ये नेत्रहीन लड़कियां बन रही हैं प्रेरणास्रोत

जानिए, कैसे ये नेत्रहीन लड़कियां जू़डो के सहारे एक नई कहानी लिख रही हैं.

judo

इमेज स्रोत, ARKO DATTO / NOOR / SIGHTSAVERS

इमेज कैप्शन, भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में नेत्रहीन महिलाओं के लिए उनकी नेत्रहीनता यौन शोषण के ख़तरे को बढ़ाने का काम करती है. ऐसे में कई नेत्रहीन लड़कियां अपने दम पर घरों से बाहर भी नहीं निकल पातीं. लेकिन अब ऐसी लड़कियां जूडो सीखते हुए आत्मरक्षा की ट्रेनिंग लेकर बदलाव की एक नई इबारत लिख रही हैं.
judo

इमेज स्रोत, ARKO DATTO / NOOR / SIGHTSAVERS

इमेज कैप्शन, ऐसी कई लड़कियां हैं जो राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में ख़िताब हासिल करने के साथ ही अपने जैसी दूसरी नेत्रहीन महिलाओं का हौसला बढ़ा रही हैं.
judo

इमेज स्रोत, ARKO DATTO / NOOR / SIGHTSAVERS

इमेज कैप्शन, सुदामा नाम की एक नेत्रहीन युवती साल 2014 में जूडो सीखने के बाद से अब तक दिल्ली, गुरुग्राम (गुड़गांव), लखनऊ और गोवा जैसे शहरों में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं.
judo

इमेज स्रोत, ARKO DATTO / NOOR / SIGHTSAVERS

इमेज कैप्शन, वहीं 20 साल की जानकी ने राष्ट्रीय नेत्रहीन प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया है.
judo

इमेज स्रोत, ARKO DATTO / NOOR / SIGHTSAVERS

इमेज कैप्शन, जानकी को हाल ही में अंतरराष्ट्रीय नेत्रहीन जूडो प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए चुना गया है.
जूडो

इमेज स्रोत, ARKO DATTO / NOOR / SIGHTSAVERS

इमेज कैप्शन, लेकिन जानकी के परिवार के लिए उन्हें तुर्की में होने वाली इस प्रतियोगिता के लिए भेज पाना आसान नहीं होगा.
judo

इमेज स्रोत, ARKO DATTO / NOOR / SIGHTSAVERS

इमेज कैप्शन, कई अन्य नेत्रहीन प्रतिभाओं की तरह जानकी के सामने भी आर्थिक संकट है जो उनकी तुर्की तक की उड़ान रोक सकती है.