बिहार में बढ़ते अपराध के बीच बोले सीएम नीतीश कुमार- 'सब ठीक है'

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- Author, मनीष शांडिल्य
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए
बिहार में अपराध की घटनाओं पर अंकुश लगता नहीं दिख रहा है. बीते शनिवार को 15 साल के छात्र सत्यम भारती का शव राजधानी पटना से लगे दानापुर इलाक़े में आरपीएस इंजीनियरिंग कॉलेज के पीछे झाड़ियों के बीच मिला.
सत्यम भारती के पिता डॉक्टर शशि भूषण प्रसाद गुप्ता ने गुरुवार की रात अपने बेटे की गुमशुदगी की लिखित सूचना रूपसपुर थाने में दी थी.
गुरूवार को हो चुकी थी हत्या
सत्यम के शव की बरामदगी के बाद पटना सिटी वेस्ट के एसपी रवीन्द्र कुमार ने प्रेस कान्फ्रेंस में बताया, "सत्यम के पिता की सूचना के आधार पर पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज कर जांच शुरू की. अगले दिन शुक्रवार को सुबह करीब आठ बजे फ़िरौती के लिए फ़ोन आया."
"इसके बाद दिन में ऐसे ही दो-तीन और फ़ोन-कॉल आए. इसके बाद शाम तक छापेमारी कर दो लोग नीरज और प्रमोद को गिरफ़्तार किया गया. इसके बाद इनसे पूछताछ से मिली जानकारी के आधार पर सत्यम का शव आज (शनिवार) बरामद किया गया है."

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एसपी ने कहा, "सत्यम की हत्या गुरूवार शाम सात बजे को ही कर दी गई थी. सत्यम को पहले गांजा पिलाया गया और फिर उसकी चाक़ू मारकर हत्या कर दी गई. इसके बाद हत्या को छुपाने के लिए फ़ोन करके फ़िरौती मांगी जा रही थी. हत्या के कारणों की जांच की जा रही है. अभी बहुत सारी बातें सामने आ रही हैं. लड़की की भी बात सामने आई है."
वहीं कल पुलिस की प्रेस कान्फ्रेंस में गिरफ़्तार युवकों में से एक ने कहा कि सत्यम हमारे गाँव आकर छेड़खानी करता था इसलिए हमने प्लान बनाकर उसे चाकुओं से मार डाला.
'सब ठीक है'
बिहार में कानून व्यवस्था की हालत पर विपक्ष लगातार तीख़े सवाल कर रहा है. कल सत्यम की हत्या की ख़बर सामने आने के बाद बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने 28 सितम्बर के ट्वीट को रीट्वीट कर निशाना साधा.
28 सितम्बर को उन्होंने लिखा था, "पटना में डॉक्टर के बेटे का अपहरण, 60 लाख फ़िरौती की माँग. जंगलराज अलापने वालों का इस आतंकराज में अब कलेजा नहीं फटेगा क्योंकि भाजपाई हाथों में चुराई गयी नीतीश सरकार की लगाम है. इनके सगे-संबंधी मंगलकारी अपराधी सरकारी संरक्षण में सकुशल राजी-खुशी है."

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वहीं कानून-व्यवस्था पर बिहार के मुख्यमंत्री का कहना है कि सब ठीक है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार को पटना में ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन के कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे थे.
कार्यक्रम से लौटते वक़्त जब एक पत्रकार ने उनसे सवाल किया कि बिहार की कानून-व्यवस्था पर क्या बोलेंगे? इसके जवाब में उन्होंने दो बार दोहराया कि सब ठीक है.
ये हैं हाल की बड़ी वारदातें
बीते दस दिनों में अपराध की कई बड़ी घटनाएं सामने आई हैं. 21 सितम्बर को राजधानी पटना के बीच शहर में स्थित कोतवाली थाने के ठीक बगल में तबरेज नाम के एक ज़मीन कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. स्थानीय मीडिया के मुताबिक तबरेज पूर्व सांसद शहाबुद्दीन का सहयोगी था.
बढ़ते आपराधिक घटनाओं के चलते ही 23 सितम्बर को बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने गया में कहा था, "मैं अपराधियों से भी हाथ जोड़ कर आग्रह करूंगा कि कम-से-कम पितृपक्ष में तो छोड़ दीजिए (अपराध करना छोड़ दीजिए). बाकी दिन तो मना करें न करें, आप कुछ न कुछ करते रहते हैं और पुलिस वाले लगे रहते हैं."
उनकी गुज़ारिश के चंद घंटे बाद ही अपराधियों ने मुज़फ़्फ़रपुर के पूर्व मेयर समीर कुमार और उनके ड्राइवर की हत्या कर दी. यह हत्या मुज़फ़्फ़रपुर शहर के नवाब रोड इलाक़े में एके-47 से की गई. वारदात के दौरान इस कदर गोलियों की बौछार की गई थी कि मृत लोगों की पहचान मुश्किल हो गई थी.

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फिर शुक्रवार को अपराध से जुड़ी तीन बड़ी खबरें सामने आईं. शुक्रवार को आरा ज़िले में क़रीब दो साल पहले हुए भाजपा उपाध्यक्ष विशेश्वर ओझा हत्याकांड के मुख्य गवाह कमल किशोर मिश्रा की हत्या कर दी गई. मुंगेर में एक कुएं से बारह एके-47 राइफ़ल और अत्याधुनिक हथियारों के कई पार्ट्स बरामद किए गए. साथ ही इसी दिन ये ख़बर भी सामने आई कि शेखपुरा से एक बैंक अधिकारी का अपहरण कर लिया गया है.
इस बीच सरकार ने बीते 48 घंटों में 15 आईपीएस अफ़सरों सहित बड़े पैमाने पर पुलिस अधिकारियों का तबादला किया है. इसे क़ानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने की कार्रवाई के बतौर देखा जा रहा है. जिन ज़िलों के एसपी बदले गए हैं उनमें मुज़फ़्फ़रपुर और बेगूसराय के एसपी भी शामिल हैं.

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मुज़फ़्फ़रपुर में 23 सितम्बर को पूर्व मेयर की हत्या हुई थी जबकि बेगूसराय में सितम्बर महीने की शुरुआत में भीड़ ने तीन लोगों की हत्या कर दी थी.
नागरिक पहल से जुड़ी सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता कंचन बाला का कहना है कि बिहार सरकार की लापरवाही के कारण सूबे में लगातार अपराध की बड़ी घटनाएँ सामने आ रही हैं.
वह कहती हैं, "चाहे दानापुर इलाके में छात्रा की हत्या हो या फुलवारीशरीफ़ में स्कूली छात्रा के साथ हुआ बलात्कार. ये सब अपराध इसलिए सामने आ रहे हैं क्योंकि सरकार जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को नज़रअंदाज़ कर रही है. सरकार का ध्यान समीकरणों के ज़रिए चुनाव जीतने पर है.
"अपराध चरम पर हैं और सरकार अपराधियों से ऐसे विनती कर रही है मानो अपराधी उनके ही चट्टे-बट्टे हों."
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