रकबर की मौत हिरासत में मौत की तरह: कटारिया

- Author, नारायण बारेठ
- पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए
राजस्थान में सरकार ने अलवर में कथित गौ रक्षको के हाथों रकबर के मारे जाने की घटना की मजिस्ट्रेट से जाँच का आदेश दिया है.
राज्य के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने अलवर में घटनास्थल का दौरा करने के बाद कहा कि 'कसूरवार' लोगों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. कटारिया ने कहा रकबर की मौत एक तरह से हिरासत में हुई मौत की तरह है.
उन्होंने कहा, "यह हिरासत में मौत जैसा है, क्योंकि वो हमारे पास ही थे. 300 मीटर की दूरी पर सरकारी स्वास्थ केंद्र है. लिहाजा यह न्यायिक जाँच का विषय बन गया है. इसीलिए हमने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट दी है. अब वे किसी को जाँच के लिए नियुक्त करेंगे."
हालांकि उन्होंने इससे इनकार किया कि रबकर के साथ थाने में मारपीट की गई. गुलाब चंद कटारिया ने पीड़ित परिवार से भी बात की और उन्हें कार्रवाई का भरोसा दिलाया.
उन्होंने कहा, "बात सही है कि पुलिस को रकबर को पहले अस्पताल ले जाना था. अगर समय पर अस्पताल ले जाते तो उन्हें राहत मिल सकती थी. इसीलिए एएसआई को निलंबित किया गया. अब पुलिस महानिरीक्षक जाँच कर रहे हैं. न्याय होगा."
इस बीच पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि रकबर को बहुत बेदर्दी से मारा पीटा गया था. रकबर की पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट कहती है कि उनकी पसलियाँ टूटी हुई थी और एक पैर में भी फ्रैक्चर था.
डॉक्टरों की रिपोर्ट कहती है कि इन चोटों के बाद रकबर सदमे में चल बसे. इस बीच अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने अलवर में विरोध प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला जलाया. विरोध प्रदर्शन में समाज के अन्य वर्गों के लोग भी शामिल हुए.
डॉक्टरों की एक टीम ने रकबर के शव का पोस्टमॉर्टम करने के बाद अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रकबर के जिस्म पर जगह-जगह चोट के निशान थे. रिपोर्ट के अनुसार रकबर को भोथरे हथियार से चोट पहुंचाई गई.

इमेज स्रोत, Narayan Bareth/BBC
गौरक्षक पुलिस पर रकबर की पिटाई का आरोप लगा रहे हैं. रकबर पर अलवर ज़िले के लालवंडी गांव के निकट शुक्रवार की रात कथित गौरक्षकों ने हमला कर दिया था.
पुलिस मौक़े पर पहुंची और उन्हें उठाकर अपने साथ थाने ले आई. लेकिन पुलिस रकबर को तीन घंटे बाद अस्पताल ले गई जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.
इस मामले में पुलिस के एक सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) मोहन सिंह को निलंबित कर दिया गया है.
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि एएसआई से रकबर की चोटों की गहनता का आकलन करने में चूक हुई है. अधिकारी के अनुसार मामले के सभी पहलुओं की जाँच की जा रही है.


इस बीच दो वीडियो भी वायरल हुए हैं. इनमें से एक में कथित गौ रक्षक स्थानीय बीजेपी विधायक ज्ञानदेव आहूजा का नाम लेकर कहता हुआ दिखाई देता है कि उन्हें विधायक की हिमायत हासिल है.
लेकिन विधायक आहूजा इसे साज़िश बताते हैं. आहूजा कहते हैं कि रकबर की मौत के लिए पुलिस ज़िम्मेदार है. एक और वीडियो में सहायक उप निरीक्षक सिंह कहते हुए सुने गए हैं कि उनसे ग़लती हो गई.
पुलिस की भूमिका की जाँच

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पुलिस सूत्रों के अनुसार उस रात एएसआई मोहन सिंह को लगा कि रकबर बात कर रहे हैं और उनकी हालत गंभीर नहीं है. लेकिन ये उनकी बड़ी चूक थी. घटना के समय थानेदार मौजूद नहीं थे और न ही दूसरे वरिष्ठ उप निरीक्षक मौजूद थे. राज्य सरकार ने अपने तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को मौक़े पर जाँच के लिए भेजा था.
इसके बाद ही एएसआई को निलंबित किया गया. अब गृह मंत्री कटारिया ने घटना स्थल का दौरा किया है और लोगों से मिले हैं. इस बीच कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की और से अलवर में विरोध प्रदर्शन किया गया है. प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सरपंच जमशेद ख़ान कहते हैं कि कथित गौ रक्षक सरकार के संरक्षण में पिछले चार साल से पुलिस का काम कर रहे हैं.
हरियाणा में नूह ज़िले के रकबर मुस्लिम मेव समुदाय से थे. राजस्थान के अलवर और भरतपुर ज़िले उस मेवात क्षेत्र का हिस्सा हैं, जिनका विस्तार हरियाणा तक है. मेव समुदाय के सामाजिक कार्यकर्ता नूर मोहम्मद कहते हैं कि मेव लोग खेती और पशुपालन से गुज़र बसर करते हैं.
वे कहते हैं, "पिछले कुछ समय से योजनाबद्ध रूप से ऐसी घटनाएँ हो रही हैं ताकि मेव समुदाय के लोगों से पशुपालन का पुश्तैनी काम छीन कर उनको रोज़ी रोटी से महरूम किया जा सके." वे पूछते है कि क्या वजह है कि दोनों पक्षों में ये ही लोग थे लेकिन चार साल पहले ऐसी घटनाएँ नहीं होती थी.

कार्रवाई कब होगी?
राजस्थान में जब गौरक्षा का मुद्दा उठा तो सरकार ने मेवात क्षेत्र में गौ रक्षा के लिए ख़ास पुलिस चौकियाँ भी स्थापित कीं. ऐसी छह पुलिस चौकियाँ अलवर ज़िले में हैं.
रकबर को जहाँ निशाना बनाया गया, उस क्षेत्र के निकट भी एक पुलिस चौकी है. मानवाधिकार संगठन पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) की अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव कहती हैं, "दरअसल कथित गौ रक्षकों को सरकारी संरक्षण हासिल है. वे वसूली भी करते हैं. राज्य में वर्ष 2015 से ऐसी घटनाएँ हो रही हैं."
मेव समुदाय के मौलवी हनीफ़ कहते हैं कि वे लोग बहुत बेबस महसूस करते हैं. किस पर यक़ीन करें. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में ऐसी घटनाओं को रोकने का आह्वान करते हैं और उसके कुछ घंटे बाद रकबर की जान ले ली जाती है. राज्य सरकार ने कहा है कि कसूरवार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.
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