दो मुल्कों की गोलियों से बचते कश्मीर के ये गांववाले

श्रीनगर में मौजूद फोटोग्राफ़र आबिद बट ने भारत प्रशासित कश्मीर में सीमा से सटे गांवों के लोगों की मुश्किलों को अपने कैमरे में क़ैद किया है

50 साल के मोहम्मद याकूब

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इमेज कैप्शन, 50 साल के मोहम्मद याकूब भारत प्रशासित कश्मीर में पाकिस्तान की सीमा से सटे एक गांव में रहते हैं. वो कई बार ऐसी गोलियों से बचे हैं जो अचानक ही उनके घर के भीतर दाखिल हो गई हैं. बीती 22 फरवरी के भारत और पाकिस्तान दोनों ही तरफ से सीमा के नज़दीक शेलिंग यानी गोलियां चलाने की घटनाओं में इज़ाफा हुआ है. इस कारण मोहम्मद याकूब समेत कई और गांववालों के लिए घर छोड़ना अब मजबूरी बन गया है.
कश्मीर के गांवों की महिलाएं

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इमेज कैप्शन, भारत और पाकिस्तान दोनों ही दावा करते हैं कि कश्मीर उनके देश का अभिन्न हिस्सा है. दोनों के इस दावे के कारण अब तक दो युद्ध हो चुके हैं और परमाणु हथियार संपन्न इन दोनों के बीच तनाव लगभग हमेशा जारी ही रहा है. 428 मील लंबी इस सीमा यानी लाइन ऑफ़ कंट्रोल के आसपास तनाव साल 2003 तक जारी था. 2003 में दोनों देशों में युद्धविराम को लेकर सहमत बनी. लेकिन साल 2013 के बाद से सीमा पर इस जगह पर कई बार युद्धविराम का उल्लघंन हुआ है.
सिलीकोट गांव की महिला

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इमेज कैप्शन, सिलीकोट गांव की ये महिला अपने पारंपरिक पहनावे फिरन के भीतर 10 साल के एक बच्चे को ले कर दौड़ रही है. ये उस गाड़ी की तरफ दौड़ रही है जो गांववालों को सुरक्षा के लिहाज़ से नज़दीक के एक राहत शिविर में ले जा रहा है.
पनाह के लिए भागते गांववाले

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इमेज कैप्शन, युद्धविराम के उल्लंघन और बार-बार शेलिंग के कारण सीमा पर स्थित लगभग पांच गांवों के लोगों को अपना घर-बार छोड़ नज़दीक एक शहर में अस्थाई तौर पर शरण लेनी पड़ी है. ये शहर तीन तरफ से सीमा से घिरा है. अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि इन पांच गांवों में अब तक की सबसे बुरी शेलिंग हुई है, जिसके कारण 7000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं. कुछ गांववालों के अनुसार 2003 के बाद से शेलिंग का ये अब तक सबसे ‘बुरा दौर’ है.
एंबुलेंस में महिलाएं

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इमेज कैप्शन, अधिकारियों का कहना है कि सीमा से सटे तीन गांवों में रहने वाले लगभग एक हज़ार लोग गांव छोड़ कर जा चुके हैं. उनका कहना है कि सेना ने बच्चों और औरतों को राहत शिविरों तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था की है.
गांव में रहने वाली एक महिला

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इमेज कैप्शन, गांववालों ने बीबीसी को बताया कि हाल के दिनों में पूरे के पूरे गांव खाली हो रहे हैं. लोग अपने घर, मवेशी और अपना सामान छोड़ कर इलाके से पलायन कर रहे हैं. हाल में महिनों में शेलिंग के कारण कितने नागरिकों की मौत हुई है इसके संबंध में स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. उड़ी में रहने वाले लाल दीन कहते हैं, “हम युद्ध के जैसी परिस्थितियों में रहने को और इस तरह परेशान होने को मजबूर हैं. सीमा के दोनों तरफ के लोगों को हमारे बारे में सोचना चहिए और युद्धविराम के रास्ते खोजने चाहिए.”
राहत शिविर में महिलाएं

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इमेज कैप्शन, कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने जो कपड़े पहने थे बस उसी में वो जान बचा कर गांव से भागे हैं. अब उनके पास बदलने के लिए कपड़े तक नहीं है.