शौर्य चक्र से सम्मानित हवलदार विवेक सिंह तोमर के परिवार का हाल
अपनी जान की परवाह किए बिना अपनी ड्यूटी निभाने वाले नौजवान अपने पीछे गहरी उदासी, कभी न भरने वाला ख़ालीपन और ढेर सारी यादें छोड़ जाते हैं.
सिर्फ़ दीवार पर टंगी तस्वीर में ही नहीं, बल्कि घर की हर छोटी-बड़ी चीज़ में उनके वहाँ होने, और फिर अचानक सदा के लिए चले जाने की टीस बसी होती है.
उनकी हिम्मत पर नाज़ तो होता है लेकिन घर के सारे खुशनुमा रंग भी उसी के साथ जा चुके होते हैं.
ऐसी ही कहानी है हवलदार विवेक सिंह तोमर की. वो साल 2023 में सियाचिन में तैनात थे जब उन्होंने एक जगह आग से अपने कई साथियों की जान बचाई, लेकिन उनकी खुद की जान चली गई.

हाल ही में विवेक सिंह तोमर को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया.
विवेक का परिवार आज भी उनके जाने के ग़म से उबर नहीं पाया है. उनकी पत्नी कहती हैं कि हर त्योहार में उनके घर आने का इंतज़ार रहता था, अब किसका इंतज़ार करें.
विवेक की मां कहती हैं कि बेटे ने देश के लिए जान दी, इस पर गर्व तो है लेकिन बेटा चला गया, आंसू नहीं रुकते.
देखिए बीबीसी की ये ख़ास पेशकश- जो लौटकर घर ना आए.
रिपोर्टः नीतू सिंह और देबलिन रॉय
प्रोड्यूसरः सुशीला सिंह
(बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)



