चुनाव आयोग पर आरोप और लोगों का डगमगाता भरोसा- द लेंस
चुनाव आयोग को भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ कहा जाता है, वो इन दिनों विवाद के केंद्र में है.
एक तरफ़ बिहार में मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का आरोप है तो दूसरी ओर कई जगहों पर बड़ी संख्या में मतदाताओं का नाम फ़र्ज़ी तरीक़े से जोड़े जाने का आरोप है.
चुनाव आयोग इन आरोपों से इनकार कर रहा है.
राहुल गांधी अब बिहार में तेजस्वी यादव के साथ मिलकर 'वोटर अधिकार यात्रा' निकाल रहे हैं. उधर बीजेपी का कहना है कि ये हारती हुई पार्टियों की निराशा की राजनीति है.
ऐसे में कई अहम सवाल उठ रहे हैं. सवाल हैं कि क्या वोट चोरी जैसे आरोप लोकतंत्र में लोगों का भरोसा कमज़ोर करते हैं या इनके ज़रिए लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर चर्चा शुरू हुई है?
चुनाव आयोग अगर बचाव करे तो क्या वो हर बार पक्षपात के तौर पर ही देखा जाएगा? और चुनाव आयोग राहुल गांधी से शपथ पत्र लेने की मांग पर क्यों अड़ा हुआ है?
और क्या केंद्र सरकार इन आरोपों के बाद किसी तरह बैकफ़ुट पर दिखती है?
द लेंस के आज के एपिसोड में इन सभी मुद्दों पर चर्चा की गई.
इस चर्चा में कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़म मुकेश शर्मा के साथ शामिल हुए पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा और इंडियन एक्सप्रेस की नेशनल ब्यूरो चीफ़ रितिका चोपड़ा.
प्रोड्यूसरः सईदुज़्जमान
गेस्ट कोऑर्डिनेटरः संगीता यादव
वीडियो एडिटिंगः सुमित वैद्य
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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