वो सुबह कब आएगी?

राजस्थान का बाड़मेर ज़िला आज भी पानी के लिए तरसता नज़र आता है. नेताओं के दावों के बावजूद यहां तक विकास नहीं पहुंचा है. ज़िला मुख्यालय से 150 किलोमीटर दूर क़तार के आख़िरी लोगों तक पहुंचा बीबीसी.

बाड़मेर, क़तार के आख़िरी
इमेज कैप्शन, राजस्थान के बाड़मेर ज़िले के अधिकतर क्षेत्रों में पानी की कमी है. ख़ासतौर पर खारे पानी की समस्या बहुत अधिक है. आजादी के 66 सालों के बाद भी आजतक किसी ने गंभीरता से इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया है.
बाड़मेर, क़तार के आख़िरी
इमेज कैप्शन, बाड़मेर जिला मुख्यालय से करीब 150 किलोमीटर दूर बसा है गाँव जुड़ियां. इलाक़े की महिलाओं को अपने घर से दो-दो मील की दूरी तक पानी लेने जाना पड़ता है. घड़ा भरकर वापस घर तक पहुंचना उनके लिए पहाड़ सी चुनौती होती है, जिससे वो रोज़ पार करती हैं.
बाड़मेर, क़तार के आख़िरी
इमेज कैप्शन, इन्हीं महिलाओं में एक मूली सिंह का कहना है, "हमारी गाय भी खारा पानी पीने को मज़बूर है. उसे चारा देना, दूध निकालने के बाद हम पानी भरने जाते हैं. बहुत देर से जाएं तो बहुत धूप हो जाती है, सूरज तपने लगता है और पैर के नीचे रेत."
बाड़मेर, क़तार के आख़िरी
इमेज कैप्शन, ये लोग पीने के पानी पर जितना पैसा खर्च करते हैं, उतना पैसा अपने बच्चों पर भी खर्च नहीं कर पाते हैं.
बाड़मेर, क़तार के आख़िरी
इमेज कैप्शन, इलाक़े में आम लोगों की ज़रूरतें पूरी करने वाली सुविधाएं नहीं पहुंची हैं. न सड़कें हैं और न बस. आने-जाने के लिए ऊंटगाड़ी का ही सहारा होता है.
बाड़मेर, क़तार के आख़िरी
इमेज कैप्शन, जल संकट से महिलाओं की मुश्किलें काफ़ी बढ़ जाती हैं. घर की जिम्मेदारियां निभाते हुए भी इन लोगों का ध्यान हर वक़्त पानी लाने पर ही टिका होता है.
बाड़मेर, क़तार के आख़िरी
इमेज कैप्शन, 26 साल की मूली सिंह इसी गांव में छह साल पहले बहू बनकर आईं. मायका चौहटन भी इसी ज़िले में है, पर वहां पानी की बेरियां, टांके हैं गाँव के नज़दीक. इसलिए मीठे पानी की भारी किल्लत नहीं.
बाड़मेर, क़तार के आख़िरी
इमेज कैप्शन, मूली सिंह ने ससुराल में आकर देखा कि यहाँ तो पीने का पानी ही नहीं मिलता. वे पूछती हैं, “मीठा पानी है ही नहीं तो लाएं कहां से?”
बाड़मेर, क़तार के आख़िरी
इमेज कैप्शन, मूली सिंह के लिए गले की प्यास का मतलब हैं पांवों से मीलों का सफ़र. वे बताती हैं, "हम लोग 1000-800 रुपए देकर मीठे पानी का टैंकर मंगाते हैं. कितने दिन चलेगा और इतने पैसे लाएं कहां से?"
बाड़मेर, क़तार के आख़िरी
इमेज कैप्शन, इन लोगों के घरों में अगर घी ढुल जाए तो उतनी तकलीफ़ नहीं होती जितना पानी की एक बूंद बर्बाद होने से. इसकी वजह बताते हुए महिलाएं कहती हैं, "घी तो हमारी गाय दे देती है पर पानी?"
बाड़मेर, क़तार के आख़िरी
इमेज कैप्शन, मूली सिंह बताती हैं, ''मेरी सास भी जब से शादी होकर आईं, कई मील दूर से पानी लेकर आ रही हैं. अब मैं भी वही करती हूं. मैं क्या, पूरे गांव की सभी लड़कियों, बहुओं, औरतों को पानी लेने जाना पड़ता है.
बाड़मेर, क़तार के आख़िरी
इमेज कैप्शन, दो मील दूर जाने पर भी जो पानी मिलता है वो ख़ारा होता है. ख़ारे पानी में साबुन लगता नहीं है, बर्तन और कपड़े अच्छे साफ़ होते नहीं हैं, बाल गिरते हैं सो अलग.
बाड़मेर, क़तार के आख़िरी
इमेज कैप्शन, बाड़मेर का भौगोलिक क्षेत्र बहुत बड़ा है. औसत से कम वर्षा होती है और आबादी बहुत छितरी हुई है. इसलिए अभी तक कई स्थानों पर पाइपलाइन से पानी नहीं पहुंचा है. नर्मदा नहर और राजस्थान नहर जैसी बड़ी महत्वाकांक्षी योजनाओं का भी लाभ एक चौथाई लोगों को भी नहीं मिला है.
बाड़मेर, क़तार के आख़िरी
इमेज कैप्शन, गाँव में कोई अच्छी सुविधाएं नहीं हैं पढ़ाई की. एक सरकारी स्कूल है आठवीं क्लास तक. पर एक दिन खुलता है तो सात दिन बंद. मास्टर तो पहुंचते ही नहीं.
बाड़मेर, क़तार के आख़िरी
इमेज कैप्शन, गाँव के लोग हर चुनाव में वोट डालते हैं जिससे उनके नेता उनके लिए कुछ सुविधाएँ जुटाएं. लोगों का कहना है कि सब वादे तो खूब करते हैं पर पूरे नहीं करते.
बाड़मेर, क़तार के आख़िरी
इमेज कैप्शन, मीठे पानी का और लड़कियों के लिए स्कूल खोलने से संबंधित वादा यहां चुनाव लड़ने वाला हर नेता करता है. महिलाएं कहती हैं कि चुनाव जीतने के बाद नेता अपने वादे से मुकर जाता है.
बाड़मेर, क़तार के आख़िरी
इमेज कैप्शन, इस बार चुनाव को लेकर भी मूली सिंह उत्साहित दिखीं. वे बताती हैं, "चुनाव में यह ज़रूर देखेंगे कि हमारा नेता हमारे लिए पानी लाएगा या नहीं लाएगा. पर क्या कह सकते हैं वो पूरा करेंगे या नहीं? हम उनके अन्दर झांककर तो देख नहीं सकते."
बाड़मेर, क़तार के आख़िरी
इमेज कैप्शन, मूली सिंह उम्मीद के साथ कहती हैं, "मेरी और मेरी सास की उम्र तो पानी भरने में ही निकलती जा रही है, सोचती हूं कि कम से कम मेरी बहुओं के साथ ऐसा न हो." (सभी तस्वीरें - आभा शर्मा, बीबीसी)