राजनीतिक पार्टियों के वादे से इतर कितना मुश्किल है सरकारी नौकरी पाने का स्टूडेंट्स का सफ़र-ग्राउंड रिपोर्ट
राजनीतिक पार्टियों के वादे से इतर कितना मुश्किल है सरकारी नौकरी पाने का स्टूडेंट्स का सफ़र-ग्राउंड रिपोर्ट
साल 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन से सीएम पद के दावेदार तेजस्वी यादव ने कहा था कि अगर वो सत्ता में आए तो पहली कैबिनेट बैठक में दस लाख सरकारी नौकरियों की मंज़ूरी दी जाएगी.
तत्कालीन एनडीए और प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस वादे को तब असंभव और झूठा सपना बताया था.
ऐसे में बीबीसी ने बिहार की राजधानी पटना के अलग-अलग इलाक़ों में रहने वाले छात्रों से बात की और ये जानने और समझने की कोशिश की कि जितनी आसानी से राजनीतिक पार्टियां सरकारी नौकरी देने का दावा करती हैं, क्या उन नौकरियों तक पहुंचने का सफ़र उतना ही आसान होता है?
रिपोर्ट: प्रेरणा
शूट: सप्तऋषि
वीडियो एडिट: देवेश चोपड़ा
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित



