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ट्रंप के टैरिफ़ के बाद रूस-भारत संबंध क्या और मजबूत होंगे - द लेंस
27 अगस्त से भारत पर अमेरिका का टैरिफ़ 25 फ़ीसदी से बढ़कर 50 फ़ीसदी हो जाएगा. ये एशिया में अमेरिका द्वारा लगाए गए अब तक के सबसे ज़्यादा टैरिफ हैं.
इस हफ़्ते भारत ने भी इस मामले में चुप्पी तोड़ी और थोड़ा सख़्त लहज़ा अपनाते हुए कहा कि अमेरिका और यूरोप ख़ुद रूस से व्यापार कर रहे हैं, तो ये दोहरे मापदंड क्यों?
भारत-अमेरिका रिश्तों में आ रहे बदलाव के बीच आज हम भारत और रूस के मौजूदा रिश्तों को इतिहास की दृष्टि से समझने की कोशिश करेंगे.
सवाल कई हैं, क्या इस तरह की कूटनीतिक खींचतान के बीच भारत वास्तव में गुटनिरपेक्ष रह सकता है?
क्या ट्रंप ब्रिक्स को एक चुनौती की तरह देखते हैं और क्या ये भारत के लिए एक अवसर बन सकता है?
क्या भारत और चीन के बीच नज़दीक़ी बढ़ना वक़्त की ज़रूरत है या चीन इसे अपने हित में भुना रहा है और रूस इस स्थिति में कैसे भारत की मदद कर सकता है?
द लेंस के इस एपिसोड में इन सभी मुद्दों पर चर्चा की गई.
इस चर्चा में कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़म मुकेश शर्मा के साथ शामिल हुए भारत के पूर्व विदेश सचिव शशांक और कूटनीतिक मामलों पर नज़र रखने वाली पत्रकार स्मिता शर्मा.
प्रोड्यूसरः सईदुज़्जमान
गेस्ट कोऑर्डिनेटरः संगीता यादव
वीडियो एडिटिंगः सुमित वैद्य
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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