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सड़क, बिजली, पानी की बाट जोह रहे राजस्थानी आदिवासियों का इंतज़ार कब ख़त्म होगा?
''रास्ता नहीं है, कच्चा ही है. एंबुलेंस बुलाते हैं तो यहां आती नहीं. यहां से खाट पर रख ले जाना पड़ता है.''
''रास्ता नहीं है, कच्चा ही है. एंबुलेंस बुलाते हैं तो यहां आती नहीं. यहां से खाट पर रख ले जाना पड़ता है.'' ''कोई काम नहीं है इसलिए अहमदाबाद जाते हैं. यहां पर तो 100 रुपया मिलता है.'' राजस्थान के आदिवासी इलाक़े जहां रास्ते हैं पर सड़क नहीं, खंभे हैं पर बिजली नहीं, हैंडपंप है पर साफ़ पानी नहीं. राजस्थान की राजनीति में खास जगह रखने वाले आदिवासी किस हाल में हैं?
वीडियो: कमलेश मठेनी और शाहनवाज़ अहमद
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