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कश्मीर पर मुशर्रफ़ की भाषा बदली: आडवाणी
भारत के उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि पाकिस्तान से लगी सीमा पर लाखों सैनिकों की तैनाती की वजह से ही पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की कश्मीर विवाद को लेकर भाषा बदली है. बीबीसी वर्ल्ड के हार्डटॉक इंडिया कार्यक्रम में आडवाणी ने कहा, "मेरे ख़्याल से हम कुछ हद तक स्थिति बदलने में कामयाब हुए हैं." उन्होंने कहा, "कम से कम इतना तो फ़र्क आया ही है कि तीन साल पहले पाकिस्तान के नेता यहाँ आकर ये स्वीकार करने से इनकार करते रहे कि जम्मू कश्मीर में आतंकवाद है मगर अब वह ये नहीं कहते." पाकिस्तान के राष्ट्रपति के बारे में आडवाणी का कहना था कि वह पहले जम्मू कश्मीर में आतंकवाद की बात नहीं मानते थे और उसे स्वतंत्रता की लड़ाई कहते थे मगर अब वह ऐसा नहीं कहते. आडवाणी ने कहा, "अब वह कहते हैं कि वहाँ आतंकवाद है मगर हम उसके लिए ज़िम्मेदार नहीं हैं." 'आतंकवाद' थमा? जब उनसे ये पूछा गया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में 'आतंकवाद' अब भी जारी है तो इस पर उनका कहना था, "वह अभी रुका नहीं है." मगर आडवाणी ने ये ज़रूर माना कि ऐसी घटनाओं में कमी आई है. उन्होंने कहा, "मैं तथ्यों और आँकड़ों के आधार पर ये कह सकता हूँ कि इसमें कमी आई है."
जब उनसे यह पूछा गया कि उनकी सरकार 'आतंकवाद को उखाड़ फेंकने' के एजेंडे के साथ सत्ता में आई थी मगर ऐसा लगता है कि भारत में हमले बढ़े ही हैं तो उन्होंने इससे इनकार किया. आडवाणी का कहना था, "जब ये सरकार सत्ता में आई थी तो पंजाब के कुछ हिस्सों में आतंकवाद बरकरार था मगर उसे पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया." उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में लोग सीमा पार करके जाते थे और हथियार लेकर लौटने के साथ ही हिंसात्मक गतिविधियों में लग जाते थे. आडवाणी ने कहा कि अब स्थिति बदल गई है और बहुत कम ही लोग सीमा पार करते हैं. निजीकरण कई विषयों पर केन्द्रित बातचीत में आडवाणी ने इन ख़बरों से भी इनकार किया कि दो बड़ी तेल कंपनियों एचपीसीएल और बीपीसीएल के विनिवेश पर रोक लगाने के उच्चतम न्यायालय के फ़ैसले से भारत में निजीकरण रुक जाएगा. उन्होंने कहा, "मैं इस सोच से पूरी तरह सहमति नहीं रखता हालाँकि उससे मुश्किलें पैदा ज़रूर हुई हैं. हम फ़ैसले पर विचार कर रहे हैं." आडवाणी ने यो तो माना कि ये फ़ैसला निजीकरण की राह में रोड़ा है मगर उन्होंने इसे एक बड़ा रोड़ा मानने से इनकार किया. उनका कहना था कि सरकार के पास कई विकल्प हैं और सरकार उन पर विचार कर रही है मगर उच्चतम न्यायालय का फ़ैसला सरकार की कोई कमज़ोरी नहीं है. उन्होंने कहा, "ये सरकार निजीकरण को लेकर प्रतिबद्ध है." |
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