख है और यहां भारी मात्रा में सैनिक, पैरामिलिट्री और राज्य पुलिस बागी गुटों के खिलाफ़ लड़ने के लिए तैनात हैं.