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ट्रंप के भारत-पाकिस्तान मुद्दे में बीच में आने से क्या भारत की मुश्किलें बढ़ीं?- द लेंस
भारत और पाकिस्तान के संघर्ष को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान की खूब चर्चा हुई.
जबकि उनसे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा था कि इससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है.
तो दो दिन में ऐसा क्या बदल गया कि अमेरिका लेना-देना नहीं होने से मध्यस्थता के चलते संघर्ष रुकने के दावे तक आ गया?
भारत ने खुलकर अमेरिका की बातों का खंडन क्यों नहीं किया? क्या ट्रंप इस मसले में आगे मध्यस्थ की भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे हैं? संघर्ष विराम कितना टिकेगा?
सिंधु जल संधि के निलंबित रहने, वीज़ा पर लगी रुकावटों और दोनों देशों के बीच आवाजाही रुके रहने का आगे इस संघर्ष विराम पर क्या असर होगा?
क्या कश्मीर एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन रहा है और जो भी ट्रंप कह रहे हैं क्या वो अपनी छवि चमकाने की कोशिश है?
द लेंस के आज के एपिसोड में कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ जर्नलिज़म मुकेश शर्मा ने इन्हीं सवालों पर बात की पूर्व राजनयिक वीना सीकरी, ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन के डायरेक्टर और लंदन में किंग्स कॉलेज के प्रोफ़ेसर हर्ष पंत और आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद जैसे विषयों पर काम कर रहीं फ़ोर्स मैगज़ीन की एडिटर ग़ज़ाला वहाब के साथ.
प्रोड्यूसर: शिवालिका पुरी
गेस्ट कोऑर्डिनेटर: संगीता यादव
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