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टी20 वर्ल्ड कप: जो कमाल भारतीय टीम ने किया, ऐसा इतिहास में कम ही दिखता है...
ज़िंदगी आपको शहंशाह बनने का एक मौका देती है, वो एक मौका जो कुछ इंच की दूरी पर होता है, वो मौका जो कुछ कदम के फासलों से तय होता है, वो एक मौका जो हर गम-दुश्वारियों को भुला, सिर्फ जीत की राह पर ले चलता है.
ज़िंदगी आपको शहंशाह बनने का एक मौका देती है, वो एक मौका जो कुछ इंच की दूरी पर होता है, वो मौका जो कुछ कदम के फासलों से तय होता है, वो एक मौका जो हर गम-दुश्वारियों को भुला, सिर्फ जीत की राह पर ले चलता है.
शनिवार की देर रात, हिंदुस्तान के इन 11 खिलाड़ियों ने इन मौकों को एक-एक कर बटोरना शुरू किया. जब लगने लगा फाइनल मुकाबले में वही पुरानी कहानी दोहराई जा रही है तब....कोई बुमराह था, जिसने अपनी लहराती गेंदों से मौके का पहला दरवाजा खोला.
कोई अर्शदीप था, जिसने अपने जवां कंधों पर करोड़ों हिंदुस्तानियों का बोझ सहा और किफायती गेंदें डाली और कोई सूर्या था, जिसने सीमा रेखा के पास खड़े होकर, ऐसा अविश्वसनीय कैच पकड़ा कि हार और जीत की सीमा तय हो गई.
कोई हार्दिक था, जिसे कुछ महीने पहले लोग मैदान में घुसते ही बुरा भला सुना रहे थे, और आज वो अंतिम गेंदों के साथ तमाम देशवासियों की नब्ज़ को लेकर दौड़ रहा था और क्लासेन, मिलर जैसों का काल बनकर आया.
इन्हीं के साथ विश्व का सबसे विख्यात बल्लेबाज़ था, जो पूरे टूर्नामेंट की नाकामियों को भुला, अंतिम जंग में विराट बनकर डटा रहा और आखिर में वो कप्तान था, जो इस जंग को जीत जाने के बाद ज़मीन पर नतमस्तक होकर अपने आंसुओं को बहने दे रहा था.
उनके आंसुओं के साथ जैसे पूरा हिंदुस्तान इस टी20 वर्ल्ड कप खिताब को अपनी पलकों पर उठाए हुए था. ज़िंदगी ने इन सभी को एक मौका दिया, शहंशाह बनने का और क्या आप यकीन करेंगे, इन सभी ने अपने मौकों को दोनों हाथों से लपका और हिंदुस्तान को 13 साल बाद विश्व विजेता का तमगा दिला ही दिया.
स्क्रिप्ट और आवाज़: नवीन नेगी
वीडियो एडिटिंग: देबलिन रॉय
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