कोलकाता की दीवारें और राजनीतिक कलाकारी

चुनावी मौसम में राजनीतिक पार्टियां लोगों को रिझाने के लिए लंबे लंबे भाषणों की लाइन लगा देते हैं. लेकिन कोलकाता की ये दीवारें बिना कुछ कहें रंगों से ही सब कुछ कह जाती हैं.

चुनावी ग्रैफिटी
इमेज कैप्शन, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता अपनी कलात्मक दीवारों के लिए मशहूर है. दिल को गुदगुदाने वाली ये राजनीतिक ग्रैफिटी बहुत कम में बहुत ज़्यादा कह जाती है.
चुनावी ग्रैफिटी
इमेज कैप्शन, मज़ाक मज़ाक में यह ग्रैफिटी बहुत सारी बातें कह जाती हैं. प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के नेताओं का मखौल उड़ाती इस ग्रैफिटी के बीच एक बच्ची मस्ती में स्कूल जा रही है.
चुनावी ग्रैफिटी
इमेज कैप्शन, लोगों का मानना है कि अब के दौर में बनाई जानी वाली ग्रैफिटी के अंदाज़ में वो मज़ा और रंग नहीं, जो पहले की ग्रैफिटी में हुआ करता था. अब कलात्मकता के नाम पर सिर्फ़ पार्टियों के चुनाव चिन्ह या उम्मीदवारों का नाम छपा होता है. यहां तक की 2011 से पहले तीस साल तक पश्चिम बंगाल पर राज करने वाली कम्युनिस्ट पार्टी की ग्रैफिटी में भी अब वो बात नहीं रही.
चुनावी ग्रैफिटी
इमेज कैप्शन, दीवारों पर राजनीतिक ग्रैफिटी के कम होते प्रचलन का एक कारण चुनाव आयोग का ग्रैफिती, बैनर, पोस्टर और लकड़ी के बने सुंदर चुनावी चिन्हों पर रोक है. वैसे बंगाल में ज़्यादातर पार्टियां इसकी परवाह नहीं करती.
चुनावी ग्रैफिटी
इमेज कैप्शन, पहले चुनावी मौसमों की शुरूआत में ही राजनीतिक पार्टियां तोल मोल कर ग्रैफिटी के लिए दीवारों को हथियाने की कोशिश करती थीं. उसके बाद अपनी दीवारों पर वे, "सभी दीवारें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 1999-2002 की हैं " लिख देते. लेकिन अब इन दीवारों को अपनाने की होड़ बहुत कम हो गई है.
चुनावी ग्रैफिटी
इमेज कैप्शन, लोगों का मानना है कि ग्रैफिटी पर लगी आधिकारिक रोक को सोच समझ कर बहुत सख्ती से नहीं लागू किया गया.
चुनावी ग्रैफिटी
इमेज कैप्शन, घरों के मालिक चाहते हैं कि उनके घर की बाहरी दीवारें साफ सुथरी रहें. उनपर कुछ लिखा न जाएं. लेकिन राजनीतिक पार्टियां दीवारों को पोत ही देती हैं. लेकिन ऐसा केवल पश्चिम बंगाल में ही होता है.
चुनावी ग्रैफिटी
इमेज कैप्शन, राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पार्टी अपनी विपक्षी पार्टियों भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस के ख़िलाफ़ हमेशा मोर्चा खोले रहती हैं. लेकिन कांग्रेस पार्टी हाथ के चिन्ह की ग्रैफिटी के साथ लोगों को रिझाने की कोशिश में है.
चुनावी ग्रैफिटी
इमेज कैप्शन, एक स्थानीय पत्रकार को उम्मीद है कि दिलों को खुश करने वाले ये राजनीतिक व्यंग ग्रैफिटी फिर से कोलकाता की शान बनें. लेकिन, लोगों की मर्ज़ी के बगैर नहीं.