क्या कुंभ की ये दुनिया देखी है आपने

तस्वीरों में देखिए कुंभ के कई अनदेखे रंग.

कुंभ, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश, अखाड़े, नागा बाबा

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इमेज कैप्शन, प्रयागराज में इन दिनों दुनिया के सबसे बड़ा आयोजन कहे जाने वाले कुंभ मेले की धूम है. 15 जनवरी को शाही स्नान के साथ ही इसका प्रारंभ हो चुका है.
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इमेज कैप्शन, 49 दिनों तक चलने वाले इस मेले का समापन चार मार्च को होगा और इस बीच आठ मुख्य पर्वों पर शाही स्नान होगा. अगला शाही स्नान 21 जनवरी को होगा.
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इमेज कैप्शन, कुंभ में लोगों के ठहरने और आने-जाने के लिए बड़े स्तर पर इंतजाम किए गए हैं. मेले तक पहुंचने के लिए विशेष ट्रेनें, बसें और ई—रिक्शा चलाये गये हैं. साथ ही सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम भी किए गए हैं.
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इमेज कैप्शन, माना जा रहा है कि 49 दिनों तक चलने वाले इस बार के कुंभ मेले में क़रीब 12 करोड़ लोग आ सकते हैं. इनमें से 10 लाख के क़रीब विदेशी नागरिक भी होंगे.
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इमेज कैप्शन, उत्तर प्रदेश सरकार कुंभ 2019 को अब तक का सबसे भव्य कुंभ बता रही है और सरकार ने इसकी ख़ूब ब्रांडिंग भी की है.
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इमेज कैप्शन, मेले का क्षेत्रफल भी इस बार बढ़ाया गया है. कुंभ के ज़िलाधिकारी विजय किरण आनंद के मुताबिक़, इस बार मेला क्षेत्र क़रीब 45 वर्ग किमी के दायरे में फैला है, जबकि इससे पहले यह सिर्फ़ 20 वर्ग किमी इलाक़े में ही होता था.
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इमेज कैप्शन, माना जाता है कि प्रयागराज में जहां कुंभ मेले का आयोजन होता है, वहीं ब्रह्माण्ड का उद्गम हुआ था और वहीं पर पृथ्वी का केंद्र भी है. मान्यता ये भी है कि सृष्टि निर्माण से पहले ब्रह्माजी ने इसी स्थान पर अश्वमेघ यज्ञ किया था.
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इमेज कैप्शन, कुंभ के दौरान प्रयागराज में दुनिया का सबसे बड़ा तंबुओं का अस्थायी शहर बस जाता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़, कुंभ के आयोजन पर इस साल चार हज़ार करोड़ रुपये से ज़्यादा ख़र्च हो रहा है.
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इमेज कैप्शन, इस कुंभ में कुल 13 अखाड़े शामिल हुए हैं. इनके साथ ही कुंभ में साधु-संतों का मेला लगा हुआ है. शाही स्नान में विभिन्न अखाड़ों से संबंध रखने वाले साधु-संत सोने-चांदी की पालकियों, हाथी-घोड़े पर बैठकर संगम में स्नान के लिए पहुंचते हैं. शरीर पर धुनी रमाए ये साधु-संत अपनी-अपनी शक्ति और वैभव का प्रदर्शन करते हैं.
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इमेज कैप्शन, शुरु में केवल चार प्रमुख अखाड़े थे, लेकिन वैचारिक मतभेद की वजह से उनका बंटवारा होता गया और आज 13 प्रमुख अखाड़े हैं. कुंभ अखाड़ों का ही है .कुंभ ऐसा अवसर है जहाँ आध्यात्मिक और धार्मिक विचार-विमर्श होता है. अखाड़े अपनी-अपनी परंपराओं में शिष्यों को दीक्षित करते हैं और उन्हें उपाधि देते हैं.
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इमेज कैप्शन, श्रद्धालु जहाँ पुण्य कमाने की इच्छा लिए संगम पर पहुँचते हैं, वहीं साधुओं का दावा है कि वे कुंभ पहुंचते हैं गंगा को निर्मल करने के लिए. उनका कहना है कि गंगा धरती पर आने को तैयार नहीं थीं, जब उन्होंने धरती को पवित्र किया, तब गंगा आईं.
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इमेज कैप्शन, आवाह्‍न अखाड़ा, अटल अखाड़ा, महानिर्वाणी अखाड़ा, आनंद अखाड़ा, निर्मोही अखाड़ा, दशनामी, निरंजनी और जूना अखाड़ों का भी कई सदियों का इतिहास है. सभी अखाड़ों के अपने-अपने विधि-विधान और नियम हैं. इस बार कुंभ में किन्नर अखाड़ा भी है.
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इमेज कैप्शन, भारत में कुल चार स्थानों पर कुंभ का आयोजन होता है - प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक. इनमें से हर स्थान पर बारहवें साल कुंभ होता है. प्रयाग में दो कुंभ पर्वों के बीच छह साल के अंतराल पर अर्धकुंभ भी होता है.
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इमेज कैप्शन, परंपरा के अनुसार इस बार अर्धकुंभ ही पड़ रहा है लेकिन सरकार ने अर्धकुंभ का नाम बदलकर कुंभ और कुंभ का नाम महाकुंभ कर दिया है.
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इमेज कैप्शन, कुंभ को राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है. यहां कई राजनीतिक दलों के शिविर लगते हैं. जगह-जगह नेताओं के पोस्टर भी देख जा सकते हैं. यही नहीं, कुंभ के पहले शाही स्नान के दौरान तीन केंद्रीय मंत्रियों के संगम स्नान की ख़बरें भी चर्चा में रहीं.